बेहतर होगा कि अपने बच्चों को दूर ही रखिये सोशल मीडिया से!
Saturday - November 16, 2019 12:57 pm ,
Category : WTN HINDI
रिसर्च से सामने आए सोशल मीडिया के साइड इफेक्ट्स
सोशल मीडिया बना रहा है आपके बच्चों को 'असंतुष्ट' और 'निराशावादी'
NOV 16 (WTN) – किसी भी साधन या सुविधा के इस्तेमाल पर ही निर्भर होता है कि वो आपके लिए लाभदायक है या फ़िर नुकसानदायक। यदि आप साधन या सुविधा का विवेकपूर्ण तरीक़े से इस्तेमाल करते हैं तो यह आपके लिए लाभदायक साबित होंगे, लेकिन वहीं आपने इसका ग़लत तरीक़े से इस्तेमाल किया तो यही साधन या सुविधा आपके लिए परेशानी का कारण बन सकते हैं। कुछ ऐसा ही इन दिनों स्मार्टफ़ोन और सोशल मीडिया के इस्तेमाल में देखा जा रहा है। रिसर्च बताते हैं कि स्मार्टफ़ोन और सोशल मीडिया का ग़लत इस्तेमाल नुकसानदायक साबित हो रहा है।
रिसर्च से पता चला है कि सोशल मीडिया के बहुत ज़्यादा इस्तेमाल से बच्चों के मन पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है और यह प्रभाव सकारात्मक और नकारात्मक दोनों हो सकता है। देखा गया है कि बच्चे सोशल मीडिया का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल करने लगे हैं। एक रिसर्च के मुताबिक, जो बच्चे सोशल मीडिया का उपयोग बहुत ज़्यादा करते हैं, उनके मन में जीवन के प्रति असंतुष्टि का भाव अन्य बच्चों की तुलना में जरा ज़्यादा ही रहता है। सोशल मीडिया का ज़्यादा इस्तेमाल कर रहे बच्चे तुलना करने लगते हैं और इसी कारण से वे अपने अभिभावकों से ऐसी मांग करने लगते हैं, जिसकी या तो उन्हें ज़रूरत ही नहीं या फ़िर वो उनके अभिभावकों की आर्थिक क्षमता से ज़्यादा है।
कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि सोशल मीडिया के ज़्यादा इस्तेमाल से बच्चों के मन में असंतुष्टि के भाव ज़्यादा उत्पन्न होने लगते हैं। दरअसल, आधुनिक युग में व्यस्त दिनचर्या होने के कारण माता-पिता बच्चों को समय नहीं दे पाते हैं और उनके हाथ में स्मार्टफ़ोन दे देते हैं ताकि उनका समय गुजर सके, लेकिन माता-पिता की यह ग़लती बच्चों के दिमाग पर असर कर रही है और उन्हें असंतुष्ट बना रही है। एक रिसर्च के मुताबिक़, बच्चे सोशल मीडिया पर जितना ज़्यादा समय बिताते हैं, वे उसी अनुपात में अपने जीवन, स्कूल और घर-परिवार के प्रति असंतुष्ट रहते हैं।
वहीं जो बच्चे सोशल मीडिया पर तुलनात्मक रूप से कम समय बिताते हैं, वे आशावादी होते हैं और जीवन के प्रति ज़्यादा संतुष्ट नज़र आते हैं। रिसर्च के मुताबिक़, जो बच्चे सोशल मीडिया पर कम समय बिताते हैं उन्हें अपना स्कूल और माता-पिता ज़्यादा पसंद आते हैं। वहीं जो बच्चे सोशल मीडिया पर ज़्यादा समय बिताते हैं, वे निराशावादी हो जाते हैं और उन्हें लगता है कि उनका जीवन अर्थहीन है। इतना ही नहीं, सोशल मीडिया के ज़्यादा इस्तेमाल से लड़कियों पर ज़्यादा हानिकारक प्रभाव पड़ता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि लड़कों की तुलना में लड़कियां जरा ज़्यादा भावुक होती हैं।
वहीं सोशल मीडिया के ज़्यादा इस्तेमाल से बच्चों की पढ़ाई पर भी विपरित असर पड़ रहा है। एक रिसर्च के मुताबिक़, जिन बच्चों के मार्क्स परीक्षा में औसत से कम आते हैं अगर वे सोशल मीडिया का इस्तेमाल कम कर देते हैं तो उनके नम्बर 10 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं। रिसर्च में पता चला है कि जो विद्यार्थी फेसबुक पर कम समय व्यतीत करते हैं उनका पढ़ाई में ज़्यादा मन लगता है।
ऑस्ट्रेलिया की एक यूनिवर्सिटी में हुई इस रिसर्च के मुताबिक़, जिन विद्यार्थियों के ग्रेड अच्छे थे उनके सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से उनके अंकों पर कोई ज़्यादा फर्क नहीं पड़ा, लेकिन जिन विद्यार्थियों के नम्बर कम थे उनके सोशल मीडिया पर ज़्यादा समय व्यतीत करने से परीक्षा में उनके अंकों पर असर देखा गया है। रिसर्च में इस बात की पुष्टि हुई कि कम नम्बर लाने वाले विद्यार्थी यदि सोशल मीडिया का ज़्यादा इस्तेमाल करते हैं तो उनके नम्बर और कम होने की आशंका रहती है। वहीं यदि ऐसे विद्यार्थी जिनके नम्बर कम आते हैं वे यदि सोशल मीडिया का कम से कम इस्तेमाल करें तो उनके अंकों में 10 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है।
यानी कि साफ़ ज़ाहिर है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल बच्चों के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है। सोशल मीडिया पर ज़्यादा समय बिताने वाले बच्चे ख़ुद की अन्य लोगों से तुलना करने लगते हैं, ऐसे में उन्हें ख़ुद में हीनभावना आने लगती है और वे ख़ुद से, अपने जीवन से, अपने माता-पिता से और अपने स्कूल से अंसतुष्ट नज़र आने लगते हैं। सोशल मीडिया पर दिखावे की दुनिया से बच्चों के मन में लालच और तुलना जैसी भावनाएं घर कर जाती हैं, जिससे वे उन वस्तुओं और साधनों की जिद करने लगते हैं जिनका उनके लिए कोई उपयोग नहीं है और इन वस्तुओं और साधनों की पूर्ति ना होने पर बच्चे चिढ़चिढ़े हो जाते हैं और उनमें असंतुष्टि की भावना पनपने लगती है।
यदि आप अपने बच्चे को आशावादी और संतुष्ट देखना चाहते हैं तो अपने बच्चों को या तो सोशल मीडिया से दूर रखिए या फ़िर सोशल मीडिया पर उसे कम से कम समय व्यतीत करने दीजिए। सोशल मीडिया एक आभासी दुनिया है और बच्चों को जब इस आभासी दुनिया में जीने की लत लग जाती है तो उन्हें वास्तविक दुनिया निराशावादी और नीरस लगने लगती है। ऐसे में आप अपने बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखिए और उसे आशावादी और संतुष्ट बनाइये।
NOV 16 (WTN) – किसी भी साधन या सुविधा के इस्तेमाल पर ही निर्भर होता है कि वो आपके लिए लाभदायक है या फ़िर नुकसानदायक। यदि आप साधन या सुविधा का विवेकपूर्ण तरीक़े से इस्तेमाल करते हैं तो यह आपके लिए लाभदायक साबित होंगे, लेकिन वहीं आपने इसका ग़लत तरीक़े से इस्तेमाल किया तो यही साधन या सुविधा आपके लिए परेशानी का कारण बन सकते हैं। कुछ ऐसा ही इन दिनों स्मार्टफ़ोन और सोशल मीडिया के इस्तेमाल में देखा जा रहा है। रिसर्च बताते हैं कि स्मार्टफ़ोन और सोशल मीडिया का ग़लत इस्तेमाल नुकसानदायक साबित हो रहा है।
रिसर्च से पता चला है कि सोशल मीडिया के बहुत ज़्यादा इस्तेमाल से बच्चों के मन पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है और यह प्रभाव सकारात्मक और नकारात्मक दोनों हो सकता है। देखा गया है कि बच्चे सोशल मीडिया का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल करने लगे हैं। एक रिसर्च के मुताबिक, जो बच्चे सोशल मीडिया का उपयोग बहुत ज़्यादा करते हैं, उनके मन में जीवन के प्रति असंतुष्टि का भाव अन्य बच्चों की तुलना में जरा ज़्यादा ही रहता है। सोशल मीडिया का ज़्यादा इस्तेमाल कर रहे बच्चे तुलना करने लगते हैं और इसी कारण से वे अपने अभिभावकों से ऐसी मांग करने लगते हैं, जिसकी या तो उन्हें ज़रूरत ही नहीं या फ़िर वो उनके अभिभावकों की आर्थिक क्षमता से ज़्यादा है।
कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि सोशल मीडिया के ज़्यादा इस्तेमाल से बच्चों के मन में असंतुष्टि के भाव ज़्यादा उत्पन्न होने लगते हैं। दरअसल, आधुनिक युग में व्यस्त दिनचर्या होने के कारण माता-पिता बच्चों को समय नहीं दे पाते हैं और उनके हाथ में स्मार्टफ़ोन दे देते हैं ताकि उनका समय गुजर सके, लेकिन माता-पिता की यह ग़लती बच्चों के दिमाग पर असर कर रही है और उन्हें असंतुष्ट बना रही है। एक रिसर्च के मुताबिक़, बच्चे सोशल मीडिया पर जितना ज़्यादा समय बिताते हैं, वे उसी अनुपात में अपने जीवन, स्कूल और घर-परिवार के प्रति असंतुष्ट रहते हैं।
वहीं जो बच्चे सोशल मीडिया पर तुलनात्मक रूप से कम समय बिताते हैं, वे आशावादी होते हैं और जीवन के प्रति ज़्यादा संतुष्ट नज़र आते हैं। रिसर्च के मुताबिक़, जो बच्चे सोशल मीडिया पर कम समय बिताते हैं उन्हें अपना स्कूल और माता-पिता ज़्यादा पसंद आते हैं। वहीं जो बच्चे सोशल मीडिया पर ज़्यादा समय बिताते हैं, वे निराशावादी हो जाते हैं और उन्हें लगता है कि उनका जीवन अर्थहीन है। इतना ही नहीं, सोशल मीडिया के ज़्यादा इस्तेमाल से लड़कियों पर ज़्यादा हानिकारक प्रभाव पड़ता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि लड़कों की तुलना में लड़कियां जरा ज़्यादा भावुक होती हैं।
वहीं सोशल मीडिया के ज़्यादा इस्तेमाल से बच्चों की पढ़ाई पर भी विपरित असर पड़ रहा है। एक रिसर्च के मुताबिक़, जिन बच्चों के मार्क्स परीक्षा में औसत से कम आते हैं अगर वे सोशल मीडिया का इस्तेमाल कम कर देते हैं तो उनके नम्बर 10 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं। रिसर्च में पता चला है कि जो विद्यार्थी फेसबुक पर कम समय व्यतीत करते हैं उनका पढ़ाई में ज़्यादा मन लगता है।
ऑस्ट्रेलिया की एक यूनिवर्सिटी में हुई इस रिसर्च के मुताबिक़, जिन विद्यार्थियों के ग्रेड अच्छे थे उनके सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से उनके अंकों पर कोई ज़्यादा फर्क नहीं पड़ा, लेकिन जिन विद्यार्थियों के नम्बर कम थे उनके सोशल मीडिया पर ज़्यादा समय व्यतीत करने से परीक्षा में उनके अंकों पर असर देखा गया है। रिसर्च में इस बात की पुष्टि हुई कि कम नम्बर लाने वाले विद्यार्थी यदि सोशल मीडिया का ज़्यादा इस्तेमाल करते हैं तो उनके नम्बर और कम होने की आशंका रहती है। वहीं यदि ऐसे विद्यार्थी जिनके नम्बर कम आते हैं वे यदि सोशल मीडिया का कम से कम इस्तेमाल करें तो उनके अंकों में 10 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है।
यानी कि साफ़ ज़ाहिर है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल बच्चों के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है। सोशल मीडिया पर ज़्यादा समय बिताने वाले बच्चे ख़ुद की अन्य लोगों से तुलना करने लगते हैं, ऐसे में उन्हें ख़ुद में हीनभावना आने लगती है और वे ख़ुद से, अपने जीवन से, अपने माता-पिता से और अपने स्कूल से अंसतुष्ट नज़र आने लगते हैं। सोशल मीडिया पर दिखावे की दुनिया से बच्चों के मन में लालच और तुलना जैसी भावनाएं घर कर जाती हैं, जिससे वे उन वस्तुओं और साधनों की जिद करने लगते हैं जिनका उनके लिए कोई उपयोग नहीं है और इन वस्तुओं और साधनों की पूर्ति ना होने पर बच्चे चिढ़चिढ़े हो जाते हैं और उनमें असंतुष्टि की भावना पनपने लगती है।
यदि आप अपने बच्चे को आशावादी और संतुष्ट देखना चाहते हैं तो अपने बच्चों को या तो सोशल मीडिया से दूर रखिए या फ़िर सोशल मीडिया पर उसे कम से कम समय व्यतीत करने दीजिए। सोशल मीडिया एक आभासी दुनिया है और बच्चों को जब इस आभासी दुनिया में जीने की लत लग जाती है तो उन्हें वास्तविक दुनिया निराशावादी और नीरस लगने लगती है। ऐसे में आप अपने बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखिए और उसे आशावादी और संतुष्ट बनाइये।