जानिए क्यों ट्विटर से ज़्यादा पॉपुलर होती जा रही है सोशल मीडिया साइट मास्टोडॉन?
Monday - November 11, 2019 3:51 pm ,
Category : WTN HINDI
ट्विटर को कड़ी प्रतिस्पर्धा देती मास्टोडॉन
ट्विटर से ही सीखकर ट्विटर को ही टक्कर देती सोशल मीडिया साइट मास्टोडॉन!
NOV 11 (WTN) – इंटरनेट क्रान्ति के बाद से भारत में सोशल मीडिया यूज़र्स की तादात में गुणात्मक रूप से इज़ाफ़ा हुआ है। फेसबुक, ट्विटर और इन्टाग्राम जैसी सोशल मीडिया साइट्स पर करोड़ों की तादात में भारतीय यूज़र्स मौजूद हैं। लेकिन हर हाथ में मोबाइल वाले इस जमाने में सोशल मीडिया साइट्स को एक दूसरे से काफ़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। जैसा कि आप जानते हैं कि कम्यूनिकेशन के लिए इंटरनेट प्लेटफॉर्म पर कई तरह की सोशल मीडिया साइट्स मौजूद हैं, जिस कारण से इन साइट्स के बीच यूज़र्स की एक्टिविटी के लिए प्रतिस्पर्धा का दौर जारी है।
इसी कड़ी में माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर को चुनौती देते हुए मास्टोडॉन (Mastodon) नाम की एक सोशल मीडिया साइट काफ़ी तेज़ी से पॉपुलर हो रही है। जानकारी के मुताबिक़, सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले लोगों में मास्टोडॉन को इन दिनों ट्विटर से ज़्यादा पसंद किया जा रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मास्टोडॉन की स्थापना 5 अक्टूबर 2016 को यूगेन रोचको ने की थी। यूगेन मास्टोडॉन को फेडरेशन कहते हैं।
माइक्रो ब्लॉगिंग साइट मास्टोडॉन का इस्तेमाल भी ट्विटर की ही तरह सोशल नेटवर्किंग साइट के रूप में किया जाता है, जिसमें यूज़र्स अपनी प्रोफाइल बनाने के साथ-साथ फ़ोटो पोस्ट कर सकते हैं, सन्देश और वीडियो को सेंड और शेयर कर सकते हैं। जानकारी के लिए बता दें कि मास्टोडॉन जर्मनी बेस्ड ओपन सोर्स सोशल नेटवर्किंग साइट है जो कि माइक्रो ब्लागिंग साइट रेडिट की ही तरह ओपेन सोर्सज पर काम करती है।
दरअसल, मास्टोडॉन धरती से विलुप्त हो गए एक बड़े प्राणी को कहते हैं और इस साइट के नाम के मुताबिक़ ही यह साइट अपने यूज़र्स को ज़्यादा बड़ा स्पेस देती है। ट्विटर जहां अपने यूज़र्स को सिर्फ़ 280 अक्षरों का स्पेस ही कोई सन्देश भेजने के दिए प्रदान करता है, वहीं धीरे-धीरे पॉपुलर हो रही साइट मास्टोडॉन अपने यूज़र्स को अपनी बात कहने के लिए 500 अक्षरों का स्पेस प्रदान करती है।
यदि आप सोच रहे हैं कि मास्टोडॉन एक नयी ब्लॉगिंग साइट है, तो आपका यह सोचना ग़लत है। इस साइट की स्थापना तो साल 2016 में ही हो चुकी है, लेकिन तभी से यह साइट लगातार सीखने की प्रक्रिया के चलते बदलावों के दौर से गुजरती रही है। सीखने और उसके बाद बदलाव करने के कारण ही इस साइट में काफ़ी कुछ बदलाव हुए हैं और जिसके बाद ही मास्टोडॉन अब एक सुरक्षित सोशल मीडिया साइट होने का दावा कर रही है।
जानकारों के मुताबिक़, मास्टोडॉन खुद को और अपने यूज़र्स को सख्त आचार संहिता से बचाने के लिए बेहतर उपकरणों से लैस है। दावा किया जा रहा है कि इस साइट की दिन-रात देखभाल के लिए कई प्रोफेशनल्स की एक बड़ी टीम शामिल है। वहीं ट्विटर और मास्टोडॉन के बुनियादी ढाचे में भी व्यापक स्तर पर अन्तर है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्विटर एक केन्द्रीकृत सोशल नेटवर्किंग साइट है, तो वहीं मास्टोडॉन कई लोगों के बीच सम्वाद पर आधारित साइट है।
दरअसल, वास्तव में ट्विटर एक कम्पनी द्वारा नियंत्रित होती है, जिसमें सभी लोग एक-दूसरे से इंटरकनेक्टेड होते हैं। वहीं मास्टोडॉन में व्यक्ति की स्वयं की नीतियां और व्यवस्था होती है। वैसे मास्टोडॉन ने बहुत कुछ ट्विटर को ही फॉलो किया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मास्टोडॉन के संस्थापक यूगेन ने जुलाई 2018 में एक पोस्ट के ज़रिए कहा था कि उन्होंने मास्टोडॉन के विकास के लिए वास्तव में ट्विटर मॉडल का इस्तेमाल किया है। बाद में यूगेन ने कहा कि उनको धीरे-धीरे इस बात का एहसास हुआ कि ट्विटर में उत्पीड़न और उससे निपटने के उपकरणों का अभाव है, जिसके चलते उन्होंने मास्टोडॉन में इन समस्याओं के स्थायी समाधान वाले टूल का निर्माण किया है।
पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत में भी मास्टोडॉन को बहुत बड़ी तादात में पसंद किया जा रहा है। कई ट्विटर यूज़र्स ने ट्विटर पर अपनी सख़्त नीतियों के लिए असंगत होने का आरोप लगाया है। ट्विटर यूज़र्स धीरे-धीरे मास्टोडॉन की तरफ़ इसलिए आकर्षित हो रहे हैं, क्योंकि मास्टोडॉन को एक व्यक्तिगत सेवा के रूप में डिजाइन किया गया है।
मास्टोडॉन सोशल नेटवर्किंग साइट में कोई भी सामान्य रूप से शामिल हो सकता है। वहीं अन्य सोशल नेटवर्किंग साइट नियंत्रित रूप से कुछ विशिष्ट लोगों के हितों को साझा करने में केन्द्रित रहती हैं। दरअसल, मास्टोडॉन में प्रत्येक व्यक्ति का अपना अलग व्यक्तिगत सर्वर होता है, जिसको उसी के द्वारा चलाया और नियंत्रित किया जाता है। साथ ही वही व्यक्ति अन्य सदस्यों को भी नियंत्रित करता है। यही कारण है कि मास्टोडॉन सोशल नेटवर्किंग साइट धीरे-धीरे ट्विटर से ज़्यादा पॉपुलर होती जा रही है।
NOV 11 (WTN) – इंटरनेट क्रान्ति के बाद से भारत में सोशल मीडिया यूज़र्स की तादात में गुणात्मक रूप से इज़ाफ़ा हुआ है। फेसबुक, ट्विटर और इन्टाग्राम जैसी सोशल मीडिया साइट्स पर करोड़ों की तादात में भारतीय यूज़र्स मौजूद हैं। लेकिन हर हाथ में मोबाइल वाले इस जमाने में सोशल मीडिया साइट्स को एक दूसरे से काफ़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। जैसा कि आप जानते हैं कि कम्यूनिकेशन के लिए इंटरनेट प्लेटफॉर्म पर कई तरह की सोशल मीडिया साइट्स मौजूद हैं, जिस कारण से इन साइट्स के बीच यूज़र्स की एक्टिविटी के लिए प्रतिस्पर्धा का दौर जारी है।
इसी कड़ी में माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर को चुनौती देते हुए मास्टोडॉन (Mastodon) नाम की एक सोशल मीडिया साइट काफ़ी तेज़ी से पॉपुलर हो रही है। जानकारी के मुताबिक़, सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले लोगों में मास्टोडॉन को इन दिनों ट्विटर से ज़्यादा पसंद किया जा रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मास्टोडॉन की स्थापना 5 अक्टूबर 2016 को यूगेन रोचको ने की थी। यूगेन मास्टोडॉन को फेडरेशन कहते हैं।
माइक्रो ब्लॉगिंग साइट मास्टोडॉन का इस्तेमाल भी ट्विटर की ही तरह सोशल नेटवर्किंग साइट के रूप में किया जाता है, जिसमें यूज़र्स अपनी प्रोफाइल बनाने के साथ-साथ फ़ोटो पोस्ट कर सकते हैं, सन्देश और वीडियो को सेंड और शेयर कर सकते हैं। जानकारी के लिए बता दें कि मास्टोडॉन जर्मनी बेस्ड ओपन सोर्स सोशल नेटवर्किंग साइट है जो कि माइक्रो ब्लागिंग साइट रेडिट की ही तरह ओपेन सोर्सज पर काम करती है।
दरअसल, मास्टोडॉन धरती से विलुप्त हो गए एक बड़े प्राणी को कहते हैं और इस साइट के नाम के मुताबिक़ ही यह साइट अपने यूज़र्स को ज़्यादा बड़ा स्पेस देती है। ट्विटर जहां अपने यूज़र्स को सिर्फ़ 280 अक्षरों का स्पेस ही कोई सन्देश भेजने के दिए प्रदान करता है, वहीं धीरे-धीरे पॉपुलर हो रही साइट मास्टोडॉन अपने यूज़र्स को अपनी बात कहने के लिए 500 अक्षरों का स्पेस प्रदान करती है।
यदि आप सोच रहे हैं कि मास्टोडॉन एक नयी ब्लॉगिंग साइट है, तो आपका यह सोचना ग़लत है। इस साइट की स्थापना तो साल 2016 में ही हो चुकी है, लेकिन तभी से यह साइट लगातार सीखने की प्रक्रिया के चलते बदलावों के दौर से गुजरती रही है। सीखने और उसके बाद बदलाव करने के कारण ही इस साइट में काफ़ी कुछ बदलाव हुए हैं और जिसके बाद ही मास्टोडॉन अब एक सुरक्षित सोशल मीडिया साइट होने का दावा कर रही है।
जानकारों के मुताबिक़, मास्टोडॉन खुद को और अपने यूज़र्स को सख्त आचार संहिता से बचाने के लिए बेहतर उपकरणों से लैस है। दावा किया जा रहा है कि इस साइट की दिन-रात देखभाल के लिए कई प्रोफेशनल्स की एक बड़ी टीम शामिल है। वहीं ट्विटर और मास्टोडॉन के बुनियादी ढाचे में भी व्यापक स्तर पर अन्तर है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्विटर एक केन्द्रीकृत सोशल नेटवर्किंग साइट है, तो वहीं मास्टोडॉन कई लोगों के बीच सम्वाद पर आधारित साइट है।
दरअसल, वास्तव में ट्विटर एक कम्पनी द्वारा नियंत्रित होती है, जिसमें सभी लोग एक-दूसरे से इंटरकनेक्टेड होते हैं। वहीं मास्टोडॉन में व्यक्ति की स्वयं की नीतियां और व्यवस्था होती है। वैसे मास्टोडॉन ने बहुत कुछ ट्विटर को ही फॉलो किया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मास्टोडॉन के संस्थापक यूगेन ने जुलाई 2018 में एक पोस्ट के ज़रिए कहा था कि उन्होंने मास्टोडॉन के विकास के लिए वास्तव में ट्विटर मॉडल का इस्तेमाल किया है। बाद में यूगेन ने कहा कि उनको धीरे-धीरे इस बात का एहसास हुआ कि ट्विटर में उत्पीड़न और उससे निपटने के उपकरणों का अभाव है, जिसके चलते उन्होंने मास्टोडॉन में इन समस्याओं के स्थायी समाधान वाले टूल का निर्माण किया है।
पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत में भी मास्टोडॉन को बहुत बड़ी तादात में पसंद किया जा रहा है। कई ट्विटर यूज़र्स ने ट्विटर पर अपनी सख़्त नीतियों के लिए असंगत होने का आरोप लगाया है। ट्विटर यूज़र्स धीरे-धीरे मास्टोडॉन की तरफ़ इसलिए आकर्षित हो रहे हैं, क्योंकि मास्टोडॉन को एक व्यक्तिगत सेवा के रूप में डिजाइन किया गया है।
मास्टोडॉन सोशल नेटवर्किंग साइट में कोई भी सामान्य रूप से शामिल हो सकता है। वहीं अन्य सोशल नेटवर्किंग साइट नियंत्रित रूप से कुछ विशिष्ट लोगों के हितों को साझा करने में केन्द्रित रहती हैं। दरअसल, मास्टोडॉन में प्रत्येक व्यक्ति का अपना अलग व्यक्तिगत सर्वर होता है, जिसको उसी के द्वारा चलाया और नियंत्रित किया जाता है। साथ ही वही व्यक्ति अन्य सदस्यों को भी नियंत्रित करता है। यही कारण है कि मास्टोडॉन सोशल नेटवर्किंग साइट धीरे-धीरे ट्विटर से ज़्यादा पॉपुलर होती जा रही है।