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ई-कॉमर्स कम्पनियों के ख़िलाफ़ व्यापारियों की आरपार की लड़ाई

Tuesday - November 5, 2019 3:05 pm , Category : WTN HINDI
7 करोड़ व्यापारी उतरेंगे ऑनलाइन शॉपिंग कम्पनियों के ख़िलाफ़ मैदान में
7 करोड़ व्यापारी उतरेंगे ऑनलाइन शॉपिंग कम्पनियों के ख़िलाफ़ मैदान में

ई-कॉमर्स कम्पनियों पर लगे गम्भीर आरोप, गुस्साए व्यापारी करेंगे बड़ा आन्दोलन

NOV 05 (WTN) – फ्लिपकार्ट और अमेज़न जैसे ई-कॉमर्स कम्पनियों से तो आप ऑनलाइन शॉपिंग करते ही होंगे। एक उपभोक्ता के रूप में आपका इन ई-कॉमर्स कम्पनियों में शॉपिंग का अनुभव अच्छा ही रहा होगा, क्योंकि ऑनलाइन शॉपिंग में आपको अपने पसंद के सामान की वैरायटी मिल जाती है और बाज़ार की तुलना में वही सामान कम से कम दाम पर उपलब्ध हो जाता है। एक उपभोक्ता के लिए ई-कॉमर्स कम्पनियां से ख़रीददारी एक फ़ायदे का सौदा है, लेकिन देश के व्यापारियों को फ्लिपकार्ट और अमेज़न जैसे ई-कॉमर्स कम्पनियों के कारण भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है और इसी कारण से अब इन ऑनलाइन शॉपिंग कम्पनियों के ख़िलाफ़ पूरे देश में व्यापारी बहुत बड़ा आन्दोलन करने जा रहे हैं।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बड़ी ई-कॉमर्स कम्पनियों जैसे अमेज़न और फ्लिपकार्ट के ख़िलाफ़ देश के बड़े व्यापारी संगठन CAIT (Confederation Of All India Traders) ने देशभर में बड़े आंदोलन की घोषणा की है। कैट का आरोप है कि ई-कॉमर्स कम्पनियों के कारण भारत का रिटेल व्यापार बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गया है। व्यापारियों का कहना है कि ई-कॉमर्स कम्पनियों की ग़लत व्यापारिक रणनीति के कारण रिटेल व्यापारी प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पा रहे हैं और उनकी ग्राहकी आधी हो गई है। ऐसे में व्यापारियों की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए ई-कॉमर्स कम्पनियों के ख़िलाफ़ CAIT रणनीति बना रहा है।

दरअसल, कैट का आरोप है कि अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स कम्पनियां अपने पोर्टल पर पहले की ही तरह लागत से भी कम मल्य पर अपना माल बेच रही हैं और निमयों का उल्लंघन कर रही हैं। इतना ही नहीं यह कम्पनियां ऑनलाइन मार्केटिंग में अपने उत्पादों पर भारी छूट दे रही हैं, जिसके कारण बल्क में आयटम बिकने से ई-कॉमर्स कम्पनियों का तो फ़ायदा हो रहा है लेकिन इस कारण से दुकानों पर ग्राहकों ने ख़रीददारी कम कर दिया है, जिसके कारण रिटेल व्यापारियों को काफ़ी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
 
इतना ही नहीं, व्यापारियों का आरोप है कि ई-कॉमर्स कम्पनियां अपने पोर्टल पर होने वाली बिक्री को नियंत्रित करती हैं, वहीं अपनी पसंद के विक्रेताओं को अपने पोर्टल पर ज़्यादा ऑर्डर देने में भी ई-कॉमर्स कम्पनियां वादे से पीछे हट रही हैं। इतना ही नहीं, व्यापारियों का आरोप है कि ऑनलाइन श़ॉपिंग के कारण ई-कॉमर्स कम्पनियों ने बाज़ार में क़ीमतों को प्रभावित किया है, जिस कारण से रिटेल व्यापार करने वाले व्यापारियों को काफ़ी परेशान का सामना करना पड़ रहा है।
 
इन्हीं सब कारणों से ई-कॉमर्स कम्पनियों के ख़िलाफ़ CAIT एक बड़ा आन्दोलन करने जा रहा है, जिसमें व्यापारियों के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट्स, छोटे उद्योगपतियों, किसानों, हॉकर्स, ग्राहकों और उद्यमियों समेत स्वदेशी जागरण मंच को भी जोड़ा जाएगा। अपने आन्दोलन के बारे में CAIT का कहना है कि ई-कॉमर्स कम्पनियों द्वारा की जा रही नियमों के अवहेलना से देश के क़रीब 7 करोड़ व्यापारियों के व्यापार पर विपरित असर पड़ा है।

CAIT के अनुसार देश में लगभग 7 करोड़ व्यापारी हैं, जो कि क़रीब 30 करोड़ लोगों को रोज़गार देते हैं और देश का रिटेल व्यापार हर साल क़रीब 42 लाख करोड़ रुपये का है। लेकिन बहुराष्ट्रीय कम्पनियां धीरे-धीरे योजनाबद्ध तरीक़े से भारतीय रिटेल बाज़ार पर कब्ज़ा करना चाहती हैं। यदि ऐसा होता है तो इससे ना केवल लाखों व्यापारियों का धंधा चौपट होगा बल्कि व्यापारियों का धंधा चौपट होने से करोड़ों बेरोज़गार हो जाएंगे।
 
वैसे अपने आन्दोलन से पहले CAIT ई-कॉमर्स कम्पनियों के ख़िलाफ़ केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से पहले ही शिकायत कर चुका है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि CAIT की शिकायत के बाद केन्द्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने फ्लिपकार्ट और अमेज़न से नियमों के उल्लंघन के ख़िलाफ़ मिली शिकायत पर जवाब तलब किया है। वहीं CAIT ने राजस्थान हाईकोर्ट के जोधपुर बेंच में भी इस मुद्दे पर एक याचिका दायर की है।
 
CAIT के मुताबिक़, ई-कॉमर्स कम्पनियां सरकार द्वारा लागू की गई नीतियों का खुलेआम उल्लंघन करती हैं। इतना ही नहीं, यह कम्पनियां भारत के ई-कॉमर्स बाज़ार को कैप्चर करने के लिए मनमानी करती हैं और नियमों की परवाह तक नहीं करती हैं। CAIT की मांग है कि सरकार की ओर से ई-कॉमर्स पॉलिसी को लाने में अब देरी नहीं करना चाहिए। साथ ही CAIT की मांग है कि पिछले दो सालों में ई-कॉमर्स कम्पनियों ने जिन भी नीतियों का उल्लंघन किया है, उसकी जांच के लिए एक विशेष जांच दल गठित किया जाना चाहिए और दोषी कम्पनियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं CAIT की सरकार से गुजारिश है कि ई-कॉमर्स पॉलिसी को समुचित रूप से लागू करने के लिए एक रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन किया जाना चहिए। इतना ही नहीं वहीं जो पाबंदियां एफडीआई में लागू हैं वे ही पाबंदियां घरेलू ई-कॉमर्स कम्पनियों पर भी लागू की जाएं जिससे बाज़ार में एकरूपता बनी रहे और किसी के भी साथ कोई भी भेदभाव न हो।

ई-कॉमर्स कम्पनियों के ख़िलाफ़ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के तहत 13 नवम्बर को CAIT के प्रतिनिधिमण्डल के व्यापारी देशभर में लोकसभा और राज्य सभा के सभी सांसदों को ज्ञापन देंगे। वहीं 20 नवम्बर को देश के सभी राज्यों में लगभग 200 शहरों में धरने आयोजित किए जाएंगे। वहीं 25 नवम्बर को देश के 500 से ज़्यादा ज़िलों में व्यापारी मार्च निकाले जाएंगे और कलेक्टर को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौपेंगे।
 
वहीं 2 दिसम्बर को सभी राज्यों की राजधानियों में व्यापारी रैली आयोजित की जाएगी, जिसमें कहा जा रहा है कि बड़ी तादात में व्यापारी शामिल होंगे। उसी दिन CAIT प्रतिनिधिमण्डल सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को ज्ञापन देगा। अब देखना होगा कि ई-कॉमर्स कम्पनियों के ख़िलाफ़ व्यापारियों द्वारा किये जा रहे आन्दोलन को केन्द्र सरकार कितना गम्भीरता से लेती है और 7 करोड़ व्यापारियों के हित में क्या कुछ फ़ैसले लेती है?