मोदी सरकार लेने जा रही है बैंक उपभोक्ताओं के हित में ‘बड़ा फ़ैसला’
Saturday - November 16, 2019 3:06 pm ,
Category : WTN HINDI
बैंकों में जमा राशि की वापसी की गारण्टी रक़म बढ़ा सकती है मोदी सरकार
बैंकिंग प्रणाली में लोगों का विश्वास बढ़ाने मोदी सरकार का ‘मास्टर स्ट्रोक’
NOV 16 (WTN) – कई कारणों के चलते आप अपना पैसा घर की बजाय बैंकों में रखते हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि आपका सोचना है कि बैंकों में आपका पैसा चोरी, डकैती और प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रहता है। वहीं बैंक में पैसा रखने से आपको कई तरह के लाभ बैंक द्वारा दिये जाते हैं। आप यदि सोच रहे हैं कि बैंक में रखा आपका पैसा सुरक्षित है, तो शायद आप किसी बड़ी ग़लतफ़हमी में हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि किसी भी कारण से कोई बैंक दिवालिया या धराशायी होता है तो उसमें आपके द्वारा किसी भी रूप में जमा की गई पूरी राशि आपको नहीं मिलेगी।
जी हां, यदि किसी बैंक में आपके 10 लाख रुपये किसी भी रूप में जमा हैं और वो बैंक यदि किसी भी कारण से दिवालिया या धराशायी हो जाता है तो उस बैंक में आपके द्वारा जमा किये गये पूरे 10 लाख रुपये आपको नहीं मिलेंगे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि किसी भी बैंक के दिवालिया होने या धराशायी होने के बाद उस बैंक के उपभोक्ता बैंक में जमा अपनी पूरी राशि का क्लेम नहीं कर सकते हैं। नियमों के अनुसार बैंक के डूबने की स्थिति में उस बैंक के उपभोक्ता एक निश्चित राशि से ज़्यादा का क्लेम नहीं कर सकते हैं।
डिपॉजिट इंश्योरेंस एण्ड क्रेडिट गारण्टी कॉर्पोरेशन (DICGC), बैंकों में जमा राशि की एक सीमा तक सुरक्षा की गारण्टी लेता है। आपकी जानकारी क लिए बता दें कि यह कॉर्पोरेशन रिज़र्व बैंक की एक सहायक इकाई है और इसकी स्थापना जुलाई 1978 में हुई थी। किसी भी बैंक के दिवालिया होने या धराशायी होने की स्थिति में यह निगम बैंकों के जमाधारकों को उनकी जमा राशि पर अधिकतम 1 लाख रुपये तक की गारण्टी देता है। यदि कोई बैंक दिवालिया या धराशायी होता है तो उस बैंक के उपभोक्ताओं का कितना भी पैसा किसी भी रूप में बैंक में जमा हो, उन्हें क्लेम के बाद अधिकतम सिर्फ़ 1 लाख रुपये ही मिलेंगे वो भी दो महीने की समय सीमा के अन्दर।
रिज़र्व बैंक के लाइसेंसधारी सभी बैंक हर साल अपने बैंक में जमा डिपॉज़िट के इन्श्योरेंस के लिए DICGC को प्रीमियम देते हैं। जानकारी के लिए बता दें कि किसी भी बैंक के बचत खाता, चालू खाता, फिक्स्ड डिपॉज़िट और रेकरिंग डिपॉज़िट समेत सभी डिपॉज़िट इंश्योरेंस एण्ड गारण्टी कॉरपोरेशन (DICGC) की तरफ से इंश्योर्ड होते हैं। जैसा कि हमने आपको बताया कि बैंक में जमा राशि का सिर्फ़ 1 लाख रुपया ही इंश्योर्ड है और इस 1 लाख रुपये में प्रिसिंपल अमाउण्ट और ब्याज, दोनों शामिल हैं। इतना ही नहीं, इस लिमिट में एक बैंक की सभी ब्रांच में किए गए सभी डिपॉज़िट भी शामिल हैं।
दरअसल, बहुचर्चित पीएमसी बैंक घोटाले के सामने आने के बाद से बैंकों में ग्राहकों की जमा राशि के भविष्य को लेकर पूरे देश में बहस छिड़ी हुई है कि किसी भी बैंक के दिवालिया या धराशायी होने पर उस बैंक के उपभोक्ताओं के लाखों रुपये डूब जाते हैं। किसी भी बैंक के दिवालिया या धराशायी होने पर उसके उपभोक्ताओं को अधिकतम 1 लाख रुपये ही मिलेंगे, इस सीमा को साल 1993 में तय किया था। लेकिन अब महंगाई और आयकर छूट की सीमा में वृद्धि को देखते हुए इस सीमा को बढ़ाए जाने की ज़रूरत महसूस की जा रही है।
पीएमसी बैंक घोटाले के बाद बैंक के उपभोक्ताओं की परेशानी को देखते हुए और बैंकिंग प्रणाली पर लोगों द्वारा जताए जा रहे अविश्वास के बाद केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार एक बड़ा फैसला लेने जा रही है। जानकारी के मुताबिक, इस फ़ैसले के तहत बैंक खातों में जमा रकम पर इंश्योरेंस गारण्टी की सीमा बढ़ाई जा सकती है। इस बारे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है, “बैंक जमा एवं ऋण गारण्टी निगम अधिनियम योजना के तहत जमाकर्ताओं की बैंकों में जमा राशि पर मिलने वाले इंश्योरेंस को वर्तमान में 1 लाख रुपये की सीमा से ऊपर किया जाएगा।”
जानकारी के मुताबिक़, इसके लिए संसद के शीतकालीन सत्र में एक संशोधन विधेयक लाया जा सकता है। हालांकि, इस बात की अभी कोई जानकारी नहीं है कि बैंक जमा पर बीमा सुरक्षा की नई सीमा कितनी बढ़ाई जा सकती है। दरअसल, पंजाब एण्ड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (पीएमसी) बैंक के घोटाले के बाद बैंकों में जमा राशि की बीमा रकम को बढ़ाने पर बहस के बाद मोदी सरकार की इस पहल से लोगों का एक बार फ़िर से बैंकिंग प्रणाली के प्रति विश्वास बढ़ेगा। लोगों की मांग है कि बैंक में जमा उनकी ज़्यादा से ज़्यादा राशि का बीमा हो, जिससे किसी भी कारण से बैंक के दिवालिया या धराशायी होने पर उन्हें जमा राशि की ज़्यादा से ज़्यादा रक़म मिल सके।
NOV 16 (WTN) – कई कारणों के चलते आप अपना पैसा घर की बजाय बैंकों में रखते हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि आपका सोचना है कि बैंकों में आपका पैसा चोरी, डकैती और प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रहता है। वहीं बैंक में पैसा रखने से आपको कई तरह के लाभ बैंक द्वारा दिये जाते हैं। आप यदि सोच रहे हैं कि बैंक में रखा आपका पैसा सुरक्षित है, तो शायद आप किसी बड़ी ग़लतफ़हमी में हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि किसी भी कारण से कोई बैंक दिवालिया या धराशायी होता है तो उसमें आपके द्वारा किसी भी रूप में जमा की गई पूरी राशि आपको नहीं मिलेगी।
जी हां, यदि किसी बैंक में आपके 10 लाख रुपये किसी भी रूप में जमा हैं और वो बैंक यदि किसी भी कारण से दिवालिया या धराशायी हो जाता है तो उस बैंक में आपके द्वारा जमा किये गये पूरे 10 लाख रुपये आपको नहीं मिलेंगे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि किसी भी बैंक के दिवालिया होने या धराशायी होने के बाद उस बैंक के उपभोक्ता बैंक में जमा अपनी पूरी राशि का क्लेम नहीं कर सकते हैं। नियमों के अनुसार बैंक के डूबने की स्थिति में उस बैंक के उपभोक्ता एक निश्चित राशि से ज़्यादा का क्लेम नहीं कर सकते हैं।
डिपॉजिट इंश्योरेंस एण्ड क्रेडिट गारण्टी कॉर्पोरेशन (DICGC), बैंकों में जमा राशि की एक सीमा तक सुरक्षा की गारण्टी लेता है। आपकी जानकारी क लिए बता दें कि यह कॉर्पोरेशन रिज़र्व बैंक की एक सहायक इकाई है और इसकी स्थापना जुलाई 1978 में हुई थी। किसी भी बैंक के दिवालिया होने या धराशायी होने की स्थिति में यह निगम बैंकों के जमाधारकों को उनकी जमा राशि पर अधिकतम 1 लाख रुपये तक की गारण्टी देता है। यदि कोई बैंक दिवालिया या धराशायी होता है तो उस बैंक के उपभोक्ताओं का कितना भी पैसा किसी भी रूप में बैंक में जमा हो, उन्हें क्लेम के बाद अधिकतम सिर्फ़ 1 लाख रुपये ही मिलेंगे वो भी दो महीने की समय सीमा के अन्दर।
रिज़र्व बैंक के लाइसेंसधारी सभी बैंक हर साल अपने बैंक में जमा डिपॉज़िट के इन्श्योरेंस के लिए DICGC को प्रीमियम देते हैं। जानकारी के लिए बता दें कि किसी भी बैंक के बचत खाता, चालू खाता, फिक्स्ड डिपॉज़िट और रेकरिंग डिपॉज़िट समेत सभी डिपॉज़िट इंश्योरेंस एण्ड गारण्टी कॉरपोरेशन (DICGC) की तरफ से इंश्योर्ड होते हैं। जैसा कि हमने आपको बताया कि बैंक में जमा राशि का सिर्फ़ 1 लाख रुपया ही इंश्योर्ड है और इस 1 लाख रुपये में प्रिसिंपल अमाउण्ट और ब्याज, दोनों शामिल हैं। इतना ही नहीं, इस लिमिट में एक बैंक की सभी ब्रांच में किए गए सभी डिपॉज़िट भी शामिल हैं।
दरअसल, बहुचर्चित पीएमसी बैंक घोटाले के सामने आने के बाद से बैंकों में ग्राहकों की जमा राशि के भविष्य को लेकर पूरे देश में बहस छिड़ी हुई है कि किसी भी बैंक के दिवालिया या धराशायी होने पर उस बैंक के उपभोक्ताओं के लाखों रुपये डूब जाते हैं। किसी भी बैंक के दिवालिया या धराशायी होने पर उसके उपभोक्ताओं को अधिकतम 1 लाख रुपये ही मिलेंगे, इस सीमा को साल 1993 में तय किया था। लेकिन अब महंगाई और आयकर छूट की सीमा में वृद्धि को देखते हुए इस सीमा को बढ़ाए जाने की ज़रूरत महसूस की जा रही है।
पीएमसी बैंक घोटाले के बाद बैंक के उपभोक्ताओं की परेशानी को देखते हुए और बैंकिंग प्रणाली पर लोगों द्वारा जताए जा रहे अविश्वास के बाद केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार एक बड़ा फैसला लेने जा रही है। जानकारी के मुताबिक, इस फ़ैसले के तहत बैंक खातों में जमा रकम पर इंश्योरेंस गारण्टी की सीमा बढ़ाई जा सकती है। इस बारे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है, “बैंक जमा एवं ऋण गारण्टी निगम अधिनियम योजना के तहत जमाकर्ताओं की बैंकों में जमा राशि पर मिलने वाले इंश्योरेंस को वर्तमान में 1 लाख रुपये की सीमा से ऊपर किया जाएगा।”
जानकारी के मुताबिक़, इसके लिए संसद के शीतकालीन सत्र में एक संशोधन विधेयक लाया जा सकता है। हालांकि, इस बात की अभी कोई जानकारी नहीं है कि बैंक जमा पर बीमा सुरक्षा की नई सीमा कितनी बढ़ाई जा सकती है। दरअसल, पंजाब एण्ड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (पीएमसी) बैंक के घोटाले के बाद बैंकों में जमा राशि की बीमा रकम को बढ़ाने पर बहस के बाद मोदी सरकार की इस पहल से लोगों का एक बार फ़िर से बैंकिंग प्रणाली के प्रति विश्वास बढ़ेगा। लोगों की मांग है कि बैंक में जमा उनकी ज़्यादा से ज़्यादा राशि का बीमा हो, जिससे किसी भी कारण से बैंक के दिवालिया या धराशायी होने पर उन्हें जमा राशि की ज़्यादा से ज़्यादा रक़म मिल सके।