जानिए कैसा होगा अयोध्या का प्रस्तावित राम मन्दिर?
Tuesday - November 12, 2019 12:50 pm ,
Category : WTN HINDI
नागर शैली पर आधारित होगा अयोध्या का राम मन्दिर
106 स्तम्भों के साथ भव्य आकार में बनेगा अयोध्या में राम मन्दिर
NOV 12 (WTN) – जैसा कि आप जानते ही हैं कि माननीय उच्चतम न्यायालय के फ़ैसले के बाद अयोध्या में राम मन्दिर बनना तय हो गया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने अयोध्या की विवादित ज़मीन पर रामलला विराजमान का हक़ माना है। राम मन्दिर निर्माण का रास्ता साफ़ होने के बाद अब चर्चा इस बात की है कि राम मन्दिर किस डिजाइन और तकनीक से बनेगा? आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 1989 में ही राम मन्दिर के लिए डिजाइन तैयार कर लिया गया था।
राम मन्दिर का डिजाइन तैयार करने वाले शिल्पकार चन्द्रकांत सोमपुरा के मुताबिक़, अयोध्या में बनने वाला प्रस्तावित राम मन्दिर नागर शैली के आधार पर बनेगा। मन्दिर का नक्शा उत्तर भारत में प्रचलित नागर शैली के आधार पर बनाया गया है। आइये आपको बताते हैं कि आख़िर नागर शैली की क्या विशेषताएं होती हैं?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वास्तुकला की नागर शैली उत्तर भारतीय हिन्दू स्थापत्य कला की तीन शैलियों में से एक शैली है। वास्तुशास्त्र के अनुसार नागर शैली के मन्दिरों की पहचान आधार से लेकर सर्वोच्च अंश तक इसका चतुष्कोण होना है। नागर शैली की दो बड़ी विशेषताएं हैं एक है इसकी विशिष्ट योजना और दूसरा इसके विमान। नागर शैली के मन्दिरों की मुख्य भूमि आयताकार होती है, जिसमें बीच के दोनों ओर क्रमिक विमान होते हैं जिनके चलते इसका पूर्ण आकार तिकोना हो जाता है।
नागर शैली के मन्दिरों के सबसे ऊपर शिखर होता है, जिसे रेखा शिखर भी कहा जाता है। नागर शैली के मन्दिरों में दो भवन भी होते हैं, जिसमें से एक को गर्भगृह और दूसरे को मण्डप कहा जाता है। गर्भगृह ऊंचा होता है जबकि मण्डप छोटा होता है। गर्भगृह के ऊपर एक घण्टाकार संरचना होती है, जिससे मन्दिर की ऊंचाई बढ़ जाती है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नागर शैली के मन्दिरों में चार कक्ष होते हैं, गर्भगृह, जगमोहन, नाट्यमन्दिर और भोगमन्दिर। बता दें नागर शैली के प्राचीन मन्दिरों में स्तम्भ नहीं होते थे, लेकिन धीरे-धीरे इसकी डिजाइन में बदलाव होता गया और मन्दिरों के निर्माण में स्थानीय विविधताओं का भी मिश्रण देखने को मिलने लगा।
नागर शैली के मन्दिरों की सबसे बड़ी ख़ासियत यह है कि इनके निर्माण में लोहे और सीमेन्ट का इस्तेमाल नहीं होता है। ओडिशा के भुवनेश्वर में स्थित लिंगराज मंदिर नागर शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। वहीं ओडिशा का प्रसिद्ध कोणार्क का सूर्य मन्दिर और खजुराहो के विश्व प्रसिद्ध मन्दिर भी नागर शैली के आधार पर बनाए गये हैं।
अयोध्या में प्रस्तावित राम मन्दिर का प्लान क़रीब 69 एकड़ का है। रामलला का प्रमुख मन्दिर 270 फीट लम्बा, 126 फीट चौड़ा और 12.3 फीट ऊंचा है। प्रस्तावित मन्दिर में 106 स्तम्भ लगने हैं। प्रस्तावित राम मन्दिर, जो कि नागर शैली पर आधारित होगा दो मन्जिला होगा। जिसमें पहले मन्जिल में रामलला का मन्दिर होगा तो दूसरी मन्जिल में राम दरबार रहेगा जिसमें श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के साथ हनुमान जी की मूर्ति लगेगी।
मुख्य राम मन्दिर के अलावा यहां पर चार अन्य मन्दिरों का भी निर्माण होगा। राम मन्दिर के अलावा श्री गणेश मन्दिर, श्री राम के भाई भरत केा मन्दिर, श्री राम की पत्नी सीता का मन्दिर और श्री राम के परम भक्त हनुमान जी का मन्दिर भी मुख्य मन्दिर के आसपास बनाए जाएंगे। वहीं मुख्य मन्दिर के पिलर पर अलग-अलग भगवानों की झांकियां तैयार की जाएंगी।
प्रस्तावित राम मन्दिर के लिए डिजाइन के अनुसार क़रीब 2 लाख 63 हज़ार घनफीट पत्थर लगेगा, जिसमें में से अब तक 1 लाख 60 हज़ार घनफीट पत्थर तराशे जा चुके हैं। वहीं डिजाइन में मन्दिर में प्रवेश के लिए चार अलग-अलग द्वार भी दिशाओं में बनाए गए हैं। सभी द्वारों पर भारतीय संस्कृति की झांकियां भी मिलेंगी। साथ ही मन्दिर में प्रदर्शनी, मेडिटेशन हॉल, धर्मशाला, रिसर्च सेन्टर, स्टॉफ के रहने के लिए घर, श्रीराम भगवान पर रिसर्च और साहित्य के लिए लाइब्रेरी बनाया जाना प्रस्तावित है।
NOV 12 (WTN) – जैसा कि आप जानते ही हैं कि माननीय उच्चतम न्यायालय के फ़ैसले के बाद अयोध्या में राम मन्दिर बनना तय हो गया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने अयोध्या की विवादित ज़मीन पर रामलला विराजमान का हक़ माना है। राम मन्दिर निर्माण का रास्ता साफ़ होने के बाद अब चर्चा इस बात की है कि राम मन्दिर किस डिजाइन और तकनीक से बनेगा? आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 1989 में ही राम मन्दिर के लिए डिजाइन तैयार कर लिया गया था।
राम मन्दिर का डिजाइन तैयार करने वाले शिल्पकार चन्द्रकांत सोमपुरा के मुताबिक़, अयोध्या में बनने वाला प्रस्तावित राम मन्दिर नागर शैली के आधार पर बनेगा। मन्दिर का नक्शा उत्तर भारत में प्रचलित नागर शैली के आधार पर बनाया गया है। आइये आपको बताते हैं कि आख़िर नागर शैली की क्या विशेषताएं होती हैं?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वास्तुकला की नागर शैली उत्तर भारतीय हिन्दू स्थापत्य कला की तीन शैलियों में से एक शैली है। वास्तुशास्त्र के अनुसार नागर शैली के मन्दिरों की पहचान आधार से लेकर सर्वोच्च अंश तक इसका चतुष्कोण होना है। नागर शैली की दो बड़ी विशेषताएं हैं एक है इसकी विशिष्ट योजना और दूसरा इसके विमान। नागर शैली के मन्दिरों की मुख्य भूमि आयताकार होती है, जिसमें बीच के दोनों ओर क्रमिक विमान होते हैं जिनके चलते इसका पूर्ण आकार तिकोना हो जाता है।
नागर शैली के मन्दिरों के सबसे ऊपर शिखर होता है, जिसे रेखा शिखर भी कहा जाता है। नागर शैली के मन्दिरों में दो भवन भी होते हैं, जिसमें से एक को गर्भगृह और दूसरे को मण्डप कहा जाता है। गर्भगृह ऊंचा होता है जबकि मण्डप छोटा होता है। गर्भगृह के ऊपर एक घण्टाकार संरचना होती है, जिससे मन्दिर की ऊंचाई बढ़ जाती है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नागर शैली के मन्दिरों में चार कक्ष होते हैं, गर्भगृह, जगमोहन, नाट्यमन्दिर और भोगमन्दिर। बता दें नागर शैली के प्राचीन मन्दिरों में स्तम्भ नहीं होते थे, लेकिन धीरे-धीरे इसकी डिजाइन में बदलाव होता गया और मन्दिरों के निर्माण में स्थानीय विविधताओं का भी मिश्रण देखने को मिलने लगा।
नागर शैली के मन्दिरों की सबसे बड़ी ख़ासियत यह है कि इनके निर्माण में लोहे और सीमेन्ट का इस्तेमाल नहीं होता है। ओडिशा के भुवनेश्वर में स्थित लिंगराज मंदिर नागर शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। वहीं ओडिशा का प्रसिद्ध कोणार्क का सूर्य मन्दिर और खजुराहो के विश्व प्रसिद्ध मन्दिर भी नागर शैली के आधार पर बनाए गये हैं।
अयोध्या में प्रस्तावित राम मन्दिर का प्लान क़रीब 69 एकड़ का है। रामलला का प्रमुख मन्दिर 270 फीट लम्बा, 126 फीट चौड़ा और 12.3 फीट ऊंचा है। प्रस्तावित मन्दिर में 106 स्तम्भ लगने हैं। प्रस्तावित राम मन्दिर, जो कि नागर शैली पर आधारित होगा दो मन्जिला होगा। जिसमें पहले मन्जिल में रामलला का मन्दिर होगा तो दूसरी मन्जिल में राम दरबार रहेगा जिसमें श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के साथ हनुमान जी की मूर्ति लगेगी।
मुख्य राम मन्दिर के अलावा यहां पर चार अन्य मन्दिरों का भी निर्माण होगा। राम मन्दिर के अलावा श्री गणेश मन्दिर, श्री राम के भाई भरत केा मन्दिर, श्री राम की पत्नी सीता का मन्दिर और श्री राम के परम भक्त हनुमान जी का मन्दिर भी मुख्य मन्दिर के आसपास बनाए जाएंगे। वहीं मुख्य मन्दिर के पिलर पर अलग-अलग भगवानों की झांकियां तैयार की जाएंगी।
प्रस्तावित राम मन्दिर के लिए डिजाइन के अनुसार क़रीब 2 लाख 63 हज़ार घनफीट पत्थर लगेगा, जिसमें में से अब तक 1 लाख 60 हज़ार घनफीट पत्थर तराशे जा चुके हैं। वहीं डिजाइन में मन्दिर में प्रवेश के लिए चार अलग-अलग द्वार भी दिशाओं में बनाए गए हैं। सभी द्वारों पर भारतीय संस्कृति की झांकियां भी मिलेंगी। साथ ही मन्दिर में प्रदर्शनी, मेडिटेशन हॉल, धर्मशाला, रिसर्च सेन्टर, स्टॉफ के रहने के लिए घर, श्रीराम भगवान पर रिसर्च और साहित्य के लिए लाइब्रेरी बनाया जाना प्रस्तावित है।