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तो कम होने जा रही है आपकी टेक होम सैलरी!

Tuesday - November 26, 2019 1:06 pm , Category : WTN HINDI
सैलरी स्ट्रक्चर में जल्द होने जा रहा है बदलाव
सैलरी स्ट्रक्चर में जल्द होने जा रहा है बदलाव

लागू हुआ नया सैलरी स्ट्रक्चर तो बढ़ेगा पीएफ और कम होगी टेक होम सैलरी 

NOV 26 (WTN) – यदि आप नौकरीपेशा हैं तो आपकी सैलरी के स्ट्रक्चर में जल्द ही बदलाव होने वाला है और यदि यह बदलाव होता है तो इससे आपकी सैलरी पर भी असर पड़ने वाला है। यदि बदलाव होता है तो हो सकता है कि सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव से आपकी टेक होम सैलरी कम हो जाए। यदि ऐसा होता है तो इससे आपको कम टेक होम सैलरी का नुकसान उठाना पड़े। लेकिन टेक होम सैलरी कम होने से हो सकता है कि आपका पीएफ बढ़ जाए। आप सोच रहे होंगे कि आख़िर क्या है यह पूरा मामला, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जल्द ही आपकी बेसिक सैलरी में अलाउंसेस भी शामिल हो सकते हैं और यदि ऐसा होता है तो इससे आपकी टेक होम सैलरी कम हो सकती है।
 
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, बेसिक सैलरी में अलाउंसेस शामिल करने के लिए इण्डस्ट्री इस शर्त के साथ तैयार है कि सरकार अलाउंसेस की स्पष्ट कैटेगरी तय कर दे। दरअसल, बेसिक सैलरी में अलाउंसेस का कितना कण्ट्रीब्यूशन होगा, उसमें कितना क्या जोड़ा जाएगा, कौन से अलाउंस बेसिक सैलरी का हिस्सा होंगे, कौन से अलाउंसेस को उनसे बाहर रखा जाएगा। यह सभी वे मामले हैं जिन पर काफ़ी लम्बे समय से चर्चा चल रही है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने निर्देश में इसे सुनिश्चित करने को कहा था कि बेसिक सैलरी और अलाउंसेस की हिस्सेदारी का मामला जल्द से जल्द स्पष्ट होना चाहिए।

निजी क्षेत्र के साथ हुई त्रिपक्षीय बैठक में सैद्धांतिक रूप से इण्डस्ट्री इस बात पर सहमत हो गई है कि बेसिक सैलरी में सरकार जो भी अलाउंसेस तय करेगी उसको शामिल किया जाएगा। इससे होगा यह कि आपकी बेसिक सैलरी में बढ़ोतरी होगी और बेसिक सैलरी में बढ़ोतरी होने से पीएफ का कण्ट्रीब्यूशन बढ़ जाएगा, लेकिन इस कारण से आपकी टेक होम सैलरी में कुछ कमी आ सकती है।

इण्डस्ट्री सरकार की बातों से सहमत है, लेकिन इण्डस्ट्री ने इसके लिए सरकार के सामने दो शर्तें रखी हैं। इण्डस्ट्री की पहली शर्त है कि सरकार स्पष्ट रूप ये तय कर दे कि कौन से अलाउंसेस बेसिक सैलरी के साथ जोड़े जाएंगे और कौन से अलाउंसेस बेसिक सैलरी के साथ नहीं जोड़े जाएंगे। इसके अलावा इण्डस्ट्री की एक शर्त यह भी है कि सारे सेक्टर पर इसे समान रूप से लागू नहीं किया जाए और इसके लिए कुछ सेक्टर्स तय किए जाएं। जानकारी के मुताबिक़, अब सरकार और इण्डस्ट्री आपस में सलाह करके उन सेक्टर्स को निर्धारित करेंगी जिन पर यह नियम लागू होना चाहिए।

लेकिन बेसिक सैलरी और अलाउंसेस का मामला तय कब तक होगा यह कहना मुश्किल है। लेकिन न्यूनतम वेतन के लिए ड्राफ्ट कोड को सरकार ने जारी कर दिया है और उस पर क़ानून बनाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। क़ानून बनाने की प्रक्रिया के साथ ही बेसिक सैलरी में अलाउंसेस को शामिल किया जा सकता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, नये संशोधन में HRA को बेसिक से बाहर रखने का प्रस्ताव है। वहीं बाक़ी बचे अलाउंसेस का 50 प्रतिशत बेसिक में शामिल किया जाएगा। जानकारी के अनुसार, PLI यानी परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव को अलाउंसेस नहीं माना जाएगा। वहीं किसी भी क़ीमत पर बेसिक सैलरी मिनिमम वेज से कम नहीं हो सकती है।

यानी कि साफ़ है कि नये नियम से नौकरीपेशा लोगों की टेक होम सैलरी में कुछ कमी आ सकती है, लेकिन इसकी भरपाई उनके पीएफ योगदान में वृद्धि से हो जाएगी। लेकिन देखना होगा कि सरकार के इस फ़ैसले पर नौकरीपेशा लोगों की क्या राय होती है? टेक होम सैलरी कम होने से नौकरीपेशा लोगों को ऐसा लग सकता है कि उनका वेतन कम हो गया है, लेकिन जहां उनकी टेक होम सैलरी कम होगी तो वहीं बेसिक सैलरी में अलाउंसेस शामिल होने से पीएफ में योगदान बढ़ेगा जिसका दीर्घकालीन फ़ायदा उन्हें होगा। अब देखना होगा कि सरकार और इण्डस्ट्री के इस फ़ैसले को नौकरीपेशा लोग स्वीकार करते हैं कि नहीं।