जानिए क्यों प्राइवेट हो रही है एअर इण्डिया?
Monday - October 21, 2019 3:58 pm ,
Category : WTN HINDI
जल्द बिकेगी एअर इण्डिया की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी
क्या निजीकरण ही आख़िरी रास्ता है एअर इण्डिया को क़र्ज़ से उबारने का?
OCT 21 (WTN) – तो आख़िरकार अब देश की सरकारी विमानन कम्पनी एअर इण्डिया प्राइवेट होने जा रही है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि केन्द्र सरकार अगले महीने एअर इण्डिया की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए बिडिंग की योजना बना रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़, एअर इण्डिया को ख़रीदने में कुछ कम्पनियां अपनी इच्छा ज़ाहिर कर चुकी हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एअर इण्डिया पर क़रीब 58,000 करोड़ रुपये का क़र्ज़ है। इतना ही नहीं, कम्पनी के संचालन में भी हज़ारों करोड़ रुपये का घाटा हो चुका है।
वैसे कहा जा रहा है कि सालों से घाटे में चल रही एअर इण्डिया को बेचना ही केन्द्र सरकार के लिए अब मुनाफ़े का सौदा लग रहा है। यह सही है कि एअर इण्डिया घाटे में चल रही है, लेकिन कुछ कम्पनियों ने एअर इंडिया में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी ख़रीदने में रुचि दिखाई है। यह कम्पनियां अपना एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट जमा करने से पहले इसे अन्तिम रूप देने पर काम कर रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक़, एअर इण्डिया में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी ख़रीदने के लिए यह कम्पनियां इस महीने के आख़िरी में या फ़िर अगले महीने तक एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट जमा भी कर देंगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकारी क्षेत्र की विमानन कम्पनी एअर इण्डिया को बेचने के लिए बिडिंग प्रक्रिया नए तरीक़े से डेवलप किए गए ई-बिडिंग सिस्टम के ज़रिए होगी।
स्वाभाविक है कि एअर इण्डिया के निजीकरण का विरोध एअर इण्डिया के कर्मचारी और अधिकारी कर रहे हैं। इसलिए इस महीने की शुरुआत में एअर इण्डिया के मैनेजमेंट ने ट्रेड यूनियन के साथ प्रस्तावित निजीकरण को लेकर एक बैठक की थी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एअर इण्डिया के निजीकरण का ज़्यादातर यूनियनों ने विरोध किया था, क्योंकि उन्हें आशंका है कि यदि एअर इण्डिया का निजीकरण हुआ तो इससे कई लोगों की नौकरी जा सकती है।
घाटे में चल रही एअर इण्डिया की बैलेंस शीट को क्लीयर करने के उद्देश्य से स्पेशल पर्पज व्हीकल एअर इण्डिया एसेट होल्डिंग लिमिटेड के माध्यम से इंश्यूएंस बॉन्ड की मदद से क़रीब तीस हज़ार करोड़ रुपये रिपेमेंट करने की तैयारी चल रही है। जानकारी के लिए बता दें कि एअर इण्डिया एसेट होल्डिंग लिमिटेड को चार सहायक कम्पनियों की उन वर्किंग कैपिटल लोन की वेयरहाउसिंग के लिए सेटअप किया गया था, जिसके लिए कोई एसेट नहीं रखा गया है।
इन सहायक कम्पनियों के नाम हैं; एअर इण्डिया ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड, एअरलाइन अलाइड सर्विसेज लिमिटेड, एअर इण्डिया इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड और होटल कॉरपोरेशन ऑफ़ इण्डिया लिमिटेड। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कम्पनी ने बॉन्ड इश्यू के ज़रिए 16 सितम्बर के बाद से 21,985 करोड़ रुपये जुटाए हैं ताकि इसका इस्तेमाल एअर इण्डिया पर क़र्ज़ के बोझ को कम करने के लिए किया जा सके।
यानी कि साफ़ ज़ाहिर है कि निजी क्षेत्र की एअरलाइन्स से एअर इण्डिया मुक़ाबला नहीं कर सकी है। सरकार को आशा है कि निजी क्षेत्र में एअर इण्डिया की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के बाद कम्पनी में काफ़ी व्यापक सुधार होगा और कम्पनी एक बार फ़िर से मुनाफ़े कमाएगी। वैसे कहा जाए तो एअर इण्डिया का निजीकरण होना अपने आप में एक ऐतिहासिक घटना होगी।
58,000 करोड़ रुपये के क़र्ज़ वाली इस कम्पनी को एक बार फ़िर से लाभ की कम्पनी बनाना कोई आसान काम नहीं होगा। स्वाभाविक है कि निजीकरण होने के बाद कई अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने नौकरी गंवानी पड़ सकती है, लेकिन इस कम्पनी को बचाने के लिए निजीकरण के अलावा कोई अन्य तरीक़ा सरकार के पास नहीं है।
OCT 21 (WTN) – तो आख़िरकार अब देश की सरकारी विमानन कम्पनी एअर इण्डिया प्राइवेट होने जा रही है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि केन्द्र सरकार अगले महीने एअर इण्डिया की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए बिडिंग की योजना बना रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़, एअर इण्डिया को ख़रीदने में कुछ कम्पनियां अपनी इच्छा ज़ाहिर कर चुकी हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एअर इण्डिया पर क़रीब 58,000 करोड़ रुपये का क़र्ज़ है। इतना ही नहीं, कम्पनी के संचालन में भी हज़ारों करोड़ रुपये का घाटा हो चुका है।
वैसे कहा जा रहा है कि सालों से घाटे में चल रही एअर इण्डिया को बेचना ही केन्द्र सरकार के लिए अब मुनाफ़े का सौदा लग रहा है। यह सही है कि एअर इण्डिया घाटे में चल रही है, लेकिन कुछ कम्पनियों ने एअर इंडिया में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी ख़रीदने में रुचि दिखाई है। यह कम्पनियां अपना एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट जमा करने से पहले इसे अन्तिम रूप देने पर काम कर रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक़, एअर इण्डिया में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी ख़रीदने के लिए यह कम्पनियां इस महीने के आख़िरी में या फ़िर अगले महीने तक एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट जमा भी कर देंगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकारी क्षेत्र की विमानन कम्पनी एअर इण्डिया को बेचने के लिए बिडिंग प्रक्रिया नए तरीक़े से डेवलप किए गए ई-बिडिंग सिस्टम के ज़रिए होगी।
स्वाभाविक है कि एअर इण्डिया के निजीकरण का विरोध एअर इण्डिया के कर्मचारी और अधिकारी कर रहे हैं। इसलिए इस महीने की शुरुआत में एअर इण्डिया के मैनेजमेंट ने ट्रेड यूनियन के साथ प्रस्तावित निजीकरण को लेकर एक बैठक की थी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एअर इण्डिया के निजीकरण का ज़्यादातर यूनियनों ने विरोध किया था, क्योंकि उन्हें आशंका है कि यदि एअर इण्डिया का निजीकरण हुआ तो इससे कई लोगों की नौकरी जा सकती है।
घाटे में चल रही एअर इण्डिया की बैलेंस शीट को क्लीयर करने के उद्देश्य से स्पेशल पर्पज व्हीकल एअर इण्डिया एसेट होल्डिंग लिमिटेड के माध्यम से इंश्यूएंस बॉन्ड की मदद से क़रीब तीस हज़ार करोड़ रुपये रिपेमेंट करने की तैयारी चल रही है। जानकारी के लिए बता दें कि एअर इण्डिया एसेट होल्डिंग लिमिटेड को चार सहायक कम्पनियों की उन वर्किंग कैपिटल लोन की वेयरहाउसिंग के लिए सेटअप किया गया था, जिसके लिए कोई एसेट नहीं रखा गया है।
इन सहायक कम्पनियों के नाम हैं; एअर इण्डिया ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड, एअरलाइन अलाइड सर्विसेज लिमिटेड, एअर इण्डिया इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड और होटल कॉरपोरेशन ऑफ़ इण्डिया लिमिटेड। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कम्पनी ने बॉन्ड इश्यू के ज़रिए 16 सितम्बर के बाद से 21,985 करोड़ रुपये जुटाए हैं ताकि इसका इस्तेमाल एअर इण्डिया पर क़र्ज़ के बोझ को कम करने के लिए किया जा सके।
यानी कि साफ़ ज़ाहिर है कि निजी क्षेत्र की एअरलाइन्स से एअर इण्डिया मुक़ाबला नहीं कर सकी है। सरकार को आशा है कि निजी क्षेत्र में एअर इण्डिया की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के बाद कम्पनी में काफ़ी व्यापक सुधार होगा और कम्पनी एक बार फ़िर से मुनाफ़े कमाएगी। वैसे कहा जाए तो एअर इण्डिया का निजीकरण होना अपने आप में एक ऐतिहासिक घटना होगी।
58,000 करोड़ रुपये के क़र्ज़ वाली इस कम्पनी को एक बार फ़िर से लाभ की कम्पनी बनाना कोई आसान काम नहीं होगा। स्वाभाविक है कि निजीकरण होने के बाद कई अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने नौकरी गंवानी पड़ सकती है, लेकिन इस कम्पनी को बचाने के लिए निजीकरण के अलावा कोई अन्य तरीक़ा सरकार के पास नहीं है।