हर तरफ़ से मुसीबतों में फंसे इमरान ख़ान
Saturday - November 30, 2019 10:41 am ,
Category : WTN HINDI
विद्यार्थियों ने छेड़ा इमरान ख़ान सरकार के ख़िलाफ़ आन्दोलन
राजनीतिक और धार्मिक दलों के बाद अब विद्याथियों ने किया इमरान ख़ान सरकार के ख़िलाफ़ देशव्यापी प्रदर्शन
NOV 30 (WTN) – भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में राजनीतिक हालात धीरे-धीरे ख़राब होते जा रहे हैं। आतंक को पालने और प्रश्रय देने वाले पाकिस्तान में वहां के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन दिनों-दिन बढ़ते ही जा रहे हैं। राजनीतिक पार्टियां और धार्मिक दल तो इमरान ख़ान सरकार के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतर ही चुके हैं। लेकिन अब पाकिस्तान में इमरान ख़ान सरकार के ख़िलाफ़ विद्यार्थियों ने देशव्यापारी आन्दोलन छेड़ दिया है।
पूर्व क्रिकेटर इमरान ख़ान के नेतृत्व वाली सरकार की मुसीबतें ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। बिगड़ती अर्थव्यवस्था और ऐतिहासिक महंगाई के कारण पाकिस्तान की जनता की परेशानियां बढ़ती ही जा रही हैं। अपने देश की ग़रीबी और महंगाई पर ध्यान देने के बजाय इमरान ख़ान सरकार कश्मीर मुद्दे पर भारत से विवाद बढ़ाने में ज़्यादा व्यस्त है। इधर इमरान ख़ान सरकार की महंगाई पर काबू पाने की सारी कोशिशें असफ़ल साबित हो रही हैं, और इसी कारण से अब विद्यार्थियों ने इमरान ख़ान सरकार के ख़िलाफ़ एक बड़ा आन्दोलन छेड़ दिया है।
जैसा कि आप जानते हैं कि इस समय पाकिस्तान में इमरान ख़ान सरकार के ख़िलाफ़ फज़ल-उर-रहमान के नेतृत्व में बड़ा आंदोलन अभी पूरी तरह से शान्त भी नहीं हुआ है और इस बड़े आन्दोलन के विरोध से इमरान ख़ान सरकार उबर भी नहीं पाई थी कि अब विद्यार्थियों ने इमरान ख़ान सरकार के ख़िलाफ़ देशव्यापी आंदोलन खड़ा कर दिया है। जानकारी के लिए बता दें कि इमरान ख़ान सरकार पर जन-विरोधी नीतियों को लागू करने और क़ानून व्यवस्था की लचरता का आरोप लगाते हुए फज़ल-उर-रहमान पिछले कई समय से इमरान ख़ान सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन और बयानबाज़ी करते आ रहे हैं।
फज़ल-उर-रहमान, इमरान ख़ान सरकार के ख़िलाफ़ विभिन्न विपक्षी पार्टियों और अन्य संगठनों को एक करने की मुहिम में लगे हुए हैं, जिससे सभी को एक साथ लेकर एक बड़ा आन्दोलन इमरान ख़ान सरकार के ख़िलाफ़ किया जा सके। इमरान ख़ान सरकार को सत्ता से हटाने के लिए पाकिस्तान में आज़ादी मार्च और देशव्यापी धरनों के बाद अब आन्दोलन के अगले चरण पर विचार के लिए जमीयत उलेमा-ए इस्लाम-एफ (जेयूआई-एफ) के प्रमुख मौलाना फज़ल-उर-रहमान ने सभी दलों का एक सम्मेलन भी बुलाया था।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, फज़ल-उर-रहमान के पास इमरान ख़ान सरकार के ख़िलाफ़ आज़ादी मार्च के अलावा कई अन्य आन्दोलन के प्लान भी हैं। कहा जा रहा है कि फज़ल-उर-रहमान, विपक्षी दलों के नेताओं को सरकार को गिराने के लिए हुई गुप्त वार्ताओं की भी जानकारी दे रहे हैं। फज़ल-उर-रहमान, विपक्षी नेताओं को उस प्लानिंग के बारे में भी बता रहे हैं जिससे इमरान ख़ान सरकार को अन्दर से कमज़ोर किया जा सके।
फज़ल-उर-रहमान के आन्दोलन के साथ-साथ विद्यार्थियों के आन्दोलन ने अब इमरान ख़ान सरकार को और भी ज़्यादा परेशान कर दिया है। विद्यार्थियों का इमरान ख़ान सरकार के ख़िलाफ़ आन्दोलन कई मांगों को लेकर योजनाबद्ध तरीक़े से हो रहा है। विद्यार्थियों की मांग है कि छात्र संघों की बहाली की जाए, सभी को बेहतर और सुलभ शिक्षा उपलब्ध कराई जाए, स्कूल और कॉलेज परिसर में किसी भी तरह के लैंगिक और धार्मिक भेदवाव ना हों। इन्हीं सब और अन्य मांगों को लेकर पाकिस्तान में विद्यार्थियों ने पूरे देश में बड़ा प्रदर्शन किया है। इस आन्दोलन की ख़ास बात यह है कि विद्यार्थियों के इस आन्दोलन में समाज के कई वर्गों के लोग शामिल हुए हैं।
पाकिस्तान के सभी प्रान्तों में कल यानी कि शुक्रवार को विद्यार्थियों ने जगह-जगह पर रैली निकाली और अभिव्यक्ति और दमन से आज़ादी की मांग करते हुए आज़ादी के नारे लगाए। विद्यार्थियों द्वारा किये जा रहे इस आन्दोलन को राजनैतिक दलों के साथ-साथ, किसानों, मज़दूरों और अल्पसंख्यक समुदायों के संगठनों का पूरा समर्थन हासिल है। पाकिस्तान की मीडिया के मुताबिक़, विद्यार्थियों का यह आन्दोलन इसलिए ख़ास है क्योंकि इसमें विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके माता-पिता और सिविल सोसाइटी के सदस्य भी शामिल हैं।
दरअसल, इमरान ख़ान सरकार अपने आप में एक असफ़ल सरकार साबित हुई है। कूटनीतिक स्तर पर जहां पाकिस्तान को कश्मीर मसले पर हर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर मोदी सरकार से मात खाना पड़ी है। तो वहीं अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर इमरान ख़ान सरकार बुरी तरह से असफ़ल साबित हुई है। निर्यात में कमी, डॉलर के मुक़ाबले लगातार कमज़ोर होती पाकिस्तानी करेंसी, ऐतिहासिक निम्नतम स्तर पर पहुंचा विदेशी मुद्रा भण्डार, लगातार कम होता विदेशी निवेश और और इस सबके कारण दिनों-दिन बढ़ती महंगाई के कारण पाकिस्तान की जनता बदहाली की कगार पर आ गई है।
पाकिस्तान में रोजमर्रा की वस्तुएं इतनी महंगी हो गई हैं जिससे ग़रीबों और मध्यमवर्गीय लोगों को जीना दूभर हो गया है। पाकिस्तान में दूध, सब्ज़ियां और किराना सामान ऐतिहासिक रूप से इतना महंगा हो गया है कि लोगों का गुस्सा दिनों-दिन इमरान ख़ान सरकार के ख़िलाफ़ बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में राजनीतिक और धार्मिक संगठनों के अलावा अब विद्यार्थियों ने भी इमरान ख़ान सरकार की नीतियों के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है। अब देखना होगा कि चारों तरफ़ से मुसीबत में घिरे इमरान ख़ान अपने ख़िलाफ़ उठ रही आवाज़ों का कब, कैसे और क्या जवाब देते हैं।
NOV 30 (WTN) – भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में राजनीतिक हालात धीरे-धीरे ख़राब होते जा रहे हैं। आतंक को पालने और प्रश्रय देने वाले पाकिस्तान में वहां के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन दिनों-दिन बढ़ते ही जा रहे हैं। राजनीतिक पार्टियां और धार्मिक दल तो इमरान ख़ान सरकार के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतर ही चुके हैं। लेकिन अब पाकिस्तान में इमरान ख़ान सरकार के ख़िलाफ़ विद्यार्थियों ने देशव्यापारी आन्दोलन छेड़ दिया है।
पूर्व क्रिकेटर इमरान ख़ान के नेतृत्व वाली सरकार की मुसीबतें ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। बिगड़ती अर्थव्यवस्था और ऐतिहासिक महंगाई के कारण पाकिस्तान की जनता की परेशानियां बढ़ती ही जा रही हैं। अपने देश की ग़रीबी और महंगाई पर ध्यान देने के बजाय इमरान ख़ान सरकार कश्मीर मुद्दे पर भारत से विवाद बढ़ाने में ज़्यादा व्यस्त है। इधर इमरान ख़ान सरकार की महंगाई पर काबू पाने की सारी कोशिशें असफ़ल साबित हो रही हैं, और इसी कारण से अब विद्यार्थियों ने इमरान ख़ान सरकार के ख़िलाफ़ एक बड़ा आन्दोलन छेड़ दिया है।
जैसा कि आप जानते हैं कि इस समय पाकिस्तान में इमरान ख़ान सरकार के ख़िलाफ़ फज़ल-उर-रहमान के नेतृत्व में बड़ा आंदोलन अभी पूरी तरह से शान्त भी नहीं हुआ है और इस बड़े आन्दोलन के विरोध से इमरान ख़ान सरकार उबर भी नहीं पाई थी कि अब विद्यार्थियों ने इमरान ख़ान सरकार के ख़िलाफ़ देशव्यापी आंदोलन खड़ा कर दिया है। जानकारी के लिए बता दें कि इमरान ख़ान सरकार पर जन-विरोधी नीतियों को लागू करने और क़ानून व्यवस्था की लचरता का आरोप लगाते हुए फज़ल-उर-रहमान पिछले कई समय से इमरान ख़ान सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन और बयानबाज़ी करते आ रहे हैं।
फज़ल-उर-रहमान, इमरान ख़ान सरकार के ख़िलाफ़ विभिन्न विपक्षी पार्टियों और अन्य संगठनों को एक करने की मुहिम में लगे हुए हैं, जिससे सभी को एक साथ लेकर एक बड़ा आन्दोलन इमरान ख़ान सरकार के ख़िलाफ़ किया जा सके। इमरान ख़ान सरकार को सत्ता से हटाने के लिए पाकिस्तान में आज़ादी मार्च और देशव्यापी धरनों के बाद अब आन्दोलन के अगले चरण पर विचार के लिए जमीयत उलेमा-ए इस्लाम-एफ (जेयूआई-एफ) के प्रमुख मौलाना फज़ल-उर-रहमान ने सभी दलों का एक सम्मेलन भी बुलाया था।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, फज़ल-उर-रहमान के पास इमरान ख़ान सरकार के ख़िलाफ़ आज़ादी मार्च के अलावा कई अन्य आन्दोलन के प्लान भी हैं। कहा जा रहा है कि फज़ल-उर-रहमान, विपक्षी दलों के नेताओं को सरकार को गिराने के लिए हुई गुप्त वार्ताओं की भी जानकारी दे रहे हैं। फज़ल-उर-रहमान, विपक्षी नेताओं को उस प्लानिंग के बारे में भी बता रहे हैं जिससे इमरान ख़ान सरकार को अन्दर से कमज़ोर किया जा सके।
फज़ल-उर-रहमान के आन्दोलन के साथ-साथ विद्यार्थियों के आन्दोलन ने अब इमरान ख़ान सरकार को और भी ज़्यादा परेशान कर दिया है। विद्यार्थियों का इमरान ख़ान सरकार के ख़िलाफ़ आन्दोलन कई मांगों को लेकर योजनाबद्ध तरीक़े से हो रहा है। विद्यार्थियों की मांग है कि छात्र संघों की बहाली की जाए, सभी को बेहतर और सुलभ शिक्षा उपलब्ध कराई जाए, स्कूल और कॉलेज परिसर में किसी भी तरह के लैंगिक और धार्मिक भेदवाव ना हों। इन्हीं सब और अन्य मांगों को लेकर पाकिस्तान में विद्यार्थियों ने पूरे देश में बड़ा प्रदर्शन किया है। इस आन्दोलन की ख़ास बात यह है कि विद्यार्थियों के इस आन्दोलन में समाज के कई वर्गों के लोग शामिल हुए हैं।
पाकिस्तान के सभी प्रान्तों में कल यानी कि शुक्रवार को विद्यार्थियों ने जगह-जगह पर रैली निकाली और अभिव्यक्ति और दमन से आज़ादी की मांग करते हुए आज़ादी के नारे लगाए। विद्यार्थियों द्वारा किये जा रहे इस आन्दोलन को राजनैतिक दलों के साथ-साथ, किसानों, मज़दूरों और अल्पसंख्यक समुदायों के संगठनों का पूरा समर्थन हासिल है। पाकिस्तान की मीडिया के मुताबिक़, विद्यार्थियों का यह आन्दोलन इसलिए ख़ास है क्योंकि इसमें विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके माता-पिता और सिविल सोसाइटी के सदस्य भी शामिल हैं।
दरअसल, इमरान ख़ान सरकार अपने आप में एक असफ़ल सरकार साबित हुई है। कूटनीतिक स्तर पर जहां पाकिस्तान को कश्मीर मसले पर हर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर मोदी सरकार से मात खाना पड़ी है। तो वहीं अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर इमरान ख़ान सरकार बुरी तरह से असफ़ल साबित हुई है। निर्यात में कमी, डॉलर के मुक़ाबले लगातार कमज़ोर होती पाकिस्तानी करेंसी, ऐतिहासिक निम्नतम स्तर पर पहुंचा विदेशी मुद्रा भण्डार, लगातार कम होता विदेशी निवेश और और इस सबके कारण दिनों-दिन बढ़ती महंगाई के कारण पाकिस्तान की जनता बदहाली की कगार पर आ गई है।
पाकिस्तान में रोजमर्रा की वस्तुएं इतनी महंगी हो गई हैं जिससे ग़रीबों और मध्यमवर्गीय लोगों को जीना दूभर हो गया है। पाकिस्तान में दूध, सब्ज़ियां और किराना सामान ऐतिहासिक रूप से इतना महंगा हो गया है कि लोगों का गुस्सा दिनों-दिन इमरान ख़ान सरकार के ख़िलाफ़ बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में राजनीतिक और धार्मिक संगठनों के अलावा अब विद्यार्थियों ने भी इमरान ख़ान सरकार की नीतियों के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है। अब देखना होगा कि चारों तरफ़ से मुसीबत में घिरे इमरान ख़ान अपने ख़िलाफ़ उठ रही आवाज़ों का कब, कैसे और क्या जवाब देते हैं।