BrahMos WORLD INDIA MADHYA PRADESH BHOPAL WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RELIGION SPORTS BUSINESS FUN FACTS ENTERTAINMENT LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE SCIENCE & TECHNOLOGY HEALTH EDUCATION DIASPORA OPINION & INTERVIEW RECIPES DRINKS BIG MEMSAAB 2017 BUDGET 2017 FUNNY VIDEOS VIRAL ON WEB PICTURE STORIES Mahakal Ke Darshan
WTN HINDI ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
logo
Breaking News

...तो अब महंगाई का है जमाना!

Monday - December 2, 2019 12:51 pm , Category : WTN HINDI
टेलीकॉम कम्पनियां ने अपने उपभोक्ताओं को दिया बड़ा झटका
टेलीकॉम कम्पनियां ने अपने उपभोक्ताओं को दिया बड़ा झटका

घाटे और कम मुनाफे के कारण कम्पनियां ने बढ़ाए दाम, कम किया डिस्काउण्ट

DEC 02 (WTN) – तो अब महंगाई का है ज़माना! जी हां अब दौर महंगाई का आ गया है। आर्थिक सुस्ती के कारण पूरी दुनिया की 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्थाएं इन दिनों प्रभावित हैं। लेकिन भारत और ब्राजील जैसी तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं पर आर्थिक सुस्ती का सबसे ज़्यादा असर पड़ा है। जहां तक भारतीय अर्थव्यवस्था की बात है, तो आर्थिक सुस्ती के कारण चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट सिर्फ़ 4.5 प्रतिशत ही रही है। आंकड़ें बता रहे हैं कि वैश्विक आर्थिक सुस्ती के कारण देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है, और इसी कारण से जो सेवाएं आपको अभी तक सस्ते दामों पर मिल रही थीं, अब आपको इनके लिए पहले की तुलना में ज़्यादा दाम चुकाने होंगे।
 
सबसे पहले बात करते हैं आपको मोबाइल फ़ोन के बिल की। तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि AGR यानी कि समायोजित सकल राजस्व पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले की वजह से टेलीकॉम कम्पनियों ने अपने-अपने टैरिफ को अब महंगा कर दिया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के एक फ़ैसले के बाद से टेलीकॉम कम्पनियों को एजीआर के तहत सरकार को भारी राजस्व देना पड़ रहा है और इसी कारण से टेलीकॉम कम्पनियों को भारी भरकम घाटा उठाना पड़ रहा है।
 
जानकारी के लिए बता दें कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में वोडाफ़ोन को भारतीय कॉरपोरेट जगत का सबसे बड़ा यानी कि 50,922 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। वहीं इसके अलावा कम्पनी के ऊपर 1.17 लाख करोड़ रुपये की भारी देनदारी भी बकाया है। वहीं एक अन्य टेलीकॉम कम्पनी एयरटेल को इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 23,045 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है।
 
टेलीकॉम कम्पनियों को लगातार हो रहे घाटे के कारण इन कम्पनियों के पास अब टैरिफ बढ़ाने के अलावा और कोई अन्य दूसरा विकल्प नहीं है। इसी कारण से घाटे से जूझ रही टेलीकॉम कम्पनियों ने अपने प्रीपेड ग्राहकों को एक बड़ा झटका दिया है। यदि साफ़ तौर पर कहें तो अब मुफ्त और सस्ती कॉलिंग और इंटरनेट डेटा के दिन चले गए हैं। रिलायंस जियो, एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया जैसी बड़ी दिग्गज टेलीकॉम कम्पनियों ने अपने प्रीपेड उत्पादों और सेवाओं के लिए टैरिफ में भारी वृद्धि करने की घोषणा कर दी है। अनुमान है कि टेलीकॉम कम्पनियों द्वारा टैरिफ में की जा रही वृद्धि के कारण ग्राहकों के मोबाइल बिल में 50 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारती एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया ने अपने टैरिफ में 15 से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि की घोषणा की है जो कि 3 दिसम्बर से लागू होगी। वहीं रिलायंस जियो ने भी नई शुल्क दर योजना में 40 प्रतिशत तक की वृद्धि की घोषणा की है। रिलायंस जियो ने अपने एक बयान में कहा कि उसका नया प्लान 'ऑल इन वन' छह दिसम्बर से लागू होगा।

टेलीकॉम कम्पनियों द्वारा टैरिफ में वृद्धि किये जाने के बाद स्वाभाविक है कि लोगों के मोबाइल का मासिक ख़र्च 15 से 40 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। वहीं यदि आप फूड डिलीवरी कम्पनियों से खाना ऑर्डर करते हैं, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जोमैटो, स्विगी और उबर ईट्स जैसी फूड डिलीवरी कम्पनियों की सर्विस भी अब पहले की तुलना में महंगी हो गई है, क्योंकि यह कम्पनियां अब डिस्काउण्ट में कमी कर रही हैं।
 
जानकारी के मुताबिक़, पिछले 18 महीने तक ऑर्डर में तेजी के बाद ऑनलाइन फूड डिलीवरी करने वाली कम्पनियों का व्यापार सुस्त पड़ने लगा है। यही वो सबसे बड़ा कारण है कि यह कम्पनियां अब ग्राहकों को दिये जा रहे डिस्काउण्ट को धीरे-धीरे घटा रही हैं। अर्थशास्त्र के जानकारों के मुताबिक़, आर्थिक सुस्ती के कारण इस साल अगस्त के बाद से कई सेक्टर मे ग्रोथ रेट घटकर 1 से 2 प्रतिशत पर रह गई है। वहीं उद्योगों में डिमाण्ड कम होने, उद्योगों में उत्पादन कम या कुछ समय के लिए बंद होने और लोगों की नौकरी जाने समेत कई अन्य दूसरे कारणों से फूड डिलीवरी कम्पनियों को पहले की तुलना में कम ऑर्डर मिल रहे हैं। इसी कारण से अपना मुनाफ़ा कमाने के लिए जोमैटो, स्विगी और उबर ईट्स जैसी फूड डिलीवर करने वाली कम्पनियों ने डिस्काउण्ट के साथ ही प्रमोशन भी कम कर दिया है।

जानकारी के मुताबिक़, जोमैटो, स्विगी और उबर ईट्स जैसी पॉपुलर तीन फूड डिलीवरी कम्पनियों को जनवरी के महीने में औसत 18 लाख ऑर्डर मिले थे, जो कि जून के महीने में बढ़कर 30 लाख तक पहुंच गये थे। लेकिन, इसके बाद इन कम्पनियों को मिलने वाले ऑर्डर में कमी आना शुरू हो गया। यानी कि आंकड़े साफ़ ज़ाहिर कर रहे हैं कि फूड डिलीवरी करने वाली कम्पनियों के व्यापार पर आर्थिक सुस्ती का बड़ा असर पड़ा है।
 
वैसे कुछ जानकारों का मानना है कि फूड ऑर्डर पर भी त्यौहारों और सीजन का असर पड़ता है। आमतौर पर त्यौहारों पर फूड डिलीवरी कम होती है, क्योंकि इस दौरान नौकरीपेशा लोग अपने घर पर ही होते हैं। हालांकि, ऐसा नहीं है कि फूड डिलीवरी करने वाली कम्पनियों को घाटा हो रहा है, लेकिन बस उनका मुनाफा पहले की तरह नहीं होकर कम हो रहा है। अब कम हो रहे मुनाफे को बढ़ाने के लिए यह कम्पनियां डिस्काउण्ट में कटौती कर अपना मुनाफा बढ़ाने की नीति पर काम कर रही हैं।
 
तो आने वाले समय में आप मोबाइल फ़ोन के ज़्यादा बिल और ऑनलाइन फूड ऑर्डर पर कम डिस्काउण्ट के लिए तैयार रहें, क्योंकि घाटे में चल रही और कम मुनाफा कमा रही कम्पनियां इसकी भरपाई के लिए दामों में वृद्धि करने जा रही हैं। यानी कि मुफ़्त मोबाइल कॉलिंग और सस्ते नेट प्लान के बारे में तो भूल ही जाइये, वहीं अब फूड डिलीवरी करने वाली कम्पनियों से भी ज़्यादा से ज़्यादा डिस्काउण्ट की आशा मत रखिए।