सावधान! यदि ‘इन’ पटाखों का किया इस्तेमाल तो हो सकती है सज़ा
Wednesday - October 23, 2019 1:02 pm ,
Category : WTN HINDI
इस दिवाली पर चलाएं सिर्फ़ ग्रीन पटाखे
हानिकारक चाइनीज पटाखों के इस्तेमाल पर जाना पड़ सकता है जेल
OCT 23 (WTN) – दिवाली पर पटाखों का इस्तेमाल भारत में सालों से एक आम परम्परा रही है। दिवाली त्यौहार के पांचों दिन पूरे भारत में पटाखों की गूंज सुनाई देती है। अब जबकि दिवाली आने को ही है, तो ऐसे में पूरे देश में पटाखों की बिक्री ज़ोरों पर हैं। लेकिन यदि आप इस बार दिवाली में चाइनीज पटाखों को फोड़ने की तैयारी में हैं तो ज़रा सावधान रहिये, क्योंकि यदि आपने चाइनीज पटाखे चलाए तो आपको सज़ा तक हो सकती है! यह पढ़कर आप सोच रहे होंगे कि आख़िर यह पूरा मामला है क्या, तो आइये आपको इस बारे में विस्तार से बताते हैं।
दरअसल, केन्द्र सरकार ने दिवाली पर पटाखों की बिक्री और उनके इस्तेमाल को देखते हुए चाइनीज पटाखों पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है। इस बैन के लिए कस्टम विभाग के प्रिंसिपल कमिश्नर ने बाक़ायदा इस सम्बन्ध में एक नोटिस जारी किया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जारी किये गये नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि चाइनीज पटाखों के आयात पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। अगर कोई व्यक्ति चाइनीज पटाखों को रखता है, बेचता है या फ़िर किसी तरह से इसकी डीलिंग करता है तो यह एक अपराध होगा और उस व्यक्ति को कस्टम एक्ट 1962 के तहत दण्डित किया जाएगा।
आप यह पढ़कर सोच रहे होंगे कि आख़िर सरकार ने चाइनीज पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर प्रतिबन्ध क्यों लगाया है? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में चाइनीज पटाखों का आयात प्रतिबन्धित है। सरकार की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि चाइनीज पटाखों का आयात और भारतीय बाज़ार में इनका इस्तेमाल चिंता का विषय है। यानी कि साफ़ है कि यदि किसी व्यक्ति के पास चाइनीज पटाखें पाए जाते हैं उसके ख़िलाफ़ दण्डात्मक कार्रवाई की जा सकती है, क्योंकि भारत में चाइनीज पटाखों का आयात प्रतिबन्धित है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में चाइनीज पटाखों का इस्तेमाल सरकार के एक्सप्लोजिव रूल्स 2008 (Explosive Rules 2008) के ख़िलाफ़ है। चूंकि चाइनीज पटाखों में लेड, कॉपर, ऑक्साइड और लीथियम जैसे प्रतिबन्धित कैमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए ये पटाखे इंसानों के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी हानिकारक हैं। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने चाइनीज पटाखों पर प्रतिबन्ध लगाया है। लोग चाइनीज पटाखे ना ख़रीदें, इसके लिए सरकार ने सलाह दी है कि वे पटाखे ख़रीदते समय पटाखों की लेबलिंग डिटेल्स देखें।
वहीं पटाखों के हानिकारण कैमिकल्स से लोगों को निजात दिलाने के लिए इस साल केन्द्र सरकार ने ग्रीन पटाखे जारी किये हैं। इन ग्रीन पटाखों में अनार, पेंसिल, चकरी, फुलझड़ी और सुतली बम शामिल हैं। ग्रीन पटाखों के बारे में सरकार का दावा है कि सामान्य पटाखों की तुलना में ग्रीन पटाखों से 30 से 50 प्रतिशत कम प्रदूषण होता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने साल 2018 में दिल्ली-एनसीआर में पटाखों के इस्तेमाल पर प्रतिबन्ध लगा दिया था। पटाखों के इस्तेमाल पर प्रतिबन्ध लगने के बाद त्यौहारों और उत्सवों पर पटाखों के इस्तेमाल के लिए ग्रीन पटाखों के कॉन्सेप्ट पर विचार किया गया। ग्रीन पटाखों को बनाने में वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जानकारी के मुताबिक़, पटाखों से प्रदूषण कम हो और ग्रीन पटाखों का उत्पादन बढ़े इसके लिए पटाखा कम्पनियों ने क़रीब 230 सहमति-पत्रों और 165 नॉन डिसक्लोजर एग्रीमेंट्स पर हस्ताक्षर किए हैं।
अब आप सोच रहे होंगे कि आख़िर यह ग्रीन पटाखे होते क्या हैं, तो आइये आपको ग्रीन पटाखों के बारे में विस्तार से बताते हैं। सबसे पहले तो आप यह समझ लें कि किसी भी तरह के पटाखों को पूरी तरह से प्रदूषण रहित नहीं बनाया जा सकता है, लेकिन ऐसे पटाखे बनाए जा सकते हैं जो कि कम प्रदूषण फैलाएं। इसलिए काउंसिल ऑफ़ साइंटिफिक एण्ड इंडस्ट्रियल रिसर्च के वैज्ञानिकों ने पटाखों का ऐसा फॉर्म्युला तैयार किया है, जिसे ग्रीन पटाखों की कैटिगरी में रखा जा सकता है, क्योंकि यह पटाखे आम पटाखों की तुलना में 30 से 50 प्रतिशत कम प्रदूषण फैलाते हैं।
ग्रीन पटाखे दिखने, जलने और आवाज़ करने में सामान्य पटाखों की तरह ही होते हैं। फ़िलहाल बाज़ार में तीन तरह के ग्रीन पटाखे उपलब्ध हैं। पहली तरह के ग्रीन पटाखे जलने के साथ ही पानी पैदा करते हैं, जिससे सल्फर और नाइट्रोजन जैसी हानिकारक गैसें इन्हीं में घुल जाती हैं। इन्हें सेफ वाटर रिलीजर भी कहा जाता है।
दूसरी तरह के ग्रीन पटाखों को स्टार क्रैकर के नाम से जाना जाता है। यह पटाखे सामान्य पटाखों की तुलना में कम सल्फर और नाइट्रोजन पैदा करते हैं वहीं इनमें एल्यूमिनियम का इस्तेमाल कम से कम किया जाता है। इस कैटेगिरी के पटाखे भी कम प्रदूषण करते हैं। वहीं तीसरी तरह के ग्रीन पटाखे अरोमा क्रैकर्स हैं, जो कि कम प्रदूषण फैलाते हैं और खुशबू भी पैदा करते हैं।
तो यदि आप इस दिवाली पर चाइनीज पटाखे फोड़ने की तैयारी में हैं तो जरा सावधान रहें, क्योंकि देश में चाइनीज फटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर प्रतिबन्ध है। और यदि आप चाइनीज पटाखे बेचते या फ़िर फोड़ते पाए गये तो आपको सज़ा तक हो सकती है। तो हमारी आपको सलाह है कि इस दिवाली पर ग्रीन पटाखों का ही इस्तेमाल करें, जो कि इंसानों और पर्यावरण के लिए कम हानिकारक हैं और सामान्य पटाखों की तुलना में कम प्रदूषण फैलाते हैं।
OCT 23 (WTN) – दिवाली पर पटाखों का इस्तेमाल भारत में सालों से एक आम परम्परा रही है। दिवाली त्यौहार के पांचों दिन पूरे भारत में पटाखों की गूंज सुनाई देती है। अब जबकि दिवाली आने को ही है, तो ऐसे में पूरे देश में पटाखों की बिक्री ज़ोरों पर हैं। लेकिन यदि आप इस बार दिवाली में चाइनीज पटाखों को फोड़ने की तैयारी में हैं तो ज़रा सावधान रहिये, क्योंकि यदि आपने चाइनीज पटाखे चलाए तो आपको सज़ा तक हो सकती है! यह पढ़कर आप सोच रहे होंगे कि आख़िर यह पूरा मामला है क्या, तो आइये आपको इस बारे में विस्तार से बताते हैं।
दरअसल, केन्द्र सरकार ने दिवाली पर पटाखों की बिक्री और उनके इस्तेमाल को देखते हुए चाइनीज पटाखों पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है। इस बैन के लिए कस्टम विभाग के प्रिंसिपल कमिश्नर ने बाक़ायदा इस सम्बन्ध में एक नोटिस जारी किया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जारी किये गये नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि चाइनीज पटाखों के आयात पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। अगर कोई व्यक्ति चाइनीज पटाखों को रखता है, बेचता है या फ़िर किसी तरह से इसकी डीलिंग करता है तो यह एक अपराध होगा और उस व्यक्ति को कस्टम एक्ट 1962 के तहत दण्डित किया जाएगा।
आप यह पढ़कर सोच रहे होंगे कि आख़िर सरकार ने चाइनीज पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर प्रतिबन्ध क्यों लगाया है? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में चाइनीज पटाखों का आयात प्रतिबन्धित है। सरकार की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि चाइनीज पटाखों का आयात और भारतीय बाज़ार में इनका इस्तेमाल चिंता का विषय है। यानी कि साफ़ है कि यदि किसी व्यक्ति के पास चाइनीज पटाखें पाए जाते हैं उसके ख़िलाफ़ दण्डात्मक कार्रवाई की जा सकती है, क्योंकि भारत में चाइनीज पटाखों का आयात प्रतिबन्धित है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में चाइनीज पटाखों का इस्तेमाल सरकार के एक्सप्लोजिव रूल्स 2008 (Explosive Rules 2008) के ख़िलाफ़ है। चूंकि चाइनीज पटाखों में लेड, कॉपर, ऑक्साइड और लीथियम जैसे प्रतिबन्धित कैमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए ये पटाखे इंसानों के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी हानिकारक हैं। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने चाइनीज पटाखों पर प्रतिबन्ध लगाया है। लोग चाइनीज पटाखे ना ख़रीदें, इसके लिए सरकार ने सलाह दी है कि वे पटाखे ख़रीदते समय पटाखों की लेबलिंग डिटेल्स देखें।
वहीं पटाखों के हानिकारण कैमिकल्स से लोगों को निजात दिलाने के लिए इस साल केन्द्र सरकार ने ग्रीन पटाखे जारी किये हैं। इन ग्रीन पटाखों में अनार, पेंसिल, चकरी, फुलझड़ी और सुतली बम शामिल हैं। ग्रीन पटाखों के बारे में सरकार का दावा है कि सामान्य पटाखों की तुलना में ग्रीन पटाखों से 30 से 50 प्रतिशत कम प्रदूषण होता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने साल 2018 में दिल्ली-एनसीआर में पटाखों के इस्तेमाल पर प्रतिबन्ध लगा दिया था। पटाखों के इस्तेमाल पर प्रतिबन्ध लगने के बाद त्यौहारों और उत्सवों पर पटाखों के इस्तेमाल के लिए ग्रीन पटाखों के कॉन्सेप्ट पर विचार किया गया। ग्रीन पटाखों को बनाने में वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जानकारी के मुताबिक़, पटाखों से प्रदूषण कम हो और ग्रीन पटाखों का उत्पादन बढ़े इसके लिए पटाखा कम्पनियों ने क़रीब 230 सहमति-पत्रों और 165 नॉन डिसक्लोजर एग्रीमेंट्स पर हस्ताक्षर किए हैं।
अब आप सोच रहे होंगे कि आख़िर यह ग्रीन पटाखे होते क्या हैं, तो आइये आपको ग्रीन पटाखों के बारे में विस्तार से बताते हैं। सबसे पहले तो आप यह समझ लें कि किसी भी तरह के पटाखों को पूरी तरह से प्रदूषण रहित नहीं बनाया जा सकता है, लेकिन ऐसे पटाखे बनाए जा सकते हैं जो कि कम प्रदूषण फैलाएं। इसलिए काउंसिल ऑफ़ साइंटिफिक एण्ड इंडस्ट्रियल रिसर्च के वैज्ञानिकों ने पटाखों का ऐसा फॉर्म्युला तैयार किया है, जिसे ग्रीन पटाखों की कैटिगरी में रखा जा सकता है, क्योंकि यह पटाखे आम पटाखों की तुलना में 30 से 50 प्रतिशत कम प्रदूषण फैलाते हैं।
ग्रीन पटाखे दिखने, जलने और आवाज़ करने में सामान्य पटाखों की तरह ही होते हैं। फ़िलहाल बाज़ार में तीन तरह के ग्रीन पटाखे उपलब्ध हैं। पहली तरह के ग्रीन पटाखे जलने के साथ ही पानी पैदा करते हैं, जिससे सल्फर और नाइट्रोजन जैसी हानिकारक गैसें इन्हीं में घुल जाती हैं। इन्हें सेफ वाटर रिलीजर भी कहा जाता है।
दूसरी तरह के ग्रीन पटाखों को स्टार क्रैकर के नाम से जाना जाता है। यह पटाखे सामान्य पटाखों की तुलना में कम सल्फर और नाइट्रोजन पैदा करते हैं वहीं इनमें एल्यूमिनियम का इस्तेमाल कम से कम किया जाता है। इस कैटेगिरी के पटाखे भी कम प्रदूषण करते हैं। वहीं तीसरी तरह के ग्रीन पटाखे अरोमा क्रैकर्स हैं, जो कि कम प्रदूषण फैलाते हैं और खुशबू भी पैदा करते हैं।
तो यदि आप इस दिवाली पर चाइनीज पटाखे फोड़ने की तैयारी में हैं तो जरा सावधान रहें, क्योंकि देश में चाइनीज फटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर प्रतिबन्ध है। और यदि आप चाइनीज पटाखे बेचते या फ़िर फोड़ते पाए गये तो आपको सज़ा तक हो सकती है। तो हमारी आपको सलाह है कि इस दिवाली पर ग्रीन पटाखों का ही इस्तेमाल करें, जो कि इंसानों और पर्यावरण के लिए कम हानिकारक हैं और सामान्य पटाखों की तुलना में कम प्रदूषण फैलाते हैं।