मंदी की मार झेल रहे ऑटो सेक्टर में गति लाने मोदी सरकार का ‘मास्टर प्लान’!
Friday - November 15, 2019 3:54 pm ,
Category : WTN HINDI
ऑटो स्क्रैपेज पॉलिसी को जल्द मिल सकती है मन्जूरी
मोदी सरकार की ‘इस पॉलिसी’ से बढ़ेगी गाड़ियों की बिक्री और बढ़ेगा सरकार का राजस्व
NOV 15 (WTN) – वैश्विक आर्थिक मंदी का सबसे ज़्यादा असर भारत के ऑटो सेक्टर पर पड़ा है। पिछले 18 महीनों से भारतीय ऑटोमोबाइल इण्डस्ट्री में वाहनों की बिक्री में गिरावट देखी जा रही है। यहां तक कि त्यौहारों पर भी गाड़ियों की सेलिंग उम्मीद के मुताबिक़ नहीं हो सकी। वैश्विक आर्थिक मंदी का पहला और सीधा असर भारतीय ऑटो इण्डस्ट्री पर पड़ा है। मंदी की मार झेल रही ऑटो इण्डस्ट्री काफ़ी लम्बे समय से मोदी सरकार से मांग कर रही है कि बुरी दौर से गुजर रही इण्डस्ट्री को सहारा देने के लिए कुछ ज़रूरी उपाय जल्द से जल्द लागू किये जाने चाहिए। मोदी सरकार भी ऑटो इण्डस्ट्री पर जारी मंदी की मार से चिन्तित है और बिक्री में बढ़ावा देने के लिए उपाय करने पर विचार कर रही है।
इसी कड़ी में ऑटो सेक्टर में छाई मंदी को दूर करने के प्रयास में मोदी सरकार अब कुछ नये क़दम उठाने जा रही है। जैसा कि हमने आपको बताया कि इस समय गाड़ियों की मांग मार्केट में ऐतिहासिक स्तर पर कम हो गई है, ऐसे में सरकार ऑटो इण्डस्ट्री में नई मांग पैदा करने का प्रयास कर रही है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि काफ़ी लम्बे समय से प्रतीक्षारत ऑटो स्क्रैपेज पॉलिसी जल्द लागू हो सकती है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, सड़क परिवहन मंत्रालय ने ऑटो स्क्रैपेज पॉलिसी ड्रॉफ्ट कैबिनेट नोट जारी कर दिया है और कहा जा रहा है कि आगामी दो सप्ताह में इसे कैबिनेट से मन्जूरी मिल सकती है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि परिवहन मंत्रालय ने जो ड्राफ्ट कैबिनेट नोट जारी किया है, सूत्रों के मुताबिक़ उसमें स्क्रैप पॉलिसी को लेकर वित्त, परिवहन, स्टील ,पर्यावरण मंत्रालयों में सहमति बन गई है। इस पॉलिसी को कैबिनेट की मन्जूरी मिलते ही स्क्रैप पॉलिसी पर अमल शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है। अब आप सोच रहे होंगे कि स्क्रैप पॉलिसी क्या होती है और इससे किस तरह से गाड़ियों की बिक्री में वृद्धि होगी और इससे सरकार को क्या फ़ायदा होगा? तो आइये आपको पूरी जानकारी हम विस्तार से बताते हैं।
दरअसल, ऑटो स्क्रैपेज पॉलिसी ड्राफ्ट में पुरानी कमर्शियल गाड़ियों की ख़रीदी और बिक्री पर सख़्ती का प्रावधान है। लेकिन वहीं पुरानी गाड़ी के बदले नई गाड़ी लेने पर कई तरह की छूट दी जा सकती है। यदि कोई व्यक्ति अपनी पुरानी गाड़ी को स्क्रैप करके नई गाड़ी ख़रीदता है तो उसे रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन चार्ज में छूट देने का प्रस्ताव है। लेकिन वहीं यदि गाड़ी 15 साल से ज़्यादा पुरानी है तो उस पर ज़्यादा रोड टैक्स चुकाना पड़ सकता है। ड्रॉफ्ट में प्रस्तावित पॉलिस में पुरानी गाड़ी के रजिस्ट्रेशन पर रिन्यू चार्ज को कई गुना बढ़ाया जा सकता है। जानकारी के मुताबिक़, शुरुआती प्रस्ताव में रजिस्ट्रेशन रिन्यू पर 25 गुना चार्ज देना होगा, जिसमें कार, 3-व्हीलर और 2-व्हीलर शामिल होंगी।
जानकारी के अनुसार साल 2005 से पहले विनिर्मित गाड़ियों के लिए पंजीकरण और फिटनेस नियमों को कड़ा किया जा सकता है। एक अनुमान के अनुसार देश में साल 2005 से पहले निर्मित दो करोड़ गाड़ियां देश की सड़कों पर दौड़ रही हैं। नई स्क्रैप पॉलिसी का म़कसद ऐसे वाहनों को हतोत्साहित करना है, जिससे पुरानी गाड़ियों की सेलिंग कम या बंद हो सके और लोग नई गाड़ियों को ख़रीदें।
नई स्क्रैप पॉलिसी में पुराने वाहनों को कबाड़ करने के बाद नया वाहन ख़रीदने वालों को सरकार और डीलर्स की तरफ़ से रियायत भी मिल सकती है। वहीं परिवहन मंत्रालय आने वाले दो साल में फिटनेस की व्यवस्था को ऑटोमेटेड करने की योजना बना रहा है, जिसमें कोई मानवीय हस्तक्षेप नहीं होगा। कहा जा रहा है कि ऐसा होने से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और मानकों पर खरा ना उतरने वाली गाड़ियों की सही तरीक़े से पहचान हो सकेगी।
नई स्क्रैप पॉलिसी आने के बाद सरकार के राजस्व में भी इजाफ़े की बात कही जा रहा है। जानकारों के मुताबिक़, नई पॉलिसी से सरकार के राजस्व में क़रीब 100 अरब रुपये की वृद्धि हो सकती है। वहीं नई पॉलिसी से नये वाहनों की बिक्री में 22 प्रतिशत तक वृद्धि की आशा की जा रही है। मौजूदा समय में ऑटोमोबाइल इण्डस्ट्री जो कि क़रीब 4.5 लाख करोड़ की है, वो नई पॉलिसी के बाद 20 लाख करोड़ रुपये की इण्डस्ट्री बन सकती है।
ऑटो इण्डस्ट्री के जानकारों के मुताबिक़, सरकार की नई स्क्रैपिंग पॉलिसी से आर्थिक मंदी झेल रही देश की ऑटोमोबाइल इण्डस्ट्री में गाड़ियों की बिक्री बढ़ेगी, क्योंकि लोग नए वाहनों को खरीदेंगे। समय-समय पर सोसाइटी ऑफ़ इण्डियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के आंकड़े बता रहे हैं कि गाड़ियों की बिक्री कम होती जा रही है। अब ऐसे में ऑटोमोबाइल इण्डस्ट्री को भी सरकार की इस नई नीति से काफ़ी उम्मीदें हैं कि इससे गाड़ियों की बिक्री में वृद्धि हो और इस क्षेत्र में रोज़गार बढ़े।
NOV 15 (WTN) – वैश्विक आर्थिक मंदी का सबसे ज़्यादा असर भारत के ऑटो सेक्टर पर पड़ा है। पिछले 18 महीनों से भारतीय ऑटोमोबाइल इण्डस्ट्री में वाहनों की बिक्री में गिरावट देखी जा रही है। यहां तक कि त्यौहारों पर भी गाड़ियों की सेलिंग उम्मीद के मुताबिक़ नहीं हो सकी। वैश्विक आर्थिक मंदी का पहला और सीधा असर भारतीय ऑटो इण्डस्ट्री पर पड़ा है। मंदी की मार झेल रही ऑटो इण्डस्ट्री काफ़ी लम्बे समय से मोदी सरकार से मांग कर रही है कि बुरी दौर से गुजर रही इण्डस्ट्री को सहारा देने के लिए कुछ ज़रूरी उपाय जल्द से जल्द लागू किये जाने चाहिए। मोदी सरकार भी ऑटो इण्डस्ट्री पर जारी मंदी की मार से चिन्तित है और बिक्री में बढ़ावा देने के लिए उपाय करने पर विचार कर रही है।
इसी कड़ी में ऑटो सेक्टर में छाई मंदी को दूर करने के प्रयास में मोदी सरकार अब कुछ नये क़दम उठाने जा रही है। जैसा कि हमने आपको बताया कि इस समय गाड़ियों की मांग मार्केट में ऐतिहासिक स्तर पर कम हो गई है, ऐसे में सरकार ऑटो इण्डस्ट्री में नई मांग पैदा करने का प्रयास कर रही है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि काफ़ी लम्बे समय से प्रतीक्षारत ऑटो स्क्रैपेज पॉलिसी जल्द लागू हो सकती है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, सड़क परिवहन मंत्रालय ने ऑटो स्क्रैपेज पॉलिसी ड्रॉफ्ट कैबिनेट नोट जारी कर दिया है और कहा जा रहा है कि आगामी दो सप्ताह में इसे कैबिनेट से मन्जूरी मिल सकती है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि परिवहन मंत्रालय ने जो ड्राफ्ट कैबिनेट नोट जारी किया है, सूत्रों के मुताबिक़ उसमें स्क्रैप पॉलिसी को लेकर वित्त, परिवहन, स्टील ,पर्यावरण मंत्रालयों में सहमति बन गई है। इस पॉलिसी को कैबिनेट की मन्जूरी मिलते ही स्क्रैप पॉलिसी पर अमल शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है। अब आप सोच रहे होंगे कि स्क्रैप पॉलिसी क्या होती है और इससे किस तरह से गाड़ियों की बिक्री में वृद्धि होगी और इससे सरकार को क्या फ़ायदा होगा? तो आइये आपको पूरी जानकारी हम विस्तार से बताते हैं।
दरअसल, ऑटो स्क्रैपेज पॉलिसी ड्राफ्ट में पुरानी कमर्शियल गाड़ियों की ख़रीदी और बिक्री पर सख़्ती का प्रावधान है। लेकिन वहीं पुरानी गाड़ी के बदले नई गाड़ी लेने पर कई तरह की छूट दी जा सकती है। यदि कोई व्यक्ति अपनी पुरानी गाड़ी को स्क्रैप करके नई गाड़ी ख़रीदता है तो उसे रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन चार्ज में छूट देने का प्रस्ताव है। लेकिन वहीं यदि गाड़ी 15 साल से ज़्यादा पुरानी है तो उस पर ज़्यादा रोड टैक्स चुकाना पड़ सकता है। ड्रॉफ्ट में प्रस्तावित पॉलिस में पुरानी गाड़ी के रजिस्ट्रेशन पर रिन्यू चार्ज को कई गुना बढ़ाया जा सकता है। जानकारी के मुताबिक़, शुरुआती प्रस्ताव में रजिस्ट्रेशन रिन्यू पर 25 गुना चार्ज देना होगा, जिसमें कार, 3-व्हीलर और 2-व्हीलर शामिल होंगी।
जानकारी के अनुसार साल 2005 से पहले विनिर्मित गाड़ियों के लिए पंजीकरण और फिटनेस नियमों को कड़ा किया जा सकता है। एक अनुमान के अनुसार देश में साल 2005 से पहले निर्मित दो करोड़ गाड़ियां देश की सड़कों पर दौड़ रही हैं। नई स्क्रैप पॉलिसी का म़कसद ऐसे वाहनों को हतोत्साहित करना है, जिससे पुरानी गाड़ियों की सेलिंग कम या बंद हो सके और लोग नई गाड़ियों को ख़रीदें।
नई स्क्रैप पॉलिसी में पुराने वाहनों को कबाड़ करने के बाद नया वाहन ख़रीदने वालों को सरकार और डीलर्स की तरफ़ से रियायत भी मिल सकती है। वहीं परिवहन मंत्रालय आने वाले दो साल में फिटनेस की व्यवस्था को ऑटोमेटेड करने की योजना बना रहा है, जिसमें कोई मानवीय हस्तक्षेप नहीं होगा। कहा जा रहा है कि ऐसा होने से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और मानकों पर खरा ना उतरने वाली गाड़ियों की सही तरीक़े से पहचान हो सकेगी।
नई स्क्रैप पॉलिसी आने के बाद सरकार के राजस्व में भी इजाफ़े की बात कही जा रहा है। जानकारों के मुताबिक़, नई पॉलिसी से सरकार के राजस्व में क़रीब 100 अरब रुपये की वृद्धि हो सकती है। वहीं नई पॉलिसी से नये वाहनों की बिक्री में 22 प्रतिशत तक वृद्धि की आशा की जा रही है। मौजूदा समय में ऑटोमोबाइल इण्डस्ट्री जो कि क़रीब 4.5 लाख करोड़ की है, वो नई पॉलिसी के बाद 20 लाख करोड़ रुपये की इण्डस्ट्री बन सकती है।
ऑटो इण्डस्ट्री के जानकारों के मुताबिक़, सरकार की नई स्क्रैपिंग पॉलिसी से आर्थिक मंदी झेल रही देश की ऑटोमोबाइल इण्डस्ट्री में गाड़ियों की बिक्री बढ़ेगी, क्योंकि लोग नए वाहनों को खरीदेंगे। समय-समय पर सोसाइटी ऑफ़ इण्डियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के आंकड़े बता रहे हैं कि गाड़ियों की बिक्री कम होती जा रही है। अब ऐसे में ऑटोमोबाइल इण्डस्ट्री को भी सरकार की इस नई नीति से काफ़ी उम्मीदें हैं कि इससे गाड़ियों की बिक्री में वृद्धि हो और इस क्षेत्र में रोज़गार बढ़े।