गोल्ड के मामले में आप तो नहीं करते ‘यह’ ग़लतियां!
Monday - December 16, 2019 11:02 am ,
Category : WTN HINDI
गोल्ड रखने और ख़रीदने के हैं कुछ नियम
यदि किया गोल्ड रखने और ख़रीदी के नियमों का उल्लंघन, तो लग सकता है भारी जुर्माना
DEC 16 (WTN) – सोना यानी गोल्ड से भारतीय लोगों का कितना लगाव है यह बात किसी से छिपी नहीं है। सदियों से गोल्ड भारतीय महिलाओं की पहली पसंद और कमज़ोरी रहा है। गोल्ड के ज़ेवरातों के प्रति दीवानगी भी भारतीय महिलाओं में कम नहीं है। एक जानकारी के मुताबिक़, भारत में सालाना गोल्ड की खपत 849 मिट्रिक टन है जो कि चीन के बाद दुनिया में सबसे ज़्यादा है। दरअसल, गोल्ड की भारत में इतना ज़्यादा डिमाण्ड इसलिए है क्योंकि गोल्ड को मुसीबत के समय आर्थिक सुरक्षा के लिए लोग सबसे ज़्यादा मुफ़ीद समझते हैं, जिससे आकस्मिक आर्थिक ज़रूरतों को गोल्ड के ज़रिये पूरा किया जा सके।
निवेश से लेकर गिफ्ट तक और त्यौहारों में ख़रीददारी से लेकर शादी आदि में गोल्ड की ख़रीदी भारत में बहुत ज़्यादा होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर में सोना यानी गोल्ड रखने के भी कुछ नियम हैं। यदि आपने इन नियमों का उल्लंघन किया, तो आपको इनकम टैक्स डिपार्टमेण्ट का नोटिस आ सकता है और आप पर पेनाल्टी भी लग सकती है। क्या हैं गोल्ड रखने, बेचने और ख़रीदने के नियम आपको बताते हैं।
नियमों के मुताबिक़ घर में गोल्ड रखने की कोई लिमिट नहीं है, कोई भी व्यक्ति घर में कितना भी गोल्ड या उसके बने ज़ेवरात रख सकता है। लेकिन घर में यदि गोल्ड रखा है तो उसकी प्राप्ति का ज़रिया आपको बताना होगा। वहीं यदि गोल्ड ख़रीदा है तो उसकी ख़रीदी का पक्का बिल होना बेहद ज़रूरी है। यदि इनकम टैक्स डिपार्टमेण्ट ने घर पर रखे गोल्ड या उसके ज़ेवरातों की जानकारी मांगी और आप गोल्ड हासिल करने का ज़रिया नहीं बता सकते हैं या फ़िर आपके पास ख़रीदी का पक्का बिल नहीं है, तो आप मुसीबत में फंस सकते हैं। यदि जांच के दौरान आयकर विभाग को लगता है कि किसी व्यक्ति के पास उसकी आर्थिक क्षमता से ज़्यादा गोल्ड है और उसे यह गोल्ड गिफ्ट में नहीं मिला है और ना ही पुश्तैनी है, तो इस गोल्ड को आयकर विभाग ज़ब्त कर सकता है।
वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वार्षिक 50 लाख रुपये से ज़्यादा की आमदनी होने पर घर में रखे गोल्ड की क़ीमत की जानकारी आयकर रिटर्न में देना ज़रूरी है। आयकर रिटर्न भरते समय एसेट्स और लायबिलिटी के विकल्प में गोल्ड की क़ीमत का जिक्र करना ज़रूरी है। इनकम टैक्स डिपार्टमेण्ट ने अपने एक सर्कुलर में बाक़ायदा स्पष्ट किया है कि यदि किसी के घर की छानबीन होती है और गोल्ड पाया जाता है, तो घर में गोल्ड रखने की कुछ सीमाएं हैं। नियमों के मुताबिक़, विवाहित महिलाओं को अपने पास 500 ग्राम गोल्ड रखने की छूट है वहीं अविवाहित महिलाएं अपने साथ 250 ग्राम गोल्ड रख सकती हैं। वहीं पुरुषों के लिए सिर्फ़ 100 ग्राम गोल्ड अपने साथ रखने की छूट है। लेकिन इससे ज़्यादा गोल्ड होने पर गोल्ड की ख़रीदी या फ़िर उसके हासिल करने का ज़रिया बताना अनिवार्य है।
वहीं यदि आप गोल्ड या गोल्ड से बने ज़ेवरात ख़रीदने के तीन साल के अन्दर उसे बेचते हैं, तो सोना बेचने पर होने वाला फ़ायदा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स के अंतर्गत आता है। हालांकि, इसकी अलग से गणना नहीं की जाती है। शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स को आपके सारे स्त्रोतों से हुई आमदनी में जोड़ दिया जाता है। वहीं यदि आप गोल्ड ख़रीदने के तीन साल के बाद उसे बेचते हैं, तो ऐसी स्थिति में आपको लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स चुकाना पड़ता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स में आपको कोई राहत नहीं मिल सकती है, लेकिन लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स में कुछ नियमों के तहत छूट हासिल हो सकती है।
वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 15 जनवरी 2021 से भारत में गोल्ड, गोल्ड के जेवरात और कलाकृतियां बिना BIS हॉल मार्किंग के नहीं बेची जा सकती हैं, यानी कि इस तारीख़ से भारत में हॉल मार्किंग अनिवार्य हो रही है। BIS हॉल मार्किंग अनिवार्य होने के बाद अगर कोई ज्वेलर नियमों की अनदेखी करता है, तो उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना लग सकता है और उसे एक साल की सज़ा हो सकती है। वहीं जुर्माने के तौर पर गोल्ड की क़ीमत का पांच गुना तक चुकाने का प्रावधान भी किया गया है।
DEC 16 (WTN) – सोना यानी गोल्ड से भारतीय लोगों का कितना लगाव है यह बात किसी से छिपी नहीं है। सदियों से गोल्ड भारतीय महिलाओं की पहली पसंद और कमज़ोरी रहा है। गोल्ड के ज़ेवरातों के प्रति दीवानगी भी भारतीय महिलाओं में कम नहीं है। एक जानकारी के मुताबिक़, भारत में सालाना गोल्ड की खपत 849 मिट्रिक टन है जो कि चीन के बाद दुनिया में सबसे ज़्यादा है। दरअसल, गोल्ड की भारत में इतना ज़्यादा डिमाण्ड इसलिए है क्योंकि गोल्ड को मुसीबत के समय आर्थिक सुरक्षा के लिए लोग सबसे ज़्यादा मुफ़ीद समझते हैं, जिससे आकस्मिक आर्थिक ज़रूरतों को गोल्ड के ज़रिये पूरा किया जा सके।
निवेश से लेकर गिफ्ट तक और त्यौहारों में ख़रीददारी से लेकर शादी आदि में गोल्ड की ख़रीदी भारत में बहुत ज़्यादा होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर में सोना यानी गोल्ड रखने के भी कुछ नियम हैं। यदि आपने इन नियमों का उल्लंघन किया, तो आपको इनकम टैक्स डिपार्टमेण्ट का नोटिस आ सकता है और आप पर पेनाल्टी भी लग सकती है। क्या हैं गोल्ड रखने, बेचने और ख़रीदने के नियम आपको बताते हैं।
नियमों के मुताबिक़ घर में गोल्ड रखने की कोई लिमिट नहीं है, कोई भी व्यक्ति घर में कितना भी गोल्ड या उसके बने ज़ेवरात रख सकता है। लेकिन घर में यदि गोल्ड रखा है तो उसकी प्राप्ति का ज़रिया आपको बताना होगा। वहीं यदि गोल्ड ख़रीदा है तो उसकी ख़रीदी का पक्का बिल होना बेहद ज़रूरी है। यदि इनकम टैक्स डिपार्टमेण्ट ने घर पर रखे गोल्ड या उसके ज़ेवरातों की जानकारी मांगी और आप गोल्ड हासिल करने का ज़रिया नहीं बता सकते हैं या फ़िर आपके पास ख़रीदी का पक्का बिल नहीं है, तो आप मुसीबत में फंस सकते हैं। यदि जांच के दौरान आयकर विभाग को लगता है कि किसी व्यक्ति के पास उसकी आर्थिक क्षमता से ज़्यादा गोल्ड है और उसे यह गोल्ड गिफ्ट में नहीं मिला है और ना ही पुश्तैनी है, तो इस गोल्ड को आयकर विभाग ज़ब्त कर सकता है।
वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वार्षिक 50 लाख रुपये से ज़्यादा की आमदनी होने पर घर में रखे गोल्ड की क़ीमत की जानकारी आयकर रिटर्न में देना ज़रूरी है। आयकर रिटर्न भरते समय एसेट्स और लायबिलिटी के विकल्प में गोल्ड की क़ीमत का जिक्र करना ज़रूरी है। इनकम टैक्स डिपार्टमेण्ट ने अपने एक सर्कुलर में बाक़ायदा स्पष्ट किया है कि यदि किसी के घर की छानबीन होती है और गोल्ड पाया जाता है, तो घर में गोल्ड रखने की कुछ सीमाएं हैं। नियमों के मुताबिक़, विवाहित महिलाओं को अपने पास 500 ग्राम गोल्ड रखने की छूट है वहीं अविवाहित महिलाएं अपने साथ 250 ग्राम गोल्ड रख सकती हैं। वहीं पुरुषों के लिए सिर्फ़ 100 ग्राम गोल्ड अपने साथ रखने की छूट है। लेकिन इससे ज़्यादा गोल्ड होने पर गोल्ड की ख़रीदी या फ़िर उसके हासिल करने का ज़रिया बताना अनिवार्य है।
वहीं यदि आप गोल्ड या गोल्ड से बने ज़ेवरात ख़रीदने के तीन साल के अन्दर उसे बेचते हैं, तो सोना बेचने पर होने वाला फ़ायदा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स के अंतर्गत आता है। हालांकि, इसकी अलग से गणना नहीं की जाती है। शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स को आपके सारे स्त्रोतों से हुई आमदनी में जोड़ दिया जाता है। वहीं यदि आप गोल्ड ख़रीदने के तीन साल के बाद उसे बेचते हैं, तो ऐसी स्थिति में आपको लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स चुकाना पड़ता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स में आपको कोई राहत नहीं मिल सकती है, लेकिन लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स में कुछ नियमों के तहत छूट हासिल हो सकती है।
वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 15 जनवरी 2021 से भारत में गोल्ड, गोल्ड के जेवरात और कलाकृतियां बिना BIS हॉल मार्किंग के नहीं बेची जा सकती हैं, यानी कि इस तारीख़ से भारत में हॉल मार्किंग अनिवार्य हो रही है। BIS हॉल मार्किंग अनिवार्य होने के बाद अगर कोई ज्वेलर नियमों की अनदेखी करता है, तो उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना लग सकता है और उसे एक साल की सज़ा हो सकती है। वहीं जुर्माने के तौर पर गोल्ड की क़ीमत का पांच गुना तक चुकाने का प्रावधान भी किया गया है।