आख़िरकार चीन को अंदाज़ा लग ही गया अमेरिकी ‘बादशाहत’ का!
Saturday - October 19, 2019 1:52 pm ,
Category : WTN HINDI
ट्रेड वॉर से चीन की अर्थव्यवस्था प्रभावित
अमेरिका से चल रहे व्यापारिक युद्ध ने चीन को दिया ‘बड़ा झटका’
OCT 19 (WTN) – 20.49 ट्रिलियन डॉलर वाली दुनिया की सबसे बड़ी अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सालों से वैश्विक अर्थव्यवस्था में बादशाहत है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था और उसकी करेंसी इतनी मज़बूत है कि पूरी दुनिया का ज़्यादातर कारोबार अमेरिकी डॉलर में ही होता है। वहीं 13.41 ट्रिलियन डॉलर के साथ चीन की अर्थव्यवस्था दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। जैसा कि आप जानते हैं कि चीन एक महत्वाकांक्षी देश है, ऐसे में चीन काफ़ी समय से अमेरिकी अर्थव्यवस्था से टक्कर लेने की कोशिश कर रहा है। यानी साफ़ शब्दों में कहा जाए तो इन दिनों अमेरिका और चीन के बीच वैश्विक व्यापार और पारस्परिक व्यापार में वर्चस्व की लड़ाई चल रही है, जिसे ट्रेड वॉर कहा जा रहा है।
लेकिन अमेरिका के साथ चल रहे ट्रेड वॉर का बड़ा असर अब चीन की अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में चीन की जीडीपी ग्रोथ रेट बीते 30 सालों के सबसे निचले स्तर पर आ चुकी है। चीनी सरकार ने तीसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़े जारी किए हैं, जिससे पता चलता है कि सुस्त घरेलू डिमाण्ड और ट्रेड वॉर के कारण चीन की अर्थव्यवस्था को एक बड़ा झटका लगा है।
बता दें कि चीन के नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के अनुसार, जुलाई-सितम्बर की तिमाही में चीन की GDP दर सिर्फ़ 6 प्रतिशत रही। इसके पहले दूसरी तिमाही में यह 6.2 प्रतिशत रही थी। चीन की GDP ग्रोथ में 0.2 प्रतिशत की इस कमी का प्रमुख कारण घरेलू बाज़ार में मांग की कमी और अमेरिका के साथ चल रहे ट्रेड वॉर को बताया जा रहा है। चीन जैसे महत्वाकांक्षी देश के लिए यह चिंता का कारण है कि साल 1992 के बाद किसी भी तिमाही में चीनी अर्थव्यवस्था की यह सबसे खराब जीडीपी ग्रोथ रेट है।
चीन के लिए जीडीपी ग्रोथ रेट में कमी एक बड़े झटके की तरह है। पिछले साल चीन की विकास दर 6.6 प्रतिशत रही थी। उस हिसाब से देखा जाए तो इस साल जुलाई-सितम्बर की तिमाही में चीन की GDP दर का सिर्फ़ 6 प्रतिशत रहना उसके लिए चिंता का कारण है। हालांकि, चीनी सरकार ने 2019 के लिए आर्थिक वृद्धि दर का लक्ष्य 6 से 6.5 प्रतिशत के बीच रखा था। लेकिन फ़िर भी तीसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट का सिर्फ़ 6 प्रतिशत पर सिमट जाना महत्वाकांक्षी चीन के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है। चीन की चिंता का एक कारण और है कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने चीन के जीडीपी ग्रोथ रेट के अनुमान को 6.2 प्रतिशत से कम कर 6.1 प्रतिशत कर दिया है।
तीसरी तिमाही के आंकड़े जारी होने के बाद कहा जा सकता है कि चीन की अर्थव्यवस्था में तीन तिमाहियों के दौरान स्थिरता देखी गई है। तीसरी तिमाही के जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े चीन के लिए एक चेतावनी है कि उसे घरेलू और वैश्विक स्तर पर गम्भीर आर्थिक हालातों के प्रति सजग रहना होगा। चीन की अर्थव्यवस्था के जानकारों के मुताबिक़, वैश्विक स्तर पर आर्थिक संकट के कारण जारी नरमी और बाहरी व्यापार में बढ़ती अनिश्चित्तता से घरेलू बाजार पर भारी दबाव है।
जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि चीन एक महत्वाकांक्षी देश है। ऐसे में कहा जा सकता है कि चीन, अमेरिकी ट्रेड वॉर से हार मानने वाला नहीं है। चीन ने अपनी अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने के लिए कई क़दम भी उठाएं हैं। घरेलू डिमाण्ड बढ़े इसके लिए चीन सरकार आम लोगों को राहत देने के लिए टैक्स में कटौती कर रही है। साथ ही शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई प्रतिबंध भी हटाए गये हैं।
इतना ही नहीं, चीन के सेंट्रल बैंक, पीपुल्स बैंक ऑफ़ चायना ने बैंकिंग सिस्टम में बैंकों को मीडियम टर्म लैण्डिंग सुविधा के ज़रिए 28 अरब डॉलर यानी कि 200 अरब युआन जारी किये हैं, जिससे बाज़ार में लिक्विडिटी को बढ़ाया जा सके। हालांकि, चीन के सेन्ट्ल बैंक की इस कोशिश का कुछ ख़ास असर देखने को नहीं मिल रहा है। वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन में लगातार 15वें महीने ऑटोमोबाइल सेल में गिरावट दर्ज की गई है। इसके अलावा शिपमेण्ट, फैक्ट्री, पावर जनरेशन, रोज़गार और मनोरंजन पर होने वाले ख़र्च में भी कमी आई है।
दरअसल, चीन की अर्थव्यवस्था, अमेरिका की शुल्क वृद्धि का सामना नहीं कर पा रही है। वहीं चीन की तकनीकीय योजनाओं को भी धक्का लगा है, जिससे चीन की जीडीपी ग्रोथ रेट प्रभावित हुई है। पूरी दुनिया में अमेरिका और चीन के ट्रेड एग्रीमेण्ट को लेकर अब भी अनिश्चितताएं बरक़रार हैं। जानकारों के मुताबिक़, 15 दिसम्बर को लागू होने वाले शुल्क, 2020 की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डालेंगे। वैसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प का कहना है कि वे चीन के साथ एग्रीमेण्ट के क़रीब हैं, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि अभी इसमें काफ़ी कसर बाक़ी है।
यानी कि साफ़ ज़ाहिर कि चीन को अमेरिका से चल रहे ट्रेड वॉर का काफ़ी ख़ामियाजा भुगतना पड़ रहा है। अब देखना होगा कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच चल रहा ट्रेड वॉर कहां पर आकर ख़त्म होता है। ऐसा नहीं है कि ट्रेड वॉर का असर सिर्फ़ चीन की अर्थव्यवस्था पर ही पड़ा है, अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी ट्रेड वॉर से नुकसान हुआ है। लेकिन इस ट्रेड वॉर से चीन की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है और 27 सालों के बाद तिमाही जीडीपी ग्रोथ रेट निचले स्तर पर आ गई है। अब देखना होगा कि आख़िर क्या कुछ उपाय बीजिंग की सरकार उठाती है, जिससे अमेरिकी से मिल रही आर्थिक चुनौती का वे सामना कर सकें और जवाब दे सकें।
OCT 19 (WTN) – 20.49 ट्रिलियन डॉलर वाली दुनिया की सबसे बड़ी अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सालों से वैश्विक अर्थव्यवस्था में बादशाहत है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था और उसकी करेंसी इतनी मज़बूत है कि पूरी दुनिया का ज़्यादातर कारोबार अमेरिकी डॉलर में ही होता है। वहीं 13.41 ट्रिलियन डॉलर के साथ चीन की अर्थव्यवस्था दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। जैसा कि आप जानते हैं कि चीन एक महत्वाकांक्षी देश है, ऐसे में चीन काफ़ी समय से अमेरिकी अर्थव्यवस्था से टक्कर लेने की कोशिश कर रहा है। यानी साफ़ शब्दों में कहा जाए तो इन दिनों अमेरिका और चीन के बीच वैश्विक व्यापार और पारस्परिक व्यापार में वर्चस्व की लड़ाई चल रही है, जिसे ट्रेड वॉर कहा जा रहा है।
लेकिन अमेरिका के साथ चल रहे ट्रेड वॉर का बड़ा असर अब चीन की अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में चीन की जीडीपी ग्रोथ रेट बीते 30 सालों के सबसे निचले स्तर पर आ चुकी है। चीनी सरकार ने तीसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़े जारी किए हैं, जिससे पता चलता है कि सुस्त घरेलू डिमाण्ड और ट्रेड वॉर के कारण चीन की अर्थव्यवस्था को एक बड़ा झटका लगा है।
बता दें कि चीन के नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के अनुसार, जुलाई-सितम्बर की तिमाही में चीन की GDP दर सिर्फ़ 6 प्रतिशत रही। इसके पहले दूसरी तिमाही में यह 6.2 प्रतिशत रही थी। चीन की GDP ग्रोथ में 0.2 प्रतिशत की इस कमी का प्रमुख कारण घरेलू बाज़ार में मांग की कमी और अमेरिका के साथ चल रहे ट्रेड वॉर को बताया जा रहा है। चीन जैसे महत्वाकांक्षी देश के लिए यह चिंता का कारण है कि साल 1992 के बाद किसी भी तिमाही में चीनी अर्थव्यवस्था की यह सबसे खराब जीडीपी ग्रोथ रेट है।
चीन के लिए जीडीपी ग्रोथ रेट में कमी एक बड़े झटके की तरह है। पिछले साल चीन की विकास दर 6.6 प्रतिशत रही थी। उस हिसाब से देखा जाए तो इस साल जुलाई-सितम्बर की तिमाही में चीन की GDP दर का सिर्फ़ 6 प्रतिशत रहना उसके लिए चिंता का कारण है। हालांकि, चीनी सरकार ने 2019 के लिए आर्थिक वृद्धि दर का लक्ष्य 6 से 6.5 प्रतिशत के बीच रखा था। लेकिन फ़िर भी तीसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट का सिर्फ़ 6 प्रतिशत पर सिमट जाना महत्वाकांक्षी चीन के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है। चीन की चिंता का एक कारण और है कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने चीन के जीडीपी ग्रोथ रेट के अनुमान को 6.2 प्रतिशत से कम कर 6.1 प्रतिशत कर दिया है।
तीसरी तिमाही के आंकड़े जारी होने के बाद कहा जा सकता है कि चीन की अर्थव्यवस्था में तीन तिमाहियों के दौरान स्थिरता देखी गई है। तीसरी तिमाही के जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े चीन के लिए एक चेतावनी है कि उसे घरेलू और वैश्विक स्तर पर गम्भीर आर्थिक हालातों के प्रति सजग रहना होगा। चीन की अर्थव्यवस्था के जानकारों के मुताबिक़, वैश्विक स्तर पर आर्थिक संकट के कारण जारी नरमी और बाहरी व्यापार में बढ़ती अनिश्चित्तता से घरेलू बाजार पर भारी दबाव है।
जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि चीन एक महत्वाकांक्षी देश है। ऐसे में कहा जा सकता है कि चीन, अमेरिकी ट्रेड वॉर से हार मानने वाला नहीं है। चीन ने अपनी अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने के लिए कई क़दम भी उठाएं हैं। घरेलू डिमाण्ड बढ़े इसके लिए चीन सरकार आम लोगों को राहत देने के लिए टैक्स में कटौती कर रही है। साथ ही शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई प्रतिबंध भी हटाए गये हैं।
इतना ही नहीं, चीन के सेंट्रल बैंक, पीपुल्स बैंक ऑफ़ चायना ने बैंकिंग सिस्टम में बैंकों को मीडियम टर्म लैण्डिंग सुविधा के ज़रिए 28 अरब डॉलर यानी कि 200 अरब युआन जारी किये हैं, जिससे बाज़ार में लिक्विडिटी को बढ़ाया जा सके। हालांकि, चीन के सेन्ट्ल बैंक की इस कोशिश का कुछ ख़ास असर देखने को नहीं मिल रहा है। वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन में लगातार 15वें महीने ऑटोमोबाइल सेल में गिरावट दर्ज की गई है। इसके अलावा शिपमेण्ट, फैक्ट्री, पावर जनरेशन, रोज़गार और मनोरंजन पर होने वाले ख़र्च में भी कमी आई है।
दरअसल, चीन की अर्थव्यवस्था, अमेरिका की शुल्क वृद्धि का सामना नहीं कर पा रही है। वहीं चीन की तकनीकीय योजनाओं को भी धक्का लगा है, जिससे चीन की जीडीपी ग्रोथ रेट प्रभावित हुई है। पूरी दुनिया में अमेरिका और चीन के ट्रेड एग्रीमेण्ट को लेकर अब भी अनिश्चितताएं बरक़रार हैं। जानकारों के मुताबिक़, 15 दिसम्बर को लागू होने वाले शुल्क, 2020 की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डालेंगे। वैसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प का कहना है कि वे चीन के साथ एग्रीमेण्ट के क़रीब हैं, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि अभी इसमें काफ़ी कसर बाक़ी है।
यानी कि साफ़ ज़ाहिर कि चीन को अमेरिका से चल रहे ट्रेड वॉर का काफ़ी ख़ामियाजा भुगतना पड़ रहा है। अब देखना होगा कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच चल रहा ट्रेड वॉर कहां पर आकर ख़त्म होता है। ऐसा नहीं है कि ट्रेड वॉर का असर सिर्फ़ चीन की अर्थव्यवस्था पर ही पड़ा है, अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी ट्रेड वॉर से नुकसान हुआ है। लेकिन इस ट्रेड वॉर से चीन की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है और 27 सालों के बाद तिमाही जीडीपी ग्रोथ रेट निचले स्तर पर आ गई है। अब देखना होगा कि आख़िर क्या कुछ उपाय बीजिंग की सरकार उठाती है, जिससे अमेरिकी से मिल रही आर्थिक चुनौती का वे सामना कर सकें और जवाब दे सकें।