‘अशान्त’ ईरान कर सकता है सऊदी अरब पर हमला
Friday - November 29, 2019 10:13 am ,
Category : WTN HINDI
महंगाई और तेल की राशनिंग से बेहाल ईरान में जनता की ‘बग़ावत’
अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंध से बर्बादी की कगार पर पहुंची ईरान की अर्थव्यवस्था
NOV 29 (WTN) - खाड़ी का देश ईरान अशान्त है, और ईरान की जनता में गुस्सा है। ईरान में कस्बों से लेकर शहरों तक लोग सड़कों पर उतर आए हैं और जोरदार तरीक़े से सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन जारी है। ईरान की जनता गुस्से में हैं, और जनता का गुस्सा सिर्फ़ विरोध प्रदर्शनों तक ही सीमित नहीं है बल्कि उग्र हो चुकी जनता आगजनी कर रही है, बैंकों और दुकानों को लूट रही है। एक तरह से कहा जाए तो पूरा का पूरा ईरान इस समय अराजकता की भेंट चढ़ चुका है। ईरान में लोगों का गुस्सा क्यों फूट पड़ा है, तो इसके पीछे कई कारण हैं। लेकिन यदि ईरान में विरोध प्रदर्शन जारी रहे, तो हो सकता है कि इसके कारण ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध का आगाज हो जाए।
ईरान के कई शहरों में जारी विरोध प्रदर्शन के कारण सुरक्षा बलों को फायरिंग तक करने पड़ी है, और जानकारी के मुताबिक़ इस फायरिंग में क़रीब 200 से ज़्यादा युवक मारे गये हैं। हालांकि, युवकों के मारे जाने की बात से ईरान ने इनकार किया है, लेकिन एमनेस्टी इंटरनेशनल का दावा है कि सुरक्षा बलों की फायरिंग में मरने वाले की संख्या और भी ज़्यादा हो सकती है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ईरान में इस समय जो अराजकता फैली हुई है उसके पीछे कई कारण हैं, लेकिन सबसे बड़ा कारण है ईरान के लोगों की बढ़ती परेशानियां और इसके कारण धीरे-धीरे फ़ैलता असंतोष। जैसा कि आप जानते हैं कि अमेरिका ने परमाणु कार्यक्रम का आरोप लगाकर साल 2015 में ईरान पर आर्थिक प्रतिबंधों की घोषणा कर दी थी। समय के साथ-साथ अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक प्रतिबंधों को काफ़ी कड़ा किया है, जिसके कारण ईरान की जनता अब परेशानी का सामना कर रही है।
अमेरिकी द्वारा लगाए गये आर्थिक प्रतिबंधों के बाद से ईरान की अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे कमज़ोर होती गई, और अब यह तबाह होने की कगार पर आ गई है। अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की प्लानिंग के तहत ईरान में तेल के दामों में क़रीब 50 प्रतिशत की बेतहाशा वृद्धि की गई है और तेल की राशनिंग की गई है, जिसके बाद पूरे देश में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। धीरे-धीरे ईरान में लोगों का विरोध प्रदर्शन इतना बढ़ गया कि लोग हिंसा पर उतारू हो गये।
अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों के कारण पिछले दो सालों से ईरान में महंगाई दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही है। खाने पीने के सामान से लेकर दवाइयां तक सभी महंगी हो चुकी हैं, वहीं दैनिक उपभोग का सामान भी इतना महंगा हो गया है कि यह लोगों की पहुंच से बाहर हो गया है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण आर्थिक तौर पर ईरान इतना कमज़ोर है गया है कि उद्योग धंधे बंद हो रहे हैं जिसके कारण लोगों की नौकरियां जा रही हैं। लोग कैसे तो भी बचत के पैसों से काम चला रहे थे, लेकिन धीरे-धीरे बचत के पैसे भी ख़त्म होने लगे हैं, जिसके बाद लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है।
सामान महंगा होने तक तो ठीक था, लेकिन ईरान में तेल के दामों में भारी वृद्धि से लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। पहले से ही महंगाई की मार झेल रही ईरान की जनता तेल के दामों में वृद्धि और तेल की राशनिंग के बाद बुरी तरह से गुस्से में है। ईरान में तेल के दाम बढ़ने के बाद तेल के दाम 15,000 रियाल प्रति लीटर हो गये हैं। वहीं सरकार द्वारा की गई तेल की राशनिंग के तहत अब ईरान में कोई भी अपने निजी वाहन के लिए 60 लीटर से ज़्यादा तेल का इस्तेमाल नहीं कर सकता है।
तेल के दामों में वृद्धि के बाद उपजे असंतोष ने ईरान की सरकार को हिलाकर रख दिया है। तेल के दाम बढ़ाने के पीछे ईरान की सरकार का तर्क है कि तेल के दाम इसलिए बढ़ाए गये हैं ताकि देश में गरीबों की मदद के लिए फण्ड बनाया जा सके। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ईरान में तेल के दामों में 50 प्रतिशत की वृद्धि को ईरान के सर्वोच्च धार्मिक गुरु अयातुल्लाह खामेनी और राष्ट्रपति हसन रुहानी समेत कई बड़े नेताओं और अधिकारियों की मंजूरी हासिल है। जनता के उग्र विरोध प्रदर्शन के बाद भी इन सभी ने मूल्य वृद्धि को वापस लेने से इनकार कर दिया है।
अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंध से बर्बादी की कगार पर पहुंची ईरान की अर्थव्यवस्था को ठीक करने के नाम पर ईरान में नेताओं ने एक झटके में तेल के दामों में काफ़ी वृद्धि तो कर दी, लेकिन नेताओं का यह फ़ैसला अब उन पर ही भारी पड़ रहा है। एक तो तेल की दामों में वृद्धि और फ़िर उसकी राशनिंग से हालात ख़राब होते जा रहे हैं। ईरान में यदि किसी भी व्यक्ति के पास तय कोटे से ज़्यादा तेल मिलता है, तो उससे पर प्रति लीटर 30,000 रियाल की दर से पेनाल्टी वसूली जाती है। सरकार के इस फ़ैसले को तानाशाही करार देते हुए ईरान में लोगों ने अपने-अपने वाहनों को सड़कों पर खड़ा कर दिया है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ईरान दुनिया में तेल का चौथा बड़ा उत्पादक देश है, लेकिन अब अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते इंटरनेशनल मार्केट में उसके तेल की बिक्री काफ़ी कम हो गई है। कई आर्थिक कारणों से अमेरिकी डॉलर की तुलना में ईरान की करेंसी रियाल भी बहुत गिर गई है। ईरान की अर्थव्यवस्था के बारे में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का कहना है कि ईरान की अर्थव्यवस्था पहले ही संकट की स्थिति में और अमेरिकी प्रतिबंध जारी रहने से हालत और भी ख़राब होंगे।
देश में उपजे विरोध प्रदर्शन के बीच आशंका व्यक्त की जा रही है कि देश के लोगों का ध्यान भटकाने के लिए ईरान, खाड़ी में युद्ध छेड़ सकता है। दरअसल, ईरान की नीतियों के कारण खाड़ी के देश धीरे-धीरे उसके ख़िलाफ़ होते जा रहे हैं। ईरान समय-समय पर अमेरिका और सऊदी अरब से युद्ध की धमकी देता रहता है। ऐसे में कहा जा रहा है कि आर्थिक परेशानी से जूझ रहे ईरान के नेता अपने देश की जनता का ध्यान महंगाई और अन्य दूसरे मुद्दों से भटकाने के लिए अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ युद्ध छेड़ सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो इससे एक बार फ़िर से पूरी दुनिया तेल संकट में घिर सकती है।
NOV 29 (WTN) - खाड़ी का देश ईरान अशान्त है, और ईरान की जनता में गुस्सा है। ईरान में कस्बों से लेकर शहरों तक लोग सड़कों पर उतर आए हैं और जोरदार तरीक़े से सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन जारी है। ईरान की जनता गुस्से में हैं, और जनता का गुस्सा सिर्फ़ विरोध प्रदर्शनों तक ही सीमित नहीं है बल्कि उग्र हो चुकी जनता आगजनी कर रही है, बैंकों और दुकानों को लूट रही है। एक तरह से कहा जाए तो पूरा का पूरा ईरान इस समय अराजकता की भेंट चढ़ चुका है। ईरान में लोगों का गुस्सा क्यों फूट पड़ा है, तो इसके पीछे कई कारण हैं। लेकिन यदि ईरान में विरोध प्रदर्शन जारी रहे, तो हो सकता है कि इसके कारण ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध का आगाज हो जाए।
ईरान के कई शहरों में जारी विरोध प्रदर्शन के कारण सुरक्षा बलों को फायरिंग तक करने पड़ी है, और जानकारी के मुताबिक़ इस फायरिंग में क़रीब 200 से ज़्यादा युवक मारे गये हैं। हालांकि, युवकों के मारे जाने की बात से ईरान ने इनकार किया है, लेकिन एमनेस्टी इंटरनेशनल का दावा है कि सुरक्षा बलों की फायरिंग में मरने वाले की संख्या और भी ज़्यादा हो सकती है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ईरान में इस समय जो अराजकता फैली हुई है उसके पीछे कई कारण हैं, लेकिन सबसे बड़ा कारण है ईरान के लोगों की बढ़ती परेशानियां और इसके कारण धीरे-धीरे फ़ैलता असंतोष। जैसा कि आप जानते हैं कि अमेरिका ने परमाणु कार्यक्रम का आरोप लगाकर साल 2015 में ईरान पर आर्थिक प्रतिबंधों की घोषणा कर दी थी। समय के साथ-साथ अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक प्रतिबंधों को काफ़ी कड़ा किया है, जिसके कारण ईरान की जनता अब परेशानी का सामना कर रही है।
अमेरिकी द्वारा लगाए गये आर्थिक प्रतिबंधों के बाद से ईरान की अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे कमज़ोर होती गई, और अब यह तबाह होने की कगार पर आ गई है। अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की प्लानिंग के तहत ईरान में तेल के दामों में क़रीब 50 प्रतिशत की बेतहाशा वृद्धि की गई है और तेल की राशनिंग की गई है, जिसके बाद पूरे देश में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। धीरे-धीरे ईरान में लोगों का विरोध प्रदर्शन इतना बढ़ गया कि लोग हिंसा पर उतारू हो गये।
अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों के कारण पिछले दो सालों से ईरान में महंगाई दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही है। खाने पीने के सामान से लेकर दवाइयां तक सभी महंगी हो चुकी हैं, वहीं दैनिक उपभोग का सामान भी इतना महंगा हो गया है कि यह लोगों की पहुंच से बाहर हो गया है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण आर्थिक तौर पर ईरान इतना कमज़ोर है गया है कि उद्योग धंधे बंद हो रहे हैं जिसके कारण लोगों की नौकरियां जा रही हैं। लोग कैसे तो भी बचत के पैसों से काम चला रहे थे, लेकिन धीरे-धीरे बचत के पैसे भी ख़त्म होने लगे हैं, जिसके बाद लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है।
सामान महंगा होने तक तो ठीक था, लेकिन ईरान में तेल के दामों में भारी वृद्धि से लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। पहले से ही महंगाई की मार झेल रही ईरान की जनता तेल के दामों में वृद्धि और तेल की राशनिंग के बाद बुरी तरह से गुस्से में है। ईरान में तेल के दाम बढ़ने के बाद तेल के दाम 15,000 रियाल प्रति लीटर हो गये हैं। वहीं सरकार द्वारा की गई तेल की राशनिंग के तहत अब ईरान में कोई भी अपने निजी वाहन के लिए 60 लीटर से ज़्यादा तेल का इस्तेमाल नहीं कर सकता है।
तेल के दामों में वृद्धि के बाद उपजे असंतोष ने ईरान की सरकार को हिलाकर रख दिया है। तेल के दाम बढ़ाने के पीछे ईरान की सरकार का तर्क है कि तेल के दाम इसलिए बढ़ाए गये हैं ताकि देश में गरीबों की मदद के लिए फण्ड बनाया जा सके। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ईरान में तेल के दामों में 50 प्रतिशत की वृद्धि को ईरान के सर्वोच्च धार्मिक गुरु अयातुल्लाह खामेनी और राष्ट्रपति हसन रुहानी समेत कई बड़े नेताओं और अधिकारियों की मंजूरी हासिल है। जनता के उग्र विरोध प्रदर्शन के बाद भी इन सभी ने मूल्य वृद्धि को वापस लेने से इनकार कर दिया है।
अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंध से बर्बादी की कगार पर पहुंची ईरान की अर्थव्यवस्था को ठीक करने के नाम पर ईरान में नेताओं ने एक झटके में तेल के दामों में काफ़ी वृद्धि तो कर दी, लेकिन नेताओं का यह फ़ैसला अब उन पर ही भारी पड़ रहा है। एक तो तेल की दामों में वृद्धि और फ़िर उसकी राशनिंग से हालात ख़राब होते जा रहे हैं। ईरान में यदि किसी भी व्यक्ति के पास तय कोटे से ज़्यादा तेल मिलता है, तो उससे पर प्रति लीटर 30,000 रियाल की दर से पेनाल्टी वसूली जाती है। सरकार के इस फ़ैसले को तानाशाही करार देते हुए ईरान में लोगों ने अपने-अपने वाहनों को सड़कों पर खड़ा कर दिया है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ईरान दुनिया में तेल का चौथा बड़ा उत्पादक देश है, लेकिन अब अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते इंटरनेशनल मार्केट में उसके तेल की बिक्री काफ़ी कम हो गई है। कई आर्थिक कारणों से अमेरिकी डॉलर की तुलना में ईरान की करेंसी रियाल भी बहुत गिर गई है। ईरान की अर्थव्यवस्था के बारे में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का कहना है कि ईरान की अर्थव्यवस्था पहले ही संकट की स्थिति में और अमेरिकी प्रतिबंध जारी रहने से हालत और भी ख़राब होंगे।
देश में उपजे विरोध प्रदर्शन के बीच आशंका व्यक्त की जा रही है कि देश के लोगों का ध्यान भटकाने के लिए ईरान, खाड़ी में युद्ध छेड़ सकता है। दरअसल, ईरान की नीतियों के कारण खाड़ी के देश धीरे-धीरे उसके ख़िलाफ़ होते जा रहे हैं। ईरान समय-समय पर अमेरिका और सऊदी अरब से युद्ध की धमकी देता रहता है। ऐसे में कहा जा रहा है कि आर्थिक परेशानी से जूझ रहे ईरान के नेता अपने देश की जनता का ध्यान महंगाई और अन्य दूसरे मुद्दों से भटकाने के लिए अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ युद्ध छेड़ सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो इससे एक बार फ़िर से पूरी दुनिया तेल संकट में घिर सकती है।