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अब आपका डेटा रहेगा सुरक्षित!

Thursday - December 5, 2019 11:43 am , Category : WTN HINDI
डेटा प्रोटेक्शन के लिए मोदी सरकार ने दिखाई सख़्ती
डेटा प्रोटेक्शन के लिए मोदी सरकार ने दिखाई सख़्ती

यूज़र्स के डेटा को सुरक्षित रखने सरकार ने बनाया कड़ा क़ानून

DEC 05 (WTN) – जब से मानव सभ्यता अस्तित्व में आई है, तभी से चोरी जैसे अपराध भी होते रहे हैं। समय के साथ-साथ चोरी करने के तरीक़े तो बदले ही हैं, वहीं चोरी किस वस्तु की जा रही है यह भी बदल गया है। खाने के सामान से लेकर धन सम्पत्ति और अन्य क़ीमती और ज़रूरी वस्तुओं तक की चोरी के बारे में तो आप जानते ही हैं। लेकिन टेक्नोलॉजी के इस युग में चोरी करने का तरीक़ा और चोरी होने वाली वस्तु भी बदल गई है।

जैसा कि आप जानते हैं कि आधुनिक युग में आजकल ज़्यादातर काम ऑनलाइन या फ़िर कहें कि इंटरनेट के ज़रिये होते हैं। वहीं बैंकिंग और अन्य वित्त सम्बन्धित काम आजकल कम्प्यूटर या स्मार्टफ़ोन पर इंटरनेट के ज़रिये ही लोग करते हैं। इतना ही नहीं मनोरंजन और टाइमपास के लिए आजकल लोग सोशल मीडिया पर भी काफ़ी सक्रिय रहते हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि इंटरनेट पर आपकी किसी ना किसी रूप में मौजूदगी से आपका निजी और बैंक सम्बन्धित डेटा उस पर मौजूद रहता है, और यदि आपने लालच या ग़लती की या फ़िर लापरवाही बरती तो आपका डेटा चोरी हो सकता है, और यदि आपका डेटा चोरी हुआ तो आपको मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

जीहां इन दिनों यदि सबसे ज़्यादा क़ीमती आपके लिए कुछ है तो वो है आपका डेटा। यदि हैकर्स ने आपका डेटा चुरा लिया या फ़िर आपके डेटा को आपकी जानकारी के बिना किसी ने किसी को दे दिया तो आपको काफ़ी दिक़्क़तों का सामना करना पड़ सकता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पूरी दुनिया में हैकर्स ने लाखों लोगों का डेटा चुराकर उनके सामने परेशानी खड़ी कर दी है। साइबर क्राइम विशेषज्ञों के मुताबिक़, हैकर्स डेटा चोरी के लिए यूज़र्स की ग़लती और लापरवाही का ही इंतज़ार करते हैं कि जैसे ही यूज़र्स द्वारा कोई ग़लती या लापरवाही होती है, हैकर्स डेटा चुरा लेते हैं।

जहां तक भारत की बात है तो अकेले भारत में ही हैकर्स के कारण बैंकिंग फ्रॉड के ज़रिये बैंकों को हज़ारों करोड़ रुपयों की चपत लग चुकी है। वहीं हैकर्स सोशल मीडिया साइट्स और ऐप्स को हैक करके यूज़र्स की निजी जानकारी, उनकी कॉल और चैट हिस्ट्री के बारे में पता कर सकते हैं, जो कि यूज़र्स के लिए काफ़ी नुकसानदेह साबित हो सकता है।
 
डेटा चोरी की लगातार बढ़ती शिकायतों के बाद मोदी सरकार ने अब डेटा प्रोटेक्शन के लिए एक बड़ा क़दम उठाया है। इसी के मुद्देनज़र मोदी सरकार ने डेटा प्रोटेक्शन बिल (Data Protection Bill) को मन्ज़ूरी दे दी है। यूज़र्स के डेटा की सुरक्षा के लिए बनाए गये इस बिल में सोशल साइट्स और ऐप्स पर यूज़र्स की निजी जानकारी को सुरक्षित करने का प्रावधान किया गया है।

जैसा कि आप जानते हैं कि पिछले दिनों व्हाट्सएप पर डेटा की सुरक्षा में सेंध के बाद सरकार पर विपक्ष ने काफ़ी आरोप लगाए थे, जिसके बाद सरकार ने इस बड़े क़दम को उठाया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि व्हाट्सएप जासूसी केस के बाद काफ़ी बवाल हुआ था, जिसके बाद मोदी सरकार ने कहा था कि सरकार हर किसी की निजता का सम्मान करती है और उसे गम्भीरता से लेती है और सूचना की गोपनीयता भी इसी का एक हिस्सा है।

मोदी सरकार के मुताबिक़, डेटा प्रोटेक्शन बिल में यूज़र्स की निजता का पूरा ध्यान रखने की कोशिश की गई है। प्रस्तावित बिल का जो मसौदा सरकार ने अपनी वेबसाइट पर डाला है, उस मसौदे के मुताबिक़ आम लोगों के निजी डेटा के सही और पारदर्शी इस्तेमाल की ज़िम्मेदारी सरकारी और प्राइवेट एजेंसियों पर सौंपी गई है, जो कि डेटा का इस्तेमाल करती हैं। यदि किसी भी कारण से यूज़र्स की जानकारी के बिना उसका डेटा किसी को दिया जाता है या फ़िर उसकी चोरी हो जाती है तो इस परिस्थिति के लिए जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। इस तरह की कोई भी ग़लती होने पर सरकार और प्राइवेट दोनों ही एजेंसियों को 15 करोड़ रुपये का जुर्माना भरना पड़ेगा।

यूज़र्स के डेटा का सही तरीक़े से इस्तेमाल हो इसे सुनिश्चित करने के लिए बिल में एक डेटा सुरक्षा प्राधिकरण (Data Protection Authority) बनाने का प्रावधान भी किया गया है। बिल में किसी भी तरह की कोई भी कमी ना रहे और एक मज़बूत बिल बन सके इसके लिए डेटा प्रोटेक्शन से सम्बन्धित तमाम देशों से जुड़े क़ानूनों की समीक्षा कर इस नये क़ानून को बनाया गया है। जानकारी के लिए बता दें कि यूरोप के डेटा प्रोटेक्शन क़ानून से कई इनपुट इस बिल में लिये गये हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्रस्तावित बिल में सबसे ज़्यादा फोकस डेटा को साझा करने में यूज़र्स की सहमति लेने पर दिया गया है। डेटा यूज़र्स की सहमति से ही साझा हो इसके लिए कई प्रावधान इस बिल में बनाए गए हैं। बिल में साफ़ कहा गया है कि बिना किसी की अनुमति के यदि डेटा लिया जाता है या फ़िर उसे साझा किया जाता है तो यह करना क़ानूनन अपराध होगा। अब देखना होगा कि सरकार द्वारा डेटा प्रोटेक्शन के लिए लाये जा रहे इस सख़्त क़ानून से यूज़र्स का डेटा कितना सुरक्षित रह पाता है।

दरअसल, डेटा प्रोटेक्शन आज की सबसे बड़ी ज़रूरत बन गया है, क्योंकि यदि किसी व्यक्ति का डेटा ग़लत हाथों में लग गया तो उसे कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आशा की जाना चाहिए कि इस नये बिल में यूज़र्स के डेटा को पूरी तरह से सुरक्षित रखने के लिए जो ज़िम्मेदारी तय की गई है, उससे यूज़र्स का डेटा सुरक्षित रहेगा।