हर महीने समय पर वेतन नहीं मिलने की ‘समस्या’ अब जल्द होगी दूर
Wednesday - November 20, 2019 10:21 am ,
Category : WTN HINDI
कर्मचारियों के हितों के लिए मोदी सरकार ला रही नई नीति
“वन नेशन, वन पे डे” नीति से मज़बूत होगा भाजपा का वोट बैंक!
NOV 20 (WTN) – एक नौकरीपेशा व्यक्ति के लिए वेतन की काफ़ी अहमियत होती है। वेतन से मिलने वाले पैसों से ही उसका और उसके परिवार का गुज़ारा होता है। वहीं वेतन के पैसों की बचत वेतनभोगी व्यक्ति के लिए भविष्य में ज़रूरत के वक़्त काम में आती है। लेकिन भारत में निजी क्षेत्र में नौकरी करने वाले लोगों के साथ वेतन विसंगति की समस्या रहती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत में कई कम्पनियों और संस्थानों में कर्मचारियों को मानक वेतन तक नहीं दिया जाता है और उनसे नियमों से ज़्यादा काम लिया जाता है। कई तरह की वेतन विसंगतियों में एक विसंगति है, वेतन का समय पर नहीं मिलना।
देखा गया है कि भारत में निजी क्षेत्र में काम करने वालों के लिए वेतन समय पर नहीं मिलना हर महीने के एक बड़ी समस्या है। भारत में श्रम क़ानूनों का सही तरीक़े से पालन नहीं होने के कारण कम्पनियां और संस्थान हर महीने एक तय समय पर वेतन नहीं देती हैं, जिसके कारण नौकरीपेशा लोगों का बजट बिगड़ जाता है और उन्हें परेशानियां का सामना करना पड़ता है।
देश में करोड़ों लोगों की इस समस्या को देखते हुए मोदी सरकार अब नौकरीपेशा लोगों के लिए "अच्छे दिन" लाने की कवायद में है। जानकारी के मुताबिक़, मोदी सरकार “वन नेशन, वन पे डे” नति पर विचार कर रही है। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ख़ुद चाहते हैं कि इसके लिए बाक़ायदा एक क़ानून तैयार किया जाए और इसे जल्द से जल्द पास किया जाए। “वन नेशन, वन पे डे” पढ़कर आप सोच रहे होंगे कि आख़िर मोदी सरकार की इस नीति का उद्देश्य क्या है? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस नीति के अनुसार पूरे देश में वेतन के लिए एक समान व्यवस्था किये जाने की योजना है, जिसके तहत हर सेक्टर में सभी वर्ग के कर्मचारियों और मज़दूरों को महीने के एक ही दिन वेतन मिलेगा।
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ख़ुद की मंशा है कि नौकरी करने वाले सभी लोगों को पूरे देश में हर महीने की एक निश्चित तारीख़ को वेतन मिलना चाहिए और इसके लिए जल्द से जल्द एक क़ानून संसद से पारित किया जाए। यदि यह क़ानून पारित हो जाता है और देश में “वन नेशन, वन पे डे” नीति लागू हो जाती है तो संगठित क्षेत्र के सभी कर्मचारियों को महीने के एक ही दिन वेतन मिला करेगा। दरअसल, अभी तक सैलरी मिलने का कोई सिस्टम देश में तय नहीं है। वर्तमान में कम्पनियां और संस्थान अपनी सुविधा के हिसाब से महीने के किसी भी दिन वेतन देती हैं।
यदि महीने के एक निर्धारित दिन कर्मचारियों को वेतन मिलने लगेगा तो इससे उनका मासिक बजट नहीं गड़बड़ाएगा और वे वेतन के हिसाब से भविष्य के लिए प्लानिंग भी कर सकेंगे। वहीं “वन नेशन, वन पे डे” नीति के अलावा मोदी सरकार कर्मचारियों की हितों की रक्षा के लिए और भी कुछ बड़े फ़ैसले ले सकती है। जैसे सरकार यूनिफॉर्म मिनिमम वेज प्रोग्राम को लागू करने की दिशा में भी काम कर रही है। वहीं व्यावसायिक सुरक्षा, हेल्थ एण्ड वर्किंग कंडीशन कोड (OSH), कोड ऑन वेजेज को लागू करने की भी तैयारी की जा रही है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि OSH (Occupational safety and health) को लोकसभा में 23 जुलाई 2019 को पेश किया गया था। इस कोड को 13 लेबर लॉ को मिलाकर तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा इसमें कई और प्रावधानों को भी जोड़ा गया है, जैसे हर कर्मचारी को अपॉइंटमेंट लेटर, वार्षिक फ्री मेडिकल चेकअप और साथ में और भी कई सुविधाएं। वैसे मोदी सरकार का दावा है कि 2014 में पदभार सम्भालने के बाद से मोदी सरकार श्रम क़ानूनों में सुधार पर काम कर रही है। मोदी सरकार ने 44 जटिल श्रम क़ानूनों में सुधार का कार्य किया है और इन क़ानूनों को और भी ज़्यादा प्रभावी और लाभदायक बनाने के लिए सभी हितधारकों से इस विषय पर बातचीत की जा रही है।
दरअसल, मोदी सरकार कि इस महत्वाकांक्षी नीति के पीछे प्रधानमंत्री मोदी की राजनीतिक कुशलता भी देखी जा रही है। ऐसा इसलिए, क्योंकि देश में करोड़ों की तादात में लोग निजी क्षेत्र में नौकरी करते हैं। यदि मोदी सरकार हर महीने समय पर वेतन समेत अन्य सुधार करती है, तो इससे निजी क्षेत्र में काम कर रहे करोड़ों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। अब नौकरी करने वाले यही करोड़ों लोग भारत में मध्यम वर्ग में आते हैं और इसी मध्यम वर्ग को हमेशा से ही भाजपा का समर्थक माना गया है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी वेतन और श्रम सुधार लागू करके अपने वोट बैंक को आर्थिक मज़बूती प्रदान करने की नीति पर काम कर रहे हैं, जिससे भाजपा का वोट बैंक और भी ज़्यादा मज़बूत हो सके।
इधर मोदी सरकार की “वन नेशन, वन पे डे” नीति के बारे में निजी क्षेत्र में नौकरी कर रहे लोगों ने प्रसन्नता ज़ाहिर की है। इन लोगों के मुताबिक़, यदि मोदी सरकार इस नीति को लागू करने के लिए कोई क़ानून बनाती है तो इससे उनकी बजट प्लानिंग सही तरीक़े से होगी और हर महीने वेतन कब मिलेगा इसकी चिन्ता से वे मुक्त हो जाएंगे। वहीं इस बारे में कम्पनियों और संस्थानों का मत है कि वेतन का एक दिन तय हो जाने से उन्हें अटेण्डेंस नीति और अकाउण्ट को नये तरीक़े से लागू करना होगा और चुंकि वेतन देने का एक दिन निर्धारित हो जाएगा तो इससे उनकी ज़िम्मेदारी और भी बढ़ जाएगी। अब देखना होगा कि मोदी सरकार कर्मचारियों के हित में फ़ैसला लेती है और अपने वोट बैंक को और भी ज़्यादा मज़बूत करती या फ़िर कॉरपोरेट लॉबी के दबाव में “वन नेशन, वन पे डे” नीति को ठण्डे बस्ते में डाल दिया जाता है।
NOV 20 (WTN) – एक नौकरीपेशा व्यक्ति के लिए वेतन की काफ़ी अहमियत होती है। वेतन से मिलने वाले पैसों से ही उसका और उसके परिवार का गुज़ारा होता है। वहीं वेतन के पैसों की बचत वेतनभोगी व्यक्ति के लिए भविष्य में ज़रूरत के वक़्त काम में आती है। लेकिन भारत में निजी क्षेत्र में नौकरी करने वाले लोगों के साथ वेतन विसंगति की समस्या रहती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत में कई कम्पनियों और संस्थानों में कर्मचारियों को मानक वेतन तक नहीं दिया जाता है और उनसे नियमों से ज़्यादा काम लिया जाता है। कई तरह की वेतन विसंगतियों में एक विसंगति है, वेतन का समय पर नहीं मिलना।
देखा गया है कि भारत में निजी क्षेत्र में काम करने वालों के लिए वेतन समय पर नहीं मिलना हर महीने के एक बड़ी समस्या है। भारत में श्रम क़ानूनों का सही तरीक़े से पालन नहीं होने के कारण कम्पनियां और संस्थान हर महीने एक तय समय पर वेतन नहीं देती हैं, जिसके कारण नौकरीपेशा लोगों का बजट बिगड़ जाता है और उन्हें परेशानियां का सामना करना पड़ता है।
देश में करोड़ों लोगों की इस समस्या को देखते हुए मोदी सरकार अब नौकरीपेशा लोगों के लिए "अच्छे दिन" लाने की कवायद में है। जानकारी के मुताबिक़, मोदी सरकार “वन नेशन, वन पे डे” नति पर विचार कर रही है। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ख़ुद चाहते हैं कि इसके लिए बाक़ायदा एक क़ानून तैयार किया जाए और इसे जल्द से जल्द पास किया जाए। “वन नेशन, वन पे डे” पढ़कर आप सोच रहे होंगे कि आख़िर मोदी सरकार की इस नीति का उद्देश्य क्या है? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस नीति के अनुसार पूरे देश में वेतन के लिए एक समान व्यवस्था किये जाने की योजना है, जिसके तहत हर सेक्टर में सभी वर्ग के कर्मचारियों और मज़दूरों को महीने के एक ही दिन वेतन मिलेगा।
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ख़ुद की मंशा है कि नौकरी करने वाले सभी लोगों को पूरे देश में हर महीने की एक निश्चित तारीख़ को वेतन मिलना चाहिए और इसके लिए जल्द से जल्द एक क़ानून संसद से पारित किया जाए। यदि यह क़ानून पारित हो जाता है और देश में “वन नेशन, वन पे डे” नीति लागू हो जाती है तो संगठित क्षेत्र के सभी कर्मचारियों को महीने के एक ही दिन वेतन मिला करेगा। दरअसल, अभी तक सैलरी मिलने का कोई सिस्टम देश में तय नहीं है। वर्तमान में कम्पनियां और संस्थान अपनी सुविधा के हिसाब से महीने के किसी भी दिन वेतन देती हैं।
यदि महीने के एक निर्धारित दिन कर्मचारियों को वेतन मिलने लगेगा तो इससे उनका मासिक बजट नहीं गड़बड़ाएगा और वे वेतन के हिसाब से भविष्य के लिए प्लानिंग भी कर सकेंगे। वहीं “वन नेशन, वन पे डे” नीति के अलावा मोदी सरकार कर्मचारियों की हितों की रक्षा के लिए और भी कुछ बड़े फ़ैसले ले सकती है। जैसे सरकार यूनिफॉर्म मिनिमम वेज प्रोग्राम को लागू करने की दिशा में भी काम कर रही है। वहीं व्यावसायिक सुरक्षा, हेल्थ एण्ड वर्किंग कंडीशन कोड (OSH), कोड ऑन वेजेज को लागू करने की भी तैयारी की जा रही है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि OSH (Occupational safety and health) को लोकसभा में 23 जुलाई 2019 को पेश किया गया था। इस कोड को 13 लेबर लॉ को मिलाकर तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा इसमें कई और प्रावधानों को भी जोड़ा गया है, जैसे हर कर्मचारी को अपॉइंटमेंट लेटर, वार्षिक फ्री मेडिकल चेकअप और साथ में और भी कई सुविधाएं। वैसे मोदी सरकार का दावा है कि 2014 में पदभार सम्भालने के बाद से मोदी सरकार श्रम क़ानूनों में सुधार पर काम कर रही है। मोदी सरकार ने 44 जटिल श्रम क़ानूनों में सुधार का कार्य किया है और इन क़ानूनों को और भी ज़्यादा प्रभावी और लाभदायक बनाने के लिए सभी हितधारकों से इस विषय पर बातचीत की जा रही है।
दरअसल, मोदी सरकार कि इस महत्वाकांक्षी नीति के पीछे प्रधानमंत्री मोदी की राजनीतिक कुशलता भी देखी जा रही है। ऐसा इसलिए, क्योंकि देश में करोड़ों की तादात में लोग निजी क्षेत्र में नौकरी करते हैं। यदि मोदी सरकार हर महीने समय पर वेतन समेत अन्य सुधार करती है, तो इससे निजी क्षेत्र में काम कर रहे करोड़ों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। अब नौकरी करने वाले यही करोड़ों लोग भारत में मध्यम वर्ग में आते हैं और इसी मध्यम वर्ग को हमेशा से ही भाजपा का समर्थक माना गया है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी वेतन और श्रम सुधार लागू करके अपने वोट बैंक को आर्थिक मज़बूती प्रदान करने की नीति पर काम कर रहे हैं, जिससे भाजपा का वोट बैंक और भी ज़्यादा मज़बूत हो सके।
इधर मोदी सरकार की “वन नेशन, वन पे डे” नीति के बारे में निजी क्षेत्र में नौकरी कर रहे लोगों ने प्रसन्नता ज़ाहिर की है। इन लोगों के मुताबिक़, यदि मोदी सरकार इस नीति को लागू करने के लिए कोई क़ानून बनाती है तो इससे उनकी बजट प्लानिंग सही तरीक़े से होगी और हर महीने वेतन कब मिलेगा इसकी चिन्ता से वे मुक्त हो जाएंगे। वहीं इस बारे में कम्पनियों और संस्थानों का मत है कि वेतन का एक दिन तय हो जाने से उन्हें अटेण्डेंस नीति और अकाउण्ट को नये तरीक़े से लागू करना होगा और चुंकि वेतन देने का एक दिन निर्धारित हो जाएगा तो इससे उनकी ज़िम्मेदारी और भी बढ़ जाएगी। अब देखना होगा कि मोदी सरकार कर्मचारियों के हित में फ़ैसला लेती है और अपने वोट बैंक को और भी ज़्यादा मज़बूत करती या फ़िर कॉरपोरेट लॉबी के दबाव में “वन नेशन, वन पे डे” नीति को ठण्डे बस्ते में डाल दिया जाता है।