हैदराबाद एनकाउन्टर को छात्राओं ने बताया सही समय पर लिया गया सही फ़ैसला
Saturday - December 7, 2019 10:38 am ,
Category : WTN HINDI
अन्याय के ख़िलाफ़ छात्राओं ने उठाई आवाज़
छात्राओं ने की रेप और हत्या के आरोपियों को फांसी की सज़ा देने की मांग
DEC 07 (WTN) – हैदराबाद में वेटरनरी डॉक्टर के साथ हुए गैंगरेप और उसके बाद उसकी निर्मम हत्या और शव को जलाने की घटना ने पूरे देश को दुखी और शर्मिंदा कर दिया था। लड़कियों और महिलाओं ने समाज से सवाल करना शुरू कर दिये थे कि क्या वे सुरक्षित नहीं हैं? हैदराबाद की घटना से पूरा समाज शर्मिंदा था कि हम महिलाओं को सुरक्षा क्यों नहीं दे पा रहे हैं। वेटरनरी डॉक्टर के साथ घटी घटना के आरोपियों को पुलिस ने आख़िरकार पकड़ लिया था, और पूरा देश मांग कर रहा था कि आरोपियों के ख़िलाफ़ दोष सिद्ध होने के बाद उन्हें जल्द से जल्द फांसी पर चढ़ा देना चाहिए।
लेकिन 5 और 6 दिसम्बर की दरमयानी रात हैदराबाद पुलिस ने रेप और हत्या के आरोपियों का एनकाउन्टर कर दिया। हैदराबाद पुलिस के एनकाउन्टर पर जहां कुछ लोगों को कहना है कि यह तरीक़ा ग़लत है, वहीं बहुसंख्यक लोगों की इस बारे में राय है कि रेप और हत्या के आरोपियों के साथ पुलिस ने जो किया वो बिल्कुल सही किया। इस बारे में जब हमने भोपाल स्थित पीपुल्स विश्वविद्यालय के संस्थानों में शिक्षारत छात्राओं से चर्चा की, तो उनका साफ़ कहना था कि जो घिनौना कृत्य वेटरनरी डॉक्टर के साथ आरोपियों ने किया था उन्हें यही सज़ा मिलना चाहिए थी।
People's College Of Dental Sciences And Research Center की छात्राओं संजना बंसल, श्रृष्टि मिश्रा और विजया गुप्ता का इस बारे में कहना है कि रेप और हत्या के आरोपियों के साथ जो भी हैदराबाद पुलिस ने किया है, वो सही समय पर लिया गया सही फैसला है। यदि यह केस कोर्ट में चलता तो पीड़िता के परिजनों को न्याय मिलने में सालों लग जाते। छात्राओं के मुताबिक़, न्याय मिलने में देरी अपने आप में एक तरह का अन्याय ही है। निर्भया केस में सात साल हो गये, लेकिन दोषियों को अभी तक फांसी की सजा नहीं हुई। किसी भी महिला के साथ रेप और हत्या के मामले में फांसी की सज़ा का प्रावधान सरकार को जल्द से जल्द करना चाहिए।
वहीं People's Institute of Pharmacy & Research Center की छात्राओं पूजा अहिरवार, शैली नामदेव और अनिता पटेल ने भी हैदरबाद पुलिस की कार्रवाई को सही बताया है। छात्राओं के मुताबिक़, रेप और हत्या जैसे जघन्य अपराध में सज़ा के मामले में किसी भी तरह की दया और देरी पीड़िता और उसके परिजनों के साथ अन्याय है। वेटरनरी डॉक्टर के साथ जो भी आरोपियों ने किया था, उसकी सज़ा आख़िरकार मौत ही थी। लेकिन यदि न्यायिक प्रक्रिया से उन्हें फांसी होती तो इसमें काफ़ी समय लग सकता था, ऐसे में हैदराबाद पुलिस ने जघन्य अपराध के आरोपियों का एनकाउन्टर कर एक उदाहरण पेश किया है।
Peoples College of Nursing & Research Center में पढ़ने वाली अन्जना विश्वकर्मा, किरण और सविता लोधी का भी मत है कि हैदराबाद पुलिस की एनकाउन्टर की कार्रवाई कही से भी ग़लत नहीं है। यदि इन आरोपियों ने भागने की कोशिश की थी और पुलिस पर हमला किया था, तो रेप और हत्या जैसे जघन्य अपराध के आरोपियों का एनकाउन्टर ही सबसे बढ़िया तरीक़ा है। जब इस तरह के एनकाउन्टर होंगे तो समाज में फैले अपराधियों के मन में डर पैदा होगा। छात्राओं की मांग है कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की ड्यूटी है, वहीं यदि महिलाओं के साथ रेप और हत्या जैसी घटनाएं घटती हैं तो दोषियों को जल्द से जल्द सज़ा देना कोर्ट की ज़िम्मेदारी है।
DEC 07 (WTN) – हैदराबाद में वेटरनरी डॉक्टर के साथ हुए गैंगरेप और उसके बाद उसकी निर्मम हत्या और शव को जलाने की घटना ने पूरे देश को दुखी और शर्मिंदा कर दिया था। लड़कियों और महिलाओं ने समाज से सवाल करना शुरू कर दिये थे कि क्या वे सुरक्षित नहीं हैं? हैदराबाद की घटना से पूरा समाज शर्मिंदा था कि हम महिलाओं को सुरक्षा क्यों नहीं दे पा रहे हैं। वेटरनरी डॉक्टर के साथ घटी घटना के आरोपियों को पुलिस ने आख़िरकार पकड़ लिया था, और पूरा देश मांग कर रहा था कि आरोपियों के ख़िलाफ़ दोष सिद्ध होने के बाद उन्हें जल्द से जल्द फांसी पर चढ़ा देना चाहिए।
लेकिन 5 और 6 दिसम्बर की दरमयानी रात हैदराबाद पुलिस ने रेप और हत्या के आरोपियों का एनकाउन्टर कर दिया। हैदराबाद पुलिस के एनकाउन्टर पर जहां कुछ लोगों को कहना है कि यह तरीक़ा ग़लत है, वहीं बहुसंख्यक लोगों की इस बारे में राय है कि रेप और हत्या के आरोपियों के साथ पुलिस ने जो किया वो बिल्कुल सही किया। इस बारे में जब हमने भोपाल स्थित पीपुल्स विश्वविद्यालय के संस्थानों में शिक्षारत छात्राओं से चर्चा की, तो उनका साफ़ कहना था कि जो घिनौना कृत्य वेटरनरी डॉक्टर के साथ आरोपियों ने किया था उन्हें यही सज़ा मिलना चाहिए थी।
People's College Of Dental Sciences And Research Center की छात्राओं संजना बंसल, श्रृष्टि मिश्रा और विजया गुप्ता का इस बारे में कहना है कि रेप और हत्या के आरोपियों के साथ जो भी हैदराबाद पुलिस ने किया है, वो सही समय पर लिया गया सही फैसला है। यदि यह केस कोर्ट में चलता तो पीड़िता के परिजनों को न्याय मिलने में सालों लग जाते। छात्राओं के मुताबिक़, न्याय मिलने में देरी अपने आप में एक तरह का अन्याय ही है। निर्भया केस में सात साल हो गये, लेकिन दोषियों को अभी तक फांसी की सजा नहीं हुई। किसी भी महिला के साथ रेप और हत्या के मामले में फांसी की सज़ा का प्रावधान सरकार को जल्द से जल्द करना चाहिए।
वहीं People's Institute of Pharmacy & Research Center की छात्राओं पूजा अहिरवार, शैली नामदेव और अनिता पटेल ने भी हैदरबाद पुलिस की कार्रवाई को सही बताया है। छात्राओं के मुताबिक़, रेप और हत्या जैसे जघन्य अपराध में सज़ा के मामले में किसी भी तरह की दया और देरी पीड़िता और उसके परिजनों के साथ अन्याय है। वेटरनरी डॉक्टर के साथ जो भी आरोपियों ने किया था, उसकी सज़ा आख़िरकार मौत ही थी। लेकिन यदि न्यायिक प्रक्रिया से उन्हें फांसी होती तो इसमें काफ़ी समय लग सकता था, ऐसे में हैदराबाद पुलिस ने जघन्य अपराध के आरोपियों का एनकाउन्टर कर एक उदाहरण पेश किया है।
Peoples College of Nursing & Research Center में पढ़ने वाली अन्जना विश्वकर्मा, किरण और सविता लोधी का भी मत है कि हैदराबाद पुलिस की एनकाउन्टर की कार्रवाई कही से भी ग़लत नहीं है। यदि इन आरोपियों ने भागने की कोशिश की थी और पुलिस पर हमला किया था, तो रेप और हत्या जैसे जघन्य अपराध के आरोपियों का एनकाउन्टर ही सबसे बढ़िया तरीक़ा है। जब इस तरह के एनकाउन्टर होंगे तो समाज में फैले अपराधियों के मन में डर पैदा होगा। छात्राओं की मांग है कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की ड्यूटी है, वहीं यदि महिलाओं के साथ रेप और हत्या जैसी घटनाएं घटती हैं तो दोषियों को जल्द से जल्द सज़ा देना कोर्ट की ज़िम्मेदारी है।