मोदी सरकार के दूरगामी फ़ैसले से सस्ती हो सकती है बिजली
Saturday - November 23, 2019 3:52 pm ,
Category : WTN HINDI
बिजली ख़रीदी के नियमों में हुआ संशोधन
...तो अब कम आएगा आपका बिजली का बिल
NOV 23 (WTN) – मोदी सरकार की नीतियों के चलते आपको जल्द ही बिजली सस्ती मिल सकती है और आपका बिजली का बिल ज़ल्द ही कम हो सकता है। आप सोच रहे होंगे कि आख़िर ऐसा क्या कुछ मोदी सरकार ने कर दिया है जिसके कारण बिजली सस्ती होने जा रही है। तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एक अगस्त से बिजली खरीद के जो नए नियम लागू हुए हैं, उससे बिजली उत्पन्न करने वाली कम्पनियों की लागत घट गई है। जिसके बाद माना जा रहा है कि बिजली की क़ीमतों में कमी आ सकती है।
यदि ऐसा होता है तो इससे हर महीने बिजली बिल पर आपको पहले की तुलना में कम ख़र्च करना होगा। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, इस पूरे मामले को लेकर ऊर्जा मंत्रालय ने सभी रेगुलेटर्स को एक पत्र लिखकर कहा है कि बिजली की दरों में कमी की जाए और इसका पूरा फ़ायदा बिजली उपभोक्ताओं को दिया जाए। कहा जा रहा है कि यदि बिजली कम्पनियों इसका फ़ायदा उपभोक्ताओं को देती हैं, तो इससे हर उपभोक्ता को हर 100 यूनिट पर 10 रुपये की बचत हो सकती है। वहीं हो सकता है कि देशभर में प्रति यूनिट बिजली की दर में 3 से 5 पैसे की कमी हो जाए।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मोदी सरकार की नई नीति से बिजली कम्पनियों को क़रीब 4,500 करोड़ रुपयों का फ़ायदा हुआ है। नये नियमों के मुताबिक़ अब डिस्कॉम (Distribution Company) यानी कि बिजली वितरण करने वाली कम्पनियों को बिजली ख़रीदने के लिए एडवांस पेमेण्ट करना होता है। एडवांस पेमेण्ट करने या लेटर ऑफ़ क्रेडिट देने के बाद ही बिजली उत्पन्न करने वाली कम्पनियां अब बिजली देती हैं। पीपीए नियमों के अनुसार डिस्कॉम को पेमेण्ट के लिए 45 दिनों का समय मिलता है। वहीं समय पर पेमेण्ट करने पर रिबेट भी देने का प्रावधान है। चूंकि एक अगस्त से डिस्कॉम एडवांस पेमेण्ट कर रही हैं, इसलिए पॉवर टैरिफ में रिबेट देने का निर्देश सरकार द्वारा दिया गया है।
दरअसल, एडवांस पेमेण्ट मिलने से बिजली उत्पन्न करने वाली कम्पनियों की वर्किंग कैपिटल की जरूरत कम हुई है। कहा जा रहा है कि बिजली उत्पन्न करने वाली कम्पनियों की वर्किंग कैपिटल में क़रीब 4,000 से 4,500 करोड़ रुपयों की बचत होने की उम्मीद लगाई जा रही है।
वहीं मोदी सरकार के इस नये नियम के बाद से बिजली पैदा करने की लागत कम हो गई है। इसीलिए ऊर्जा मंत्रालय ने सभी रेगुलेटर्स को पत्र लिखा है, और इस पत्र में रेगुलेटर्स से डिस्कॉम को मिलने वाली बिजली की दरों में कमी करने को कहा गया है साथ ही बिजली की दरों में कमी का फ़ायदा उपभोक्ताओं को देने का निर्देश दिया गया है। पत्र में मंत्रालय ने साफ़ लिखा है कि नियामक एजेंसियों को जेनकॉस यानि की बिजली वितरण करने वाली कम्पनियों द्वारा फिक्स्ड कॉस्ट कंपोनेंट (प्रति यूनिट बिजली की तय दर) कम कराना चाहिए, क्योंकि अब जेनकॉस को अधिक वर्किंग कैपिटल की ज़रूरत नहीं है।
NOV 23 (WTN) – मोदी सरकार की नीतियों के चलते आपको जल्द ही बिजली सस्ती मिल सकती है और आपका बिजली का बिल ज़ल्द ही कम हो सकता है। आप सोच रहे होंगे कि आख़िर ऐसा क्या कुछ मोदी सरकार ने कर दिया है जिसके कारण बिजली सस्ती होने जा रही है। तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एक अगस्त से बिजली खरीद के जो नए नियम लागू हुए हैं, उससे बिजली उत्पन्न करने वाली कम्पनियों की लागत घट गई है। जिसके बाद माना जा रहा है कि बिजली की क़ीमतों में कमी आ सकती है।
यदि ऐसा होता है तो इससे हर महीने बिजली बिल पर आपको पहले की तुलना में कम ख़र्च करना होगा। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, इस पूरे मामले को लेकर ऊर्जा मंत्रालय ने सभी रेगुलेटर्स को एक पत्र लिखकर कहा है कि बिजली की दरों में कमी की जाए और इसका पूरा फ़ायदा बिजली उपभोक्ताओं को दिया जाए। कहा जा रहा है कि यदि बिजली कम्पनियों इसका फ़ायदा उपभोक्ताओं को देती हैं, तो इससे हर उपभोक्ता को हर 100 यूनिट पर 10 रुपये की बचत हो सकती है। वहीं हो सकता है कि देशभर में प्रति यूनिट बिजली की दर में 3 से 5 पैसे की कमी हो जाए।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मोदी सरकार की नई नीति से बिजली कम्पनियों को क़रीब 4,500 करोड़ रुपयों का फ़ायदा हुआ है। नये नियमों के मुताबिक़ अब डिस्कॉम (Distribution Company) यानी कि बिजली वितरण करने वाली कम्पनियों को बिजली ख़रीदने के लिए एडवांस पेमेण्ट करना होता है। एडवांस पेमेण्ट करने या लेटर ऑफ़ क्रेडिट देने के बाद ही बिजली उत्पन्न करने वाली कम्पनियां अब बिजली देती हैं। पीपीए नियमों के अनुसार डिस्कॉम को पेमेण्ट के लिए 45 दिनों का समय मिलता है। वहीं समय पर पेमेण्ट करने पर रिबेट भी देने का प्रावधान है। चूंकि एक अगस्त से डिस्कॉम एडवांस पेमेण्ट कर रही हैं, इसलिए पॉवर टैरिफ में रिबेट देने का निर्देश सरकार द्वारा दिया गया है।
दरअसल, एडवांस पेमेण्ट मिलने से बिजली उत्पन्न करने वाली कम्पनियों की वर्किंग कैपिटल की जरूरत कम हुई है। कहा जा रहा है कि बिजली उत्पन्न करने वाली कम्पनियों की वर्किंग कैपिटल में क़रीब 4,000 से 4,500 करोड़ रुपयों की बचत होने की उम्मीद लगाई जा रही है।
वहीं मोदी सरकार के इस नये नियम के बाद से बिजली पैदा करने की लागत कम हो गई है। इसीलिए ऊर्जा मंत्रालय ने सभी रेगुलेटर्स को पत्र लिखा है, और इस पत्र में रेगुलेटर्स से डिस्कॉम को मिलने वाली बिजली की दरों में कमी करने को कहा गया है साथ ही बिजली की दरों में कमी का फ़ायदा उपभोक्ताओं को देने का निर्देश दिया गया है। पत्र में मंत्रालय ने साफ़ लिखा है कि नियामक एजेंसियों को जेनकॉस यानि की बिजली वितरण करने वाली कम्पनियों द्वारा फिक्स्ड कॉस्ट कंपोनेंट (प्रति यूनिट बिजली की तय दर) कम कराना चाहिए, क्योंकि अब जेनकॉस को अधिक वर्किंग कैपिटल की ज़रूरत नहीं है।