आर्थिक मंदी का महाअसर; इस बार नेपाल और बांग्लादेश से भी कम रहेगी भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट
Monday - October 14, 2019 11:04 am ,
Category : WTN HINDI
भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट पर भारी पड़ रही आर्थिक मंदी
वर्ल्ड बैंक समेत कई वित्तीय संस्थाओं ने भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट का अनुमान किया कम
OCT 14 (WTN) – वैश्विक आर्थिक मंदी के कारण भारत जैसे तेज़ी से विकास कर रहे देश की अर्थव्यवस्था पर काफ़ी नकारात्मक असर पड़ा है। ऑटो सेक्टर से लेकर टैक्सटाइल सेक्टर पर आर्थिक मंदी का सबसे ज़्यादा असर देखा गया है। खुली अर्थव्यवस्था होने के कारण आर्थिक मंदी का असर पूरी दुनिया के देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ा है, जिसके कारण कई देशों की चालू वित्त वर्ष की जीडीपी ग्रोथ रेट का अनुमान घटा दिया गया है। तेज़ी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट पर भी आर्थिक मंदी का नकारात्मक असर पड़ा है। लेकिन इसके बावजूद, नेपाल और बांग्लादेश जैसे छोटे देशों की जीडीपी ग्रोथ रेट भारत से ज़्यादा रहने का अनुमान लगाया जा रहा है।
सबसे पहले आपको बता दें कि भारत के केन्द्रीय बैंक, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इण्डिया भी चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ रेट अनुमान को कम कर दिया है। ऐसे में अब विश्व बैंक ने भी चालू वित्त वर्ष में भारत की ग्रोथ रेट के अनुमान को घटा दिया है। विश्व बैंक के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में भारत की विकास दर 6 प्रतिशत पर सिमट सकती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वित्त वर्ष 2018-19 के लिए भारत की विकास दर 6.9 प्रतिशत थी। विश्व बैंक से पहले, मूडीज इंवेस्टर्स सर्विस ने भी वित्त वर्ष 2019-20 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट के अनुमान को 6.20 प्रतिशत से घटाकर 5.80 प्रतिशत कर दिया है।
जीडीपी ग्रोथ रेट कम करने के अपने फ़ैसले के बारे में मूडीज का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था आर्थिक मंदी से काफ़ी प्रभावित है और इसके कुछ कारक दीर्घकालिक असर वाले हैं। बात करें भारत के केन्द्रीय बैंक, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इण्डिया की तो रिज़र्व बैंक ने हालिया मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक (MPC) के बाद जीडीपी ग्रोथ रेट का अनुमान घटाकर 6.10 प्रतिशत कर दिया है।
हालांकि, साउथ एशिया इकोनॉमिक फोकस के नये संस्करण में विश्व बैंक का कहना है कि साल 2021 में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट अच्छा प्रदर्शन करेगी और एक बार फ़िर से यह 6.9 प्रतिशत का स्तर हासिल कर सकती है। इतना ही नहीं, अनुमान है कि साल 2022 में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 7.2 प्रतिशत रह सकती है। विश्व बैंक का कहना है कि लगातार दूसरे वित्तीय वर्ष में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट अनुमानित लक्ष्य को हासिल नहीं कर पा रही है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वित्त वर्ष 2017-18 में भारत की ग्रोथ रेट 7.2 प्रतिशत थी, जो कि साल 2018-19 में घटकर 6.8 प्रतिशत रह गई। हालांकि, मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन गतिविधियां बढ़ने से इण्डस्ट्रियल आउटपुट ग्रोथ बढ़कर 6.9 प्रतिशत हो गई, जबकि कृषि क्षेत्र ग्रोथ रेट 2.9 प्रतिशत और सेवा क्षेत्र में ग्रोथ रेट 7.5 प्रतिशत ही रही।
इधर, भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट के बारे में मूडीज का कहना है कि अभी फ़िलहाल आर्थिक मंदी का असर ग्रोथ रेट पर पड़ रहा है। लेकिन आर्थिक मंदी का असर कम होने और ख़त्म होने के बाद वित्त वर्ष 2020-21 में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 6.6 प्रतिशत तक हो सकती है। मूडीज के मुताबिक़, अगले दो साल तक जीडीपी की वास्तविक ग्रोथ और महंगाई में धीमे सुधार की उम्मीद है। इसलिए ग्रोथ रेट और महंगाई दर के लिए पूर्वानुमान घटा दिया गया है। मूडीज के अनुसार दो साल पहले की स्थिति से तुलना की जाए तो जीडीपी ग्रोथ रेट 8 प्रतिशत या इससे ज़्यादा होने की उम्मीद कम हो गई है।
वर्ल्ड बैंक, भारतीय रिज़र्व और मूडीज के बाद एशियाई विकास बैंक (ADB) और ओईसीडी ने भी भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट का अनुमान कम कर दिया था। वहीं रेटिंग एजेंसियां स्टैण्डर्ड एण्ड पुअर्स और फिच ने भी जीडीपी ग्रोथ रेट के पूर्वानुमान में कटौती की है। यानी कि साफ़ ज़ाहिर है कि आर्थिक मंदी के कारण भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट पर काफ़ी असर पड़ रहा है।
लेकिन आर्थिक मंदी में जहां भारत की ग्रोथ रेट पर सीधा असर पड़ रहा है, वहीं नेपाल और बांग्लादेश जैसे छोटे देशों की जीडीपी ग्रोथ रेट भारत जैसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश से ज़्यादा रहने वाली है। भारत की अर्थव्यवस्था से काफ़ी छोटी अर्थव्यवस्था वाले देश बांग्लादेश में आर्थिक मंदी के बावजूद जीडीपी ग्रोथ 8.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 2018-19 में बांग्लादेश की जीडीपी ग्रोथ रेट 7.9 प्रतिशत रही थी। वहीं, साल 2020 में इसके 7.2 प्रतिशत रहने और साल 2021 में 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। ऐसा इसलिए, क्योंकि अमेरिका और चीन के बीच चल रहे ट्रेड वॉर के कारण बांग्लादेश की गारमेण्ट इण्डस्ट्री को काफ़ी फ़ायदा हुआ है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के जानकारों के मुताबिक़, भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका की तुलना में बांग्लादेश ने आर्थिक मंदी के बीच बेहतर प्रदर्शन किया है और कर रहा है। बांग्लादेश की आर्थिक स्तर पर यह कामयाबी औद्योगिक उत्पादन से लेकर निर्यात तक के डेटा में दिखाई दे रहा है।
वहीं भारत और चीन के बीच स्थित बफर स्टेट यानी कि नेपाल की जीडीपी ग्रोथ रेट भी भारत से ज़्यादा होने का अनुमान लगाया जा रहा है। चालू वित्त वर्ष और अगले वित्त वर्ष में नेपाल की जीडीपी ग्रोथ 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। अब आप सोच रहे होंगे कि नेपाल जैसे छोटे से देश की जीडीपी ग्रोथ रेट भारत से ज़्यादा कैसे होने वाली है? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नेपाल में सर्विस और कंस्ट्रक्शन गतिविधियां बढ़ने के साथ-साथ टूरिज्म और पब्लिक खर्च बढ़ा है, जिसके कारण नेपाल की जीडीपी ग्रोथ में तेज़ी का अनुमान लगाया जा रहा है।
विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक़, इस बार दक्षिण एशिया में ग्रोथ 5.9 प्रतिशत रहेगी, जो कि अप्रैल 2019 की तुलना में 1.1 प्रतिशत कम है। आर्थिक मंदी का असर दक्षिण एशिया में आयात पर भी पड़ा है और सबसे ज़्यादा आयात पर असर पाकिस्तान और श्रीलंका पर पड़ा है, जहां कुल आयात में 15 से 20 प्रतिशत की कमी दर्ज़ की गई है। दरअसल, औद्योगिक उत्पादन, आयात में कमी और वित्तीय बाजार में परेशानियों के कारण दक्षिण एशियाई बाज़ार में आर्थिक सुस्ती देखने को मिल रही है।
कहा जा सकता है कि दक्षिण एशियाई देशों में आर्थिक सुस्ती साल 2008 और 2012 के दौर को दोहराते हुए दिखाई दे रही है। हालांकि, कहा जा रहा है कि निवेश और निजी खपत में हल्की तेज़ी भी 2020 के दौरान दक्षिण एशियाई देशों के लिए आर्थिक तेज़ी को 6.3 प्रतिशत तक पहुंचा सकती है। साफ़ ज़ाहिर है कि मंदी का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर ऐसा पड़ा है कि दुनिया की टॉप अर्थव्यवस्थों में शामिल भारत की अर्थव्यवस्था से ज़्यादा तेज़ी से बांग्लादेश और नेपाल की अर्थव्यवस्था आगे बढ़ेंगी।
OCT 14 (WTN) – वैश्विक आर्थिक मंदी के कारण भारत जैसे तेज़ी से विकास कर रहे देश की अर्थव्यवस्था पर काफ़ी नकारात्मक असर पड़ा है। ऑटो सेक्टर से लेकर टैक्सटाइल सेक्टर पर आर्थिक मंदी का सबसे ज़्यादा असर देखा गया है। खुली अर्थव्यवस्था होने के कारण आर्थिक मंदी का असर पूरी दुनिया के देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ा है, जिसके कारण कई देशों की चालू वित्त वर्ष की जीडीपी ग्रोथ रेट का अनुमान घटा दिया गया है। तेज़ी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट पर भी आर्थिक मंदी का नकारात्मक असर पड़ा है। लेकिन इसके बावजूद, नेपाल और बांग्लादेश जैसे छोटे देशों की जीडीपी ग्रोथ रेट भारत से ज़्यादा रहने का अनुमान लगाया जा रहा है।
सबसे पहले आपको बता दें कि भारत के केन्द्रीय बैंक, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इण्डिया भी चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी ग्रोथ रेट अनुमान को कम कर दिया है। ऐसे में अब विश्व बैंक ने भी चालू वित्त वर्ष में भारत की ग्रोथ रेट के अनुमान को घटा दिया है। विश्व बैंक के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में भारत की विकास दर 6 प्रतिशत पर सिमट सकती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वित्त वर्ष 2018-19 के लिए भारत की विकास दर 6.9 प्रतिशत थी। विश्व बैंक से पहले, मूडीज इंवेस्टर्स सर्विस ने भी वित्त वर्ष 2019-20 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट के अनुमान को 6.20 प्रतिशत से घटाकर 5.80 प्रतिशत कर दिया है।
जीडीपी ग्रोथ रेट कम करने के अपने फ़ैसले के बारे में मूडीज का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था आर्थिक मंदी से काफ़ी प्रभावित है और इसके कुछ कारक दीर्घकालिक असर वाले हैं। बात करें भारत के केन्द्रीय बैंक, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इण्डिया की तो रिज़र्व बैंक ने हालिया मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक (MPC) के बाद जीडीपी ग्रोथ रेट का अनुमान घटाकर 6.10 प्रतिशत कर दिया है।
हालांकि, साउथ एशिया इकोनॉमिक फोकस के नये संस्करण में विश्व बैंक का कहना है कि साल 2021 में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट अच्छा प्रदर्शन करेगी और एक बार फ़िर से यह 6.9 प्रतिशत का स्तर हासिल कर सकती है। इतना ही नहीं, अनुमान है कि साल 2022 में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 7.2 प्रतिशत रह सकती है। विश्व बैंक का कहना है कि लगातार दूसरे वित्तीय वर्ष में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट अनुमानित लक्ष्य को हासिल नहीं कर पा रही है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वित्त वर्ष 2017-18 में भारत की ग्रोथ रेट 7.2 प्रतिशत थी, जो कि साल 2018-19 में घटकर 6.8 प्रतिशत रह गई। हालांकि, मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन गतिविधियां बढ़ने से इण्डस्ट्रियल आउटपुट ग्रोथ बढ़कर 6.9 प्रतिशत हो गई, जबकि कृषि क्षेत्र ग्रोथ रेट 2.9 प्रतिशत और सेवा क्षेत्र में ग्रोथ रेट 7.5 प्रतिशत ही रही।
इधर, भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट के बारे में मूडीज का कहना है कि अभी फ़िलहाल आर्थिक मंदी का असर ग्रोथ रेट पर पड़ रहा है। लेकिन आर्थिक मंदी का असर कम होने और ख़त्म होने के बाद वित्त वर्ष 2020-21 में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 6.6 प्रतिशत तक हो सकती है। मूडीज के मुताबिक़, अगले दो साल तक जीडीपी की वास्तविक ग्रोथ और महंगाई में धीमे सुधार की उम्मीद है। इसलिए ग्रोथ रेट और महंगाई दर के लिए पूर्वानुमान घटा दिया गया है। मूडीज के अनुसार दो साल पहले की स्थिति से तुलना की जाए तो जीडीपी ग्रोथ रेट 8 प्रतिशत या इससे ज़्यादा होने की उम्मीद कम हो गई है।
वर्ल्ड बैंक, भारतीय रिज़र्व और मूडीज के बाद एशियाई विकास बैंक (ADB) और ओईसीडी ने भी भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट का अनुमान कम कर दिया था। वहीं रेटिंग एजेंसियां स्टैण्डर्ड एण्ड पुअर्स और फिच ने भी जीडीपी ग्रोथ रेट के पूर्वानुमान में कटौती की है। यानी कि साफ़ ज़ाहिर है कि आर्थिक मंदी के कारण भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट पर काफ़ी असर पड़ रहा है।
लेकिन आर्थिक मंदी में जहां भारत की ग्रोथ रेट पर सीधा असर पड़ रहा है, वहीं नेपाल और बांग्लादेश जैसे छोटे देशों की जीडीपी ग्रोथ रेट भारत जैसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश से ज़्यादा रहने वाली है। भारत की अर्थव्यवस्था से काफ़ी छोटी अर्थव्यवस्था वाले देश बांग्लादेश में आर्थिक मंदी के बावजूद जीडीपी ग्रोथ 8.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 2018-19 में बांग्लादेश की जीडीपी ग्रोथ रेट 7.9 प्रतिशत रही थी। वहीं, साल 2020 में इसके 7.2 प्रतिशत रहने और साल 2021 में 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। ऐसा इसलिए, क्योंकि अमेरिका और चीन के बीच चल रहे ट्रेड वॉर के कारण बांग्लादेश की गारमेण्ट इण्डस्ट्री को काफ़ी फ़ायदा हुआ है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के जानकारों के मुताबिक़, भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका की तुलना में बांग्लादेश ने आर्थिक मंदी के बीच बेहतर प्रदर्शन किया है और कर रहा है। बांग्लादेश की आर्थिक स्तर पर यह कामयाबी औद्योगिक उत्पादन से लेकर निर्यात तक के डेटा में दिखाई दे रहा है।
वहीं भारत और चीन के बीच स्थित बफर स्टेट यानी कि नेपाल की जीडीपी ग्रोथ रेट भी भारत से ज़्यादा होने का अनुमान लगाया जा रहा है। चालू वित्त वर्ष और अगले वित्त वर्ष में नेपाल की जीडीपी ग्रोथ 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। अब आप सोच रहे होंगे कि नेपाल जैसे छोटे से देश की जीडीपी ग्रोथ रेट भारत से ज़्यादा कैसे होने वाली है? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नेपाल में सर्विस और कंस्ट्रक्शन गतिविधियां बढ़ने के साथ-साथ टूरिज्म और पब्लिक खर्च बढ़ा है, जिसके कारण नेपाल की जीडीपी ग्रोथ में तेज़ी का अनुमान लगाया जा रहा है।
विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक़, इस बार दक्षिण एशिया में ग्रोथ 5.9 प्रतिशत रहेगी, जो कि अप्रैल 2019 की तुलना में 1.1 प्रतिशत कम है। आर्थिक मंदी का असर दक्षिण एशिया में आयात पर भी पड़ा है और सबसे ज़्यादा आयात पर असर पाकिस्तान और श्रीलंका पर पड़ा है, जहां कुल आयात में 15 से 20 प्रतिशत की कमी दर्ज़ की गई है। दरअसल, औद्योगिक उत्पादन, आयात में कमी और वित्तीय बाजार में परेशानियों के कारण दक्षिण एशियाई बाज़ार में आर्थिक सुस्ती देखने को मिल रही है।
कहा जा सकता है कि दक्षिण एशियाई देशों में आर्थिक सुस्ती साल 2008 और 2012 के दौर को दोहराते हुए दिखाई दे रही है। हालांकि, कहा जा रहा है कि निवेश और निजी खपत में हल्की तेज़ी भी 2020 के दौरान दक्षिण एशियाई देशों के लिए आर्थिक तेज़ी को 6.3 प्रतिशत तक पहुंचा सकती है। साफ़ ज़ाहिर है कि मंदी का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर ऐसा पड़ा है कि दुनिया की टॉप अर्थव्यवस्थों में शामिल भारत की अर्थव्यवस्था से ज़्यादा तेज़ी से बांग्लादेश और नेपाल की अर्थव्यवस्था आगे बढ़ेंगी।