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अब अपने ही घर में घिरे इमरान ख़ान!

Wednesday - October 23, 2019 3:48 pm , Category : WTN HINDI
विपक्षी पार्टियों ने इमरान ख़ान के ख़िलाफ़ खोला मोर्चा
विपक्षी पार्टियों ने इमरान ख़ान के ख़िलाफ़ खोला मोर्चा

कश्मीर मुद्दे के सहारे विपक्ष की आवाज़ दबाने की कोशिश करते इमरान ख़ान

OCT 23 (WTN) – पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान पेशे से एक क्रिकेटर रहे हैं। 1992 में पाकिस्तान को अपनी कप्तानी में क्रिकेट विश्व कप जिताने वाले इमरान ख़ान पाकिस्तान में हीरो बने गये थे। क्रिकेट से संन्यास के बाद इमरान ख़ान ने पाकिस्तान की राजनीति में अपनी किस्मत आजमाई। सालों की मेहनत के बाद आख़िरकार इमरान ख़ान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनने में सफ़ल रहे।

लेकिन क्रिकेट और राजनीति में बहुत बड़ा अन्तर है। जहां इमरान ख़ान एक क्रिकेटर के रूप में अपनी तेज़ गेन्दबाज़ी से बल्लेबाज़ों में ख़ौफ़ पैदा कर देते थे, आज वही इमरान ख़ान राजनीति में आने के बाद खुद को बुरी तरह से घिरा पा रहे हैं।
 
दरअसल, पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियां इमरान ख़ान को ‘इलेक्टेड’ नहीं ‘सेलेक्टेड’ प्रधानमंत्री मानती हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि कहा जाता है कि इमरान ख़ान को पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनाने में पाकिस्तान की सेना का बड़ा हाथ है। दरअसल, पाकिस्तान की सेना एक ऐसे राजनेता को पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बना देखना चाहती थी, जो कि उनके (सेना) इशारों पर काम करे। इसलिए पाकिस्तान की सेना ने चुनाव को मैनेज कर इमरान ख़ान को प्रधानमंत्री बनवा दिया। और जैसा कि आप जानते हैं कि पाकिस्तान में लोकतंत्र सिर्फ़ दुनिया को दिखाने के लिए है बाक़ी पाकिस्तान में विदेश नीति से लेकर आन्तरिक नीति के फ़ैसले वहां की सेना ही लेती है।
 
अपने एक साल के कार्यकाल में इमरान ख़ान पाकिस्तान की सेना की कठपुतली और एक बेहद ही असफ़ल प्रधानमंत्री साबित हुए हैं। एक तरफ़ जहां पाकिस्तान की आर्थिक हालत पिछले एक साल में बद से बदतर हो चुकी है, वहीं पाकिस्तान को कश्मीर मुद्दे पर भारत से हर मोर्चे पर हार का सामना करना पड़ा है।

बात करें पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की तो पाकिस्तान में महंगाई ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है, वहीं पाकिस्तान पर विदेशी क़र्ज़ भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। निर्यात ना के बराबर रह गया है तो वहीं विदेशी मुद्रा भण्डार भी रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है।
 
इमरान ख़ान की इन तमाम तरह की असफ़लताओं के बीच, अब उनके ख़िलाफ़ विपक्षी पार्टियों एकजुट होने लगी हैं। पाकिस्तान की सबसे बड़ी धार्मिक पार्टी और सुन्नी कट्टरपंथी दल जमिअत उलेमा-ए-इस्लाम (जेयूआई-एफ) के चीफ़ मौलाना फ़जलुर रहमान ने इमरान ख़ान के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है। जानकारी के मुताबिक, मौलाना फ़जलुर रहमान के नेतृत्व में इमरान ख़ान के ख़िलाफ़ पाकिस्तान में अलग-अलग हिस्सों में आज़ादी मार्च निकालने की तैयारी है।

दरअसल, मौलाना फ़जलुर रहमान ने मांग की है कि इमरान ख़ान की 'सेलेक्टेड सरकार' को इस्तीफ़ा देना चाहिए और पाकिस्तान में फ़िर से चुनाव होना चाहिए। मौलाना फ़जलुर रहमान के विरोध प्रदर्शन से इमरान ख़ान की परेशानी बढ़ सकती है, क्योंकि कहा जा रहा है कि इमरान ख़ान की सरकार के विरोध में मौलाना फ़जलुर रहमान के नेतृत्व में होने जा रहे प्रदर्शन और आंदोलन में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ (पीएमएल-एन) और पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) भी शामिल हैं।

इमरान ख़ान के प्रधानमंत्री बनने पर तंज कसते हुए मौलाना फ़जलुर का कहना है कि पिछले साल चुनाव के नतीजों को इमरान खान के हक़ में मोड़ा गया था। मौलाना ने इमरान ख़ान सरकार पर आरोप लगाए हैं और कहा है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बद से बदतर होती जा रही है और महंगाई ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। आधुनिक देश मज़बूत और स्थिर अर्थव्यवस्था के ज़रिए अपनी सम्प्रभुता बनाकर रखते हैं, लेकिन इमरान ख़ान सरकार ने सब कुछ दांव पर लगा दिया है।
 
इधर,  पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) के चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी भी इमरान ख़ान पर जमकर हमला कर रहे हैं। बिलावल भुट्टो ने इमरान ख़ान पर निशाना साधते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ही पाकिस्तान की सबसे बड़ी समस्या हैं और उनके इस्तीफ़े से देश की सारी समस्याएं सुलझ जाएंगी।

जेयूआई-एफ के आज़ादी मार्च का समर्थन करते हुए बिलावल भुट्टो ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज़ादी मार्च पर इस्लामाबाद में कई तरह की पाबंदियां लगा दी गई हैं। इमरान ख़ान पर लोकतंत्र विरोधी आरोप लगाते हुए बिलावल भुट्टों ने कहा कि जांच एजेंसियों और न्यायपालिका को अपने विरोधियों के दमन के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

कश्मीर मुद्दे पर भारत से मुंह की खाए इमरान ख़ान, मौलाना फ़जलुर रहमान और विपक्षी दलों के विरोध-प्रदर्शनों से घबरा गए हैं। अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए इमरान ख़ान ने विपक्षी दलों पर हमला करते हुए कहा, “जो लोग पाकिस्तान को आर्थिक मोर्चे पर सफ़ल होते नहीं देखना चाहते हैं, वे देश के ख़िलाफ़ साजिश रच रहे हैं।”

लगभग हर मोर्चे पर असफ़ल प्रधानमंत्री साबित हो चुके इमरान ख़ान ने अब विपक्षी आंदोलन को दबाने के लिए कश्मीर राग अलापना शुरू कर दिया है। आज़ादी मार्च को कश्मीर से जोड़ते हुए इमरान ख़ान का कहना है, “शान्तिपूर्ण और राजनीतिक प्रदर्शन सभी दलों का संवैधानिक हक़ है लेकिन वह विपक्ष के प्रदर्शनों की वजह से कश्मीर मुद्दे की लड़ाई पर कोई आंच नहीं आने देंगे।”

साफ़ ज़ाहिर है कि इमरान ख़ान के प्रधानमंत्री रहते पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था दिवालिया होने की कगार पर आ गई है। पाकिस्तान पर क़र्ज़ बढ़ता ही जा रहा है और इसी कारण से बढ़ रही महंगाई से पाकिस्तान की आम जनता का जीना दूभर हो गया है।

आईएमएफ से मिले बैलआउट पैकेज की शर्तों के कारण पाकिस्तान में टैक्स में बेतहाशा इज़ाफ़ा हुआ है, जिससे पाकिस्तान की जनता महंगाई के कारण परेशान हो गई है। इधर चीन के महत्वाकांक्षी सीपीईसी प्रोजेक्ट के कारण भी पाकिस्तान की आर्थिक हालत ख़राब होती जा रही है।

इन्हीं सब कारणों से अब पाकिस्तान के अन्दर इमरान ख़ान के ख़िलाफ़ आवाज़ उठने लगी हैं। लेकिन बजाय देश के आर्थिक हालत सुधारने के, इमरान ख़ान कश्मीर मुद्दे पर भारत के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी में व्यस्त हैं। पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियां देश की बर्बादी हो चुकी अर्थव्यवस्था के दम पर इमरान ख़ान के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल रही है, तो वहीं इमरान ख़ान कश्मीर मुद्दे की दुहाई देकर अपने ख़िलाफ़ उठ रही आवाज़ को दबाने के प्रयास कर रहे हैं।