क्वॉन्टम सुप्रीमेसी: जिससे बदल जाएगी इंसान की दुनिया
Thursday - October 24, 2019 2:09 pm ,
Category : WTN HINDI
सुपर कम्प्यूटर से भी हज़ारों गुना तेज़ है क्वॉन्टम कम्प्यूटर
‘असम्भव’ को ‘सम्भव’ करेंगे क्वॉन्टम कम्प्यूटर्स!
OCT 24 (WTN) – शायद आपको वो फ़ोटो तो याद ही होगा, जिसमें माइक्रोसॉफ्ट कॉरपोरेशन के फाउण्डर बिल गेट्स ढेर सारे काग़ज़ों से बने एक पिलर के ऊपर लटके हुए हैं और उनके हाथ में एक सीडी रोम है। इस फ़ोटो के ज़रिये बिल गेट्स ने सालों पहले यह सन्देश दिया था कि हज़ारों काग़ज़ों पर जो लिखा जाता है, वो सिर्फ़ एक सीडी रोम में लिखा और सुरक्षित रखा जा सकता है। यानी कि सालों पहले बिल गेट्स यह सन्देश दे रहे थे कि अब टेक्नोलॉजी का समय आ गया है। जी हां समय के साथ-साथ टेक्नोलॉजी बदलती गई और आज का दौर सीडी रोम से कहीं आगे बढ़ गया है।
समय के साथ तकनीक ने इंसान की मुश्किलों को कम किया और आज के इंसान की ज़िन्दगी आज से 100 साल पहले के इंसान की ज़िन्दगी से पूरी तरह से बदल गई है। मोबाइल, जो कि हर किसी की ज़रूरत सा बन गया है उसमें 5जी तकनीक आ गई है, जिसे लेकर दावा किया जा रहा है कि इससे आम इंसान के काम करने का तरीक़ा ही बदल जाएगा। कम्प्यूटर और मोबाइल के क्षेत्र में सुधारों और अविष्कारों का दौर जारी है। कहा जाता है कि एक समय ऐसा आएगा कि तकनीक के आधार पर इंसान के जीने का तरीक़ा ही बदल जाएगा। इसी कड़ी में एक बहुत बड़े परिवर्तन की ओर जाने का दावा विश्व प्रसिद्ध कम्पनी गूगल ने किया है।
दरअसल, गूगल ने एक क्वॉन्टम कम्प्यूटर (Quantum Computer) बनाने का दावा किया है। गूगल का दावा है कि यह कम्प्यूटर 'क्वॉन्टम सुप्रीमेसी' (Quantum Supremacy) तक पहुंच गया है। यह सब पढ़कर आप सोच रहे होंगे कि आख़िर यह क्वॉन्टम कम्प्यूटर और क्वॉन्टम सुप्रीमेसी होती क्या है? और इससे इंसान की ज़िन्दगी पर क्या और कैसा असर पड़ेगा? तो आज हम आपको विस्तार से बताते हैं कि आख़िर क्वॉन्टम कम्प्यूटर और क्वॉन्टम सुप्रीमेसी होती क्या है?
दरअसल, क्वॉन्टम कम्प्यूटिंग ऐसे ऐसी टेक्नोलॉजी है, जिसकी मदद से बड़े डेटा और इन्फॉर्मेशन को बहुत ही कम समय में प्रोसेस किया जा सकेगा। क्वॉन्टम कम्प्यूटर की मदद से कम्प्यूटिंग से जुड़े कामों को पहले की तुलना में बहुत ही कम वक़्त में किया जा सकेगा। वैसे क्वॉन्टम कम्प्यूटिंग अभी भी डेवेलप हो रही एक टेक्नोलॉजी है। गूगल समेत कई बड़ी कम्पनियां इस टेक्नोलॉजी को डेवलेप करने में लगी हुई हैं।
इसी क्वॉन्टम कम्प्यूटिंग की मदद से की जाने ले गणनाओं को ही क्वॉन्टम सुप्रीमेसी कहा जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि क्वॉन्टम सुप्रीमेसी का मतलब है कि जिन गणनाओं को क्वॉन्टम कम्प्यूटर कर सकता है, उसे एक साधारण कम्प्यूटर अपने पूरे जीवनकाल में नहीं कर सकता है। गूगल का यह कम्प्यूटर 54-क्वांटम बिट पर काम करता है और इसे तैयार करने में 10 साल का लम्बा समय लगा है।
इसी कड़ी में गूगल का दावा है कि उसने क्वॉन्टम कम्प्यूटिंग की मदद से एक जटिल गणना को सिर्फ़ 200 सेकेंड्स में कर दिखाया है, जिसे दुनिया के सबसे तेज़ सुपर कम्प्यूटर को करने में भी कम से कम 10 हज़ार साल लग जाएंगे। जानकारी के मुताबिक़, गूगल द्वारा की गई क्वॉन्टम कम्प्यूटिंग का परिणाम साइंस पत्रिका ‘Nature’ में प्रकाशित हुआ है। इस बारे में शोधकर्ताओं का कहना है कि क्वॉन्टम कम्प्यूटिंग की अवधारणा यह है कि इसके ज़रिये ना सिर्फ़ गणना की गति को बढ़ाया जा सकता है, बल्कि इससे बड़ी से बड़ी गणनाओं को जल्द से जल्द आसानी से किया जा सकता है।
अब आप सोच रहे होंगे कि आख़िर क्वॉन्टम कम्यूटिंग में ऐसी क्या ख़ासियत होती है कि जिस गणना को पूरा करने में सुपर कम्प्यूटर को क़रीब 10 हज़ार साल लगेंगे वो इसी गणना को चन्द सेकेण्ड में पूरा कर देगा। दरअसल, परम्परागत कम्प्यूटर्स किसी भी सूचना को 'बाइनरी सिस्टम' यानी '0' या '1' में स्टोर करते हैं। वहीं, क्वॉन्टम कम्प्यूटर इसे 'क्यूबिट्स' यानी ‘0’ और ‘1’ में साथ-साथ स्टोर कर लेता है। ऐसा होने से इसकी किसी भी सूचना को स्टोर करने की क्षमता परम्परागत कम्प्यूटर्स की तुलना में काफ़ी ज़्यादा बढ़ जाती है।
हालांकि, गूगल के दावे पर इंटरनेशनल बिज़नेस मशीन (आईबीएम) ने एक ब्लॉग के ज़रिये आपत्ति उठाई है। आईबीएम का कहना है कि जिस गणना को क्वॉन्टम कम्प्यूटर चंद सेकेण्डस में कर रहा है और गूगल का दावा है कि इसी गणना को सबसे तेज़ गति वाला सुपर कम्प्यूटर पूरा करने में 10 हज़ार साल का वक़्त लेगा, यह दावा ग़लत है। आईबीएम के मुताबिक़, इसी गणना को कोई भी एक बढ़िया सुपर कम्प्यूटर सिर्फ़ ढाई दिनों में पूरा कर सकता है। अपने ब्लॉग में आईबीएम का कहना है कि क्वॉन्टम सुप्रीमेसी का मतलब उस टास्क को परफॉर्म करने से नहीं है, जो कि क्लासिकल कम्प्यूटर नहीं कर सकते हैं।
जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि क्वॉन्टम कम्प्यूटिंग की मदद से बड़े डेटा और सूचना को काफ़ी कम वक़्त में ही प्रोसेस किया जा सकेगा, वहीं क्वॉन्टम कम्प्यूटर की मदद से कम्प्यूटिंग से जुड़े टास्क बेहद ही कम समय में पूरे किये जा सकेंगे। इस नए प्रोसेसर की मदद से नई दवाओं की खोज से लेकर शहरों के मैनेजमेंट और ट्रांसपोर्ट जैसे काम आसान हो जाएंगे। आने वाले समय में क्वॉन्टम कम्प्यूटर एक प्रभावी उपकरण होगा, जिसकी सहायता से फिजिक्स और केमेस्ट्री की समस्याओं को आसानी से हल किया जा सकेगा। यानी कि कहा जा सकता है कि क्वॉन्टम कम्प्यूटर की खूबियों के कारण आने वाले वक़्त अब क्वॉन्टम सुप्रीमेसी का ही होगा।
OCT 24 (WTN) – शायद आपको वो फ़ोटो तो याद ही होगा, जिसमें माइक्रोसॉफ्ट कॉरपोरेशन के फाउण्डर बिल गेट्स ढेर सारे काग़ज़ों से बने एक पिलर के ऊपर लटके हुए हैं और उनके हाथ में एक सीडी रोम है। इस फ़ोटो के ज़रिये बिल गेट्स ने सालों पहले यह सन्देश दिया था कि हज़ारों काग़ज़ों पर जो लिखा जाता है, वो सिर्फ़ एक सीडी रोम में लिखा और सुरक्षित रखा जा सकता है। यानी कि सालों पहले बिल गेट्स यह सन्देश दे रहे थे कि अब टेक्नोलॉजी का समय आ गया है। जी हां समय के साथ-साथ टेक्नोलॉजी बदलती गई और आज का दौर सीडी रोम से कहीं आगे बढ़ गया है।
समय के साथ तकनीक ने इंसान की मुश्किलों को कम किया और आज के इंसान की ज़िन्दगी आज से 100 साल पहले के इंसान की ज़िन्दगी से पूरी तरह से बदल गई है। मोबाइल, जो कि हर किसी की ज़रूरत सा बन गया है उसमें 5जी तकनीक आ गई है, जिसे लेकर दावा किया जा रहा है कि इससे आम इंसान के काम करने का तरीक़ा ही बदल जाएगा। कम्प्यूटर और मोबाइल के क्षेत्र में सुधारों और अविष्कारों का दौर जारी है। कहा जाता है कि एक समय ऐसा आएगा कि तकनीक के आधार पर इंसान के जीने का तरीक़ा ही बदल जाएगा। इसी कड़ी में एक बहुत बड़े परिवर्तन की ओर जाने का दावा विश्व प्रसिद्ध कम्पनी गूगल ने किया है।
दरअसल, गूगल ने एक क्वॉन्टम कम्प्यूटर (Quantum Computer) बनाने का दावा किया है। गूगल का दावा है कि यह कम्प्यूटर 'क्वॉन्टम सुप्रीमेसी' (Quantum Supremacy) तक पहुंच गया है। यह सब पढ़कर आप सोच रहे होंगे कि आख़िर यह क्वॉन्टम कम्प्यूटर और क्वॉन्टम सुप्रीमेसी होती क्या है? और इससे इंसान की ज़िन्दगी पर क्या और कैसा असर पड़ेगा? तो आज हम आपको विस्तार से बताते हैं कि आख़िर क्वॉन्टम कम्प्यूटर और क्वॉन्टम सुप्रीमेसी होती क्या है?
दरअसल, क्वॉन्टम कम्प्यूटिंग ऐसे ऐसी टेक्नोलॉजी है, जिसकी मदद से बड़े डेटा और इन्फॉर्मेशन को बहुत ही कम समय में प्रोसेस किया जा सकेगा। क्वॉन्टम कम्प्यूटर की मदद से कम्प्यूटिंग से जुड़े कामों को पहले की तुलना में बहुत ही कम वक़्त में किया जा सकेगा। वैसे क्वॉन्टम कम्प्यूटिंग अभी भी डेवेलप हो रही एक टेक्नोलॉजी है। गूगल समेत कई बड़ी कम्पनियां इस टेक्नोलॉजी को डेवलेप करने में लगी हुई हैं।
इसी क्वॉन्टम कम्प्यूटिंग की मदद से की जाने ले गणनाओं को ही क्वॉन्टम सुप्रीमेसी कहा जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि क्वॉन्टम सुप्रीमेसी का मतलब है कि जिन गणनाओं को क्वॉन्टम कम्प्यूटर कर सकता है, उसे एक साधारण कम्प्यूटर अपने पूरे जीवनकाल में नहीं कर सकता है। गूगल का यह कम्प्यूटर 54-क्वांटम बिट पर काम करता है और इसे तैयार करने में 10 साल का लम्बा समय लगा है।
इसी कड़ी में गूगल का दावा है कि उसने क्वॉन्टम कम्प्यूटिंग की मदद से एक जटिल गणना को सिर्फ़ 200 सेकेंड्स में कर दिखाया है, जिसे दुनिया के सबसे तेज़ सुपर कम्प्यूटर को करने में भी कम से कम 10 हज़ार साल लग जाएंगे। जानकारी के मुताबिक़, गूगल द्वारा की गई क्वॉन्टम कम्प्यूटिंग का परिणाम साइंस पत्रिका ‘Nature’ में प्रकाशित हुआ है। इस बारे में शोधकर्ताओं का कहना है कि क्वॉन्टम कम्प्यूटिंग की अवधारणा यह है कि इसके ज़रिये ना सिर्फ़ गणना की गति को बढ़ाया जा सकता है, बल्कि इससे बड़ी से बड़ी गणनाओं को जल्द से जल्द आसानी से किया जा सकता है।
अब आप सोच रहे होंगे कि आख़िर क्वॉन्टम कम्यूटिंग में ऐसी क्या ख़ासियत होती है कि जिस गणना को पूरा करने में सुपर कम्प्यूटर को क़रीब 10 हज़ार साल लगेंगे वो इसी गणना को चन्द सेकेण्ड में पूरा कर देगा। दरअसल, परम्परागत कम्प्यूटर्स किसी भी सूचना को 'बाइनरी सिस्टम' यानी '0' या '1' में स्टोर करते हैं। वहीं, क्वॉन्टम कम्प्यूटर इसे 'क्यूबिट्स' यानी ‘0’ और ‘1’ में साथ-साथ स्टोर कर लेता है। ऐसा होने से इसकी किसी भी सूचना को स्टोर करने की क्षमता परम्परागत कम्प्यूटर्स की तुलना में काफ़ी ज़्यादा बढ़ जाती है।
हालांकि, गूगल के दावे पर इंटरनेशनल बिज़नेस मशीन (आईबीएम) ने एक ब्लॉग के ज़रिये आपत्ति उठाई है। आईबीएम का कहना है कि जिस गणना को क्वॉन्टम कम्प्यूटर चंद सेकेण्डस में कर रहा है और गूगल का दावा है कि इसी गणना को सबसे तेज़ गति वाला सुपर कम्प्यूटर पूरा करने में 10 हज़ार साल का वक़्त लेगा, यह दावा ग़लत है। आईबीएम के मुताबिक़, इसी गणना को कोई भी एक बढ़िया सुपर कम्प्यूटर सिर्फ़ ढाई दिनों में पूरा कर सकता है। अपने ब्लॉग में आईबीएम का कहना है कि क्वॉन्टम सुप्रीमेसी का मतलब उस टास्क को परफॉर्म करने से नहीं है, जो कि क्लासिकल कम्प्यूटर नहीं कर सकते हैं।
जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि क्वॉन्टम कम्प्यूटिंग की मदद से बड़े डेटा और सूचना को काफ़ी कम वक़्त में ही प्रोसेस किया जा सकेगा, वहीं क्वॉन्टम कम्प्यूटर की मदद से कम्प्यूटिंग से जुड़े टास्क बेहद ही कम समय में पूरे किये जा सकेंगे। इस नए प्रोसेसर की मदद से नई दवाओं की खोज से लेकर शहरों के मैनेजमेंट और ट्रांसपोर्ट जैसे काम आसान हो जाएंगे। आने वाले समय में क्वॉन्टम कम्प्यूटर एक प्रभावी उपकरण होगा, जिसकी सहायता से फिजिक्स और केमेस्ट्री की समस्याओं को आसानी से हल किया जा सकेगा। यानी कि कहा जा सकता है कि क्वॉन्टम कम्प्यूटर की खूबियों के कारण आने वाले वक़्त अब क्वॉन्टम सुप्रीमेसी का ही होगा।