अमेरिकी की कूटनीतिक चाल से ‘बैकफुट’ पर आया चीन!
Wednesday - October 9, 2019 10:29 am ,
Category : WTN HINDI
अमेरिका और चीन के बीच जारी है ‘तनाव’
उइगर मुस्लिमों के नाम पर चीन को ‘अकेला’ करने अमेरिका ने चला कूटनीतिक दांव
OCT 09 (WTN) – विश्व की दो सबसे बड़ी आर्थिक और सामरिक शक्तियां अमेरिका और चीन एक बार फ़िर से आपसी विवाद के कारण आमने-सामने आ गई हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि पिछले काफ़ी समय से अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर जारी है, जिसका असर अमेरिका और चीन के बीच होने वाले व्यापार के अलावा पूरी दुनिया के व्यापार पर पड़ रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्रेड वॉर के ज़रिये दोनों ही देश एक दूसरे को सबके सिखाने के साथ-साथ विश्व व्यापार में एक दूसरे से मिल रही चुनैतियों का जवाब दे रहे हैं। लेकिन इन सबके बीच, अमेरिका के एक नये कूटनीतिक दांव से दोनों देशों के बीच एक नये विवाद ने जन्म ले लिया है।
दरअसल, अमेरिका ने चीन के शिनजियांग प्रांत के मुस्लिमों को हिरासत केन्द में रखे जाने का आरोप लगाते हुए कुछ चीनी अधिकारियों और नेताओं के वीज़ा पर प्रतिबंध लगा दिया है। अमेरिका के इस क़दम से पहले से ही ट्रेड वॉर के कारण तनाव में चल रहे दोनों देशों के रिश्तों में एक बार फ़िर से टकराव होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका काफ़ी समय से चीन में उइगर मुस्लिमों के साथ हो रहे अत्याचार और अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाता रहा है।
उइगर मुस्लिमों के प्रति सहानुभूति दिखाते हुए अमेरिका ने उइगरों मुस्लिमों को डिटेंशन कैम्प में रखे जाने के लिए ज़िम्मेदार चीनी अधिकारियों और नेताओं के वीज़ा बैन कर दिये हैं। इतना ही नहीं, अमेरिका ने इन अधिकारियों और नेताओं के परिवार के सदस्यों की अमेरिका यात्रा पर भी बैन लगा दिया है। वहीं दोनों देशों के बीच जारी ट्रेड वॉर के बीच अमेरिकी वाणिज्य मंत्रालय ने चीन की 28 कम्पनियों को ब्लैक लिस्ट में डाल दिया था। अमेरिका के इस क़दम के बाद अब यह कम्पनियां अमेरिकी कम्पनियों के साथ व्यापार नहीं कर सकेंगी। इन कम्पनियों पर उइगर मुस्लिमों समेत चीन के अन्य अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने और उनके साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप है।
अमेरिका काफ़ी समय से उइगर मुस्लिमों के प्रति चीन सरकार की नीतियों की ख़िलाफ़त करता रहा है। समय-समय पर अमेरिकी सरकार ने चीन सरकार की उइगर मुस्लिमों के ख़िलाफ़ की जा रही अत्याचारपूर्ण कार्रवाई के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी की है। इसी कड़ी में अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो का कहना है, ”चीनी सरकार ने उइगरों, कज़ाक, किर्गिज़ और मुस्लिम अल्पसंख्यक समूह के सदस्यों के खिलाफ कैम्पेन छेड़ रखा है। अमेरिका मांग करता है कि चीन गणराज्य अपने शिनजियांग प्रांत में मुस्लिमों के ख़िलाफ़ अत्याचार ख़त्म करे।”
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस्लाम को मानने वाले उइगर समुदाय के लोग चीन के सबसे बड़े शिंजियांग प्रांत में बहुतायत में रहते हैं। तुर्क मूल के उइगर मुस्लिमों की इस क्षेत्र में आबादी क़रीब एक करोड़ से ऊपर है। चीन से आज़ाद होने के लिए यह ‘ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट’ चला रहे हैं। इसी के कारण चीन ने बड़ी संख्या में उइगर मुस्लिमों को हिरासत कैम्पों में रखा हुआ है।
अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के जानकारों के मुताबिक़, अमेरिका और चीन के बीच चल रही वर्चस्व की लड़ाई के चलते ही अमेरिका ने चीन के ख़िलाफ़ यह क़दम उठाया है। इस समय अमेरिका और चीन के बीच रिश्ते बेहद नाज़ुक दौर से गुज़र रहे हैं। इस वक़्त जबकि अमेरिका ने चीन के कुछ अधिकारियों और नेताओं के वीज़ा पर प्रतिबन्ध लगाया है, बीजिंग का एक कारोबारी प्रतिनिधिमण्डल बातचीत के लिए वॉशिंगटन पहुंचने वाला है। वैसे वीज़ा पर प्रतिबन्ध के बारे में अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि नये प्रतिबन्धों और वाणिज्य विभाग की कार्रवाई का व्यापार वार्ता से कोई लेना-देना नहीं है।
जैसा कि आप जानते हैं कि चीन अपने अंदरूनी मामलों में किसी भी दूसरे देश का दख़ल बर्दाश्त नहीं करता है। उइगर मुस्लिमों के मामले में अमेरिका के ताज़ा क़दम से चीन भड़क गया है। इधर, ट्रेड वॉर के कारण वैसे भी दोनों देशों के बीच आपसी रिश्ते सामान्य नहीं है। वैसे समय-समय पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, ट्रेड वॉर के मुद्दे पर चीन से चर्चा की बात कहते रहे हैं, लेकिन इतना होने के बाद भी दोनों देश चर्चा के लिए आमने-सामने नहीं आ सके हैं। वहीं अब ट्रम्प प्रशासन द्वारा लिये गये इस नये फ़ैसले से दोनों देशों के बीच वार्ता की सम्भावना धूमिल होती नज़र आ रही है।
वैसे ट्रम्प प्रशासन की वीज़ा कूटनीति से चीन पर शिनजियांग प्रांत में मुस्लिमों पर अत्याचार के मुद्दे पर दबाव बढ़ गया है। दरअसल, वीज़ा कूटनीति ट्रम्प प्रशासन की बहुत बड़ी रणनीति है। अमेरिका जानता है कि चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बन गया है, और धीरे-धीरे चीन पूरी दुनिया में अमेरिकी वर्चस्व को आर्थिक, सामरिक और कूटनीतिक रूप से चुनौती दे रहा है। ऐसे में चीन को मुस्लिम देशों की नज़रों में गिराने के लिए अमेरिका मुस्लिमों के ऊपर चीन में हो रहे अत्याचार को आधार बनाकर पूरी दुनिया में चीन को मुस्लिम देशों से अलग थलग करने की कोशिश में है।
अमेरिका का अनुमान है कि चीन के शिनजियांग प्रांत में क़रीब 10 लाख मुस्लिमों को हिरासत में रखा गया है। चीन को मुस्लिमों के मुद्दे पर घेरने के लिए अमेरिका के नेतृत्व में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी शिनजियांग प्रांत में मुस्लिमों के साथ किये जा रहे बुरे बर्ताव की आलोचना की गई थी। उइगर मुस्लिमों के मुद्दे के साथ-साथ अमेरिका हॉन्ग कॉन्ग के मुद्दे पर भी चीन को लगातार घेर रहा है। हॉन्ग कॉन्ग के मुद्दे पर चीन को चेताते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ़ शब्दों में चीन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि हॉन्ग कॉन्ग में चल रहे प्रदर्शनों के ख़िलाफ़ चीन कुछ भी बुरा करता है, तो चीन को इसका ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ेगा।
इधर, चीनी अधिकारियों और नेताओं के वीज़ा पर बैन लगाने के अमेरिकी क़दम की चीन ने जमकर ख़िलाफ़त की है। वॉशिंगटन में चीनी दूतावास ने अमेरिका के चीनी अधिकारियों और नेताओं के वीज़ा पर बैन लगाने के क़दम की निंदा की है। अमेरिका को उसकी सीमा याद कराते हुए चीनी दूतावास ने कहा कि चीन के शिनजियांग प्रांत के अल्पसंख्यकों का मुद्दा उसका आंतरिक मामला है और अमेरिका इस क़दम के ज़रिए इसमें हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रहा है। इतना ही नहीं, चीनी दूतावास ने कहा कि वीज़ा के मामले में अमेरिका का फ़ैसला अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्धों के सामान्य नियमों का गम्भीर रूप से उल्लंघन करता है और यह चीन के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप और चीन के हितों की अनदेखी करने वाला है।
शिनजियांग प्रांत में मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचार के अमेरिकी दावों पर चीन का कहना है कि शिनजियांग प्रांत में कथित मानवाधिकार उल्लंघन का कोई मुद्दा नहीं है, जैसा कि अमेरिका दावा कर रहा है। अमेरिका के आरोप केवल हमारे (चीन) आंतरिक मामले में दखल करने के तहत लगाए गए हैं। चीन ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अमेरिका तुरन्त अपनी ग़लती सुधारते हुए अपना फ़ैसला वापस ले और चीन के आंतरिक मामलों में दखल देना बंद कर दे।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका का जब भी किसी भी देश से विवाद होता है तो अमेरिका उस देश के ख़िलाफ़ सामरिक, आर्थिक और कूटनीतिक हथियारों का प्रयोग करता है। चीन से व्यापार और वैश्विक वर्चस्व में मिल रही कड़ी टक्कर चलते अमेरिका की कूटनीति है कि चीन को मुस्लिमों का दुश्मन बताकर मुस्लिमों देशों को चीन के ख़िलाफ़ किया जाए। ऐसा इसलिए, क्योंकि इस समय चीन का मुस्लिम देशों के साथ व्यापार बढ़ता ही जा रहा है। वहीं बेल्ट एण्ड रोड प्रोजेक्ट के ज़रिये चीन खाड़ी देशों में व्यापारिक घुसपैठ करने की कोशिश में है। अब देखना होगा कि अमेरिका अपने मंसूबों में सफ़ल हो पाता है कि नहीं और मुस्लिम देश उइगर मुस्लिमों के मुद्दे पर चीन के ख़िलाफ़ खड़े होते हैं कि नहीं?
OCT 09 (WTN) – विश्व की दो सबसे बड़ी आर्थिक और सामरिक शक्तियां अमेरिका और चीन एक बार फ़िर से आपसी विवाद के कारण आमने-सामने आ गई हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि पिछले काफ़ी समय से अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर जारी है, जिसका असर अमेरिका और चीन के बीच होने वाले व्यापार के अलावा पूरी दुनिया के व्यापार पर पड़ रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्रेड वॉर के ज़रिये दोनों ही देश एक दूसरे को सबके सिखाने के साथ-साथ विश्व व्यापार में एक दूसरे से मिल रही चुनैतियों का जवाब दे रहे हैं। लेकिन इन सबके बीच, अमेरिका के एक नये कूटनीतिक दांव से दोनों देशों के बीच एक नये विवाद ने जन्म ले लिया है।
दरअसल, अमेरिका ने चीन के शिनजियांग प्रांत के मुस्लिमों को हिरासत केन्द में रखे जाने का आरोप लगाते हुए कुछ चीनी अधिकारियों और नेताओं के वीज़ा पर प्रतिबंध लगा दिया है। अमेरिका के इस क़दम से पहले से ही ट्रेड वॉर के कारण तनाव में चल रहे दोनों देशों के रिश्तों में एक बार फ़िर से टकराव होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका काफ़ी समय से चीन में उइगर मुस्लिमों के साथ हो रहे अत्याचार और अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाता रहा है।
उइगर मुस्लिमों के प्रति सहानुभूति दिखाते हुए अमेरिका ने उइगरों मुस्लिमों को डिटेंशन कैम्प में रखे जाने के लिए ज़िम्मेदार चीनी अधिकारियों और नेताओं के वीज़ा बैन कर दिये हैं। इतना ही नहीं, अमेरिका ने इन अधिकारियों और नेताओं के परिवार के सदस्यों की अमेरिका यात्रा पर भी बैन लगा दिया है। वहीं दोनों देशों के बीच जारी ट्रेड वॉर के बीच अमेरिकी वाणिज्य मंत्रालय ने चीन की 28 कम्पनियों को ब्लैक लिस्ट में डाल दिया था। अमेरिका के इस क़दम के बाद अब यह कम्पनियां अमेरिकी कम्पनियों के साथ व्यापार नहीं कर सकेंगी। इन कम्पनियों पर उइगर मुस्लिमों समेत चीन के अन्य अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने और उनके साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप है।
अमेरिका काफ़ी समय से उइगर मुस्लिमों के प्रति चीन सरकार की नीतियों की ख़िलाफ़त करता रहा है। समय-समय पर अमेरिकी सरकार ने चीन सरकार की उइगर मुस्लिमों के ख़िलाफ़ की जा रही अत्याचारपूर्ण कार्रवाई के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी की है। इसी कड़ी में अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो का कहना है, ”चीनी सरकार ने उइगरों, कज़ाक, किर्गिज़ और मुस्लिम अल्पसंख्यक समूह के सदस्यों के खिलाफ कैम्पेन छेड़ रखा है। अमेरिका मांग करता है कि चीन गणराज्य अपने शिनजियांग प्रांत में मुस्लिमों के ख़िलाफ़ अत्याचार ख़त्म करे।”
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस्लाम को मानने वाले उइगर समुदाय के लोग चीन के सबसे बड़े शिंजियांग प्रांत में बहुतायत में रहते हैं। तुर्क मूल के उइगर मुस्लिमों की इस क्षेत्र में आबादी क़रीब एक करोड़ से ऊपर है। चीन से आज़ाद होने के लिए यह ‘ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट’ चला रहे हैं। इसी के कारण चीन ने बड़ी संख्या में उइगर मुस्लिमों को हिरासत कैम्पों में रखा हुआ है।
अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के जानकारों के मुताबिक़, अमेरिका और चीन के बीच चल रही वर्चस्व की लड़ाई के चलते ही अमेरिका ने चीन के ख़िलाफ़ यह क़दम उठाया है। इस समय अमेरिका और चीन के बीच रिश्ते बेहद नाज़ुक दौर से गुज़र रहे हैं। इस वक़्त जबकि अमेरिका ने चीन के कुछ अधिकारियों और नेताओं के वीज़ा पर प्रतिबन्ध लगाया है, बीजिंग का एक कारोबारी प्रतिनिधिमण्डल बातचीत के लिए वॉशिंगटन पहुंचने वाला है। वैसे वीज़ा पर प्रतिबन्ध के बारे में अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि नये प्रतिबन्धों और वाणिज्य विभाग की कार्रवाई का व्यापार वार्ता से कोई लेना-देना नहीं है।
जैसा कि आप जानते हैं कि चीन अपने अंदरूनी मामलों में किसी भी दूसरे देश का दख़ल बर्दाश्त नहीं करता है। उइगर मुस्लिमों के मामले में अमेरिका के ताज़ा क़दम से चीन भड़क गया है। इधर, ट्रेड वॉर के कारण वैसे भी दोनों देशों के बीच आपसी रिश्ते सामान्य नहीं है। वैसे समय-समय पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, ट्रेड वॉर के मुद्दे पर चीन से चर्चा की बात कहते रहे हैं, लेकिन इतना होने के बाद भी दोनों देश चर्चा के लिए आमने-सामने नहीं आ सके हैं। वहीं अब ट्रम्प प्रशासन द्वारा लिये गये इस नये फ़ैसले से दोनों देशों के बीच वार्ता की सम्भावना धूमिल होती नज़र आ रही है।
वैसे ट्रम्प प्रशासन की वीज़ा कूटनीति से चीन पर शिनजियांग प्रांत में मुस्लिमों पर अत्याचार के मुद्दे पर दबाव बढ़ गया है। दरअसल, वीज़ा कूटनीति ट्रम्प प्रशासन की बहुत बड़ी रणनीति है। अमेरिका जानता है कि चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बन गया है, और धीरे-धीरे चीन पूरी दुनिया में अमेरिकी वर्चस्व को आर्थिक, सामरिक और कूटनीतिक रूप से चुनौती दे रहा है। ऐसे में चीन को मुस्लिम देशों की नज़रों में गिराने के लिए अमेरिका मुस्लिमों के ऊपर चीन में हो रहे अत्याचार को आधार बनाकर पूरी दुनिया में चीन को मुस्लिम देशों से अलग थलग करने की कोशिश में है।
अमेरिका का अनुमान है कि चीन के शिनजियांग प्रांत में क़रीब 10 लाख मुस्लिमों को हिरासत में रखा गया है। चीन को मुस्लिमों के मुद्दे पर घेरने के लिए अमेरिका के नेतृत्व में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी शिनजियांग प्रांत में मुस्लिमों के साथ किये जा रहे बुरे बर्ताव की आलोचना की गई थी। उइगर मुस्लिमों के मुद्दे के साथ-साथ अमेरिका हॉन्ग कॉन्ग के मुद्दे पर भी चीन को लगातार घेर रहा है। हॉन्ग कॉन्ग के मुद्दे पर चीन को चेताते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ़ शब्दों में चीन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि हॉन्ग कॉन्ग में चल रहे प्रदर्शनों के ख़िलाफ़ चीन कुछ भी बुरा करता है, तो चीन को इसका ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ेगा।
इधर, चीनी अधिकारियों और नेताओं के वीज़ा पर बैन लगाने के अमेरिकी क़दम की चीन ने जमकर ख़िलाफ़त की है। वॉशिंगटन में चीनी दूतावास ने अमेरिका के चीनी अधिकारियों और नेताओं के वीज़ा पर बैन लगाने के क़दम की निंदा की है। अमेरिका को उसकी सीमा याद कराते हुए चीनी दूतावास ने कहा कि चीन के शिनजियांग प्रांत के अल्पसंख्यकों का मुद्दा उसका आंतरिक मामला है और अमेरिका इस क़दम के ज़रिए इसमें हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रहा है। इतना ही नहीं, चीनी दूतावास ने कहा कि वीज़ा के मामले में अमेरिका का फ़ैसला अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्धों के सामान्य नियमों का गम्भीर रूप से उल्लंघन करता है और यह चीन के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप और चीन के हितों की अनदेखी करने वाला है।
शिनजियांग प्रांत में मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचार के अमेरिकी दावों पर चीन का कहना है कि शिनजियांग प्रांत में कथित मानवाधिकार उल्लंघन का कोई मुद्दा नहीं है, जैसा कि अमेरिका दावा कर रहा है। अमेरिका के आरोप केवल हमारे (चीन) आंतरिक मामले में दखल करने के तहत लगाए गए हैं। चीन ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अमेरिका तुरन्त अपनी ग़लती सुधारते हुए अपना फ़ैसला वापस ले और चीन के आंतरिक मामलों में दखल देना बंद कर दे।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका का जब भी किसी भी देश से विवाद होता है तो अमेरिका उस देश के ख़िलाफ़ सामरिक, आर्थिक और कूटनीतिक हथियारों का प्रयोग करता है। चीन से व्यापार और वैश्विक वर्चस्व में मिल रही कड़ी टक्कर चलते अमेरिका की कूटनीति है कि चीन को मुस्लिमों का दुश्मन बताकर मुस्लिमों देशों को चीन के ख़िलाफ़ किया जाए। ऐसा इसलिए, क्योंकि इस समय चीन का मुस्लिम देशों के साथ व्यापार बढ़ता ही जा रहा है। वहीं बेल्ट एण्ड रोड प्रोजेक्ट के ज़रिये चीन खाड़ी देशों में व्यापारिक घुसपैठ करने की कोशिश में है। अब देखना होगा कि अमेरिका अपने मंसूबों में सफ़ल हो पाता है कि नहीं और मुस्लिम देश उइगर मुस्लिमों के मुद्दे पर चीन के ख़िलाफ़ खड़े होते हैं कि नहीं?