दम तोड़ते ऑटो सेक्टर को अब बस दशहरा और दीवाली से ‘आशा’
Wednesday - October 2, 2019 4:17 pm ,
Category : WTN HINDI
ऑटो सेक्टर में जारी है ऐतिहासिक मंदी
मंदी की मार से बेहाल हुआ ऑटो सेक्टर; त्यौहारों और सरकार से हैं आख़िरी उम्मीद
OCT 02 (WTN) – पूरी दुनिया में वैश्विक आर्थिक मंदी का असर देखा जा रहा है, लेकिन भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में मंदी के कारण पिछले एक साल से गाड़ियों की बिक्री पर ख़ासा विपरीत असर पड़ा है। भारत के ऑटो सेक्टर की हालत यह हो गई है कि कई तरह के डिस्काउंट देने और फेस्टिवल सीजन होने के बाद भी गाड़ियों की बिक्री पहले की तरह नहीं हो रही है। सितम्बर के महीने में गणेशोत्सव के कारण ऑटो मोबाइल कम्पनियों को उम्मीद थी कि गाड़ियों की बिक्री में तेज़ी आएगी, लेकिन गणेशोत्सव जैसे बड़े त्यौहार भी ऑटो मोबाइल सेक्टर में जारी मंदी को नहीं रोक पाए।
मारुति, टाटा और महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा जैसी कम्पनियों को सितम्बर के महीने में भारी नुकसान झेलना पड़ा है। बात करें देश की सबसे बड़ी कार कम्पनी मारुति सुजुकी इण्डिया की, तो सितम्बर के महीने में कम्पनी की बिक्री 24.4 प्रतिशत घटकर 1,22,640 वाहन रह गई। मारुति सुजुकी इण्डिया ने पिछले साल सितम्बर के महीने में 1,62,290 वाहन बेचे थे, लेकिन इस साल वाहनों की बिक्री 1,22,640 पर ही सिमट कर रह गई।
बात करें टाटा मोटर्स की तो उसे भी सितम्बर के महीने में निराशा ही हाथ लगी है। सितम्बर के महीने में टाटा मोटर्स की कुल बिक्री 48 प्रतिशत घटकर 36,376 वाहन पर रुक गई। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले साल सितम्बर के महीने में टाटा मोटर्स ने 69,991 वाहन बेचे थे। टाटा मोटर्स ने एक बयान जारी कर जानकारी दी है कि रिव्यू पीरियड में कम्पनी की कुल घरेलू बिक्री 50 प्रतिशत गिरकर 32,376 वाहन रही, जो पिछले साल सितम्बर में 64,598 वाहन थी। इसमें पैसेंजर व्हीकल की घरेलू बिक्री 8,097 वाहन रही, जो पिछले साल की इसी अवधि की 18,429 वाहन की बिक्री से 56 प्रतिशत कम है।
वहीं टाटा मोटर्स के कमर्शियल वाहनों की घरेलू बिक्री सितम्बर के महीने में 24,279 वाहन रही। जबकि पिछले साल सितम्बर के महीने में टाटा मोटर्स के 46,169 कमर्शियल वाहनों की बिक्री हुई थी। पिछले साल से तुलना की जाए तो टाटा मोटर्स के कमर्शियल वाहनों की घरेलू बिक्री में 47 प्रतिशत की कमी दर्ज़ की गई है।
वैश्विक आर्थिक मंदी का असर टाटा मोटर्स के कमर्शियल वाहन निर्यात पर भी पड़ा है। पिछले साल सितम्बर में कम्पनी ने 5,250 कमर्शियल वाहन निर्यात किये थे, लेकिन इस साल सितम्बर के महीने में सिर्फ़ 3,800 वाहन ही निर्यात हो सके। यानी कि पिछले साल की तुलना में कम्पनी का कमर्शियल वाहनों का निर्यात 27.6 प्रतिशत घट गया।
बात करें महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा की, तो महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा को भी मंदी के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इस साल सितम्बर के महीने में कम्पनी के सिर्फ़ 43,343 वाहन ही बिके हैं, जो कि पिछले साल सितम्बर की तुलना में 21 प्रतिशत कम हैं।
ऑटोमोबाइल इण्डस्ट्री के जानकारों का कहना है कि सितम्बर के महीने में श्राद्ध पक्ष पड़ने के कारण भी गाड़ियों की बिक्री पर असर पड़ा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हिन्दु धर्मावलम्बी श्राद्ध पक्ष में कोई शुभ काम प्रारम्भ नहीं करते हैं, इसी कारण से श्राद्ध पक्ष में गाड़ियों की बिक्री पर ख़ासा असर पड़ता है।
लेकिन इस सबके बीच ऑटोमोबाइल सेक्टर काफ़ी लम्बे समय से सरकार से मांग कर रहा है कि इस सेक्टर को मंदी से बचाने के लिए पैसेंजर व्हीकल पर जीएसटी दर को 28 प्रतिशत से कम करके 18 प्रतिशत कर देना चाहिए, जिससे मंदी की मार से बुरी तरह प्रभावित इस सेक्टर को कुछ तो राहत मिले।
साफ़ है कि गाड़ियों की कम बिक्री का असर ऑटो मोबाइल इण्डस्ट्री और उससे जुड़े उद्योगों और सेवाओं पर पड़ रहा है। पिछले क़रीब एक साल से ज़ारी मंदी के कारण ऑटो सेक्टर में कई लोगों की नौकरी जा चुकी है। इतना ही नहीं, गाड़ियों की कम बिक्री के कारण क़रीब 300 डीलर्स को अपना शोरूम बंद करना पड़ा है। वहीं मंदी के कारण ऑटो कम्पनियों को अपना उत्पादन कम करना पड़ा है।
जानकारों का कहना है कि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है कि ऑटो सेक्टर को मंदी का सामना करना पड़ रहा है। इससे पहले 2009-09 और 2013-14 में भी ऑटो सेक्टर ने मंदी का सामना किया है, लेकिन इस बार की मंदी पिछले मंदियों से काफ़ी अलग है। पिछली दो बार की मंदी में ऑटोमोबाइल सेक्टर का कुछ हिस्सा ऐसा था, जिसमें बिक्री का सिलसिला बना रहा था, लेकिन इस बार पूरा का पूरा ऑटोमोबाइल सेक्टर मंदी की मार झेल रहा है।
जानकारों का कहना है कि सरकार को जल्द से जल्द ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए राहत की घोषणा करना चाहिए नहीं तो यह सेक्टर जल्द ही दम तोड़ देगा। यदि ऐसा होता है तो इससे लाखों लोगों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ेगी। वैसे ऑटोमोबाइल कम्पनियों को अक्टूबर महीने में वाहनों की बिक्री की बड़ी आशा है। दशहरा और दीवाली जैसे त्यौहारों के कारण ऑटोमोबाइल कम्पनियों को उम्मीद है कि महीनों से जारी मंदी का असर अक्टूबर के महीने में कम हो सकता है और गाड़ियों की बिक्री में उछाल आ सकता है। अब देखते हैं कि दशहरा और दीवाली का अक्टूबर महीना, ऑटोमोबाइल कम्पनियों के लिए क्या अच्छी सौगात लेकर आता है?
OCT 02 (WTN) – पूरी दुनिया में वैश्विक आर्थिक मंदी का असर देखा जा रहा है, लेकिन भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर में मंदी के कारण पिछले एक साल से गाड़ियों की बिक्री पर ख़ासा विपरीत असर पड़ा है। भारत के ऑटो सेक्टर की हालत यह हो गई है कि कई तरह के डिस्काउंट देने और फेस्टिवल सीजन होने के बाद भी गाड़ियों की बिक्री पहले की तरह नहीं हो रही है। सितम्बर के महीने में गणेशोत्सव के कारण ऑटो मोबाइल कम्पनियों को उम्मीद थी कि गाड़ियों की बिक्री में तेज़ी आएगी, लेकिन गणेशोत्सव जैसे बड़े त्यौहार भी ऑटो मोबाइल सेक्टर में जारी मंदी को नहीं रोक पाए।
मारुति, टाटा और महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा जैसी कम्पनियों को सितम्बर के महीने में भारी नुकसान झेलना पड़ा है। बात करें देश की सबसे बड़ी कार कम्पनी मारुति सुजुकी इण्डिया की, तो सितम्बर के महीने में कम्पनी की बिक्री 24.4 प्रतिशत घटकर 1,22,640 वाहन रह गई। मारुति सुजुकी इण्डिया ने पिछले साल सितम्बर के महीने में 1,62,290 वाहन बेचे थे, लेकिन इस साल वाहनों की बिक्री 1,22,640 पर ही सिमट कर रह गई।
बात करें टाटा मोटर्स की तो उसे भी सितम्बर के महीने में निराशा ही हाथ लगी है। सितम्बर के महीने में टाटा मोटर्स की कुल बिक्री 48 प्रतिशत घटकर 36,376 वाहन पर रुक गई। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले साल सितम्बर के महीने में टाटा मोटर्स ने 69,991 वाहन बेचे थे। टाटा मोटर्स ने एक बयान जारी कर जानकारी दी है कि रिव्यू पीरियड में कम्पनी की कुल घरेलू बिक्री 50 प्रतिशत गिरकर 32,376 वाहन रही, जो पिछले साल सितम्बर में 64,598 वाहन थी। इसमें पैसेंजर व्हीकल की घरेलू बिक्री 8,097 वाहन रही, जो पिछले साल की इसी अवधि की 18,429 वाहन की बिक्री से 56 प्रतिशत कम है।
वहीं टाटा मोटर्स के कमर्शियल वाहनों की घरेलू बिक्री सितम्बर के महीने में 24,279 वाहन रही। जबकि पिछले साल सितम्बर के महीने में टाटा मोटर्स के 46,169 कमर्शियल वाहनों की बिक्री हुई थी। पिछले साल से तुलना की जाए तो टाटा मोटर्स के कमर्शियल वाहनों की घरेलू बिक्री में 47 प्रतिशत की कमी दर्ज़ की गई है।
वैश्विक आर्थिक मंदी का असर टाटा मोटर्स के कमर्शियल वाहन निर्यात पर भी पड़ा है। पिछले साल सितम्बर में कम्पनी ने 5,250 कमर्शियल वाहन निर्यात किये थे, लेकिन इस साल सितम्बर के महीने में सिर्फ़ 3,800 वाहन ही निर्यात हो सके। यानी कि पिछले साल की तुलना में कम्पनी का कमर्शियल वाहनों का निर्यात 27.6 प्रतिशत घट गया।
बात करें महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा की, तो महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा को भी मंदी के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इस साल सितम्बर के महीने में कम्पनी के सिर्फ़ 43,343 वाहन ही बिके हैं, जो कि पिछले साल सितम्बर की तुलना में 21 प्रतिशत कम हैं।
ऑटोमोबाइल इण्डस्ट्री के जानकारों का कहना है कि सितम्बर के महीने में श्राद्ध पक्ष पड़ने के कारण भी गाड़ियों की बिक्री पर असर पड़ा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हिन्दु धर्मावलम्बी श्राद्ध पक्ष में कोई शुभ काम प्रारम्भ नहीं करते हैं, इसी कारण से श्राद्ध पक्ष में गाड़ियों की बिक्री पर ख़ासा असर पड़ता है।
लेकिन इस सबके बीच ऑटोमोबाइल सेक्टर काफ़ी लम्बे समय से सरकार से मांग कर रहा है कि इस सेक्टर को मंदी से बचाने के लिए पैसेंजर व्हीकल पर जीएसटी दर को 28 प्रतिशत से कम करके 18 प्रतिशत कर देना चाहिए, जिससे मंदी की मार से बुरी तरह प्रभावित इस सेक्टर को कुछ तो राहत मिले।
साफ़ है कि गाड़ियों की कम बिक्री का असर ऑटो मोबाइल इण्डस्ट्री और उससे जुड़े उद्योगों और सेवाओं पर पड़ रहा है। पिछले क़रीब एक साल से ज़ारी मंदी के कारण ऑटो सेक्टर में कई लोगों की नौकरी जा चुकी है। इतना ही नहीं, गाड़ियों की कम बिक्री के कारण क़रीब 300 डीलर्स को अपना शोरूम बंद करना पड़ा है। वहीं मंदी के कारण ऑटो कम्पनियों को अपना उत्पादन कम करना पड़ा है।
जानकारों का कहना है कि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है कि ऑटो सेक्टर को मंदी का सामना करना पड़ रहा है। इससे पहले 2009-09 और 2013-14 में भी ऑटो सेक्टर ने मंदी का सामना किया है, लेकिन इस बार की मंदी पिछले मंदियों से काफ़ी अलग है। पिछली दो बार की मंदी में ऑटोमोबाइल सेक्टर का कुछ हिस्सा ऐसा था, जिसमें बिक्री का सिलसिला बना रहा था, लेकिन इस बार पूरा का पूरा ऑटोमोबाइल सेक्टर मंदी की मार झेल रहा है।
जानकारों का कहना है कि सरकार को जल्द से जल्द ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए राहत की घोषणा करना चाहिए नहीं तो यह सेक्टर जल्द ही दम तोड़ देगा। यदि ऐसा होता है तो इससे लाखों लोगों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ेगी। वैसे ऑटोमोबाइल कम्पनियों को अक्टूबर महीने में वाहनों की बिक्री की बड़ी आशा है। दशहरा और दीवाली जैसे त्यौहारों के कारण ऑटोमोबाइल कम्पनियों को उम्मीद है कि महीनों से जारी मंदी का असर अक्टूबर के महीने में कम हो सकता है और गाड़ियों की बिक्री में उछाल आ सकता है। अब देखते हैं कि दशहरा और दीवाली का अक्टूबर महीना, ऑटोमोबाइल कम्पनियों के लिए क्या अच्छी सौगात लेकर आता है?