नौकरी छूटने पर बेरोज़गारों को दो साल तक आर्थिक सहायता देगी मोदी सरकार
Tuesday - November 26, 2019 3:09 pm ,
Category : WTN HINDI
मोदी सरकार की नौकरीपेशा लोगों को बड़ी सौगात
निजी क्षेत्र में काम करने वालों को मोदी सरकार ने दिया ‘बड़ा सहारा’
NOV 26 (WTN) – प्राइवेट सेक्टर में नौकरी की निरंतरता की कोई गारण्टी नहीं होती है। नौकरी जब तक चल रही है तब तक तो नियमित रूप से आने वाले वेतन से आर्थिक ज़रूरतें पूरी होती रहती हैं, लेकिन यदि किसी कारण से नौकरी चली गई तो नौकरीपेशा लोगों को पैसों की किल्लत का सामना करना पड़ता है। नौकरी चले जाने के बाद वेतन ना मिलने से बेरोज़गारों को परिवार की ज़िम्मेदारी उठाना मुश्किल हो जाता है।
वैश्विक आर्थिक मंदी के इस दौर में लाखों लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। हालांकि, यदि आप योग्य हैं और मेहनती हैं तो जल्द ही आपको आपकी योग्यता के अनुसार नई नौकरी मिल सकती है। लेकिन नौकरी छूटने से लेकर नई नौकरी मिलने तक के समय में पैसों की किल्लत का सामना बेरोज़गार को करना होता है। नौकरी छूटने के बाद आर्थिक ज़रूरतें पूरी ना होने के कारण कई लोग आत्महत्या करने जैसा क़दम तक उठा लेते हैं।
लेकिन केन्द्र की मोदी सरकार एक ऐसी योजना लेकर आई है, जिससे चुनिंदा कारणों से बेरोज़गार हुए लोगों को एक निश्चित समय तक सरकार एक निश्चित राशि उनके बैंक अकाउण्ट में हर महीने जमा करेगी। यदि आप निजी क्षेत्र में नौकरी करते हैं तो यह पढ़कर आप चौक गये होंगे कि क्या सच में ऐसा सम्भव है? दरअसल, मोदी सरकार ने पिछले साल “अटल बीमित व्यक्ति कल्याण” नाम की एक योजना को मन्ज़री दी थी और इसी योजना के अंतर्गत चुनिंदा कारणों से बेरोज़गार होने पर मोदी सरकार एक निश्चित राशि, निश्चित समय के लिए सम्बन्धित व्यक्ति के बैंक अकाउण्ट में 24 महीने तक जमा करेगी।
लेकिन इस योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ शर्तें भी हैं। सबसे पहली शर्त यह है कि इस योजना का लाभ सिर्फ़ वे ही उठा सकते हैं जो कि संगठित क्षेत्र में नौकरी करते हैं। साथ ही ऐसे लोगों का ईएसआईसी से बीमित होना और कम से कम दो साल की नौकरी का कार्यकाल होना ज़रूरी है। मोदी सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत ईएसआईसी, रोज़गार की अनैच्छिक हानि या गैर-रोज़गार चोट के कारण स्थायी अशक्तता के मामले में 24 महीने की अवधि के लिए सम्बन्धित व्यक्ति को नक़द राशि का भुगतान करता है। लेकिन इस सुविधा के लाभ के लिए एक शर्त और है कि सम्बन्धित व्यक्ति का आधार नम्बर और बैंक अकाउण्ट डाटा बेस से जुड़ा होना ज़रूरी है।
वहीं उन लोगों को इस योजना का फायदा नहीं मिलेगा जिन्हें ग़लत आचरण के कारण कम्पनी से निकाल दिया जाता है। साथ ही आपराधिक मुक़दमा दर्ज़ होने या स्वेच्छा से रिटायरमेंट (VRS) लेने वाले कर्मचारी भी इस योजना का लाभ नहीं उठा सकेंगे। वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि संगठित क्षेत्र के कर्मचारी इस योजना का लाभ जीवन में सिर्फ़ एक बार ही उठा सकेंगे। यानी कि इस योजना के तहत उन्हें जीवन में सिर्फ़ एक बार ही आर्थिक सहायता मिल सकती है। यदि आप संगठित क्षेत्र में नौकरी करते हैं और आप भी इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको सबसे पहले ESIC की बेवसाइट पर जाकर "अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना" के लिए रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
कहा जा सकता है कि इस योजना के ज़रिये मोदी सरकार ने निजी क्षेत्र में नौकरी करने वालों की सबसे बड़ी समस्या को समझ लिया है। इस योजना का सबसे बड़ा उद्देश्य यही है कि नौकरी चले जाने पर बेरोज़गार व्यक्ति को आर्थिक रूप से परेशानी का सामना ना करना पड़े और उसके और उसके परिवार की कम से कम 24 महीने तक आर्थिक ज़रूरतें पूरी हो सकें।
इस योजना का मुख्य मक़सद बेरोज़गारी के वक़्त होने वाली आर्थिक परेशानियों को दूर करना है। मोदी सरकार की इस योजना से निजी क्षेत्र में नौकरी कर रहे उन लाखों लोगों को फायदा होगा, जिनकी किसी ना किसी कारण से नौकरी चली जाती है। यानी कि साफ़ है कि अब किसी कारण से आपका रोज़गार छूट जाता है तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपको आमदनी का नुकसान होगा, आप यदि “अटल बीमित व्यक्ति कल्याण” योजना का लाभ उठाते हैं तो नौकरी छूटने से लेकर नई नौकरी मिलने तक की समयावधि में मोदी सरकार आपको आर्थिक सहायता देगी।
वैसे कहा जा सकता है कि इस योजना के ज़रिये मोदी सरकार ने एक मास्टर स्ट्रोक खेला है। दरअसल, देश का विशाल नौकरीपेशी मध्यम वर्ग परम्परागत रूप से भाजपा का वोट बैंक माना जाता है। साल 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत में इसी मध्यम वर्ग का सबसे बड़ा योगदान रहा है। इसी मध्यम वर्ग को खुश करने के लिए मोदी सरकार नौकरी छूटने की दशा में आर्थिक सहायता देना जा रही है। कहा जा सकता है कि मोदी सरकार के इस फ़ैसले से आने वाले समय में भाजपा को बहुत बड़ा राजनीतिक लाभ हो।
NOV 26 (WTN) – प्राइवेट सेक्टर में नौकरी की निरंतरता की कोई गारण्टी नहीं होती है। नौकरी जब तक चल रही है तब तक तो नियमित रूप से आने वाले वेतन से आर्थिक ज़रूरतें पूरी होती रहती हैं, लेकिन यदि किसी कारण से नौकरी चली गई तो नौकरीपेशा लोगों को पैसों की किल्लत का सामना करना पड़ता है। नौकरी चले जाने के बाद वेतन ना मिलने से बेरोज़गारों को परिवार की ज़िम्मेदारी उठाना मुश्किल हो जाता है।
वैश्विक आर्थिक मंदी के इस दौर में लाखों लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। हालांकि, यदि आप योग्य हैं और मेहनती हैं तो जल्द ही आपको आपकी योग्यता के अनुसार नई नौकरी मिल सकती है। लेकिन नौकरी छूटने से लेकर नई नौकरी मिलने तक के समय में पैसों की किल्लत का सामना बेरोज़गार को करना होता है। नौकरी छूटने के बाद आर्थिक ज़रूरतें पूरी ना होने के कारण कई लोग आत्महत्या करने जैसा क़दम तक उठा लेते हैं।
लेकिन केन्द्र की मोदी सरकार एक ऐसी योजना लेकर आई है, जिससे चुनिंदा कारणों से बेरोज़गार हुए लोगों को एक निश्चित समय तक सरकार एक निश्चित राशि उनके बैंक अकाउण्ट में हर महीने जमा करेगी। यदि आप निजी क्षेत्र में नौकरी करते हैं तो यह पढ़कर आप चौक गये होंगे कि क्या सच में ऐसा सम्भव है? दरअसल, मोदी सरकार ने पिछले साल “अटल बीमित व्यक्ति कल्याण” नाम की एक योजना को मन्ज़री दी थी और इसी योजना के अंतर्गत चुनिंदा कारणों से बेरोज़गार होने पर मोदी सरकार एक निश्चित राशि, निश्चित समय के लिए सम्बन्धित व्यक्ति के बैंक अकाउण्ट में 24 महीने तक जमा करेगी।
लेकिन इस योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ शर्तें भी हैं। सबसे पहली शर्त यह है कि इस योजना का लाभ सिर्फ़ वे ही उठा सकते हैं जो कि संगठित क्षेत्र में नौकरी करते हैं। साथ ही ऐसे लोगों का ईएसआईसी से बीमित होना और कम से कम दो साल की नौकरी का कार्यकाल होना ज़रूरी है। मोदी सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत ईएसआईसी, रोज़गार की अनैच्छिक हानि या गैर-रोज़गार चोट के कारण स्थायी अशक्तता के मामले में 24 महीने की अवधि के लिए सम्बन्धित व्यक्ति को नक़द राशि का भुगतान करता है। लेकिन इस सुविधा के लाभ के लिए एक शर्त और है कि सम्बन्धित व्यक्ति का आधार नम्बर और बैंक अकाउण्ट डाटा बेस से जुड़ा होना ज़रूरी है।
वहीं उन लोगों को इस योजना का फायदा नहीं मिलेगा जिन्हें ग़लत आचरण के कारण कम्पनी से निकाल दिया जाता है। साथ ही आपराधिक मुक़दमा दर्ज़ होने या स्वेच्छा से रिटायरमेंट (VRS) लेने वाले कर्मचारी भी इस योजना का लाभ नहीं उठा सकेंगे। वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि संगठित क्षेत्र के कर्मचारी इस योजना का लाभ जीवन में सिर्फ़ एक बार ही उठा सकेंगे। यानी कि इस योजना के तहत उन्हें जीवन में सिर्फ़ एक बार ही आर्थिक सहायता मिल सकती है। यदि आप संगठित क्षेत्र में नौकरी करते हैं और आप भी इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको सबसे पहले ESIC की बेवसाइट पर जाकर "अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना" के लिए रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
कहा जा सकता है कि इस योजना के ज़रिये मोदी सरकार ने निजी क्षेत्र में नौकरी करने वालों की सबसे बड़ी समस्या को समझ लिया है। इस योजना का सबसे बड़ा उद्देश्य यही है कि नौकरी चले जाने पर बेरोज़गार व्यक्ति को आर्थिक रूप से परेशानी का सामना ना करना पड़े और उसके और उसके परिवार की कम से कम 24 महीने तक आर्थिक ज़रूरतें पूरी हो सकें।
इस योजना का मुख्य मक़सद बेरोज़गारी के वक़्त होने वाली आर्थिक परेशानियों को दूर करना है। मोदी सरकार की इस योजना से निजी क्षेत्र में नौकरी कर रहे उन लाखों लोगों को फायदा होगा, जिनकी किसी ना किसी कारण से नौकरी चली जाती है। यानी कि साफ़ है कि अब किसी कारण से आपका रोज़गार छूट जाता है तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपको आमदनी का नुकसान होगा, आप यदि “अटल बीमित व्यक्ति कल्याण” योजना का लाभ उठाते हैं तो नौकरी छूटने से लेकर नई नौकरी मिलने तक की समयावधि में मोदी सरकार आपको आर्थिक सहायता देगी।
वैसे कहा जा सकता है कि इस योजना के ज़रिये मोदी सरकार ने एक मास्टर स्ट्रोक खेला है। दरअसल, देश का विशाल नौकरीपेशी मध्यम वर्ग परम्परागत रूप से भाजपा का वोट बैंक माना जाता है। साल 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत में इसी मध्यम वर्ग का सबसे बड़ा योगदान रहा है। इसी मध्यम वर्ग को खुश करने के लिए मोदी सरकार नौकरी छूटने की दशा में आर्थिक सहायता देना जा रही है। कहा जा सकता है कि मोदी सरकार के इस फ़ैसले से आने वाले समय में भाजपा को बहुत बड़ा राजनीतिक लाभ हो।