जानिए कैसे एक बड़ी चिन्ता से प्रधानमंत्री मोदी ने दिलाई भारतीयों को मुक्ति?
Thursday - October 31, 2019 1:26 pm ,
Category : WTN HINDI
सऊदी अरब से निर्बाध जारी रहेगी कच्चे तेल की आपूर्ति
एक बार फ़िर रंग लाई प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति
OCT 31 (WTN) – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी सफ़ल कूटनीति के लिए जाने जाते हैं। कश्मीर मुद्दे पर जिस तरह से उन्होंने पाकिस्तान को दुनिया के लगभग हर मंच पर अकेला कर दिया है, उससे साबित होता है कि प्रधानमंत्र मोदी बहुत बड़े कूटनीतिकार हैं। जम्मू कश्मीर राज्य से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद कहा जा रहा था कि मुस्लिम देश और ख़ासकर खाड़ी के देश भारत से नाराज़ हो सकते हैं और भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने जम्मू कश्मीर राज्य से अनुच्छेद 370 ख़त्म भी कर दिया और सऊदी अरब और यूएई जैसे मुस्लिम देशों ने भारत के इस क़दम का यह कहकर समर्थन किया कि कश्मीर पर लिया गया भारत सरकार का फ़ैसला भारत का आंतरिक मामला है।
प्रधानमंत्री मोदी जानते हैं कि तेज़ी से विकास करती भारत की अर्थव्यवस्था के लिए कच्चे तेल की सतत निर्बाध आपूर्ति काफ़ी ज़रूरी है। 90 के शुरूआती दशक में खाड़ी युद्ध के समय भारत को कच्चे तेल और रसोई गैस की आपूर्ति में काफ़ी परेशानी का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद भारत सरकार ने आपातस्थिति के लिए तेल रिज़र्व बना कर रखे हैं। लेकिन जैसा कि आप जानते हैं कि हाल ही में दुनिया की सबसे बड़ी तेल कम्पनी सऊदी अरब की सरकारी तेल कम्पनी अरामको (Aramco) के दो तेल संयंत्रों पर ड्रोन से हमले हुए थे।
अरामको के संयंत्रों पर हुए हमले के बाद कच्चे तेल के भाव में काफ़ी तेज़ी आई थे, जिसके कारण भारत में पेट्रोल और डीज़ल के दामों में इज़ाफ़ा हुआ था। लेकिन पहले से ही आर्थिक मंदी से जूझ रहे भारत के लिए कच्चे तेल की क़ीमतों में वृद्धि चिन्ता का कारण थी। इसी सब के बीच, मोदी सरकार ने अपनी कूटनीति का सहारा लिया और सऊदी अरब से निर्बाध तेल आपूर्ति के लिए प्रयास शुरू किये।
अरामको के तेल संयंत्रों पर हमले के बाद कच्चे तेल की क़ीमतों में वृद्धि से परेशान भारत सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बातचीत का सहारा लिया। इसलिए पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री अब्दुल अज़ीज़ बिन सलमान से फ़ोन पर बाच की थी और उनसे अनुरोध किया था कि वे भारत को होने वाले कच्चे तेल की सप्लाई को प्रभावित करने की अनुमति न दें।
इस सबके बीच, मीडिया से मिल जानकारी के मुताबिक़, सऊदी अरब ने भारत को आश्वासन दिया है कि सऊदी अरब तेल का एक विश्वसनीय और भरोसेमंद स्रोत भारत के लिए बना रहेगा। इतना ही नहीं, सऊदी अरब का कहना है कि भारत को जितने भी तेल की ज़रूरत होगी, सऊदी अरब उसे मुहैया कराएगा।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत अपनी तेल ज़रूरत का 18 प्रतिशत तेल सऊदी अरब से ख़रीदता है। जहां तक सऊदी अरब से तेल आयात की बात है तो पिछले साल भारत ने 39.8 मिलियन मीट्रिक टन कच्चा तेल सऊदी अरब से आयात किया था। वहीं एलपीजी के मामले में भी भारत काफ़ी हद तक सऊदी अरब पर निर्भर है। भारत अपनी एलपीजी ज़रूरत का 30 प्रतिशत सऊदी अरब से आयात करता है।
जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि सऊदी अरब में अरामको के दो तेल संयंत्र पर हमले के बाद पूरी दुनिया में कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई थी, लेकिन सऊदी अरब ने इसके बावजूद भारत को निरन्तर तेल की आपूर्ति जारी रखी। अभी हाल ही में सऊदी अरब दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने परेशानी के बावजूद निरंतर तेल आपूर्ति के लिए सऊदी अरब के किंग मोहम्मद बिन सलमान को व्यक्तिगत रूप से धन्यवाद दिया था।
वहीं प्रधानमंत्री मोदी को एक और कूटनीतिक सफ़लता हासिल हुई है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सऊदी अरब ने भारत के साथ समान साझेदारी पर हस्ताक्षर किये हैं। ज्ञात हो कि ब्रिटेन, फ्रांस और चीन के साथ सऊदी अरब पहले से ही समान साझेदारी पर हस्ताक्षर कर चुका है और भारत, सऊदी अरब के साथ इस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाला चौथा देश है। समान साझेदारी पर हस्ताक्षर होन से भारत को सऊदी अरब से काफ़ी आर्थिक लाभ मिलने के अवसर खुलेंगे और सऊदी अरब के भारत में निवेश के मौक़े बढ़ेंगे, जिससे भारतीय लोगों को रोज़गार मिलेगा।
वहीं सऊदी अरब के साथ कूटनीतिक सम्बन्ध बढ़ाने के लिए भारत ने अब तुर्की को झटका देना शुरू भी कर दिया है। दरअसल, मुस्लिम देशों के बीच वर्चस्व स्थापित करने के लिए सऊदी अरब और तुर्की के बीच कूटनीतिक लड़ाई जारी है। वहीं संयुक्त राष्ट्र महासभा में तुर्की द्वारा कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का साथ देने के कारण मोदी सरकार ने तुर्की को सबक सिखाने का फ़ैसला लिया है, इसी के तहत भारत ने अब सऊदी अरब को ज़्यादा तरजीह देना शुरू कर दिया है। ज़ाहिर है कि मोदी सरकार ने अपनी कूटनीति के चलते लम्बे समय तक निर्बाध रूप से तेल की आपूर्ति भारत के लिए सुनिश्चित कर ली है।
OCT 31 (WTN) – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी सफ़ल कूटनीति के लिए जाने जाते हैं। कश्मीर मुद्दे पर जिस तरह से उन्होंने पाकिस्तान को दुनिया के लगभग हर मंच पर अकेला कर दिया है, उससे साबित होता है कि प्रधानमंत्र मोदी बहुत बड़े कूटनीतिकार हैं। जम्मू कश्मीर राज्य से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद कहा जा रहा था कि मुस्लिम देश और ख़ासकर खाड़ी के देश भारत से नाराज़ हो सकते हैं और भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने जम्मू कश्मीर राज्य से अनुच्छेद 370 ख़त्म भी कर दिया और सऊदी अरब और यूएई जैसे मुस्लिम देशों ने भारत के इस क़दम का यह कहकर समर्थन किया कि कश्मीर पर लिया गया भारत सरकार का फ़ैसला भारत का आंतरिक मामला है।
प्रधानमंत्री मोदी जानते हैं कि तेज़ी से विकास करती भारत की अर्थव्यवस्था के लिए कच्चे तेल की सतत निर्बाध आपूर्ति काफ़ी ज़रूरी है। 90 के शुरूआती दशक में खाड़ी युद्ध के समय भारत को कच्चे तेल और रसोई गैस की आपूर्ति में काफ़ी परेशानी का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद भारत सरकार ने आपातस्थिति के लिए तेल रिज़र्व बना कर रखे हैं। लेकिन जैसा कि आप जानते हैं कि हाल ही में दुनिया की सबसे बड़ी तेल कम्पनी सऊदी अरब की सरकारी तेल कम्पनी अरामको (Aramco) के दो तेल संयंत्रों पर ड्रोन से हमले हुए थे।
अरामको के संयंत्रों पर हुए हमले के बाद कच्चे तेल के भाव में काफ़ी तेज़ी आई थे, जिसके कारण भारत में पेट्रोल और डीज़ल के दामों में इज़ाफ़ा हुआ था। लेकिन पहले से ही आर्थिक मंदी से जूझ रहे भारत के लिए कच्चे तेल की क़ीमतों में वृद्धि चिन्ता का कारण थी। इसी सब के बीच, मोदी सरकार ने अपनी कूटनीति का सहारा लिया और सऊदी अरब से निर्बाध तेल आपूर्ति के लिए प्रयास शुरू किये।
अरामको के तेल संयंत्रों पर हमले के बाद कच्चे तेल की क़ीमतों में वृद्धि से परेशान भारत सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बातचीत का सहारा लिया। इसलिए पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री अब्दुल अज़ीज़ बिन सलमान से फ़ोन पर बाच की थी और उनसे अनुरोध किया था कि वे भारत को होने वाले कच्चे तेल की सप्लाई को प्रभावित करने की अनुमति न दें।
इस सबके बीच, मीडिया से मिल जानकारी के मुताबिक़, सऊदी अरब ने भारत को आश्वासन दिया है कि सऊदी अरब तेल का एक विश्वसनीय और भरोसेमंद स्रोत भारत के लिए बना रहेगा। इतना ही नहीं, सऊदी अरब का कहना है कि भारत को जितने भी तेल की ज़रूरत होगी, सऊदी अरब उसे मुहैया कराएगा।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत अपनी तेल ज़रूरत का 18 प्रतिशत तेल सऊदी अरब से ख़रीदता है। जहां तक सऊदी अरब से तेल आयात की बात है तो पिछले साल भारत ने 39.8 मिलियन मीट्रिक टन कच्चा तेल सऊदी अरब से आयात किया था। वहीं एलपीजी के मामले में भी भारत काफ़ी हद तक सऊदी अरब पर निर्भर है। भारत अपनी एलपीजी ज़रूरत का 30 प्रतिशत सऊदी अरब से आयात करता है।
जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि सऊदी अरब में अरामको के दो तेल संयंत्र पर हमले के बाद पूरी दुनिया में कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई थी, लेकिन सऊदी अरब ने इसके बावजूद भारत को निरन्तर तेल की आपूर्ति जारी रखी। अभी हाल ही में सऊदी अरब दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने परेशानी के बावजूद निरंतर तेल आपूर्ति के लिए सऊदी अरब के किंग मोहम्मद बिन सलमान को व्यक्तिगत रूप से धन्यवाद दिया था।
वहीं प्रधानमंत्री मोदी को एक और कूटनीतिक सफ़लता हासिल हुई है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सऊदी अरब ने भारत के साथ समान साझेदारी पर हस्ताक्षर किये हैं। ज्ञात हो कि ब्रिटेन, फ्रांस और चीन के साथ सऊदी अरब पहले से ही समान साझेदारी पर हस्ताक्षर कर चुका है और भारत, सऊदी अरब के साथ इस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाला चौथा देश है। समान साझेदारी पर हस्ताक्षर होन से भारत को सऊदी अरब से काफ़ी आर्थिक लाभ मिलने के अवसर खुलेंगे और सऊदी अरब के भारत में निवेश के मौक़े बढ़ेंगे, जिससे भारतीय लोगों को रोज़गार मिलेगा।
वहीं सऊदी अरब के साथ कूटनीतिक सम्बन्ध बढ़ाने के लिए भारत ने अब तुर्की को झटका देना शुरू भी कर दिया है। दरअसल, मुस्लिम देशों के बीच वर्चस्व स्थापित करने के लिए सऊदी अरब और तुर्की के बीच कूटनीतिक लड़ाई जारी है। वहीं संयुक्त राष्ट्र महासभा में तुर्की द्वारा कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का साथ देने के कारण मोदी सरकार ने तुर्की को सबक सिखाने का फ़ैसला लिया है, इसी के तहत भारत ने अब सऊदी अरब को ज़्यादा तरजीह देना शुरू कर दिया है। ज़ाहिर है कि मोदी सरकार ने अपनी कूटनीति के चलते लम्बे समय तक निर्बाध रूप से तेल की आपूर्ति भारत के लिए सुनिश्चित कर ली है।