गुणवत्ताहीन मेड इन चायना सामान को भारत का ‘तगड़ा जवाब’
Tuesday - October 29, 2019 3:39 pm ,
Category : WTN HINDI
भारतीय बाज़ारों में मेड इन चायना सामान की डिमाण्ड में भारी गिरावट
भारतीय ग्राहकों और व्यापारियों ने चीन को सिखाया ‘बढ़िया सबक़’!
OCT 29 (WTN) – भारत और चीन के बीच हमेशा से ही कूटनीतिक सम्बन्ध तनावपूर्ण रहे हैं, लेकिन बावजूद इसके दोनों ही देशों के बीच आर्थिक सम्बन्ध बहुत बढ़िया रहे हैं। वित्त वर्ष 2017-18 में दोनों देशों के बीच 62.9 बिलियन डॉलर का व्यापार हुआ था, जो कि अब 90 अरब डॉलर के आसपास पहुंच गया है।
जैसा कि आप जानते हैं कि चीन को सस्ता सामान बनाने की दुनिया की सबसे बड़ी फैक्टी कहा जाता है। ऐसे में भारत समेत दुनिया के तमाम देशों में चीन अपने सस्ते सामानों की खपत करता आया है। और इसी कारण से आज चीन 11 ट्रिलियन डॉलर जीडीपी के साथ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
जहां तक भारत और चीन के बीच व्यापार की बात है तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दोनों ही देशों के बीच हो रहे व्यापार में चीन हमेशा से ही लाभ की स्थिति में रहा है। एक समय था जब दिवाली के समय चीन के बने सामानों से पूरा बाज़ार पटा रहता था। लेकिन पिछले 5 से 6 सालों में देखा गया है कि दिवाली बाज़ारों में चीन के सामानों की मांग में बड़ी तेज़ी से गिरावट आई है। एक जानकारी के मुताबिक़, मेड इन चाइना सामान के आयात में 70 से 80 प्रतिशत की भारी कमी आई है।
दरअसल, मेड इन चाइना सामानों की मांग में भारी कमी के पीछे एक नहीं बल्कि कई कारण हैं। सबसे पहले तो चीनी सामानों की ख़राब गुणवत्ता ही उसकी मांग में गिरावट का सबसे बड़ा एक कारण है। वहीं हाल के सालों में भारत में बने सामानों ने मेड इन चाइना सामान को कड़ी प्रतिस्पर्धा दी है। इन सभी कारणों से दिवाली बाजारों में चीनी सामानों की कुल हिस्सेदारी अब सिर्फ़ 20 से 25 प्रतिशत के क़रीब ही रह गई है।
दिल्ली समेत देश के कई शहरों में इस बार दिवाली पर ज़्यादातर ग्राहकों और व्यापारियों ने भारत में बनी मूर्तियों को ही ज़्यादा तरजीह दी है। वहीं चीन पटाखे, चीन में बने इलेक्ट्रॉनिक आयटम और सजावट के चीनी सामान की भी डिमाण्ड काफ़ी तेज़ी से कम हुई है। दरअसल, प्रतिस्पर्धा के कारण धीरे-धीरे भारतीय उत्पाद चीन से काफ़ी बेहतर होते जा रहे हैं, जिसके कारण ग्राहक और व्यापारी भारतीय सामानों के टिकाऊ होने के कारण चीनी सामानों से ज़्यादा भारतीय सामानों को ज़्यादा तरजीह दे रहे हैं।
जैसा कि आप जानते हैं कि मेड इन चायना कोई एक विश्वसनीय ब्रांड होने से ज़्यादा एक मज़ाक ज़्यादा है। ऐसा इसलिए, क्योंकि चीन में बने सामानों की कई गारण्टी नहीं होती है और टिकाऊ नहीं होते हैं। ऐसे में धीरे-धीरे चीनी सामान की डिमाण्ड भारत में कम होती जा रही है। वहीं मोदी सरकार द्वारा ड्यूटी बढ़ाए जाने के बाद काफ़ी चीनी सामान भारतीय सामान से महंगा है।
साथ ही मोदी सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक आयटम समेत अन्य सामानों की गुणवत्ता को लेकर मानक सख्त कर दिए हैं, और इस कारण से चीन में बने उत्पाद इन मानकों पर खरा नहीं उतर पा रहे हैं। इसी के चलते गुणवत्ता में खरे, मज़बूत और सस्ते भारतीय सामान की चीनी सामान से ज़्यादा डिमाण्ड होने लगी है।
चीन के सामान की मांग में भारी गिरावट की पीछे के कई कारणों में एक कारण चीन के सामान का विरोध भी है। कश्मीर समेत अन्य मुद्दों पर चीन जिस तरह से पाकिस्तान का साथ देता है और भारत के ख़िलाफ़ षड़यंत्र करता रहा है, उससे चीन और चीनी सामान का विरोध देश में बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में लोगों ने भी अपने स्तर पर चीनी सामान का बॉयकॉट करना शुरू कर दिया है, जिससे चीनी सामान की मांग में गिरावट दर्ज की गई है। कहा जा सकता है कि लोगों द्वारा चीन का सामान ख़रीदने के बजाय स्वदेशी सामान को तरजीह देने से चीनी सामान की बिक्री में तेज़ी से गिरावट दर्ज की गई है।
कारण एक नहीं कई हैं, जिसके कारण मेड इन चायना सामान की डिमाण्ड भारत में धीरे-धीरे कम होती जा रही है। हालांकि, अभी भी मोबाइल मार्केट में चीनी कम्पनियों के मोबाइल की डिमाण्ड और सेलिंग सबसे ज़्यादा है। लेकिन सस्ते और मीडियम रेंज के मेड इन चायना सामान की डिमाण्ड भारत में तेज़ी से कम होती जा रही है, इसके पीछे के ठोस कारण हैं; चीन के विरोध के कारण ग्राहकों और व्यापारियों द्वारा भारतीय उत्पादों को तरजीह देना, चीनी सामान की घटिया क्वालिटी, मोदी सरकार द्वारा गुणवत्ता मानकों को कड़ा करना और चीनी सामान पर शुल्क के चलते उनका महंगा होना। कारण जो हो, लेकिन चीन को भारतीय ग्राहकों और व्यापारी ने झटका तो दे ही दिया है।
OCT 29 (WTN) – भारत और चीन के बीच हमेशा से ही कूटनीतिक सम्बन्ध तनावपूर्ण रहे हैं, लेकिन बावजूद इसके दोनों ही देशों के बीच आर्थिक सम्बन्ध बहुत बढ़िया रहे हैं। वित्त वर्ष 2017-18 में दोनों देशों के बीच 62.9 बिलियन डॉलर का व्यापार हुआ था, जो कि अब 90 अरब डॉलर के आसपास पहुंच गया है।
जैसा कि आप जानते हैं कि चीन को सस्ता सामान बनाने की दुनिया की सबसे बड़ी फैक्टी कहा जाता है। ऐसे में भारत समेत दुनिया के तमाम देशों में चीन अपने सस्ते सामानों की खपत करता आया है। और इसी कारण से आज चीन 11 ट्रिलियन डॉलर जीडीपी के साथ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
जहां तक भारत और चीन के बीच व्यापार की बात है तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दोनों ही देशों के बीच हो रहे व्यापार में चीन हमेशा से ही लाभ की स्थिति में रहा है। एक समय था जब दिवाली के समय चीन के बने सामानों से पूरा बाज़ार पटा रहता था। लेकिन पिछले 5 से 6 सालों में देखा गया है कि दिवाली बाज़ारों में चीन के सामानों की मांग में बड़ी तेज़ी से गिरावट आई है। एक जानकारी के मुताबिक़, मेड इन चाइना सामान के आयात में 70 से 80 प्रतिशत की भारी कमी आई है।
दरअसल, मेड इन चाइना सामानों की मांग में भारी कमी के पीछे एक नहीं बल्कि कई कारण हैं। सबसे पहले तो चीनी सामानों की ख़राब गुणवत्ता ही उसकी मांग में गिरावट का सबसे बड़ा एक कारण है। वहीं हाल के सालों में भारत में बने सामानों ने मेड इन चाइना सामान को कड़ी प्रतिस्पर्धा दी है। इन सभी कारणों से दिवाली बाजारों में चीनी सामानों की कुल हिस्सेदारी अब सिर्फ़ 20 से 25 प्रतिशत के क़रीब ही रह गई है।
दिल्ली समेत देश के कई शहरों में इस बार दिवाली पर ज़्यादातर ग्राहकों और व्यापारियों ने भारत में बनी मूर्तियों को ही ज़्यादा तरजीह दी है। वहीं चीन पटाखे, चीन में बने इलेक्ट्रॉनिक आयटम और सजावट के चीनी सामान की भी डिमाण्ड काफ़ी तेज़ी से कम हुई है। दरअसल, प्रतिस्पर्धा के कारण धीरे-धीरे भारतीय उत्पाद चीन से काफ़ी बेहतर होते जा रहे हैं, जिसके कारण ग्राहक और व्यापारी भारतीय सामानों के टिकाऊ होने के कारण चीनी सामानों से ज़्यादा भारतीय सामानों को ज़्यादा तरजीह दे रहे हैं।
जैसा कि आप जानते हैं कि मेड इन चायना कोई एक विश्वसनीय ब्रांड होने से ज़्यादा एक मज़ाक ज़्यादा है। ऐसा इसलिए, क्योंकि चीन में बने सामानों की कई गारण्टी नहीं होती है और टिकाऊ नहीं होते हैं। ऐसे में धीरे-धीरे चीनी सामान की डिमाण्ड भारत में कम होती जा रही है। वहीं मोदी सरकार द्वारा ड्यूटी बढ़ाए जाने के बाद काफ़ी चीनी सामान भारतीय सामान से महंगा है।
साथ ही मोदी सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक आयटम समेत अन्य सामानों की गुणवत्ता को लेकर मानक सख्त कर दिए हैं, और इस कारण से चीन में बने उत्पाद इन मानकों पर खरा नहीं उतर पा रहे हैं। इसी के चलते गुणवत्ता में खरे, मज़बूत और सस्ते भारतीय सामान की चीनी सामान से ज़्यादा डिमाण्ड होने लगी है।
चीन के सामान की मांग में भारी गिरावट की पीछे के कई कारणों में एक कारण चीन के सामान का विरोध भी है। कश्मीर समेत अन्य मुद्दों पर चीन जिस तरह से पाकिस्तान का साथ देता है और भारत के ख़िलाफ़ षड़यंत्र करता रहा है, उससे चीन और चीनी सामान का विरोध देश में बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में लोगों ने भी अपने स्तर पर चीनी सामान का बॉयकॉट करना शुरू कर दिया है, जिससे चीनी सामान की मांग में गिरावट दर्ज की गई है। कहा जा सकता है कि लोगों द्वारा चीन का सामान ख़रीदने के बजाय स्वदेशी सामान को तरजीह देने से चीनी सामान की बिक्री में तेज़ी से गिरावट दर्ज की गई है।
कारण एक नहीं कई हैं, जिसके कारण मेड इन चायना सामान की डिमाण्ड भारत में धीरे-धीरे कम होती जा रही है। हालांकि, अभी भी मोबाइल मार्केट में चीनी कम्पनियों के मोबाइल की डिमाण्ड और सेलिंग सबसे ज़्यादा है। लेकिन सस्ते और मीडियम रेंज के मेड इन चायना सामान की डिमाण्ड भारत में तेज़ी से कम होती जा रही है, इसके पीछे के ठोस कारण हैं; चीन के विरोध के कारण ग्राहकों और व्यापारियों द्वारा भारतीय उत्पादों को तरजीह देना, चीनी सामान की घटिया क्वालिटी, मोदी सरकार द्वारा गुणवत्ता मानकों को कड़ा करना और चीनी सामान पर शुल्क के चलते उनका महंगा होना। कारण जो हो, लेकिन चीन को भारतीय ग्राहकों और व्यापारी ने झटका तो दे ही दिया है।