कश्मीर पर चीन की दोहरी चाल!
Wednesday - October 23, 2019 10:40 am ,
Category : WTN HINDI
भारत को कश्मीर मुद्दे पर नाराज़ नहीं करना चाहेगा चीन
कश्मीर पर चीन दिखा रहा चालबाज़ी
OCT 23 (WTN) – विस्तारवादी मानसिकता वाला देश चीन हमेशा से ही भारत के लिए एक अविश्वनीय पड़ोसी रहा है। 1962 में युद्ध से लेकर डोकलाम विवाद तक, चीन ने हमेशा ही भारत के साथ विश्वासघात किया है। दरअसल, चीन एशिया की एकमात्र शक्ति बनना चाहता है लेकिन चीन की इस मंशा का सबसे बड़ा रोड़ा भारत ही है। हालांकि, सामरिक और आर्थिक मोर्चे पर भारत, चीन से काफ़ी पीछे है लेकिन फ़िर भी चीन एशिया का सर्वेसर्वा बनने में भारत को एक बाधा मानता है।
चीन की हमेशा से ही कूटनीति रही है कि वो पाकिस्तान के बहाने भारत को परेशान करता रहे। चीन की इसी कूटनीति का फ़ायदा पाकिस्तान उठाता रहता है और चीन से आर्थिक और सैन्य मदद हासिल करता रहता है। चीन जानता है कि भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों के बीच कश्मीर एक बेहद ही संवेदनशील मुद्दा है। कश्मीर का मामला दोनों देशों के लिए इतना महत्वपूर्ण है कि इस पर छिड़ी लड़ाई से दोनों देशों के बीच परमाणु युद्ध तक हो सकता है।
भारत और पाकिस्तान के बीच सालों से जारी कश्मीर विवाद के मामले में चीन वैसे तो हमेशा से ही पाकिस्तान का साथ देता रहा है। हाल ही में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने चीन का दौरा किया था और इस दौरान कश्मीर मुद्दे पर चीन ने बयान जारी कर पाकिस्तान का समर्थन किया था। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कश्मीर के कुछ हिस्से पर बीजिंग भी अपना दावा पेश करता है।
भारत सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर राज्य से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद, पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर समर्थन के लिए पूरी दुनिया से गुहार लगाई थी लेकिन चीन, तुर्की और मलेशिया को छोड़कर किसी अन्य देश ने पाकिस्तान का इस मुद्दे पर साथ नहीं दिया। वैसे भारत हमेशा से कहता आया है कि कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है और चीन समेत किसी अन्य देश को इससे दूर ही रहना चाहिए।
लेकिन चीन के सामने कश्मीर मुद्दा एक बड़ा ही पेंचीदा मामला है। दरअसल, भारत को कूटनीतिक रूप से घेरने के लिए चीन कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का साथ देता रहता है। इसी के चलते इमरान ख़ान के चीन दौरे पर चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ने कहा था, “चीन पाकिस्तान के वैध अधिकारों और हितों की सुरक्षा का समर्थन करता है और उसे उम्मीद है कि सम्बन्धित पक्ष शान्तिपूर्वक ‘वार्ता’ से विवाद सुलझा सकेंगे।”
वहीं चीन-पाकिस्तान के साझा बयान में कहा गया था कि कश्मीर विवाद को यूएन चार्टर, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्पों और द्विपक्षीय समझौतों के तहत शान्तिपूर्वक और उचित ढंग से सुलझाया जाए। भारत के आंतरिक मामले में चीन की इस तरह की टिप्पणी से नाराज़ भारत ने तुरन्त ही साफ़ कर दिया था और कहा था, “नई दिल्ली का पक्ष स्पष्ट है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और चीन हमारी स्थिति को भलीभांति जानता है। भारत के आन्तरिक मामलों में दूसरे देश टिप्पणी ना करें।”
दरअसल, चीन एक सोची समझी रणनीति के तहत कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का साथ देता आया है। लेकिन यदि आप सोच रहे हैं कि कश्मीर मुद्दे पर चीन केवल पाकिस्तान की वजह से दिलचस्पी दिखा रहा है तो आपका सोचना ग़लत है। दरअसल, चीन का कश्मीर के एक बड़े हिस्से अक्साई चिन पर कब्जा है, जो लद्दाख के ठीक पूर्व में स्थित है। अनुच्छेद 370 हटने और लद्दाख के केन्द्र शासित प्रदेश बनने के बाद लद्दाख पर अब सीधे तौर पर केन्द्र सरकार का शासन होगा। यही वो कारण है जिसके कारण चीन, कश्मीर मुद्दे पर इतनी बयानबाजी कर रहा है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फ़िलहाल चीन और पाकिस्तान का कारोबार कराकोरम हाईवे से होता है, जो पश्चिमी कश्मीर क्षेत्र में चीन और पाकिस्तान को जोड़ता है। अरबों डॉलर की लागत से बने चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (CPEC) के तहत इस सड़क को कई लेन वाले हाईवे में विकसित किया जा रहा है, जिससे पूरे साल इस रास्ते से व्यापार हो सके।
साफ़ ज़ाहिर है कि कश्मीर के इस क्षेत्र में चीन के आर्थिक हित जुड़े हुए हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि चीन और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक, सैन्य और आर्थिक सम्बन्ध हैं। चीन ने सीपीईसी में भी करोड़ों डॉलर्स का निवेश किया है। ऐसे में खुद का आर्थिक हित देखते हुए चीन कश्मीद मुद्दे पर पाकिस्तान का साथ देता रहता है।
हालांकि, चीन में वैसे तो साम्यवादी शासन व्यवस्था है लेकिन चीन के नेता अब पूंजीवादी विचारधारा से अपनी कूटनीति तैयार करते हैं। वैसे तो पाकिस्तान हमेशा से ही चीन का दोस्त रहा है, लेकिन भारत जैसे विशाल उपभोक्ताओं वाले बाज़ार को चीन भूलकर भी नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता है। भारत के विशाल बाज़ार को देखते हुए ही चीन समय-समय पर कहता आया है कि भारत और चीन को आपसी मतभेदों को दूर करते हुए तमाम क्षेत्रों में आगे बढ़ते रहना चाहिए। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि भारत और चीन के बीच क़रीब 90 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार होता है, जिसे चीन कभी भी खोना नहीं चाहेगा।
दरअसल, कश्मीर पर चीन की तरफ से आ रही मिली-जुली प्रतिक्रिया उसकी कूटनीति का ही हिस्सा है। उपभोक्तावादी संस्कृति में अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध वास्तविकता से जुड़े होते हैं। चीन जानता है कि उसका भारत के साथ सीमा विवाद है और कई अन्य मुद्दों को लेकर भी उसकी भारत के बीच असहमति है। लेकिन इतना सब होने के बाद भी भारत और चीन के बीच व्यापार तेज़ी से बढ़ रहा है। आज की तारीख़ में भारत और चीन के बीच कई मुद्दों को लेकर विवाद है, लेकिन यह विवाद ऐसा नहीं है जिससे पूरी दुनिया परेशान हो।
साफ़ ज़ाहिर है की चीन एक चालाक देश है। भारत को परेशान करने और घेरने की रणनीति के तहत चीन कई मुद्दों पर पाकिस्तान का साथ देता रहा है ताकि भारत को इससे परेशानी हो। लेकिन वहीं चीन, भारत को नाराज़ करने की भूल भी नहीं करना चाहता है। चीन जानता है कि पाकिस्तान की तुलना में भारत से उसे ज़्यादा आर्थिक फ़ायदा है।
इन्हीं सब कारणों से चीन कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन करता ज़रूर है, लेकिन चीन कश्मीर मुद्दे पर भारत को नाराज़ भी नहीं करना चाहता है, क्योंकि यदि वो ऐसा करता है तो उसे भारत के बड़े बाज़ार से हाथ धोना पड़ सकता है। इसलिए चीन कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों को साधने की कोशिश में है।
OCT 23 (WTN) – विस्तारवादी मानसिकता वाला देश चीन हमेशा से ही भारत के लिए एक अविश्वनीय पड़ोसी रहा है। 1962 में युद्ध से लेकर डोकलाम विवाद तक, चीन ने हमेशा ही भारत के साथ विश्वासघात किया है। दरअसल, चीन एशिया की एकमात्र शक्ति बनना चाहता है लेकिन चीन की इस मंशा का सबसे बड़ा रोड़ा भारत ही है। हालांकि, सामरिक और आर्थिक मोर्चे पर भारत, चीन से काफ़ी पीछे है लेकिन फ़िर भी चीन एशिया का सर्वेसर्वा बनने में भारत को एक बाधा मानता है।
चीन की हमेशा से ही कूटनीति रही है कि वो पाकिस्तान के बहाने भारत को परेशान करता रहे। चीन की इसी कूटनीति का फ़ायदा पाकिस्तान उठाता रहता है और चीन से आर्थिक और सैन्य मदद हासिल करता रहता है। चीन जानता है कि भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों के बीच कश्मीर एक बेहद ही संवेदनशील मुद्दा है। कश्मीर का मामला दोनों देशों के लिए इतना महत्वपूर्ण है कि इस पर छिड़ी लड़ाई से दोनों देशों के बीच परमाणु युद्ध तक हो सकता है।
भारत और पाकिस्तान के बीच सालों से जारी कश्मीर विवाद के मामले में चीन वैसे तो हमेशा से ही पाकिस्तान का साथ देता रहा है। हाल ही में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने चीन का दौरा किया था और इस दौरान कश्मीर मुद्दे पर चीन ने बयान जारी कर पाकिस्तान का समर्थन किया था। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कश्मीर के कुछ हिस्से पर बीजिंग भी अपना दावा पेश करता है।
भारत सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर राज्य से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद, पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर समर्थन के लिए पूरी दुनिया से गुहार लगाई थी लेकिन चीन, तुर्की और मलेशिया को छोड़कर किसी अन्य देश ने पाकिस्तान का इस मुद्दे पर साथ नहीं दिया। वैसे भारत हमेशा से कहता आया है कि कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है और चीन समेत किसी अन्य देश को इससे दूर ही रहना चाहिए।
लेकिन चीन के सामने कश्मीर मुद्दा एक बड़ा ही पेंचीदा मामला है। दरअसल, भारत को कूटनीतिक रूप से घेरने के लिए चीन कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का साथ देता रहता है। इसी के चलते इमरान ख़ान के चीन दौरे पर चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ने कहा था, “चीन पाकिस्तान के वैध अधिकारों और हितों की सुरक्षा का समर्थन करता है और उसे उम्मीद है कि सम्बन्धित पक्ष शान्तिपूर्वक ‘वार्ता’ से विवाद सुलझा सकेंगे।”
वहीं चीन-पाकिस्तान के साझा बयान में कहा गया था कि कश्मीर विवाद को यूएन चार्टर, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्पों और द्विपक्षीय समझौतों के तहत शान्तिपूर्वक और उचित ढंग से सुलझाया जाए। भारत के आंतरिक मामले में चीन की इस तरह की टिप्पणी से नाराज़ भारत ने तुरन्त ही साफ़ कर दिया था और कहा था, “नई दिल्ली का पक्ष स्पष्ट है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और चीन हमारी स्थिति को भलीभांति जानता है। भारत के आन्तरिक मामलों में दूसरे देश टिप्पणी ना करें।”
दरअसल, चीन एक सोची समझी रणनीति के तहत कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का साथ देता आया है। लेकिन यदि आप सोच रहे हैं कि कश्मीर मुद्दे पर चीन केवल पाकिस्तान की वजह से दिलचस्पी दिखा रहा है तो आपका सोचना ग़लत है। दरअसल, चीन का कश्मीर के एक बड़े हिस्से अक्साई चिन पर कब्जा है, जो लद्दाख के ठीक पूर्व में स्थित है। अनुच्छेद 370 हटने और लद्दाख के केन्द्र शासित प्रदेश बनने के बाद लद्दाख पर अब सीधे तौर पर केन्द्र सरकार का शासन होगा। यही वो कारण है जिसके कारण चीन, कश्मीर मुद्दे पर इतनी बयानबाजी कर रहा है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फ़िलहाल चीन और पाकिस्तान का कारोबार कराकोरम हाईवे से होता है, जो पश्चिमी कश्मीर क्षेत्र में चीन और पाकिस्तान को जोड़ता है। अरबों डॉलर की लागत से बने चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (CPEC) के तहत इस सड़क को कई लेन वाले हाईवे में विकसित किया जा रहा है, जिससे पूरे साल इस रास्ते से व्यापार हो सके।
साफ़ ज़ाहिर है कि कश्मीर के इस क्षेत्र में चीन के आर्थिक हित जुड़े हुए हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि चीन और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक, सैन्य और आर्थिक सम्बन्ध हैं। चीन ने सीपीईसी में भी करोड़ों डॉलर्स का निवेश किया है। ऐसे में खुद का आर्थिक हित देखते हुए चीन कश्मीद मुद्दे पर पाकिस्तान का साथ देता रहता है।
हालांकि, चीन में वैसे तो साम्यवादी शासन व्यवस्था है लेकिन चीन के नेता अब पूंजीवादी विचारधारा से अपनी कूटनीति तैयार करते हैं। वैसे तो पाकिस्तान हमेशा से ही चीन का दोस्त रहा है, लेकिन भारत जैसे विशाल उपभोक्ताओं वाले बाज़ार को चीन भूलकर भी नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता है। भारत के विशाल बाज़ार को देखते हुए ही चीन समय-समय पर कहता आया है कि भारत और चीन को आपसी मतभेदों को दूर करते हुए तमाम क्षेत्रों में आगे बढ़ते रहना चाहिए। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि भारत और चीन के बीच क़रीब 90 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार होता है, जिसे चीन कभी भी खोना नहीं चाहेगा।
दरअसल, कश्मीर पर चीन की तरफ से आ रही मिली-जुली प्रतिक्रिया उसकी कूटनीति का ही हिस्सा है। उपभोक्तावादी संस्कृति में अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध वास्तविकता से जुड़े होते हैं। चीन जानता है कि उसका भारत के साथ सीमा विवाद है और कई अन्य मुद्दों को लेकर भी उसकी भारत के बीच असहमति है। लेकिन इतना सब होने के बाद भी भारत और चीन के बीच व्यापार तेज़ी से बढ़ रहा है। आज की तारीख़ में भारत और चीन के बीच कई मुद्दों को लेकर विवाद है, लेकिन यह विवाद ऐसा नहीं है जिससे पूरी दुनिया परेशान हो।
साफ़ ज़ाहिर है की चीन एक चालाक देश है। भारत को परेशान करने और घेरने की रणनीति के तहत चीन कई मुद्दों पर पाकिस्तान का साथ देता रहा है ताकि भारत को इससे परेशानी हो। लेकिन वहीं चीन, भारत को नाराज़ करने की भूल भी नहीं करना चाहता है। चीन जानता है कि पाकिस्तान की तुलना में भारत से उसे ज़्यादा आर्थिक फ़ायदा है।
इन्हीं सब कारणों से चीन कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन करता ज़रूर है, लेकिन चीन कश्मीर मुद्दे पर भारत को नाराज़ भी नहीं करना चाहता है, क्योंकि यदि वो ऐसा करता है तो उसे भारत के बड़े बाज़ार से हाथ धोना पड़ सकता है। इसलिए चीन कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों को साधने की कोशिश में है।