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मोबाइल फ़ोन के इस्तेमाल में आप तो नहीं करते ‘यह’ ग़लतियां!

Friday - November 22, 2019 11:33 am , Category : WTN HINDI
मोबाइल फ़ोन का ग़लत इस्तेमाल है ‘हानिकारक’
मोबाइल फ़ोन का ग़लत इस्तेमाल है ‘हानिकारक’

यदि रहना है स्वस्थ तो मोबाइल फ़ोन से बनाए रखें ‘पर्याप्त दूरी’

NOV 22 (WTN) – 21वीं सदी के इस जमाने में ऐसा कौन है जिसे मोबाइल फ़ोन की ज़रूरत नहीं पड़ती है। कॉलिंग से लेकर ऑनलाइन कामों के लिए हम सभी मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल करते ही हैं। दरअसल, हम सभी मोबाइल फ़ोन के आदी हो चुके हैं और मोबाइल फ़ोन को हमेशा पास रखना हम सभी के लिए काफ़ी ज़रूरी हो गया है। एक रिसर्च के मुताबिक़, एक आम इंसान अपना सबसे ज़्यादा वक़्त आजकल मोबाइल फ़ोन के साथ ही बिताता है क्योंकि उसके लगभग सभी ज़रूरी काम ऑनलाइन हो जाते हैं और मोबाइल फ़ोन के ज़रिये वो मनोरंजन कर अपना समय भी बिता लेता है।
 
स्वाभाविक है कि मोबाइल फ़ोन लगभग हमेशा साथ रहेगा तो वो शरीर के सम्पर्क में भी रहेगा ही। लेकिन क्या कभी आपने इस तरफ़ ध्यान दिया है कि आख़िर मोबाइल फ़ोन को किस तरह से अपने साथ रखना चाहिए, क्योंकि मोबाइल फ़ोन को ग़लत तरीक़े से अपने साथ रखने से आपके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। दरअसल, मोबाइल फ़ोन को अपने साथ रखने के लिए कुछ ऐहतियात बरतना काफ़ी ज़रूरी है, और यदि आप सावधानी बरतते हैं तो आप मोबाइल फ़ोन से होने वाले दुष्प्रभावों से ख़ुद को काफ़ी हद तक सुरक्षित रख सकते हैं। आज हम आपको बताते हैं कि मोबाइल फ़ोन को किस तरह से अपने साथ रखना चाहिए, जिससे उसके हानिकारक प्रभावों से आप ज़्यादा से ज़्यादा दूर रह सकें।
 
सबसे पहले तो पूरी कोशिश करें कि अपने मोबाइल फ़ोन को पेंट या जींस की पीछे वाली जेब में ना रखें, क्योंकि इससे रेडिएशन का ख़तरा रहता है। एक रिसर्च के मुताबिक़, मोबाइल फ़ोन को पीछे वाली जेब में रखने से पैरों में दर्द की आशंका बढ़ जाती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि पीछे वाली जेब में मोबाइल फ़ोन रखने से पैरों की नसों के दबने की परेशानी हो सकती है, जिससे आपको पैर दर्द की शिकायत हो सकती है।
 
कभी भी मोबाइल फ़ोन को अपने तकिये के नीचे रखकर नहीं सोना चाहिए, क्योंकि यदि आप मोबाइल फ़ोन को तकिये के नीचे रखकर सोते हैं तो इससे रेडिएशन का ख़तरा रहता है। वहीं यदि आप मोबाइल फ़ोन के डेटा को ऑन रखकर उसे तकिये के नीचे रखकर सोते हैं, तो इससे रेडिएशन का ख़तरा और भी ज़्यादा बढ़ जाता है। यदि आप लम्बे समय तक मोबाइल फ़ोन को तकिये के नीचे रखकर सोते हैं या फ़िर उसे अपने सिर के पास रखकर सोते हैं तो ऐसा करना आपके लिए हानिकारक है।
 
पूरी कोशिश करें कि मोबाइल फ़ोन को अपने पैंट या जींस की आगे वाली जेब में ना रखें, क्योंकि यदि आप ऐसा करते हैं तो इससे आपके स्पर्म काउण्ट कम हो सकते हैं और स्पर्म की क्वालिटी पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए मोबाइल फ़ोन को आगे वाली जेब में रखने से आप परहेज ही करें तो बेहतर होगा।
 
वहीं शर्ट की जेब में भी मोबाइल फ़ोन रखना आपके लिए हानिकारक है। यदि आप शर्ट की जेब में मोबाइल फ़ोन को रखते हैं, तो इससे आपके हार्ट को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि मोबाइल फ़ोन से निकलने वाले रेडिएशन से हार्ट काफ़ी प्रभावित होता है और ऐसा होने से हार्टअटैक की आशंका बढ़ जाती है।
 
मोबाइल फ़ोन को बच्चों की पहुंच से दूर ही रखना चाहिए। नन्हें बच्चों के लिए मोबाइल फ़ोन से निकलने वाली रेडिएशन काफ़ी ख़तरनाक होती है। बच्चों से मोबाइल फ़ोन को दूर रखना इसलिए भी ज़रूरी है, क्योंकि बच्चे इसे मुंह में डालते हैं जिससे बच्चों के पेट में बैक्टिरिया जा सकते हैं और उनका पेट ख़राब हो सकता है। एक रिसर्च के मुताबिक़, बच्चों के पास मोबाइल फ़ोन होने से उनमें हाइपरएक्टिविटी और डिफिसिट डिसऑर्डर जैसी बीमारियां हो सकती हैं। वहीं बच्चों ने नादानी से मोबाइल फ़ोन के साथ असावधानी बरती तो मोबाइल फ़ोन ब्लास्ट भी हो सकता है, इससिए नन्हें बच्चों के हाथों में कभी भी मोबाइल फ़ोन ना दें। याद रखें मोबाइल फ़ोन को हमेशा आग से दूर ही रखें। ऐसा इसलिए, क्योंकि आग के पास रखने से मोबाइल की बैटरी के ब्लास्ट होने का ख़तरा बना रहता है।
 
लेकिन आप सोच रहे होंगे कि आख़िरकार मोबाइल फ़ोन आजकल की ज़रूरत बन गया है और अपने साथ रखना ज़रूरी भी है, तो ऐसे में मोबाइल फ़ोन को किस तरह से अपने पास रखा जाए जिससे सुरक्षा बनी रही। तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मोबाइल फ़ोन को जितना हो सके उतना अपने शरीर से दूर ही रखना आपके लिए बेहतर है। यदि कॉलिंग के लिए आपके पास लैण्डलाइन का विकल्प मौजूद है तो कोशिश करें कि मोबाइल फ़ोन के बजाय लैण्डलाइन से कॉलिंग की जाए।
 
पूरी कोशिश करे कि जब मोबाइल फ़ोन की ज़रूरत हो तभी उसे ऑन रखें, नहीं तो जरूरत ना होने पर उसे स्विच ऑफ़ कर दें या फ़िर उसके डेटा को ऑफ़ कर दें। वहीं आप अपने मोबाइल फ़ोन को एयरप्लेन मोड पर भी रख सकते हैं, जो कि आपके लिए एक बेहतर विकल्प है। मोबाइल फ़ोन पर बात करते समय यदि सम्भव हो तो इयरफ़ोन का इस्तेमाल करें या फ़िर स्पीकर मोड पर बातें करें, इससे आपका सिर और कान मोबाइल फ़ोन के सम्पर्क से दूर रहेंगे जो कि आपके लिए लाभदायक रहेगा।
 
जब भी मोबाइल फ़ोन चार्जिंग पर लगा हो तो मोबाइल फ़ोन पर बात करने की ग़लती ना करे। मोबाइल फ़ोन पर चार्जिंग के समय बात करने से मोबाइल फ़ोन के ब्लास्ट होने का ख़तरा बना रहता है। वहीं जब मोबाइल फ़ोन की बैटरी 20 प्रतिशत से कम हो तो भी मोबाइल फ़ोन पर बातें करने से बचना चाहिए, क्योंकि लो बैटरी के समय मोबाइल फ़ोन से ज़्यादा रेडिएशन निकलता है।
 
यह सच है कि मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल आजकल की ज़रूरत बन गया है, और मोबाइल फ़ोन के बिना रोज़मर्रा के कामों को करने की कल्पना भी नहीं की जा सकता है। ऐसे में मोबाइल फ़ोन को साथ रखना ज़रूरत के साथ-साथ मजबूरी भी बन गया है। लेकिन इस ज़रूरत और मजबूरी के कारण आपके स्वास्थ्य के साथ कोई खिलवाड़ ना हो इसके लिए पूरी कोशिश कीजिए कि मोबाइल फ़ोन का सही तरीक़े से इस्तेमाल हो।