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यदि कर्मचारी चाहेंगे तो ख़ुद बढ़ा सकेंगे अपनी टेक होम सैलरी!

Tuesday - December 10, 2019 11:06 am , Category : WTN HINDI
पीएफ और टेक होम सैलरी के लिए मोदी सरकार ला रही नया नियम
पीएफ और टेक होम सैलरी के लिए मोदी सरकार ला रही नया नियम

अब कर्मचारी की मर्ज़ी से होगा पीएफ में अंशदान!
 

DEC 10 (WTN) – यदि आप नौकरीपेशा हैं, तो मोदी सरकार आपके वेतन से जुड़ा एक नया नियम बनाने जा रही है। मोदी सरकार के इस नये फ़ैसले से कर्मचारी अब ख़ुद निर्धारित कर सकेंगे कि वे हर महीने अपनी तरफ़ से अपने पीएफ फण्ड में कितनी राशि का अंशदान करें। दरअसल, जैसा कि आप जानते हैं कि अभी आपके पीएफ फण्ड में आपकी तरफ़ से और आपकी नियोक्ता कम्पनी की तरफ़ से उतनी ही राशि का अंशदान होता है, जितनी राशि के अंशदान का नियम सरकार ने बनाया है। लेकिन मोदी सरकार संसद में एक नया बिल पेश करने जा रही है, इस बिल में कर्मचारियों को यह अधिकार दिया जा रहा है कि वे अपनी इच्छा के अनुसार अपनी तरफ़ से पीएफ राशि का अंशदान कर सकते हैं।
 
दरअसल, मोदी सरकार जल्द ही सोशल सिक्योरिटी कोड 2019 (Social Security Code Bill 2019) को संसद में पेश कर सकती है। जानकारी के मुताबिक़, इस नये बिल में कई प्रावधान किए गए है। इस बिल में कर्मचारियों को यह अधिकार दिया गया है कि वे अपनी इच्‍छा से चाहें तो पीएफ के लिए कम राशि का अंशदान कर सकते हैं। यानी कि नये नियम के मुताबिक़, यदि कर्मचारी चाहें तो अपनी पीएफ राशि का अंशदान 12 प्रतिशत से कम करवा सकते हैं। इस बिल को केन्द्रीय कैबिनेट से पहले ही मन्ज़ूरी मिल चुकी है। वहीं यदि यह बिल संसद में पारित हो जाता है, तो EPFO इस नियम को जल्द नोटिफाई करेगा।

क्या है यह पूरा मामला, आइये आपको विस्तार से बताते हैं। दरअसल, पीएफ के लिए कर्मचारियों द्वारा किये जा रहे अंशदान के लिए सरकार द्वारा नियमों में परिवर्तन किया जा रहा है। अभी जो नियम हैं, उसके अनुसार संगठित क्षेत्र के कर्मचारी और कम्पनी दोनों ही बेसिक वेतन का अपनी-अपनी तरफ़ से 12-12 प्रतिशत कर्मचारी भविष्‍य निधि (EPF) में अंशदान करते हैं। लेकिन नया नियम बनने के बाद, पीएफ अंशदान में कर्मचारी का हिस्सा उसकी मर्ज़ी के मुताबिक़ 9 से 12 प्रतिशत के बीच हो सकता है और यह कर्मचारी की मर्ज़ी पर निर्भर करेगा कि वो इस निर्धारित सीमा के बीच कितनी राशि का अंशदान अपने पीएफ में करना चाहता है। लेकिन पीएफ में कम्पनी की तरफ़ से अंशदान बेसिक सेलरी का 12 प्रतिशत ही रहेगा।

साफ़ ज़ाहिर है कि यह नया नियम लागू होने से कर्मचारी यदि चाहें तो उनकी टेक होम सैलरी तो ज़्यादा होगी, लेकिन उन्हें रिटायरमेण्ट के समय प्रोविडेण्ट फण्ड में कम पैसा मिल पाएगा क्योंकि कर्मचारी की तरफ़ से हर महीने पीएफ में अंशदान कम होने से प्रोविडेण्ट फण्ड में उनका कम पैसा जमा होगा। यानी कि यदि कर्मचारी ने हर महीने अपनी बेसिक सेलरी से पीएफ का कम अंशदान किया, तो उसे टेक होम सैलरी तो ज़्यादा मिलेगी लेकिन उसका प्रोविडेण्ट फण्ड कम होता जाएगा।

अब आप सोच रहे होंगे कि कि मोदी सरकार इस नये बिल के ज़रिये क्या हासिल करना चाहती है, तो इस बारे में अर्थशास्त्रियों की राय है कि ऐसा करने के पीछे मोदी सरकार का उदेश्य है कि यदि लोग कम पीएफ अंशदान करेंगे तो उनकी टेक होम सैलरी ज़्यादा होगी। यदि लोगों की टेक होम सैलरी ज़्यादा होगी, तो इससे लोगों की ख़र्च करने की क्षमता में वृद्धि होगी और जब लोगों की ख़र्च करने की क्षमता में वृद्धि होगी तो इससे बाज़ार में नक़दी बढ़ेगी जिससे उद्योग धंधों में तेज़ी आएगी।
 
हालांकि, पीएफ में कर्मचारी के अंशदान में उसकी मर्जी के नियम पर पिछले पांच साल से चर्चा हो रही है। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्रोविडेंट फण्ड का यह नया नियम चुनिंदा सेक्टर्स पर ही लागू होगा। जानकारी के मुताबिक़, MSME, टेक्सटाइल और स्टार्टअप्स जैसे सेक्टर्स के लिए यह नया नियम लागू किया जा सकता है। अब देखना होगा कि इस बिल के पास होने के बाद कर्मचारियों के बीच पीएफ अंशदान का यह नया नियम कितना लोकप्रिय और स्वीकार्य हो पाता है। वहीं देखना होगा कि यदि यह नियम कर्मचारियों, कम्पनियों और उद्योग-धंधों के लिए लाभकारी साबित होता है, तो क्या इसे चुनिंदा सेक्टर्स के अलावा अन्य सेक्टर्स पर भी लागू किया जाता है कि नहीं?