BrahMos WORLD INDIA MADHYA PRADESH BHOPAL WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RELIGION SPORTS BUSINESS FUN FACTS ENTERTAINMENT LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE SCIENCE & TECHNOLOGY HEALTH EDUCATION DIASPORA OPINION & INTERVIEW RECIPES DRINKS BIG MEMSAAB 2017 BUDGET 2017 FUNNY VIDEOS VIRAL ON WEB PICTURE STORIES Mahakal Ke Darshan
WTN HINDI ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
logo
Breaking News

आतंक के मामले में आख़िरकार नहीं सुधर रहा पाकिस्तान!

Monday - November 4, 2019 2:23 pm , Category : WTN HINDI
एक अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक़ पाकिस्तान में जारी है टेरर फण्डिंग
एक अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक़ पाकिस्तान में जारी है टेरर फण्डिंग

आतंक के ख़िलाफ़ कार्रवाई के नाम पर अमेरिका को धोखा दे रहा पाकिस्तान
 
NOV 04 (WTN) – पाकिस्तान को यदि आतंकिस्तान कहा जाए तो कुछ भी ग़लत नहीं होगा, क्योंकि जिस तरह से पाकिस्तान, भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता रहता है, उससे साबित होता है कि पाकिस्तान आतंकियों का गढ़ बन गया है और इन आतंकियों को आश्रय देने में पाकिस्तान की सरकार और वहां की सेना का पूरा सहयोग है। ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान की करतूतों की जानकारी पूरी दुनिया को नहीं है, पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में वहां की सरकार और सेना के संरक्षण से ही आतंकी पल बढ़ रहे हैं।

पाकिस्तान की आतंकी गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए मोदी सरकार ने काफ़ी प्रयास किये हैं और पूरी दुनिया के सामने पाकिस्तान की पोल खोली है कि पाकिस्तान किस तरह से भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है। मोदी सरकार के ही प्रयास थे कि टेरर फण्डिंग पर नज़र रखने वाली वैश्विक संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स यानि की FATF (Financial Action Task Force) के एशिया पैसेफिक ग्रुप ने पाकिस्तान को ब्लैक-लिस्टेड कर दिया है। इतना ही नहीं, यदि आने वाले समय में पाकिस्तान ने टेरर फण्डिंग के मामले में कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं की तो FATF भी पाकिस्तान को ब्लैक-लिस्टेड कर सकता है।
 
हालांकि, चीन, तुर्की और मलेशिया ने अपने-अपने स्वार्थ के कारण FATF की पेरिस बैठक में पाकिस्तान को ब्लैक-लिस्टेड होने से बचा लिया, लेकिन पाकिस्तान के लिए अमेरिका की एक टेरर फण्डिंग रिपोर्ट मुसीबत खड़े करने वाली है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि टेरर फण्डिंग को लेकर एक अमेरिकी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान आतंकवादी समूहों की फण्डिंग रोकने में पूरी तरह से असफ़ल साबित हुआ है। अमेरिकी की इस रिपोर्ट के बाद अमेरिकी संसद पर पाकिस्तान पर कड़ी आर्थिक कार्रवाई करने का दबाव बन गया है।
 
दरअसल, आतंकवाद को लेकर अमेरिकी संसद के प्रस्ताव पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने साल 2018 के आधार पर एक वार्षिक रिपोर्ट जारी की है। वैश्विक आतंकवाद पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी इस रिपोर्ट के आधार पर कहा जा रहा है कि अमेरिकी संसद, पाकिस्तान को मिलने वाली आर्थिक मदद पर रोक लगा सकती है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान अपनी ज़मीन पर पल रहे आतंकवादी समूहों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।

इतना ही नहीं, वैश्विक आतंकवाद पर आधारित इस रिपोर्ट में तो यह भी दावा किया है कि पाकिस्तान सरकार आतंकवादी संगठनों के लिए धन जुटाने में मदद कर रही है। अमेरिकी रिपोर्ट से भारत सरकार के उन दावों की पुष्टि होती है, जिसमें कहा जाता रहा है कि पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के लिए खुलेआम लोगों से फण्ड एकत्रित किया जाता रहा है।

पाकिस्तान में आतंकियों को खुलेआम फण्डिंग होती है और उन्हें सरकार और सेना का संरक्षण हासिल है, इसे पूरी दुनिया अब जान चुकी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हाल ही में FATF ने आतंकी समूहों पर कार्रवाई के लिए 27 एक्शन प्वाइंट्स पर ठोस कार्रवाई करने को कहा था ताकि टेरर फण्डिंग को रोका जा सके। लेकिन पाकिस्तान इन 27 एक्शन प्वाइंट्स में से 22 प्वाइंट्स पर कोई कार्रवाई करने में नाकामयाब साबित रहा। वहीं पाकिस्तान ने सिर्फ़ 5 प्वाइंट्स पर दिखाने के लिए सिर्फ़ आंशिक क़दम उठाए थे।

टेरर फण्डिंग रोकने में नाकामयाब साबित हो रहे पाकिस्तान को FATF ने फरवरी 2020 तक बाक़ी बचे 22 प्वाइंट्स पर ठोस कार्रवाई करने की समय सीमा दी है। यदि पाकिस्तान इस समय तक टेरर फण्डिग रोकने में असफ़ल साबित होता है तो FATF पाकिस्तान पर कड़ी कार्रवाई करते हुए उसे ब्लैक-लिस्टेड कर देगा और ऐसा होने से पाकिस्तान की विदेश से मिलने वाली आर्थिक सहायता रूक जाएगी।

वैसे कहा जा रहा है कि वैश्विक आतंकवाद पर रिपोर्ट आने के बाद अमेरिकी संसद पर दबाव रहेगा कि वो पाकिस्तान पर कोई ठोस कार्रवाई करे। लेकिन अमेरिकी सरकार के पाकिस्तान के साथ हितों को देखते हुए यह साफ़ तौर पर कहा नहीं जा सकता है कि अमेरिकी सरकार इस रिपोर्ट की आधार पर पाकिस्तान पर ठोस कार्रवाई करती है कि नहीं। दरअसल, अफगानिस्तान से तालिबान के सफाये के लिए अमेरिका को पाकिस्तान की मदद की हमेशा से ही ज़रूरत रही है और अमेरिकी की इसी मजबूरी के कारण पाकिस्तान ने आतंक से लड़ाई के नाम पर अमेरिका से काफ़ी आर्थिक सहायता हासिल की है।
 
वैसे वैश्विक आतंकवाद पर जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान, तालिबान के साथ चल रही अमेरिका की शान्ति वार्ता में कोई मदद नहीं कर रहा है। इतना ही नहीं, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अफगानिस्तान में सक्रिय तालिबान आतंकी समूह हक्कानी गुट को पाकिस्तान अभी भी मदद कर रहा है। अफगानिस्तान से जल्द से जल्द अपनी सेना की वापसी की योजना बना रहे अमेरिका के रूख में पाकिस्तान को लेकर बदलाव भी आ सकता है। अमेरिकी मामलों के जानकारों के मुताबिक़, मोदी सरकार की पाकिस्तान को अलग-थलग करने की कूटनीति के कारण ही भारत और अमेरिका के बीच सम्बन्धों में घनिष्ठता आई है।

वैसे पाकिस्तान के प्रति अमेरिका के बदलते रूख से भारत को फ़ायदा होता दिख रहा है। जैसा कि आप जानते हैं कि भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संवैधानिक प्रावधान अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी कर दिया है और राज्य को दो केन्द्र शासित प्रदेशों में बांट दिया है। भारत सरकार के इस आंतरिक मामले का पाकिस्तान ने जमकर विरोध किया है और इस मुद्दे को हर वैश्विक मंच पर उठाने का प्रयास भी किया है, लेकिन मोदी सरकार की कुशल कूटनीति का नतीजा ही था कि जम्मू कश्मीर मुद्दे पर अमेरिका, भारतीय नज़रिये के साथ खड़ा आया।

जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि वैश्विक आतंकवाद पर अमेरिकी रिपोर्ट आने के बाद अमेरिकी सरकार अपने हितों को देखते हुए ही पाकिस्तान पर कोई भी कार्रवाई करेगी। दरअसल, अमेरिका को डर है कि पाकिस्तान के परमाणु हथियार कभी भी आतंकी समूहों के हाथ में लग सकते हैं, जिसके कारण अमेरिका के सामने मजबूरी है कि वो पाकिस्तान को आर्थिक रूप से इतना शक्तिशाली रख सके, जिससे आर्थिक सहायता हासिल होने के लालच में आतंकियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई का दवाब पाकिस्तान पर बना रहे।

अमेरिका-पाकिस्तान सम्बन्धों के जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान अमेरिका विरोधी रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान न्यूयॉर्क पहुंचे इमरान ख़ान ने एक टीवी शो में ना केवल न्यूयॉर्क की सड़कों की आलोचना की थी, बल्कि अमेरिका को यह नसीहत तक दे डाली थी कि वो अफगानिस्तान में लड़ाई के नाम पर अरबों डॉलर बर्बाद कर रहा है। जैसा कि आप जानते हैं कि इन दिनों पाकिस्तान, चीन के साथ-साथ तुर्की के ज़रा ज़्यादा ही क़रीब होता नज़र आ रहा है।

चीन के साथ पाकिस्तान के काफ़ी पुराने आर्थिक और सैन्य रिश्ते रहे हैं। वहीं चीन की सीपीईसी जैसे महत्वाकांक्षी परियोजना का काम भी पाकिस्तान में चल रहा है और चीन ने पाकिस्तान को अरबों डॉलर का क़र्ज़ भी दे रखा है।

वैसे चीन पाकिस्तान को आर्थिक मदद देता रहता है, लेकिन उसके बदले पाकिस्तान को बहुत कुछ चीन की तानाशाही को भी सहना पड़ता है। वहीं पाकिस्तान को अमेरिका से मिलने वाली मदद आतंक के ख़िलाफ़ लड़ने के नाम पर मिलती है, जिसका पूरी तरह से दुरूपयोग पाकिस्तान करता आया है। पाकिस्तान जानता है कि यदि उसे वैश्विक आर्थिक संगठनों जैसे विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से क़र्ज़ लेना है तो उसे अमेरिकी मदद की ज़रूरत पड़ेगी।
 
अब देखना होगा कि अमेरिका, वैश्विक आतंकवाद रिपोर्ट के मामले में पाकिस्तान पर क्या कार्रवाई करता है। वैसे यदि देखा जाए तो पाकिस्तान ने आतंक के ख़िलाफ़ कार्रवाई के नाम पर सिर्फ़ और सिर्फ़ अमेरिका से आर्थिक सहायता ही हासिल की है और आतंकियों के ख़िलाफ़ कोई भी ठोस कार्रवाई नहीं की है। ऐसे में अमेरिका, अफगानिस्तान, तालिबान, चीन और ख़ासकर पाकिस्तान के साथ अपने हितों को देखकर ही वैश्विक आतंकवाद पर आई रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई करेगा।