जानिए क्यों हो रहा है आर्म्स एक्ट में संशोधन का विरोध?
Monday - December 2, 2019 3:20 pm ,
Category : WTN HINDI
नये आर्म्स एक्ट में होंगे कई कड़े प्रावधान
यदि अब की हर्ष फायरिंग तो जाना होगा जेल
DEC 02 (WTN) – यदि आपके पास हथियार का लाइसेंस या फ़िर आप हथियार का लाइसेंस लेने जा रहे हैं, तो अब कुछ बातों को जानना आपके लिए काफ़ी ज़रूरी है। ऐसा इसलिए, क्योंकि केन्द्र सरकार आर्म्स एक्ट में संशोधन कर उसमें बदलाव करने जा रही है। आर्म्स एक्ट में हुए नये संशोधनों के बाद हथियारों का दुरुपयोग करने पर सख़्त सज़ा का प्रावधान किया गया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि केन्द्रीय गृह मंत्रालय 60 साल पुराने आर्म्स एक्ट में संशोधन से जुड़ा बिल पेश कर रही है।
जानकारी के मुताबिक़, इस बिल में सज़ा के कई प्रावधानों को बदला गया है और साथ ही अपराध की नई श्रेणियों को भी इस बिल में शामिल किया गया है। नये आर्म्स एक्ट के अनुसार अब कोई भी व्यक्ति एक से ज़्यादा हथियार नहीं रख सकता है, जबकि इसकी सीमा पहले तीन आर्म्स की थी। आर्म्स एक्ट अमेण्डमेंट बिल के मुताबिक़, हथियार बेचने वाले अधिकृत डीलर के अलावा किसी को भी एक से ज़्यादा हथियार रखने की अनुमित नहीं दी जाएगी।
यह नया क़ानून बनने के बाद एक से ज़्यादा हथियार रखने वालों को 90 दिनों के अन्दर अपना हथियार जमा करना होगा। इसके लिए शस्त्र लाइसेंसधारक को क़रीबी पुलिस स्टेशन में अपना हथियार एक निश्चित समय सीमा के अन्दर जमा कराना होगा। वहीं यदि अतिरिक्त हथियार किसी सैन्यकर्मी के पास है, तो उसे अपने हथियार को अपनी यूनिट में जमा कराना पड़ सकता है। एक से ज़्यादा लाइसेंस होने पर उसे क़ानून लागू होने के एक साल के अन्दर रद्द कर दिया जाएगा।
वहीं यदि कोई पुलिस या सैन्य बलों से हथियार लूटता है तो दोषी पाये जाने पर इस मामले में कम से कम 10 साल से लेकर उम्र क़ैद की सज़ा का प्रावधान बिल में किया गया है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय शूटिंग खिलाड़ियों को एक से ज़्यादा हथियार रखने की अनुमित मिलेगी, लेकिन उसमें इस्तेमाल किए जाने वाले कारतूस की श्रेणी को तय किया गया है।
वहीं जश्न के अवसरों पर हर्ष फायरिंग करने पर भी सरकार लगाम लगाने की तैयारी में है। दरअसल, देखा गया है कि शादी, सगाई और बारात आदि कार्यक्रमों में कई लोगों द्वारा हर्ष फायरिंग की जाती है, जिसमें हर साल कई हादसे होते हैं और कई लोगों की जान चली जाती है। हर्ष फायरिंग की घटनाओं पर चिन्ता ज़ाहिर करते हुए अब जश्न के मौक़ों पर हर्ष फायरिंग को अपराध की श्रेणी में लाया जा रहा है।
शादी-बारात आदि मांगलिक उत्सवों में फायरिंग करने वालों पर अब क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रस्तावित नये बिल में ऐसे अपराध के लिए 2 साल की सज़ा या एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान शामिल किया गया है। नये क़ानून के मुताबिक़ अब धार्मिक आयोजनों, शादी समारोह और सार्वजनिक स्थलों पर फायरिंग को क़ानूनी तौर पर अपराध माना गया है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नये क़ानून में हथियारों की तस्करी और उनके पुरजों की अवैध ख़रीदी-बिक्री को भी अपराध माना गया है। वहीं बगैर लाइसेंस के प्रतिबन्धित हथियार रखने पर अब तक 7 साल की सज़ा का प्रावधान था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 10 साल किया जा रहा है। नये क़ानून के मुताबिक़ यदि प्रतिबन्धित हथियार से किसी की मौत हो जाती है, तो पहले की तरह नए क़ानून में भी मौत की सज़ा या फ़िर जुर्माने के साथ उम्र कैद को बरक़रार रखा गया है।
लेकिन वहीं नये आर्म्स एक्ट संशोधन बिल में शस्त्र लाइसेंस की वैधता को तीन साल से बढ़ाकर पांच साल करने की बात भी कही गई है। मोदी सरकार नये क़ानून में हथियारधारक की निगरानी के लिए भी नियम बना रही है, जिससे ख़रीदे गए हथियार, कारतूस और बारूद के बारे में सही तरीक़े से पता चल सके कि उनका इस्तेमाल किस तरह से हो रहा है।
लेकिन मोदी सरकार द्वारा आर्म्स एक्ट में किये जा रहे संशोधन का विरोध भी शुरू हो गया है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, राजनीतिक दलों में राजघरानों से जुड़े सांसद एक से ज़्यादा हथियार ना रखने के संशोधन के ख़िलाफ़ हैं। राजघरानों से सम्बन्धित सांसदों की दलील है कि यह उनके पुश्तैनी हथियार हैं जो कि कई पीढ़ियों से उनके परिवार में हैं। इन सांसदों का इस बारे में कहना है कि परम्परा अनुसार दशहरे पर शस्त्र पूजन में इन हथियारों का इस्तेमाल किया जाता है।
वहीं नये क़ानून के बारे में राजघरानों का कहना है कि रियासतों का भारत में विलय इन हथियारों के साथ ही हुआ था, तो ऐसे में नये आर्म्स एक्ट संशोधन बिल में इस पर किसी भी तरह की रोक नहीं लगाई जानी चाहिए। लेकिन मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, नये आर्म्स एक्ट संशोधन बिल में यह प्रावधान किया है कि जो पुश्तैनी हथियार हैं उनकी एक अलग से श्रेणी होगी, लेकिन इन हथियारों के इस्तेमाल के लिए कारतूस नहीं रखे जा सकते हैं।
अब देखना होगा कि मोदी सरकार द्वारा किये जा रहे आर्म्स एक्ट संशोधन का कितना फ़ायदा प्रशासन को होता है। दरअसल, देखा गया है कि देश के कई इलाकों में अभी भी हथियार रखना शान की बात मानी जाती है। इन इलाक़ों में कई लोगों के पास अनाधिकृत हथियार होते हैं, जिनका इस्तेमाल आपसी लड़ाई या हर्ष फायरिंग में किया जाता है। ऐसे में कहा जा सकता है कि सरकार द्वारा बनाये जा रहे नये क़ानून से अवैध हथियारों को रखने पर रोक लगेगी। लेकिन वहीं सरकार को नया क़ानून बनाते समय राजघरानों की उस मांग पर भी विचार करना चाहिए, जिसमें उन्होंने पुश्तैनी हथियारों को इस क़ानून से अलग रखने की मांग की है।
DEC 02 (WTN) – यदि आपके पास हथियार का लाइसेंस या फ़िर आप हथियार का लाइसेंस लेने जा रहे हैं, तो अब कुछ बातों को जानना आपके लिए काफ़ी ज़रूरी है। ऐसा इसलिए, क्योंकि केन्द्र सरकार आर्म्स एक्ट में संशोधन कर उसमें बदलाव करने जा रही है। आर्म्स एक्ट में हुए नये संशोधनों के बाद हथियारों का दुरुपयोग करने पर सख़्त सज़ा का प्रावधान किया गया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि केन्द्रीय गृह मंत्रालय 60 साल पुराने आर्म्स एक्ट में संशोधन से जुड़ा बिल पेश कर रही है।
जानकारी के मुताबिक़, इस बिल में सज़ा के कई प्रावधानों को बदला गया है और साथ ही अपराध की नई श्रेणियों को भी इस बिल में शामिल किया गया है। नये आर्म्स एक्ट के अनुसार अब कोई भी व्यक्ति एक से ज़्यादा हथियार नहीं रख सकता है, जबकि इसकी सीमा पहले तीन आर्म्स की थी। आर्म्स एक्ट अमेण्डमेंट बिल के मुताबिक़, हथियार बेचने वाले अधिकृत डीलर के अलावा किसी को भी एक से ज़्यादा हथियार रखने की अनुमित नहीं दी जाएगी।
यह नया क़ानून बनने के बाद एक से ज़्यादा हथियार रखने वालों को 90 दिनों के अन्दर अपना हथियार जमा करना होगा। इसके लिए शस्त्र लाइसेंसधारक को क़रीबी पुलिस स्टेशन में अपना हथियार एक निश्चित समय सीमा के अन्दर जमा कराना होगा। वहीं यदि अतिरिक्त हथियार किसी सैन्यकर्मी के पास है, तो उसे अपने हथियार को अपनी यूनिट में जमा कराना पड़ सकता है। एक से ज़्यादा लाइसेंस होने पर उसे क़ानून लागू होने के एक साल के अन्दर रद्द कर दिया जाएगा।
वहीं यदि कोई पुलिस या सैन्य बलों से हथियार लूटता है तो दोषी पाये जाने पर इस मामले में कम से कम 10 साल से लेकर उम्र क़ैद की सज़ा का प्रावधान बिल में किया गया है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय शूटिंग खिलाड़ियों को एक से ज़्यादा हथियार रखने की अनुमित मिलेगी, लेकिन उसमें इस्तेमाल किए जाने वाले कारतूस की श्रेणी को तय किया गया है।
वहीं जश्न के अवसरों पर हर्ष फायरिंग करने पर भी सरकार लगाम लगाने की तैयारी में है। दरअसल, देखा गया है कि शादी, सगाई और बारात आदि कार्यक्रमों में कई लोगों द्वारा हर्ष फायरिंग की जाती है, जिसमें हर साल कई हादसे होते हैं और कई लोगों की जान चली जाती है। हर्ष फायरिंग की घटनाओं पर चिन्ता ज़ाहिर करते हुए अब जश्न के मौक़ों पर हर्ष फायरिंग को अपराध की श्रेणी में लाया जा रहा है।
शादी-बारात आदि मांगलिक उत्सवों में फायरिंग करने वालों पर अब क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रस्तावित नये बिल में ऐसे अपराध के लिए 2 साल की सज़ा या एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान शामिल किया गया है। नये क़ानून के मुताबिक़ अब धार्मिक आयोजनों, शादी समारोह और सार्वजनिक स्थलों पर फायरिंग को क़ानूनी तौर पर अपराध माना गया है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नये क़ानून में हथियारों की तस्करी और उनके पुरजों की अवैध ख़रीदी-बिक्री को भी अपराध माना गया है। वहीं बगैर लाइसेंस के प्रतिबन्धित हथियार रखने पर अब तक 7 साल की सज़ा का प्रावधान था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 10 साल किया जा रहा है। नये क़ानून के मुताबिक़ यदि प्रतिबन्धित हथियार से किसी की मौत हो जाती है, तो पहले की तरह नए क़ानून में भी मौत की सज़ा या फ़िर जुर्माने के साथ उम्र कैद को बरक़रार रखा गया है।
लेकिन वहीं नये आर्म्स एक्ट संशोधन बिल में शस्त्र लाइसेंस की वैधता को तीन साल से बढ़ाकर पांच साल करने की बात भी कही गई है। मोदी सरकार नये क़ानून में हथियारधारक की निगरानी के लिए भी नियम बना रही है, जिससे ख़रीदे गए हथियार, कारतूस और बारूद के बारे में सही तरीक़े से पता चल सके कि उनका इस्तेमाल किस तरह से हो रहा है।
लेकिन मोदी सरकार द्वारा आर्म्स एक्ट में किये जा रहे संशोधन का विरोध भी शुरू हो गया है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, राजनीतिक दलों में राजघरानों से जुड़े सांसद एक से ज़्यादा हथियार ना रखने के संशोधन के ख़िलाफ़ हैं। राजघरानों से सम्बन्धित सांसदों की दलील है कि यह उनके पुश्तैनी हथियार हैं जो कि कई पीढ़ियों से उनके परिवार में हैं। इन सांसदों का इस बारे में कहना है कि परम्परा अनुसार दशहरे पर शस्त्र पूजन में इन हथियारों का इस्तेमाल किया जाता है।
वहीं नये क़ानून के बारे में राजघरानों का कहना है कि रियासतों का भारत में विलय इन हथियारों के साथ ही हुआ था, तो ऐसे में नये आर्म्स एक्ट संशोधन बिल में इस पर किसी भी तरह की रोक नहीं लगाई जानी चाहिए। लेकिन मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, नये आर्म्स एक्ट संशोधन बिल में यह प्रावधान किया है कि जो पुश्तैनी हथियार हैं उनकी एक अलग से श्रेणी होगी, लेकिन इन हथियारों के इस्तेमाल के लिए कारतूस नहीं रखे जा सकते हैं।
अब देखना होगा कि मोदी सरकार द्वारा किये जा रहे आर्म्स एक्ट संशोधन का कितना फ़ायदा प्रशासन को होता है। दरअसल, देखा गया है कि देश के कई इलाकों में अभी भी हथियार रखना शान की बात मानी जाती है। इन इलाक़ों में कई लोगों के पास अनाधिकृत हथियार होते हैं, जिनका इस्तेमाल आपसी लड़ाई या हर्ष फायरिंग में किया जाता है। ऐसे में कहा जा सकता है कि सरकार द्वारा बनाये जा रहे नये क़ानून से अवैध हथियारों को रखने पर रोक लगेगी। लेकिन वहीं सरकार को नया क़ानून बनाते समय राजघरानों की उस मांग पर भी विचार करना चाहिए, जिसमें उन्होंने पुश्तैनी हथियारों को इस क़ानून से अलग रखने की मांग की है।