ऑनलाइन शॉपिंग कराने वाली ई-कॉमर्स कम्पनियों पर लगाम कसेगी सरकार
Wednesday - November 13, 2019 3:56 pm ,
Category : WTN HINDI
ऑनलाइन शॉपिंग के लिए जारी हुई गाइडलाइन
ग्राहकों की सुविधा के लिए ई-कॉमर्स कम्पनियों की मनमानी पर रहेगी नज़र
NOV 13 (WTN) – भारत में जब से ऑनलाइन शॉपिंग का प्रचलन बढ़ा है, तभी से रिटेल व्यापारियों ने इसका विरोध किया है। व्यापारियों का तर्क है कि ऑनलाइन शॉपिंग के कारण उनका व्यापार बुरी तरह से प्रभावित हुआ है और उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। व्यापारियों का आरोप है कि ई-कॉमर्स कम्पनियां नियमों की अवेहलना कर रही है और इस तरफ़ सरकार ध्यान नहीं दे रही है। वहीं ऑनलाइन शॉपिंग के कारण कई बार ग्राहकों को भी परेशानियां का सामना करना पड़ा है। ऐसे में समय-समय पर ई-कॉमर्स कम्पनियों के लिए गाइडलाइन जारी करने की मांग उठती रही है।
इस कड़ी में सरकार ने कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट (Consumer Protection Act) के तहत ई-कॉमर्स (E-Commerce) कम्पनियों के लिए गाइडलाइंस का ड्रॉफ्ट जारी कर दिया है। जानकारी के मुताबिक़, सरकार इस नियम के ज़रिए क़ीमतों को प्रभावित करने वाले डीप डिस्काउंटिंग जैसे मामलों पर नज़र रख सकेगी। वहीं दावा किया जा रहा है कि इससे ई-कॉमर्स कम्पनियों के फ्रॉड और मनमानी पर भी लगाम लग सकेगी।
काफ़ी समय से ऑनलाइन शॉपिंग का विरोध कर रही व्यापारियों की संस्था CAIT (Confederation Of All India Traders) ने ड्राफ्ट नियमों का स्वागत किया है। इस बारे में कैट का कहना है कि प्रस्तावित गाइडलाइन ई-कॉमर्स कम्पनियों को ग्राहकों के प्रति और ज़्यादा जवाबदेही बनाएगी और उन्हें सामान की बिक्री में पारदर्शिता को बनाये रखने के लिए मजबूर करेगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ई-कॉमर्स कम्पनियों के लिए जारी की गई गाइडलाइंस के ड्रॉफ्ट में ऐसी व्यवस्था की गई है, जिसमें कंजम्यूमर्स के हितों की सुरक्षा की जा सकेगी। वहीं अब कम्पनियों को ग्रीवांस अधिकारी की नियुक्ति करनी पड़ेगी और इस ग्रीवांस अधिकारी की जानकारी कम्पनियों को अपनी वेबसाइट पर डालनी होगी।
ग्राहकों की सुविधा का भी ध्यान गाइडलाइन में रखा गया है, जिसके तहत ग्राहकों का पैसा 14 दिन के अन्दर रिफण्ड करने की भी व्यवस्था की गई है। वहीं कम्पनियों को शिकायत दूर करने के लिए बाक़ायदा एक मैकनिज़्म बनाना होगा और एक महीने के अन्दर ग्राहकों की शिकायतों का निपटारा करना होगा।
वहीं अब कम्पनियां ख़ुद किसी प्रोडक्ट की क़ीमतों का निर्धारण नहीं कर सकेंगी। साथ ही फेक रिव्यू जैसे मसलों को कम्पनियां अब अपनी वेबसाइट पर अपलोड नहीं कर पाएंगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गाइडलाइन में प्रस्ताव है कि ई-कॉमर्स कम्पनियों को रिटर्न, रिफण्ड, एक्सचेंज, वारण्टी / गारण्टी, डिलीवरी / शिपमेंट, भुगतान के तरीक़े, शिकायत निवारण और मैकेनिज़्म से सम्बन्धित विक्रेताओं के साथ कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों को सार्वजनिक किया जाए, जिससे ग्राहकों को आसानी से सभी जानकारी मिल सके। साथ ही वो इन सभी सूचनाओं के आधार पर शॉपिंग का फ़ैसला लेने में सक्षम हो सकें।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ई-कॉमर्स कम्पनियों के कारण व्यापारियों को हो रहे नुकसान को देखते हुए CAIT ने एक लम्बे विरोध प्रदर्शन का प्लान बनाया है। व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए CAIT ने सरकार को चेतावना दी है कि यदि व्यापारियों की ई-कॉमर्स कम्पनियों को लेकर हो रही चिन्ताओं का समाधान नहीं किया गता तो आने वाले समय में विरोध प्रदर्शन काफ़ी व्यापक स्तर पर हो सकता है। अब देखना होगा कि ऑनलाइन शॉपिंग करने वाली ई-कॉमर्स कम्पनियों की कथित मनमानी पर लगाम लगने के लिए सरकार द्वारा जारी की गाइडालाइन का कितना असर होता है?
NOV 13 (WTN) – भारत में जब से ऑनलाइन शॉपिंग का प्रचलन बढ़ा है, तभी से रिटेल व्यापारियों ने इसका विरोध किया है। व्यापारियों का तर्क है कि ऑनलाइन शॉपिंग के कारण उनका व्यापार बुरी तरह से प्रभावित हुआ है और उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। व्यापारियों का आरोप है कि ई-कॉमर्स कम्पनियां नियमों की अवेहलना कर रही है और इस तरफ़ सरकार ध्यान नहीं दे रही है। वहीं ऑनलाइन शॉपिंग के कारण कई बार ग्राहकों को भी परेशानियां का सामना करना पड़ा है। ऐसे में समय-समय पर ई-कॉमर्स कम्पनियों के लिए गाइडलाइन जारी करने की मांग उठती रही है।
इस कड़ी में सरकार ने कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट (Consumer Protection Act) के तहत ई-कॉमर्स (E-Commerce) कम्पनियों के लिए गाइडलाइंस का ड्रॉफ्ट जारी कर दिया है। जानकारी के मुताबिक़, सरकार इस नियम के ज़रिए क़ीमतों को प्रभावित करने वाले डीप डिस्काउंटिंग जैसे मामलों पर नज़र रख सकेगी। वहीं दावा किया जा रहा है कि इससे ई-कॉमर्स कम्पनियों के फ्रॉड और मनमानी पर भी लगाम लग सकेगी।
काफ़ी समय से ऑनलाइन शॉपिंग का विरोध कर रही व्यापारियों की संस्था CAIT (Confederation Of All India Traders) ने ड्राफ्ट नियमों का स्वागत किया है। इस बारे में कैट का कहना है कि प्रस्तावित गाइडलाइन ई-कॉमर्स कम्पनियों को ग्राहकों के प्रति और ज़्यादा जवाबदेही बनाएगी और उन्हें सामान की बिक्री में पारदर्शिता को बनाये रखने के लिए मजबूर करेगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ई-कॉमर्स कम्पनियों के लिए जारी की गई गाइडलाइंस के ड्रॉफ्ट में ऐसी व्यवस्था की गई है, जिसमें कंजम्यूमर्स के हितों की सुरक्षा की जा सकेगी। वहीं अब कम्पनियों को ग्रीवांस अधिकारी की नियुक्ति करनी पड़ेगी और इस ग्रीवांस अधिकारी की जानकारी कम्पनियों को अपनी वेबसाइट पर डालनी होगी।
ग्राहकों की सुविधा का भी ध्यान गाइडलाइन में रखा गया है, जिसके तहत ग्राहकों का पैसा 14 दिन के अन्दर रिफण्ड करने की भी व्यवस्था की गई है। वहीं कम्पनियों को शिकायत दूर करने के लिए बाक़ायदा एक मैकनिज़्म बनाना होगा और एक महीने के अन्दर ग्राहकों की शिकायतों का निपटारा करना होगा।
वहीं अब कम्पनियां ख़ुद किसी प्रोडक्ट की क़ीमतों का निर्धारण नहीं कर सकेंगी। साथ ही फेक रिव्यू जैसे मसलों को कम्पनियां अब अपनी वेबसाइट पर अपलोड नहीं कर पाएंगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गाइडलाइन में प्रस्ताव है कि ई-कॉमर्स कम्पनियों को रिटर्न, रिफण्ड, एक्सचेंज, वारण्टी / गारण्टी, डिलीवरी / शिपमेंट, भुगतान के तरीक़े, शिकायत निवारण और मैकेनिज़्म से सम्बन्धित विक्रेताओं के साथ कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों को सार्वजनिक किया जाए, जिससे ग्राहकों को आसानी से सभी जानकारी मिल सके। साथ ही वो इन सभी सूचनाओं के आधार पर शॉपिंग का फ़ैसला लेने में सक्षम हो सकें।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ई-कॉमर्स कम्पनियों के कारण व्यापारियों को हो रहे नुकसान को देखते हुए CAIT ने एक लम्बे विरोध प्रदर्शन का प्लान बनाया है। व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए CAIT ने सरकार को चेतावना दी है कि यदि व्यापारियों की ई-कॉमर्स कम्पनियों को लेकर हो रही चिन्ताओं का समाधान नहीं किया गता तो आने वाले समय में विरोध प्रदर्शन काफ़ी व्यापक स्तर पर हो सकता है। अब देखना होगा कि ऑनलाइन शॉपिंग करने वाली ई-कॉमर्स कम्पनियों की कथित मनमानी पर लगाम लगने के लिए सरकार द्वारा जारी की गाइडालाइन का कितना असर होता है?