यदि आपके पास है बिना बिल का गोल्ड तो हो जाएं सावधान!
Wednesday - October 30, 2019 3:51 pm ,
Category : WTN HINDI
ब्लैकमनी पर मोदी सरकार फ़िर करेगी कड़ा प्रहार
यदि है तय सीमा से ज़्यादा गोल्ड तो सरकार को जानकारी देना हो सकता है ज़रूरी!
OCT 30 (WTN) – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देशहित के लिए कड़े फ़ैसले लेने के लिए जाने जाते हैं। नोटबंदी हो या फ़िर जम्मू कश्मीर राज्य से अनुच्छेद 370 को हटाना, प्रधानमंत्री मोदी ने इस तरह के कड़े फ़ैसले लेकर साबित कर दिया है कि वे देशहित के लिए किसी भी तरह के फ़ैसले लेने से पीछे नहीं हटने वाले हैं। अपने एक भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने साफ़ कहा था कि वे समस्याओं को पालना पसन्द नहीं करते हैं। बात करें नोटबंदी की तो मोदी सरकार द्वारा लिये गये नोटबंदी के फ़ैसले को काफ़ी ऐतिहासिक और कड़ा फैसला माना जाता है।
मोदी सरकार का दावा था कि नोटबंदी से काले धन का पता चलेगा और इससे देश की मौद्रिक व्यवस्था में सुधार होगा। नोटबंदी की सफ़लता और असफ़लता के अपने-अपने दावे हैं, लेकिन नोटबंदी का फ़ैसला साबित करता है कि प्रधानमंत्री देश की अर्थव्यवस्था को खोखली कर रही ब्लैक मनी पर समय-समय पर प्रहार करते रहेंगे। और इसके लिए वे कभी भी कोई भी बड़ा और कड़ा क़दम उठा सकते हैं। इसी कड़ी में कहा जाता रहा है कि मोदी सरकार जल्द ही देस की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा क़दम उठाने जा रही है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, ब्लैकमनी से सोना (Gold) ख़रीदने वालों पर लगाम लगाने के लिए मोदी सरकार एक ख़ास स्कीम ला सकती है। जानकारी के अनुसार इनकम टैक्स (Income Tax) की एमनेस्टी स्कीम की तरह ही गोल्ड के लिए भी मोदी सरकार एमनेस्टी स्कीम (Amnesty Scheme) ला सकती है। इस स्कीम के तहत एक तय मात्रा से ज़्यादा बगैर रसीद वाला गोल्ड होने पर उसकी जानकारी देनी होगी और गोल्ड की क़ीमत सरकार को बतानी होगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस एमनेस्टी स्कीम के तहत गोल्ड की क़ीमत तय करने के लिए वैल्यूएशन सेन्टर से बाक़ायदा एक सर्टिफिकेट लेना होगा। इस स्कीम के तहत बगैर रसीद वाले जितने भी गोल्ड का खुलासा होगा, उस गोल्ड पर एक तय मात्रा में टैक्स देने होगा। सरकार की यह महत्वाकांक्षी स्कीम एक निश्चित समय सीमा के लिए ही खोली जाएगी। वहीं स्कीम ख़त्म होने के बाद तय मात्रा से ज़्यादा गोल्ड पाए जाने पर भारी जुर्माना देना होगा। वहीं सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़, मन्दिर और ट्रस्ट के पास जमा गोल्ड को भी प्रोडक्टिव इन्वेस्टमेंट के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए विशेष ऐलान हो सकते हैं।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, एमनेस्टी स्कीम के साथ-साथ गोल्ड को एसेट क्लास के तौर पर बढ़ावा देने के भी ऐलान हो सकते हैं। इस योजना के तहत सोवरन गोल्ड बॉन्ड स्कीम को आकर्षक बनाने के लिए कई अहम बदलाव किए जा सकते हैं। वहीं सोवरन गोल्ड बॉन्ड सर्टिफिकेट को मोर्गेज करने का भी विकल्प लोगों को दिया जा सकता है।
वहीं कहां जा रहा है कि मोदी सरकार एक गोल्ड बोर्ड बनाने का ऐलान भी कर सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि सरकार गोल्ड को घरों में जमा के तौर पर रखने के बजाय उसका इस्तेमाल प्रोडक्टिव इनवेस्टमेंट के तौर पर करना चाहती है। जैसा कि आप जानते हैं कि पूरी दुनिया में भारत में गहने बनाने में सोने की सबसे ज़्यादा खपत है। जानकारी के मुताबिक़, हर साल भारत में क़रीब 849 मैट्रिक टन सोने की खपत है।
भारत में लोग सोने में सबसे ज़्यादा इन्वेस्ट करना पसंद करते हैं। जानकारी के मुताबिक़, भारत में लाखों टन सोना घरों में रखा हुआ है। मोदी सरकार की मंशा है कि घरों में रखे इस गोल्ड का सही तरीक़े से इन्वेस्ट होना ज़रूरी है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। इस योजना को जल्द ही कैबिनेट से मन्ज़ूरी मिलने की बात कही जा रही है।
यदि मोदी सरकार गोल्ड पर इस तरह का कोई भी फ़ैसला लेते है तो इसे भी नोटबंदी के तरह ही एक ऐतिहासिक फ़ैसला माना जाएगा। जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि भारत में सोना की हर साल टनों में खपत होती है, तो ऐसे में इस सोने का इस्तेमाल मोदी सरकार प्रोडक्टिव इनवेस्टमेंट के तौर पर करना चाहती है।
लेकिन मोदी सरकार के इस फ़ैसले से उन लोगों को काफ़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, जिनके पास ब्लैकमनी से ख़रीदा गया सोना है या फ़िर जिनके पास गोल्ड ख़रीदी की रसीद नहीं है। यानी कि साफ़ ज़ाहिर है कि मोदी सरकार एक बार फ़िर से ब्लैक मनी पर कड़ा प्रहार करने जा रही है।
OCT 30 (WTN) – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देशहित के लिए कड़े फ़ैसले लेने के लिए जाने जाते हैं। नोटबंदी हो या फ़िर जम्मू कश्मीर राज्य से अनुच्छेद 370 को हटाना, प्रधानमंत्री मोदी ने इस तरह के कड़े फ़ैसले लेकर साबित कर दिया है कि वे देशहित के लिए किसी भी तरह के फ़ैसले लेने से पीछे नहीं हटने वाले हैं। अपने एक भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने साफ़ कहा था कि वे समस्याओं को पालना पसन्द नहीं करते हैं। बात करें नोटबंदी की तो मोदी सरकार द्वारा लिये गये नोटबंदी के फ़ैसले को काफ़ी ऐतिहासिक और कड़ा फैसला माना जाता है।
मोदी सरकार का दावा था कि नोटबंदी से काले धन का पता चलेगा और इससे देश की मौद्रिक व्यवस्था में सुधार होगा। नोटबंदी की सफ़लता और असफ़लता के अपने-अपने दावे हैं, लेकिन नोटबंदी का फ़ैसला साबित करता है कि प्रधानमंत्री देश की अर्थव्यवस्था को खोखली कर रही ब्लैक मनी पर समय-समय पर प्रहार करते रहेंगे। और इसके लिए वे कभी भी कोई भी बड़ा और कड़ा क़दम उठा सकते हैं। इसी कड़ी में कहा जाता रहा है कि मोदी सरकार जल्द ही देस की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा क़दम उठाने जा रही है।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, ब्लैकमनी से सोना (Gold) ख़रीदने वालों पर लगाम लगाने के लिए मोदी सरकार एक ख़ास स्कीम ला सकती है। जानकारी के अनुसार इनकम टैक्स (Income Tax) की एमनेस्टी स्कीम की तरह ही गोल्ड के लिए भी मोदी सरकार एमनेस्टी स्कीम (Amnesty Scheme) ला सकती है। इस स्कीम के तहत एक तय मात्रा से ज़्यादा बगैर रसीद वाला गोल्ड होने पर उसकी जानकारी देनी होगी और गोल्ड की क़ीमत सरकार को बतानी होगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस एमनेस्टी स्कीम के तहत गोल्ड की क़ीमत तय करने के लिए वैल्यूएशन सेन्टर से बाक़ायदा एक सर्टिफिकेट लेना होगा। इस स्कीम के तहत बगैर रसीद वाले जितने भी गोल्ड का खुलासा होगा, उस गोल्ड पर एक तय मात्रा में टैक्स देने होगा। सरकार की यह महत्वाकांक्षी स्कीम एक निश्चित समय सीमा के लिए ही खोली जाएगी। वहीं स्कीम ख़त्म होने के बाद तय मात्रा से ज़्यादा गोल्ड पाए जाने पर भारी जुर्माना देना होगा। वहीं सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़, मन्दिर और ट्रस्ट के पास जमा गोल्ड को भी प्रोडक्टिव इन्वेस्टमेंट के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए विशेष ऐलान हो सकते हैं।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, एमनेस्टी स्कीम के साथ-साथ गोल्ड को एसेट क्लास के तौर पर बढ़ावा देने के भी ऐलान हो सकते हैं। इस योजना के तहत सोवरन गोल्ड बॉन्ड स्कीम को आकर्षक बनाने के लिए कई अहम बदलाव किए जा सकते हैं। वहीं सोवरन गोल्ड बॉन्ड सर्टिफिकेट को मोर्गेज करने का भी विकल्प लोगों को दिया जा सकता है।
वहीं कहां जा रहा है कि मोदी सरकार एक गोल्ड बोर्ड बनाने का ऐलान भी कर सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि सरकार गोल्ड को घरों में जमा के तौर पर रखने के बजाय उसका इस्तेमाल प्रोडक्टिव इनवेस्टमेंट के तौर पर करना चाहती है। जैसा कि आप जानते हैं कि पूरी दुनिया में भारत में गहने बनाने में सोने की सबसे ज़्यादा खपत है। जानकारी के मुताबिक़, हर साल भारत में क़रीब 849 मैट्रिक टन सोने की खपत है।
भारत में लोग सोने में सबसे ज़्यादा इन्वेस्ट करना पसंद करते हैं। जानकारी के मुताबिक़, भारत में लाखों टन सोना घरों में रखा हुआ है। मोदी सरकार की मंशा है कि घरों में रखे इस गोल्ड का सही तरीक़े से इन्वेस्ट होना ज़रूरी है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। इस योजना को जल्द ही कैबिनेट से मन्ज़ूरी मिलने की बात कही जा रही है।
यदि मोदी सरकार गोल्ड पर इस तरह का कोई भी फ़ैसला लेते है तो इसे भी नोटबंदी के तरह ही एक ऐतिहासिक फ़ैसला माना जाएगा। जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि भारत में सोना की हर साल टनों में खपत होती है, तो ऐसे में इस सोने का इस्तेमाल मोदी सरकार प्रोडक्टिव इनवेस्टमेंट के तौर पर करना चाहती है।
लेकिन मोदी सरकार के इस फ़ैसले से उन लोगों को काफ़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, जिनके पास ब्लैकमनी से ख़रीदा गया सोना है या फ़िर जिनके पास गोल्ड ख़रीदी की रसीद नहीं है। यानी कि साफ़ ज़ाहिर है कि मोदी सरकार एक बार फ़िर से ब्लैक मनी पर कड़ा प्रहार करने जा रही है।