वर्ल्ड बैंक ने दिखाया भारत के विपक्ष को ‘आईना’!
Tuesday - October 29, 2019 10:42 am ,
Category : WTN HINDI
विश्व बैंक अध्यक्ष डेविड मालपास ने की मोदी सरकार के आर्थिक सुधारों की तारीफ़
'इन उपायों' से आर्थिक मंदी का सामना कर सकती है भारतीय अर्थव्यवस्था!
OCT 29 (WTN) – वैश्विक आर्थिक मंदी से भारत समेत दुनिया के कई देश सीधे-सीधे प्रभावित हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, दुनिया की 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्थाओं को आर्थिक मंदी ने प्रभावित किया है। लेकिन आर्थिक मंदी का असर भारत और ब्राजील जैसे तेज़ी से विकासशील देशों पर ज़्यादा पड़ा है। भारत की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर बनाने की दिशा में काम करने वाली मोदी सरकार के लिए आर्थिक मंदी एक बहुत बड़ा झटका है। आर्थिक मंदी का भारतीय अर्थव्यवस्था पर सीधा असर हुआ है, और राष्ट्रीय समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने चालू वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट के अनुमान को कम कर दिया है।
ऐसा नहीं है कि आर्थिक मंदी से निपटने और उसे दूर करने के लिए मोदी सरकार कोई क़दम नहीं उठा रही है। कुछ दिनों पहले ही मोदी सरकार ने कॉरपोरेट टैक्स की दर को 30 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत कर दिया है। वहीं कहा जा रहा है कि मोदी सरकार इनकम टैक्स के स्लैब में भी ऐतिहासिक परिवर्तन कर सकती है, जिससे लोगों के पास ज़्यादा पैसा बचे। लोगों के पास ज़्यादा पैसा बचने से उसे वे या तो ख़र्च करेंगे या फ़िर निवेश करेंगे। इन दोनों ही कारणों से बाज़ार में पैसा आएगा, जिससे अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
मंदी से प्रभावित भारत की अर्थव्यस्था के लिए उठाए जा रहे मोदी सरकार के प्रयासों की अब वर्ल्ड बैंक ने भी सराहना की है। वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष डेविड मालपास ने कॉरपोरेट टैक्स दर में कटौती के लिए मोदी सरकार के फ़ैसला की प्रशंसा की है। डेविड मलपास के मुताबिक़, कॉरपोरेट टैक्स में कटौती से भारत को बड़ा फ़ायदा मिल सकता है, और इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
जैसा कि आप जानते हैं कि आर्थिक मंदी के कारण विपक्ष लगातार मोदी सरकार को घेर रहा है। भारत के विपक्ष को लगता है कि आर्थिक मंदी सिर्फ़ और सिर्फ़ भारत में ही है और सिर्फ़ भारत ही आर्थिक मंदी से प्रभावित है। लेकिन भारतीय विपक्ष को वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष डेविड मालपास ने सटीक जवाब दिया है। भारतीय अर्थव्यवस्था में मंदी पर डेविड मालपास का कहना है कि वैश्विक कारणों से भारतीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। साफ़ ज़ाहिर है कि मालपास ने भारतीय विपक्ष को आईना दिखा दिया है कि चूंकि पूरी दुनिया आर्थिक मंदी से प्रभावित है, इसलिए भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था भी इससे अछूती नहीं रह सकती है।
वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष डेविड मालपास के मुताबिक़, "भारत ने पहले के वर्षों में तेज़ी से विकास किया है। लेकिन यदि आर्थिक मंदी से निपटना है तो भविष्य में सुधार और नई तकनीक ही भारत में विकास में मदद करेगी।" मालपास ने प्रधानमंत्री मोदी के आर्थिक सुधारों की जमकर तारीफ़ भी की है। मालपास का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा निर्धारित 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य बहुत ही मज़बूत दृष्टिकोण है।
साफ़ ज़ाहिर है कि मालपास ने भारत की विपक्षी पार्टियों को एक बार फ़िर आईना दिखाया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत की विपक्षी पार्टियां, प्रधानमंत्री मोदी द्वारा निर्धारित किये गये 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को मज़ाक मानती है। लेकिन वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष मालपास ने 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को मज़बूत दृष्टिकोण कहकर भारत के विपक्ष को करारा जवाब दिया है।
वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष डेविड मालपास के मुताबिक़, 2024-25 तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने में वित्तीय क्षेत्र में नवाचार महत्वपूर्ण होगा। इस बारे में मालपास का कहना है, “हालांकि, भारत ने वित्तीय क्षेत्र में प्रगति की है। लेकिन बैंकिंग क्षेत्र, शैडो बैंकिंग और पूंजी बाज़ार में और भी सुधार की गुंजाइश है।”
भारत के वित्तीय क्षेत्र में प्रगति के बारे में मालपास का कहना है, भारत तीन प्राथमिक क्षेत्रों में प्रगति को प्रोत्साहित करे। एक तो निजी क्षेत्र समेत स्वयं बैंकिंग क्षेत्र की वृद्धि की अनुमति दी जानी चाहिए। दूसरा, कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट और मॉर्गेज मार्केट का गहरा होना ज़रूरी है और तीसरा गैर-बैंक वित्तीय कम्पनियों का विनियमन भी ज़रूरी है। दरअसल, यह भारतीय वित्तीय प्रणाली के साथ बढ़ी हैं लेकिन कुछ जोखिमों को बढ़ाती हैं। मालपास का कहना है कि भारत को ज़िला स्तर पर व्यावसायिक अदालतें बनानी चाहिए, जिससे कारोबार से जुड़े मामले जल्द से जल्द निपट सकें।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत के विकास में वर्ल्ड बैंक का काफ़ी योगदान रहा है, इसलिए मंदी से प्रभावित भारतीय अर्थव्यवस्था पर उसके विचार काफ़ी महत्वपूर्ण हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस समय भारत में वर्ल्ड बैंक की सहायता से 97 परियोजनाएं चल रही है। वहीं भारत की साख को देखते हुए विश्व बैंक भारत को 6 अरब डॉलर सालाना लक्ष्य के अनुरूप लोन समर्थन देना जारी रखेगा।
वर्ल्ड बैंक मोदी सरकार द्वारा ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस की दिशा में किये जा रहे सुधार से भी काफ़ी प्रभावित हुआ है। वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष डेविड मालपास का कहना है कि भारत ने आर्थिक सुधारों को तेज़ी से आगे बढ़ाया है, ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस वाले देशों की सूची में भारत की रैंकिंग में सुधार हुआ है और भारत अब 63वें स्थान पर है। भारत में जारी आर्थिक सुधारों पर मलपास का कहना है कि अभी कुछ और क्षेत्र हैं जहां पर सुधार की ज़रूरत है। यदि भारत इन क्षेत्रों में सुधार करने में सफ़ल हो जाता है, तो इससे ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस में भारत की रैंकिंग और भी बेहतर हो सकती है।
यानी कि साफ़ ज़ाहिर है कि वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष ने मोदी सरकार द्वारा किये जा रहे आर्थिक सुधारों की तारीफ़ की है और साफ़ कर दिया है कि आर्थिक मंदी का असर सिर्फ़ भारत में ही नहीं बल्कि कई देशों में है। वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष डेविड मालपास की बातों से भारत की विपक्षी पार्टियों को एक सबक मिलेगा कि बिना ठोस जानकारी के सरकार पर आरोप लगाना कहीं से भी सही नहीं है। आशा की जाना चाहिए कि भारत की विपक्षी पार्टियां मोदी सरकार की नीतियों को सही से समझेंगी और उसके बाद ही उस पर टीका टिप्पणी करेंगी।
OCT 29 (WTN) – वैश्विक आर्थिक मंदी से भारत समेत दुनिया के कई देश सीधे-सीधे प्रभावित हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, दुनिया की 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्थाओं को आर्थिक मंदी ने प्रभावित किया है। लेकिन आर्थिक मंदी का असर भारत और ब्राजील जैसे तेज़ी से विकासशील देशों पर ज़्यादा पड़ा है। भारत की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर बनाने की दिशा में काम करने वाली मोदी सरकार के लिए आर्थिक मंदी एक बहुत बड़ा झटका है। आर्थिक मंदी का भारतीय अर्थव्यवस्था पर सीधा असर हुआ है, और राष्ट्रीय समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने चालू वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट के अनुमान को कम कर दिया है।
ऐसा नहीं है कि आर्थिक मंदी से निपटने और उसे दूर करने के लिए मोदी सरकार कोई क़दम नहीं उठा रही है। कुछ दिनों पहले ही मोदी सरकार ने कॉरपोरेट टैक्स की दर को 30 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत कर दिया है। वहीं कहा जा रहा है कि मोदी सरकार इनकम टैक्स के स्लैब में भी ऐतिहासिक परिवर्तन कर सकती है, जिससे लोगों के पास ज़्यादा पैसा बचे। लोगों के पास ज़्यादा पैसा बचने से उसे वे या तो ख़र्च करेंगे या फ़िर निवेश करेंगे। इन दोनों ही कारणों से बाज़ार में पैसा आएगा, जिससे अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
मंदी से प्रभावित भारत की अर्थव्यस्था के लिए उठाए जा रहे मोदी सरकार के प्रयासों की अब वर्ल्ड बैंक ने भी सराहना की है। वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष डेविड मालपास ने कॉरपोरेट टैक्स दर में कटौती के लिए मोदी सरकार के फ़ैसला की प्रशंसा की है। डेविड मलपास के मुताबिक़, कॉरपोरेट टैक्स में कटौती से भारत को बड़ा फ़ायदा मिल सकता है, और इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
जैसा कि आप जानते हैं कि आर्थिक मंदी के कारण विपक्ष लगातार मोदी सरकार को घेर रहा है। भारत के विपक्ष को लगता है कि आर्थिक मंदी सिर्फ़ और सिर्फ़ भारत में ही है और सिर्फ़ भारत ही आर्थिक मंदी से प्रभावित है। लेकिन भारतीय विपक्ष को वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष डेविड मालपास ने सटीक जवाब दिया है। भारतीय अर्थव्यवस्था में मंदी पर डेविड मालपास का कहना है कि वैश्विक कारणों से भारतीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। साफ़ ज़ाहिर है कि मालपास ने भारतीय विपक्ष को आईना दिखा दिया है कि चूंकि पूरी दुनिया आर्थिक मंदी से प्रभावित है, इसलिए भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था भी इससे अछूती नहीं रह सकती है।
वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष डेविड मालपास के मुताबिक़, "भारत ने पहले के वर्षों में तेज़ी से विकास किया है। लेकिन यदि आर्थिक मंदी से निपटना है तो भविष्य में सुधार और नई तकनीक ही भारत में विकास में मदद करेगी।" मालपास ने प्रधानमंत्री मोदी के आर्थिक सुधारों की जमकर तारीफ़ भी की है। मालपास का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा निर्धारित 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य बहुत ही मज़बूत दृष्टिकोण है।
साफ़ ज़ाहिर है कि मालपास ने भारत की विपक्षी पार्टियों को एक बार फ़िर आईना दिखाया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत की विपक्षी पार्टियां, प्रधानमंत्री मोदी द्वारा निर्धारित किये गये 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को मज़ाक मानती है। लेकिन वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष मालपास ने 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को मज़बूत दृष्टिकोण कहकर भारत के विपक्ष को करारा जवाब दिया है।
वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष डेविड मालपास के मुताबिक़, 2024-25 तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने में वित्तीय क्षेत्र में नवाचार महत्वपूर्ण होगा। इस बारे में मालपास का कहना है, “हालांकि, भारत ने वित्तीय क्षेत्र में प्रगति की है। लेकिन बैंकिंग क्षेत्र, शैडो बैंकिंग और पूंजी बाज़ार में और भी सुधार की गुंजाइश है।”
भारत के वित्तीय क्षेत्र में प्रगति के बारे में मालपास का कहना है, भारत तीन प्राथमिक क्षेत्रों में प्रगति को प्रोत्साहित करे। एक तो निजी क्षेत्र समेत स्वयं बैंकिंग क्षेत्र की वृद्धि की अनुमति दी जानी चाहिए। दूसरा, कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट और मॉर्गेज मार्केट का गहरा होना ज़रूरी है और तीसरा गैर-बैंक वित्तीय कम्पनियों का विनियमन भी ज़रूरी है। दरअसल, यह भारतीय वित्तीय प्रणाली के साथ बढ़ी हैं लेकिन कुछ जोखिमों को बढ़ाती हैं। मालपास का कहना है कि भारत को ज़िला स्तर पर व्यावसायिक अदालतें बनानी चाहिए, जिससे कारोबार से जुड़े मामले जल्द से जल्द निपट सकें।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत के विकास में वर्ल्ड बैंक का काफ़ी योगदान रहा है, इसलिए मंदी से प्रभावित भारतीय अर्थव्यवस्था पर उसके विचार काफ़ी महत्वपूर्ण हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस समय भारत में वर्ल्ड बैंक की सहायता से 97 परियोजनाएं चल रही है। वहीं भारत की साख को देखते हुए विश्व बैंक भारत को 6 अरब डॉलर सालाना लक्ष्य के अनुरूप लोन समर्थन देना जारी रखेगा।
वर्ल्ड बैंक मोदी सरकार द्वारा ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस की दिशा में किये जा रहे सुधार से भी काफ़ी प्रभावित हुआ है। वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष डेविड मालपास का कहना है कि भारत ने आर्थिक सुधारों को तेज़ी से आगे बढ़ाया है, ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस वाले देशों की सूची में भारत की रैंकिंग में सुधार हुआ है और भारत अब 63वें स्थान पर है। भारत में जारी आर्थिक सुधारों पर मलपास का कहना है कि अभी कुछ और क्षेत्र हैं जहां पर सुधार की ज़रूरत है। यदि भारत इन क्षेत्रों में सुधार करने में सफ़ल हो जाता है, तो इससे ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस में भारत की रैंकिंग और भी बेहतर हो सकती है।
यानी कि साफ़ ज़ाहिर है कि वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष ने मोदी सरकार द्वारा किये जा रहे आर्थिक सुधारों की तारीफ़ की है और साफ़ कर दिया है कि आर्थिक मंदी का असर सिर्फ़ भारत में ही नहीं बल्कि कई देशों में है। वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष डेविड मालपास की बातों से भारत की विपक्षी पार्टियों को एक सबक मिलेगा कि बिना ठोस जानकारी के सरकार पर आरोप लगाना कहीं से भी सही नहीं है। आशा की जाना चाहिए कि भारत की विपक्षी पार्टियां मोदी सरकार की नीतियों को सही से समझेंगी और उसके बाद ही उस पर टीका टिप्पणी करेंगी।