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क्या आप जानते हैं बीमा पॉलिसी और जीएसटी बिल से जुड़ी यह ‘अहम’ जानकारियां

Wednesday - December 11, 2019 3:46 pm , Category : WTN HINDI
जानकारियों से ना रहें वन्चित
जानकारियों से ना रहें वन्चित

जल्द होने जा रहे हैं बीमा और जीएसटी से जुड़े दो बड़े ‘बदलाव’  
 
DEC 11 (WTN) – 21वीं सदी में व्यक्ति को अपने आसपास हो रहे बदलावों की जानकारी होना काफ़ी ज़रूरी है। क्योंकि यदि आपके पास जानकारी नहीं है, तो हो सकता है कि आप ग़लती कर सकते हैं, आप परेशान हो सकते हैं या फ़िर आप किसी तरह के लाभ से वन्चित हो सकते हैं। आज हम आपको दो ऐसी ही जानकारियां देते हैं, जो आपके काफ़ी काम की हैं। सबसे पहली जानकारी आपकी बीमा पॉलिसी से जुड़ी हुई है, वहीं दूसरी जानकारी जीएसटी बिल और उससे जुड़े ईनाम की है।
 
तो सबसे पहले बात करते हैं बीमा पॉलिसी की। यदि आप बीमाधारक हैं, तो यह जानकारी आपके काफ़ी काम की है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इरडा (IRDAI) ने बीमाधारकों को एक बहुत बढ़िया सुविधा देने की घोषणा की है। इसके मुताबिक़, अब बीमाधारक इंश्योरेंस पॉलिसी ख़रीदते वक़्त या उसका रिन्यूअल कराते वक़्त अपनी मर्जी का थर्ड पार्टी ऐडमिनिस्ट्रेटर (TPA) चुन सकते हैं। इरडा के मुताबिक़, इस नई सुविधा के उप-नियमन के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बीमाधारक अपनी पसंद के उस टीपीए को चुन सकता है, जिसके साथ बीमा कम्पनी का सर्विस लेवल अग्रीमेंट है।
 
इरडा के नये सर्कुलर के अनुसार, हेल्थ इंश्योरेंस बीमा उत्पाद तथा पॉलिसीधारक की भौगोलिक स्थिति के आधार पर बीमा कम्पनी टीपीए की संख्या को सीमित कर सकती है और पॉलिसीधारक को इन्हीं में से अपनी पसंद का कोई एक टीपीए चुनना होगा। नियमानुसार बीमा पॉलिसी ख़रीदते वक़्त या उनका रिन्यूअल कराते वक्त बीमा कम्पनी ग्राहक को टीपीए की सूची सौंपेगी, जिनमें से वह अपनी पसंद का टीपीए चुन सकता है।
 
वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यदि बीमा कम्पनी बीच में से ही किसी टीपीए की सेवा ख़त्म करती है, तो वह अपने पास मौजूद सभी टीपीए की सूची बीमाधारक को उपलब्ध कराएगी, फ़िर उनमें से किसी एक टीपीए को बीमाधारक को चुनना होगा। हालांकि, पॉलिसीधारक को किसी टीपीए की सेवा ख़त्म कराने या कम्पनी को सीधे स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने के लिए आग्रह करने का अधिकार नहीं होगा।

वहीं यदि किसी पॉलिसीधारक ने किसी टीपीए का चयन नहीं किया है, तो बीमा कम्पनी बीमाधारक को अपनी पसंद का टीपीए चुनने की मन्ज़ूरी दे सकती है। साथ ही अगर किसी बीमा कम्पनी के साथ केवल एक ही टीपीए जुड़ा हुआ है, तो पॉलिसीधारक को कोई विकल्प देने की ज़रूरत नहीं है।
 
अब आपके काम की दूसरी जानकारी। लगातार घटते जीएसटी कलेक्शन से निपटने के लिए मोदी सरकार एक नया प्लान बना रही है। जीएसटी कलेक्शन बढ़ाने के लिए सरकार अब ग्राहकों को ख़रीदारी के समय जीएसटी बिल लेने के लिए प्रोत्साहित करने का विचार कर रही है। सरकार अब ख़रीदारी का जीएसटी बिल लेने वालों के लिए एक लॉटरी स्कीम शुरू करने पर विचार कर रही है। जानकारी के अनुसार, लॉटरी स्कीम के तहत लकी ड्रॉ से चुने गए ग्राहकों को सरकार ईनाम देगी।
 
इस लॉटरी स्कीम के अंतर्गत ग्राहकों के लिए दैनिक या मासिक आधार पर लॉटरी खोली जाएगी। इस लॉटरी स्कीम में सिर्फ़ वे ग्राहक ही शामिल हो सकते हैं, जो सामान ख़रीदने के लिए व्यापारी को जीएसटी भुगतान करने के बाद बिल की एक कॉपी लेते हैं। ग्राहक जब जीएसटी आधारित कोई भी बिल हासिल करेगा, लॉटरी स्कीम में शामिल होने के लिए उसे जीएसटी बिल को डेडिकेटेड पोर्टल या ऐप पर पर अपलोड करना होगा। पोर्टल के ऐप पर व्यापारी का फोन नम्बर, बिल नम्बर और जीएसटी नम्बर ऑटो कैप्चर हो जाएंगे और इसके बाद लॉटरी सिस्टम से विजेताओं के नाम चुने जाएंगे।

सरकार का मानना है कि लॉटरी ईनाम के तहत ग्राहकों को जीएसटी का भुगतान करने के लिए लुभाया जाएगा और इससे जीएसटी कलेक्शन बढ़ाने में मदद मिलेगी। लेकिन इस लॉटरी स्कीम में शामिल होने के लिए कुछ शर्तें होंगी। जैसे लॉटरी में भाग लेने के लिए बिलों की न्यूनतम सीमा तय की जाएगी, और इसमें बिजली और पानी के बिल जैसे रेगुलर बिलों को शामिल नहीं किया जाएगा। वैसे अब देखना होगा कि सरकार की इस स्कीम से ग्राहक जीएसटी बिल के प्रति आकर्षित हो पाते हैं कि नहीं?