जानिए भारत ने कैसे हासिल की ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस में बेहतर रैंकिंग?
Thursday - October 24, 2019 10:55 am ,
Category : WTN HINDI
प्रधानमंत्री मोदी ने हासिल की एक और सफ़लता
भारत में विदेशी निवेश बढ़ने के आसार; अर्थव्यवस्था को मिलेगी गति और बढ़ेंगे रोज़गार
OCT 24 (WTN) – आख़िरकार मोदी सरकार द्वारा लगातार की जा रही कोशिशों को एक बार फ़िर से सफ़लता हासिल हुई है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वर्ल्ड बैंक ने ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस (Ease of Doing Business) की रैंकिंग जारी कर दी है। मोदी सरकार की कोशिशों का ही नतीजा है कि इस बार जारी हुई ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस रैंकिंग में भारत ने अपनी पिछली रेंकिंग से 14 स्थानों का सुधार किया है और भारत अब 63वें स्थान पर पहुंच गया है।
आइये आपको विस्तार से बताते हैं कि आख़िर ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस क्या होता है और इसकी रैंकिंग में सुधार से भारत को क्या फ़ायदा होगा? वहीं आपको बताते हैं कि मोदी सरकार ने इस रैंकिंग में बेहतर स्थिति हासिल करने के लिए क्या-क्या सुधार किये हैं?
सबसे पहले आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वर्ल्ड बैंक हर साल आसान कारोबार वाले देशों की एक सूची जारी करता है। इसी सूची को ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस कहा जाता है। इस सूची में कुल 190 देश शामिल हैं। दरअसल, जब भी किसी कम्पनी को अपने देश में या फ़िर किसी दूसरे देश में कारोबार करना होता है, तो कम्पनी को यह देखना ज़रूरी होता है कि उसे उसके देश में व्यापार ज़्यादा आसान है या किसी अन्य देश में। जो देश कम्पनियों को व्यापार की ज़्यादा से ज़्यादा सुविधाएं प्रदान करता है, इसी के आधार पर ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस की रैंकिंग तैयारी की जाती है।
ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस की रैंकिंग तैयार करने के लिए कई पैमानों का अध्ययन किया जाता है। जैसे किसी व्यापार को शुरू करने के लिए कंस्ट्रक्शन परमिट जल्द मिलना, आसानी से क्रेडिट मिलना, छोटे निवेशकों की सुरक्षा, टैक्स का सरलीकरण, सही कॉन्ट्रैक्ट लागू होना, बिजली की आसानी से उपलब्धि, सम्पत्ति का पंजीकरण, अल्पसंख्यक निवेशकों की रक्षा और दिवालिया शोधन प्रक्रिया जैसे पैरामीटर्स के आधार पर ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस की रैंकिंग तैयार की जाती है।
मोदी सरकार ने ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस रैंकिंग के सभी पैरामीटर पर
अच्छा प्रदर्शन किया है, जिसके बाद भारत ने रैंकिंग में पहले से बेहतर स्थान हासिल किया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले साल भारत इस सूची में भारत 77वें स्थान पर था। लेकिन इस बार जारी हुई सूची में भारत 63वें स्थान पर पहुंच गया है।
अब आप सोच रहे होंगे कि ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस की रैंकिंग में बेहतर स्पान हासिल करने से भारत को क्या हासिल होगा? तो आपका जानना ज़रूरी है कि चूंकि इस रैंकिंग से ज़ाहिर होता है कि भारत में कारोबार करना अब पहले की तुलना में बेहतर हुआ है, तो ऐसे में भारत में कारोबार के लिए देशी और विदेशी कम्पनियां आगे आएंगी और इससे ज़्यादा से ज़्यादा विदेशी निवेश भारत में होगा।
मोदी सरकार लगातार कोशिश कर रही है कि वो भारत में कारोबार को आसान बनाए, जिससे ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस रैंकिंग के टॉप 50 देशों में भारत आ सके। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस रैंकिंग में भारत की स्थिति जितनी ज़्यादा अच्छी होगी, भारत में विदेशी कम्पनियां उतना ही ज़्यादा निवेश करेंगी। भारत में यदि विदेशी कम्पनियों निवेश करेंगी तो इससे अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और रोज़गार के साधन उपलब्ध होंगे।
जब से नरेन्द्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बने हैं उन्होंने देश में व्यापार में आने वाले परेशानियों को दूर करने का काफ़ी प्रयास किया है, जिससे देश में विदेशी निवेश के लिए रास्ता साफ़ हो सके। नरेन्द्र मोदी जब साल 2014 में प्रधानमंत्री बने थे तब ईज ऑफ़ डुइंग बिज़नेस की 190 देशों की सूची में भारत 142 वें स्थान पर था। प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों के कारण ही भारत ने लगातार इस रैंकिंग में सुधार किया है।
साल 2017 में भारत 190 देशों की सूची में 100वें स्थान पर था। वहीं साल 2018 में भारत ईज ऑफ़ डुइंग बिज़नेस की सूची में 77वें स्थान पर था। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस बार जारी की गई ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस की रैंकिंग में पिछले साल की तरह इस साल भी न्यूजीलैंड टॉप पर है। उसके बाद क्रमश: सिंगापुर, हांगकांग और डेनमार्क जैसे देशों का नम्बर आता है।
एक समय था जब कई तरह के जटिल नियमों और लालफीताशाही के कारण भारत में कारोबार करना किसी भी कम्पनी के लिए काफ़ी मुश्किल होता था। इसी कारण से देशी कम्पनियों को परेशानी होती थी और विदेशी कम्पनियां भारत में व्यापार करने से कतराती थीं। लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी ने कारोबर करने में आने वाली परेशानियों को समझा और उन्हें योजनाबद्ध तरीक़े से कम और ख़त्म करने की दिशा में काम करना शुरू किया।
कारोबारियों को कारोबार में आसानी हो इसके लिए मोदी सरकार ने नियमों का सरलीकरण किया है और कारोबार के लिए ज़रूरी लाइसेंस हासिल करने की प्रक्रिया को आसान किया है। वहीं कारोबार के लिए आसानी से क़र्ज़ की उपलब्धता, टैक्स में कमी और सुचारू रूप से बिजली की उपलब्धता समेत कई ऐसे क़दम उठाएं हैं जिससे कारोबारियों को कारोबार करने में परेशानी का सामना ना करना पड़े।
मोदी सरकार की इन्हीं कोशिशों का नतीजा है कि ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस में भारत ने इस बार बेहतरीन प्रदर्शन किया है। आशा की जानी चाहिए कि मोदी सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों से भारत में विदेशी कारोबारी दिलचस्पी दिखाएंगे जिससे भारत में विदेश निवेशी बढ़ेगा और रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे।
OCT 24 (WTN) – आख़िरकार मोदी सरकार द्वारा लगातार की जा रही कोशिशों को एक बार फ़िर से सफ़लता हासिल हुई है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वर्ल्ड बैंक ने ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस (Ease of Doing Business) की रैंकिंग जारी कर दी है। मोदी सरकार की कोशिशों का ही नतीजा है कि इस बार जारी हुई ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस रैंकिंग में भारत ने अपनी पिछली रेंकिंग से 14 स्थानों का सुधार किया है और भारत अब 63वें स्थान पर पहुंच गया है।
आइये आपको विस्तार से बताते हैं कि आख़िर ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस क्या होता है और इसकी रैंकिंग में सुधार से भारत को क्या फ़ायदा होगा? वहीं आपको बताते हैं कि मोदी सरकार ने इस रैंकिंग में बेहतर स्थिति हासिल करने के लिए क्या-क्या सुधार किये हैं?
सबसे पहले आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वर्ल्ड बैंक हर साल आसान कारोबार वाले देशों की एक सूची जारी करता है। इसी सूची को ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस कहा जाता है। इस सूची में कुल 190 देश शामिल हैं। दरअसल, जब भी किसी कम्पनी को अपने देश में या फ़िर किसी दूसरे देश में कारोबार करना होता है, तो कम्पनी को यह देखना ज़रूरी होता है कि उसे उसके देश में व्यापार ज़्यादा आसान है या किसी अन्य देश में। जो देश कम्पनियों को व्यापार की ज़्यादा से ज़्यादा सुविधाएं प्रदान करता है, इसी के आधार पर ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस की रैंकिंग तैयारी की जाती है।
ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस की रैंकिंग तैयार करने के लिए कई पैमानों का अध्ययन किया जाता है। जैसे किसी व्यापार को शुरू करने के लिए कंस्ट्रक्शन परमिट जल्द मिलना, आसानी से क्रेडिट मिलना, छोटे निवेशकों की सुरक्षा, टैक्स का सरलीकरण, सही कॉन्ट्रैक्ट लागू होना, बिजली की आसानी से उपलब्धि, सम्पत्ति का पंजीकरण, अल्पसंख्यक निवेशकों की रक्षा और दिवालिया शोधन प्रक्रिया जैसे पैरामीटर्स के आधार पर ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस की रैंकिंग तैयार की जाती है।
मोदी सरकार ने ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस रैंकिंग के सभी पैरामीटर पर
अच्छा प्रदर्शन किया है, जिसके बाद भारत ने रैंकिंग में पहले से बेहतर स्थान हासिल किया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले साल भारत इस सूची में भारत 77वें स्थान पर था। लेकिन इस बार जारी हुई सूची में भारत 63वें स्थान पर पहुंच गया है।
अब आप सोच रहे होंगे कि ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस की रैंकिंग में बेहतर स्पान हासिल करने से भारत को क्या हासिल होगा? तो आपका जानना ज़रूरी है कि चूंकि इस रैंकिंग से ज़ाहिर होता है कि भारत में कारोबार करना अब पहले की तुलना में बेहतर हुआ है, तो ऐसे में भारत में कारोबार के लिए देशी और विदेशी कम्पनियां आगे आएंगी और इससे ज़्यादा से ज़्यादा विदेशी निवेश भारत में होगा।
मोदी सरकार लगातार कोशिश कर रही है कि वो भारत में कारोबार को आसान बनाए, जिससे ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस रैंकिंग के टॉप 50 देशों में भारत आ सके। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस रैंकिंग में भारत की स्थिति जितनी ज़्यादा अच्छी होगी, भारत में विदेशी कम्पनियां उतना ही ज़्यादा निवेश करेंगी। भारत में यदि विदेशी कम्पनियों निवेश करेंगी तो इससे अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और रोज़गार के साधन उपलब्ध होंगे।
जब से नरेन्द्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बने हैं उन्होंने देश में व्यापार में आने वाले परेशानियों को दूर करने का काफ़ी प्रयास किया है, जिससे देश में विदेशी निवेश के लिए रास्ता साफ़ हो सके। नरेन्द्र मोदी जब साल 2014 में प्रधानमंत्री बने थे तब ईज ऑफ़ डुइंग बिज़नेस की 190 देशों की सूची में भारत 142 वें स्थान पर था। प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों के कारण ही भारत ने लगातार इस रैंकिंग में सुधार किया है।
साल 2017 में भारत 190 देशों की सूची में 100वें स्थान पर था। वहीं साल 2018 में भारत ईज ऑफ़ डुइंग बिज़नेस की सूची में 77वें स्थान पर था। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस बार जारी की गई ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस की रैंकिंग में पिछले साल की तरह इस साल भी न्यूजीलैंड टॉप पर है। उसके बाद क्रमश: सिंगापुर, हांगकांग और डेनमार्क जैसे देशों का नम्बर आता है।
एक समय था जब कई तरह के जटिल नियमों और लालफीताशाही के कारण भारत में कारोबार करना किसी भी कम्पनी के लिए काफ़ी मुश्किल होता था। इसी कारण से देशी कम्पनियों को परेशानी होती थी और विदेशी कम्पनियां भारत में व्यापार करने से कतराती थीं। लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी ने कारोबर करने में आने वाली परेशानियों को समझा और उन्हें योजनाबद्ध तरीक़े से कम और ख़त्म करने की दिशा में काम करना शुरू किया।
कारोबारियों को कारोबार में आसानी हो इसके लिए मोदी सरकार ने नियमों का सरलीकरण किया है और कारोबार के लिए ज़रूरी लाइसेंस हासिल करने की प्रक्रिया को आसान किया है। वहीं कारोबार के लिए आसानी से क़र्ज़ की उपलब्धता, टैक्स में कमी और सुचारू रूप से बिजली की उपलब्धता समेत कई ऐसे क़दम उठाएं हैं जिससे कारोबारियों को कारोबार करने में परेशानी का सामना ना करना पड़े।
मोदी सरकार की इन्हीं कोशिशों का नतीजा है कि ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस में भारत ने इस बार बेहतरीन प्रदर्शन किया है। आशा की जानी चाहिए कि मोदी सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों से भारत में विदेशी कारोबारी दिलचस्पी दिखाएंगे जिससे भारत में विदेश निवेशी बढ़ेगा और रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे।