‘इस’ तरह से मोदी सरकार बचाएगी आपको ठगी से!
Saturday - October 5, 2019 2:43 pm ,
Category : WTN HINDI
अब सोने के जेवरातों पर अनिवार्य होगी हॉलमार्किंग
सोने के जेवरातों पर हॉलमार्किंग से ग्राहकों को मिलेगा ‘शुद्ध’ सोना
OCT 05 (WTN) – सोने के जेवरात ख़रीदने वालों के लिए मोदी सरकार एक सौगात देने जा रही है, इस सौगात के मिलने से सोने के जेवरातों की ख़रीददारी के समय ग्राहक ठगी का शिकार होने से बच सकेंगे। दरअसल, मोदी सरकार एक ऐसी पहल करने जा रही है जिससे ग्राहकों को सोने के जेवरातों की ख़रीदी में ख़रीदे गये सोने की शुद्धता के मुताबिक़ ही दाम चुकाने पड़ेंगे। इसके लिए मोदी सरकार सोने के जेवरातों की बिक्री के लिए BIS हॉलमार्किंग को अनिवार्य करने जा रही है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि केन्द्र की कॉमर्स मिनिस्ट्री ने सोने के आभूषणों के लिए BIS हॉलमार्किंग को अनिवार्य बनाने के प्रस्ताव को बाकयदा मन्ज़ूरी दे दी है। यानी कि इस नियम के लागू होने से अब सोने के हर जेवरात पर BIS हॉलमार्क ज़रूरी होगा। ऐसे में जब आप सोने के जेवरात ख़रीदने जाएंगे तो आपको उन पर BIS हॉलमार्क नज़र आएगा।
दरअसल, गोल्ड हॉलमार्क सोने के जेवरातों की शुद्धता का एक प्रमाण है और वर्तमान में यह स्वैच्छिक आधार पर लागू किया गया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) को सूचित करने के बाद ही इस नये नियम को लागू किया जा सकता है, जिसके कारण इस नियम के लागू होने में दो से तीन महीने का समय लग सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हॉलमार्किंग से यह पता चल जाता है कि सोने की जेवरात बनाने में कितने कैरेट का कितना सोना और कितनी अन्य धातु का इस्तेमाल किया गया है।
जैसा कि आप जानते हैं कि भारत में सोने के जेवरातों के प्रति महिलाओं में काफ़ी क्रेज रहता है। प्राचीन समय से ही भारत में सोना एक स्टेटस सिम्बल रहा है। सोने के जेवरातों के प्रति दीवानगी के कारण भारत सोने का सबसे बड़ा आयातक देश है। हर साल क़रीब 800 से 900 टन सोना भारत आयात करता है। जैसा कि हमने आपको बताया कि भारत में सोने के जेवरातों के प्रति महिलाओं में काफ़ी क्रेज रहता है, लेकिन भारत में सोने के जेवरात ख़रीदते समय हॉलमार्किंग की तरफ़ ज्यादातर लोग ध्यान नहीं देते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस समय देश में क़रीब 800 हॉलमार्किंग केन्द्र हैं।
सोने के जेवरातों के प्रति भारतीय लोगों में दीवानगी तो है, लेकिन देश में सिर्फ़ 40 प्रतिशत जेवरातों में ही हॉलमार्किंग की जाती है। आरोप है कि भारत में सोने के व्यापारी सोने के जेवरातों में मिलावट करते हैं, जिसका ख़ामियाज़ा ग्राहकों को भुगतना पड़ता है। ऐसे में कहा जा सकता है कि सोने के जेवरातों पर बीआईएस हॉलमार्किंग अनिवार्य होने से ग्राहक ठगी का शिकार होने से बच सकेंगे।
दरअसल, अभी तक देश में सोने के जेवरातों की गुणवत्ता को लेकर कोई कड़े नियम नहीं थे। ऐसे में कई बार देखा गया है कि ग्राहकों को बताए गये कैरेट से कम कैरेट का सोना बेच दिया जाता है और उनसे ज़्यादा कैरेट के दाम वसूल लिये जाते हैं। लेकिन अब सोने के जेवरातों पर हॉलमार्किंग होने से ग्राहकों के साथ किसी भी तरह की धोखाधड़ी नहीं हो सकेगी। वहीं यदि सोने के जेवरात बेचने वालों ने हॉलमार्किंग के बिना जेवरात बेचे तो उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा।
अब जब देश में सोने के जेवरातों पर हॉलमार्किंग अनिवार्य हो जाएगी, तो इससे जेवरातों की गुणवत्ता की आसानी से पहचान हो सकेगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हॉलमार्क चिन्ह की पूरे देश में एक समान व्यवस्था है और इस पर भारत सरकार की गारण्टी होती है। हॉलमार्किंग के जेवरातों की निर्माण लागत अधिक होने के कारण यह 10 से 15 प्रतिशत मंहगे होते हैं, लेकिन इन जेवरातों में शुद्धता की गारण्टी होती है। भारत में सोने के जेवरातों पर हॉलमार्किंग की व्यवस्था साल 2000 से और चांदी के जेवरातों पर हॉलमार्किंग की व्यवस्था साल 2005 से लागू है, लेकिन अभी तक भारत में जेवरातों पर हॉलमार्क के चिन्ह की अनिवार्यता नहीं है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के तहत भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस), हॉलमार्क के लिए प्रशासनिक प्राधिकार है। बीआईएस में तीन ग्रेड हैं, जो कि सोने के मानक तय करते हैं। यह ग्रेड हैं; 14 कैरेट, 18 कैरेट और 22 कैरेट। वैसे असली सोना 24 कैरेट का ही होता है, लेकिन इसके अभूषण नहीं बनते हैं, क्योंकि यह बेहद मुलायम होता है।
आम तौर पर सोने के जेवरात बनाने के लिए 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें 91.66 प्रतिशत शुद्ध सोना होता है। कई बार ग्राहक जानकारी के अभाव में ग़लती से 22 कैरेट वाली सोने के जेवरात के बदले में 24 कैरेट का दाम दे आते हैं। लेकिन अब सोने के जेवरातों पर हॉलमार्किंग अनिवार्य होने से ग्राहकों के साथ किसी भी तरह की ठगी नहीं हो सकेगी।
OCT 05 (WTN) – सोने के जेवरात ख़रीदने वालों के लिए मोदी सरकार एक सौगात देने जा रही है, इस सौगात के मिलने से सोने के जेवरातों की ख़रीददारी के समय ग्राहक ठगी का शिकार होने से बच सकेंगे। दरअसल, मोदी सरकार एक ऐसी पहल करने जा रही है जिससे ग्राहकों को सोने के जेवरातों की ख़रीदी में ख़रीदे गये सोने की शुद्धता के मुताबिक़ ही दाम चुकाने पड़ेंगे। इसके लिए मोदी सरकार सोने के जेवरातों की बिक्री के लिए BIS हॉलमार्किंग को अनिवार्य करने जा रही है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि केन्द्र की कॉमर्स मिनिस्ट्री ने सोने के आभूषणों के लिए BIS हॉलमार्किंग को अनिवार्य बनाने के प्रस्ताव को बाकयदा मन्ज़ूरी दे दी है। यानी कि इस नियम के लागू होने से अब सोने के हर जेवरात पर BIS हॉलमार्क ज़रूरी होगा। ऐसे में जब आप सोने के जेवरात ख़रीदने जाएंगे तो आपको उन पर BIS हॉलमार्क नज़र आएगा।
दरअसल, गोल्ड हॉलमार्क सोने के जेवरातों की शुद्धता का एक प्रमाण है और वर्तमान में यह स्वैच्छिक आधार पर लागू किया गया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) को सूचित करने के बाद ही इस नये नियम को लागू किया जा सकता है, जिसके कारण इस नियम के लागू होने में दो से तीन महीने का समय लग सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हॉलमार्किंग से यह पता चल जाता है कि सोने की जेवरात बनाने में कितने कैरेट का कितना सोना और कितनी अन्य धातु का इस्तेमाल किया गया है।
जैसा कि आप जानते हैं कि भारत में सोने के जेवरातों के प्रति महिलाओं में काफ़ी क्रेज रहता है। प्राचीन समय से ही भारत में सोना एक स्टेटस सिम्बल रहा है। सोने के जेवरातों के प्रति दीवानगी के कारण भारत सोने का सबसे बड़ा आयातक देश है। हर साल क़रीब 800 से 900 टन सोना भारत आयात करता है। जैसा कि हमने आपको बताया कि भारत में सोने के जेवरातों के प्रति महिलाओं में काफ़ी क्रेज रहता है, लेकिन भारत में सोने के जेवरात ख़रीदते समय हॉलमार्किंग की तरफ़ ज्यादातर लोग ध्यान नहीं देते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस समय देश में क़रीब 800 हॉलमार्किंग केन्द्र हैं।
सोने के जेवरातों के प्रति भारतीय लोगों में दीवानगी तो है, लेकिन देश में सिर्फ़ 40 प्रतिशत जेवरातों में ही हॉलमार्किंग की जाती है। आरोप है कि भारत में सोने के व्यापारी सोने के जेवरातों में मिलावट करते हैं, जिसका ख़ामियाज़ा ग्राहकों को भुगतना पड़ता है। ऐसे में कहा जा सकता है कि सोने के जेवरातों पर बीआईएस हॉलमार्किंग अनिवार्य होने से ग्राहक ठगी का शिकार होने से बच सकेंगे।
दरअसल, अभी तक देश में सोने के जेवरातों की गुणवत्ता को लेकर कोई कड़े नियम नहीं थे। ऐसे में कई बार देखा गया है कि ग्राहकों को बताए गये कैरेट से कम कैरेट का सोना बेच दिया जाता है और उनसे ज़्यादा कैरेट के दाम वसूल लिये जाते हैं। लेकिन अब सोने के जेवरातों पर हॉलमार्किंग होने से ग्राहकों के साथ किसी भी तरह की धोखाधड़ी नहीं हो सकेगी। वहीं यदि सोने के जेवरात बेचने वालों ने हॉलमार्किंग के बिना जेवरात बेचे तो उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा।
अब जब देश में सोने के जेवरातों पर हॉलमार्किंग अनिवार्य हो जाएगी, तो इससे जेवरातों की गुणवत्ता की आसानी से पहचान हो सकेगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हॉलमार्क चिन्ह की पूरे देश में एक समान व्यवस्था है और इस पर भारत सरकार की गारण्टी होती है। हॉलमार्किंग के जेवरातों की निर्माण लागत अधिक होने के कारण यह 10 से 15 प्रतिशत मंहगे होते हैं, लेकिन इन जेवरातों में शुद्धता की गारण्टी होती है। भारत में सोने के जेवरातों पर हॉलमार्किंग की व्यवस्था साल 2000 से और चांदी के जेवरातों पर हॉलमार्किंग की व्यवस्था साल 2005 से लागू है, लेकिन अभी तक भारत में जेवरातों पर हॉलमार्क के चिन्ह की अनिवार्यता नहीं है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के तहत भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस), हॉलमार्क के लिए प्रशासनिक प्राधिकार है। बीआईएस में तीन ग्रेड हैं, जो कि सोने के मानक तय करते हैं। यह ग्रेड हैं; 14 कैरेट, 18 कैरेट और 22 कैरेट। वैसे असली सोना 24 कैरेट का ही होता है, लेकिन इसके अभूषण नहीं बनते हैं, क्योंकि यह बेहद मुलायम होता है।
आम तौर पर सोने के जेवरात बनाने के लिए 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें 91.66 प्रतिशत शुद्ध सोना होता है। कई बार ग्राहक जानकारी के अभाव में ग़लती से 22 कैरेट वाली सोने के जेवरात के बदले में 24 कैरेट का दाम दे आते हैं। लेकिन अब सोने के जेवरातों पर हॉलमार्किंग अनिवार्य होने से ग्राहकों के साथ किसी भी तरह की ठगी नहीं हो सकेगी।