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विदेशी सम्पत्तियां बेचने की कगार पर पहुंची पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था!

Saturday - December 7, 2019 12:41 pm , Category : WTN HINDI
पाकिस्तान की बदहाल आर्थिक स्थिति इमरान ख़ान के लिए सबसे बड़ी चुनौती
पाकिस्तान की बदहाल आर्थिक स्थिति इमरान ख़ान के लिए सबसे बड़ी चुनौती

अब विदेश की सम्पत्तियां बेचकर खजाना भरेगी पाकिस्तान सरकार

DEC 07 (WTN) – आतंक और आतंकियों को पनाह देने वाले और उन्हें बढ़ावा देने वाले देश पाकिस्तान की आर्थिक हालत इन दिनों बद से बदतर हो चुकी है। अमेरिका और चीन समेत अन्य देशों से आर्थिक सहायता हासिल करने वाले पाकिस्तान की आर्थिक हालत दिनों-दिन इतनी ख़राब होती जा रही है कि पाकिस्तान की ग़रीब जनता औऱ मध्यमवर्ग को दो वक़्त की रोटी जुटाना मुश्किल होता जा रहा है। अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले कमज़ोर होती पाकिस्तानी करेंसी, ऐतिहासिक रूप से निर्यात में कमी, विदेशी मुद्रा भण्डार में दिनों-दिन आती गिरावट समेत अन्य कारणों से पाकिस्तान में महंगाई चरम पर पहुंच चुकी है।
 
कहने को तो पाकिस्तान को अमेरिका और चीन समेत कई देशों से आर्थिक सहायता मिलती है। लेकिन हक़ीक़त यह है कि पाकिस्तान को मिलने वाली इस आर्थिक सहायता का पाकिस्तान में दुरुपयोग ज़्यादा होता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान के सालाना बजट का काफ़ी हिस्सा सिर्फ़ रक्षा क्षेत्र में ही ख़र्च हो जाता है। वहीं भारत से बराबरी करने की होड़ में पाकिस्तानी की सरकार और सेना ग़रीबी दूर करने के बजाय हथियार ख़रीदने और आतंकियों को प्रशिक्षण देने में अपना बजट ख़र्च करती करती रहती है। टेरर फण्डिग को लेकर पाकिस्तान की पूरी दुनिया में साख इतनी ज़्यादा गिर गई है कि FATF कभी भी पाकिस्तान को ब्लैक लिस्टेड कर सकता है।
 
लेकिन सब होने के बाद भी पाकिस्तान सुधारने का नाम नहीं ले रहा है और भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने की कोशिशों में लगा रहता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान इस समय इतनी भयंकर आर्थिक तंगी से गुजर रहा है कि आर्थिक संकट से निपटने के लिए अब इमरान ख़ान सरकार ने विदेश में स्थित बिना इस्तेमाल वाली महंगी सरकारी सम्पत्तियों को बेचने तक का फ़ैसला ले लिया है। जीहां यह पढ़कर आपको आश्चर्य ज़रूर हुआ होगा, लेकिन भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान की आर्थिक हालत इस स्थिति पर पहुंच गई है कि उसे अपनी सम्पत्तियों को बेचना पड़ रहा है।
 
इस बारे में पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार का दावा है कि इन सम्पत्तियों की बिक्री से जो भी आमदनी होगी, उससे सरकार ख़ाली खजाना भरने का काम करेगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इसके लिए पाकिस्तान सरकार दुबई एक्सपो में सरकारी सम्पत्तियों की बोली लगाएगी। वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान का कहना है कि लोक कल्याणकारी परियोजनाओं पर धनराशि के बेहतर इस्तेमाल के लिए महंगी सरकारी सम्पत्तियों की बिक्री की जाएगी। कहा जा रहा है कि पाकिस्तान सरकार इस धन का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य, खाद्य और आवास से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं पर ख़र्चे के लिए करेगी।

दरअसल, जब से इमरान ख़ान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने हैं, तभी से उनका कहना रहा है कि पूर्व की सरकारों की लापरवाही और वित्तीय कुप्रबन्ध के कारण ही पाकिस्तान की आर्थिक हालत इन दिनों बदतर हो चुकी है। इमरान ख़ान का आरोप है कि पूर्व की सरकारों ने विदेशों में स्थित महंगी सम्पत्तियों का या तो इस्तेमाल ही नहीं किया या फ़िर उनका उचित तरीक़े से इस्तेमाल नहीं किया, जिसके कारण विदेश की इन सम्पत्तियों को बेचने की नौबत आ गई है।
 
इमरान ख़ान का कहना है कि अरबों रुपये की सम्पत्ति के बावजूद हर साल संघीय सरकार के संस्थानों को अरबों रुपयों का घाटा हो रहा है। इसलिए इमरान ख़ान ने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि सरकार के मालिकाना हक़ वाली बिना इस्तेमाल वाली सम्पत्ति को चिन्हित करने और उनको बेचने में किसी भी तरह की कोई अड़चन कोई भी अधिकारी खड़ी करता है, तो उस पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान की आर्थिक हालत इन दिनों बेहद ख़राब दौर से गुजर रही है। कई कारणों के चलते पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से 6 अरब डॉलर का बेल ऑउट पैकेज मिला है। वहीं पाकिस्तान को उसके मित्र देशों चीन, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों से भी वित्तीय सहायता मिली है। लेकिन इतना सब होने के बाद भी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था सुधर नहीं रही है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह है पाकिस्तानी शासन व्यवस्था में सेना की दखलंदाजी। जैसा कि आप जानते हैं कि पाकिस्तान में लोकतांत्रिक व्यवस्था बस दुनिया को दिखाने के लिए ही है, जबकि वास्तव में वहां पर सेना का ही दबदबा रहता है।

पाकिस्तान में कई बार तख़्तापलट हो चुका है, वहीं समय-समय पर पाकिस्तान की सेना वहां की चुनी हुई सरकारों पर दबाव डालती रहती है। पाकिस्तान के भारत के साथ कूटनीतिक रिश्ते और पाकिस्तान की कश्मीर नीति भी वहां की सरकार नहीं बल्कि सेना ही तय करती है। ऐसे में पाकिस्तान के बजट का काफ़ी हिस्सा सेना के बजट पर ख़र्च होता है, जिसके कारण पाकिस्तान में ग़रीबी उन्मूलन, शिक्षा और स्वास्थ्य पर काफ़ी कम पैसा ख़र्च हो पाता है।
 
वहीं पाकिस्तान की आर्थिक बर्बादी का एक कारण चीन भी है। कहने को तो चीन पाकिस्तान का मित्र देश है, लेकिन चीन ने पाकिस्तान को अपने क़र्ज़ के जाल में फंसा लिया है। चीन के महत्वाकांक्षी CPEC प्रोजेक्ट में सहयोगी बनकर पाकिस्तान को काफ़ी नुकसान उठाना पड़ा है। चीन ने अपने इस प्रोजेक्ट समेत अन्य प्रोजेक्ट्स की आड़ में पाकिस्तान को काफ़ी क़र्ज़ दे रखा है, जिसे चुकाना पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। अब देखना होगा कि विदेशी सम्पतियां बेचकर भी क्या इमरान ख़ान सरकार पाकिस्तान की बिगड़ी हुई आर्थिक स्थिति को नियंत्रण में ला पाती है कि नहीं?