संकेतों से हुआ साफ़, जल्द ख़त्म होगी आर्थिक मंदी
Thursday - November 7, 2019 4:06 pm ,
Category : WTN HINDI
कुछ ही समय में मिल सकती है आर्थिक मंदी से निजात
भारत समेत दुनिया की तमाम अर्थव्यवस्थाओं को जल्द राहत मिलने की उम्मीद
NOV 07 (WTN) – वैश्विक आर्थिक मंदी ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं को किसी ना किसी तरह से प्रभावित किया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक़, विश्व की 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्थाएं आर्थिक मंदी के चपेटे में हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि वर्तमान समय में किसी भी देश का व्यापार दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं से जुड़ा हुआ और प्रभावित रहता है। ऐसे में अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के अलावा अन्य कारणों से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं आर्थिक मंदी से प्रभावित हैं।
साल 2019 के शुरू से ही विश्व की अर्थव्यवस्थाएं आर्थिक मंदी का सामना कर रही हैं। भारत और ब्राजील जैसी तेज़ी से विकास कर रही अर्थव्यवस्थाओं को आर्थिक मंदी के कारण काफ़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। लेकिन इन सबके बीच, एक रिपोर्ट के मुताबिक़ पूरी दुनिया को आर्थिक मंदी से जल्द राहत मिल सकती है। दरअसल, दुनियाभर के सेन्ट्रल बैंकों की ओर से ब्याज दरें कम करने के ऐलान और अमेरिका-चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर ख़त्म होने की उम्मीद से आर्थिक सुस्ती ख़त्म होने के संकेत मिलने लगे है।
जानकारी के मुताबिक़, अमेरिका का शेयर बाजार सप्ताह के शुरुआत में अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, एशियाई शेयर बाज़ारों में भी रौनक लौटी है। इसके अलावा भारतीय शेयर बाज़ार का प्रमुख बेंचमार्क इण्डेक्स सेंसेक्स भी रोज़ाना नए ऐतिहासिक स्तर को छू रहा है। हालांकि, वैश्विक अर्थव्यवस्था के जानकारों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक मंदी जल्द ख़त्म होगी ऐसा कहना जल्दबाज़ी होगी। लेकिन, कहा जा सकता है कि आर्थिक मंदी से प्रभावित दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाएं अगले एक साल में मंदी से उबर सकती हैं।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, दुनिया की बड़ी रेटिंग एजेंसी जेपी मॉर्गन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दुनियाभर के कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं कमज़ोर ज़रूर हैं, लेकिन अब यह धीरे-धीरे बेहतरी की ओर से जा रही हैं। कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं के आर्थिक आंकड़ों से पता चलता है कि वैश्विक आर्थिक मंदी का असर धीरे-धीरे कम होता जा रहा है।
वहीं पिछले दिनों एक अमेरिकी एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि अक्टूबर में नई नौकरियों के मौक़े तेज़ी से बढ़े हैं साथ ही आने वाले दिनों में सैलरी में भी ग्रोथ का अनुमान है। आंकड़ों के मुताबिक़, अगस्त और सितम्बर महीने के मुक़ाबले अक्टूबर महीने में ज़्यादा लोगों को नौकरियां मिली हैं। ऐसे में नौकरी के लिहाज से आने वाला समय तुलनात्मक रूप से बेहतर होने वाला है।
वहीं ब्रेक्जिट यानी ब्रिटेन के यूरोपीय संघ (European Union) से बाहर निकलने को लेकर लम्बे समय से संशय बना हुआ है। कई तरह की अनिश्चितताओं के कारण यूरोप की अर्थव्यवस्था डगमगा गई थी, लेकिन अक्टूबर में इसमें सुधार देखा गया है। वहीं जर्मनी जो कि मंदी के हालात तक ही पहुंच गया था, लेकिन अब वहां पर भी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ग्रोथ दर्ज की गई है। यूरोप के देश धीरे-धीरे आर्थिक मंदी से उबर रहे हैं, ऐसे में कहा जा सकता है कि आर्थिक मंदी का असर धीरे-धीरे ही सही लेकिन ख़त्म हो जाएगा।
वैश्विक आर्थिक मंदी को जिस फैक्टर ने सबसे ज़्यादा प्रभावित किया है वो है दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं अमेरिका और चीन के जारी ट्रेड वॉर। लेकिन कहा जा रहा है कि ट्रेड वॉर को लेकर अब इन दोनों ही देशों के बीच बातचीत शुरू हो गई है और माना जा रहा है कि अगले साल तक दोनों ही देशों के बीच व्यापारिक समझौता हो जाएगा, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक बार फ़िर से गति मिल जाएगी। यदि अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर ख़त्म होता है, तो इससे दुनिया भर के ग़रीब और विकासशील देशों को फ़ायदा होगा।
जैसा कि आप जानते हैं कि चीन की अर्थव्यवस्था को सबसे ज़्यादा नुकसान ट्रेड वॉर से ही हो रहा है। अब यदि अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर ख़त्म होता है तो उम्मीद की जा रही है कि फ़िर से चीन की ग्रोथ रेट बढ़ेगी, जिससे एशियाई बाज़ारों में तेज़ी आएगी। इसके अलावा भारतीय अर्थव्यवस्था जो कि वैश्विक आर्थिक मंदी से बुरी तरह से प्रभावित हुई है, उसमें भी धीरे-धीरे सुधार देखा जा रहा है। अक्टूबर के महीने में ऑटो सेल्स के आंकड़े बेहतर हुए हैं, जिसके बाद कहा जा सकता है कि धीरे-धीरे दुनिया वैश्विक आर्थिक मंदी के गिरफ़्त से दूर होती जा रही है।
NOV 07 (WTN) – वैश्विक आर्थिक मंदी ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं को किसी ना किसी तरह से प्रभावित किया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक़, विश्व की 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्थाएं आर्थिक मंदी के चपेटे में हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि वर्तमान समय में किसी भी देश का व्यापार दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं से जुड़ा हुआ और प्रभावित रहता है। ऐसे में अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के अलावा अन्य कारणों से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं आर्थिक मंदी से प्रभावित हैं।
साल 2019 के शुरू से ही विश्व की अर्थव्यवस्थाएं आर्थिक मंदी का सामना कर रही हैं। भारत और ब्राजील जैसी तेज़ी से विकास कर रही अर्थव्यवस्थाओं को आर्थिक मंदी के कारण काफ़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। लेकिन इन सबके बीच, एक रिपोर्ट के मुताबिक़ पूरी दुनिया को आर्थिक मंदी से जल्द राहत मिल सकती है। दरअसल, दुनियाभर के सेन्ट्रल बैंकों की ओर से ब्याज दरें कम करने के ऐलान और अमेरिका-चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर ख़त्म होने की उम्मीद से आर्थिक सुस्ती ख़त्म होने के संकेत मिलने लगे है।
जानकारी के मुताबिक़, अमेरिका का शेयर बाजार सप्ताह के शुरुआत में अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, एशियाई शेयर बाज़ारों में भी रौनक लौटी है। इसके अलावा भारतीय शेयर बाज़ार का प्रमुख बेंचमार्क इण्डेक्स सेंसेक्स भी रोज़ाना नए ऐतिहासिक स्तर को छू रहा है। हालांकि, वैश्विक अर्थव्यवस्था के जानकारों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक मंदी जल्द ख़त्म होगी ऐसा कहना जल्दबाज़ी होगी। लेकिन, कहा जा सकता है कि आर्थिक मंदी से प्रभावित दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाएं अगले एक साल में मंदी से उबर सकती हैं।
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, दुनिया की बड़ी रेटिंग एजेंसी जेपी मॉर्गन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दुनियाभर के कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं कमज़ोर ज़रूर हैं, लेकिन अब यह धीरे-धीरे बेहतरी की ओर से जा रही हैं। कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं के आर्थिक आंकड़ों से पता चलता है कि वैश्विक आर्थिक मंदी का असर धीरे-धीरे कम होता जा रहा है।
वहीं पिछले दिनों एक अमेरिकी एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि अक्टूबर में नई नौकरियों के मौक़े तेज़ी से बढ़े हैं साथ ही आने वाले दिनों में सैलरी में भी ग्रोथ का अनुमान है। आंकड़ों के मुताबिक़, अगस्त और सितम्बर महीने के मुक़ाबले अक्टूबर महीने में ज़्यादा लोगों को नौकरियां मिली हैं। ऐसे में नौकरी के लिहाज से आने वाला समय तुलनात्मक रूप से बेहतर होने वाला है।
वहीं ब्रेक्जिट यानी ब्रिटेन के यूरोपीय संघ (European Union) से बाहर निकलने को लेकर लम्बे समय से संशय बना हुआ है। कई तरह की अनिश्चितताओं के कारण यूरोप की अर्थव्यवस्था डगमगा गई थी, लेकिन अक्टूबर में इसमें सुधार देखा गया है। वहीं जर्मनी जो कि मंदी के हालात तक ही पहुंच गया था, लेकिन अब वहां पर भी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ग्रोथ दर्ज की गई है। यूरोप के देश धीरे-धीरे आर्थिक मंदी से उबर रहे हैं, ऐसे में कहा जा सकता है कि आर्थिक मंदी का असर धीरे-धीरे ही सही लेकिन ख़त्म हो जाएगा।
वैश्विक आर्थिक मंदी को जिस फैक्टर ने सबसे ज़्यादा प्रभावित किया है वो है दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं अमेरिका और चीन के जारी ट्रेड वॉर। लेकिन कहा जा रहा है कि ट्रेड वॉर को लेकर अब इन दोनों ही देशों के बीच बातचीत शुरू हो गई है और माना जा रहा है कि अगले साल तक दोनों ही देशों के बीच व्यापारिक समझौता हो जाएगा, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक बार फ़िर से गति मिल जाएगी। यदि अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर ख़त्म होता है, तो इससे दुनिया भर के ग़रीब और विकासशील देशों को फ़ायदा होगा।
जैसा कि आप जानते हैं कि चीन की अर्थव्यवस्था को सबसे ज़्यादा नुकसान ट्रेड वॉर से ही हो रहा है। अब यदि अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर ख़त्म होता है तो उम्मीद की जा रही है कि फ़िर से चीन की ग्रोथ रेट बढ़ेगी, जिससे एशियाई बाज़ारों में तेज़ी आएगी। इसके अलावा भारतीय अर्थव्यवस्था जो कि वैश्विक आर्थिक मंदी से बुरी तरह से प्रभावित हुई है, उसमें भी धीरे-धीरे सुधार देखा जा रहा है। अक्टूबर के महीने में ऑटो सेल्स के आंकड़े बेहतर हुए हैं, जिसके बाद कहा जा सकता है कि धीरे-धीरे दुनिया वैश्विक आर्थिक मंदी के गिरफ़्त से दूर होती जा रही है।