प्रॉपर्टी की धोखाधड़ी से बचाने मोदी सरकार ने बनाई ‘ख़ास रणनीति’
Wednesday - December 18, 2019 3:44 pm ,
Category : WTN HINDI
प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज़ होंगे ऑनलाइन
अब प्रॉपर्टी पर कब्ज़े से मिलेगी सुरक्षा, प्रॉपर्टी ख़रीदी में धोखाधड़ी से मिलेगी निजात
DEC 18 (WTN) – प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी कर कालेधन वालों के ख़िलाफ़ और जीएसटी लाकर टैक्स चोरी के ख़िलाफ़ बड़ा क़दम उठाया था। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री मोदी अब प्रॉपर्टी से सम्बन्धित एक बड़ी योजना बनाने जा रहे हैं, जिससे धोखाधड़ी से एक ही प्रॉपर्टी को कई लोगों को बेचना अब आसान नहीं होगा। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, केन्द्र सरकार ने प्रॉपर्टी में धोखाधड़ी रोकने के लिए बेहद खास रणनीति तैयार की है। इस ख़ास रणनीति के तहत प्रॉपर्टी के रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज़ ऑनलाइन होंगे।
दरअसल, मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार, प्रॉपर्टी की धोखाधड़ी रोकने के लिए मोदी सरकार अब तीस साल तक पुरानी प्रॉपर्टी के रजिस्ट्रेशन डिजिटल करेगी, जिसके बाद रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज़ ऑनलाइन देखे जा सकेंगे। इसमें सभी तरह के लैण्ड रिकॉर्ड के लिए बाक़ायदा एक पोर्टल बनाया जाएगा। इस ऑनलाइन पोर्टल पर कोई भी जाकर देख सकेगा कि किस प्रॉपर्टी का मालिक कौन है, और इस प्रॉपर्टी को किसने किसको और कब बेचा है।
जैसा कि आप जानते हैं कि भारत में प्रॉपर्टी विवाद सबसे ज़्यादा होते हैं। प्रॉपर्टी विवाद के काऱण हत्याएं तक हो जाना भारत में सामान्य बात है। वहीं प्रॉपर्टी विवाद के लाखों केस कोर्ट में चल रहे हैं, ऐसे में अदलतों का क़ीमती समय प्रॉपर्टी विवादों को निपटाने में ही चला जाता है। वहीं कई बार देखा गया है कि धोखाधड़ी करने वाले एक ही प्रॉपर्टी को कई लोगों को बेच देते हैं,जिसके कारण विवाद की स्थिति बन जाती है।
प्रॉपर्टी विवाद के बढ़ते मामलों के देखते हुए और इनके निपटारे के लिए मोदी सरकार एक नया सिस्टम बनाने जा रही है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, प्रॉपर्टी विवाद निपटारे के लिए इण्डिपेन्डेण्ट ग्रिवांस रिड्रेसल सिस्टम (Independent Grievance Redressal System) बनाया जायेगा। इस सिस्टम के तहत एक तय समय सीमा में प्रॉपर्टी सम्बन्धित विवादों का निपटारा किया जाएगा।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 2008 में लैण्ड रिकॉर्ड मॉर्डनाइजेशन प्रोग्राम (Land Record Modernization Program (DILRMP) शुरू किया गया था, जिसके तहत राज्यों ने नई ज़मीन की रजिस्ट्री ऑनलाइन शुरू की है। जानकारी के अनुसार, अधिकांश राज्यों ने इसके तहत काम करना शुरू कर दिया है। कहा जा रहा है कि प्रॉपर्टी मामलों पर भी मोदी सरकार का फोकस ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस की तरह ही होगा।
इतना ही नहीं, कहा जा रहा है कि सरकार प्रॉपर्टी ओनरशिप के लिए एक नया क़ानून लाने की तैयारी में है। इस क़ानून के तहत अपनी फिक्स्ड एसेट्स के मालिकाना हक़ के लिए उसको आधार नम्बर से लिंक कराना होगा। सरकार का दावा है कि इससे ज़मीन-मकान की ख़रीददारी में धोखाधड़ी रोकने में मदद मिलेगी और साथ ही इससे बेनामी सम्पत्ति का भी पता चल सकेगा।
सरकार का कहना है कि प्रॉपर्टी को आधार से लिंक कराना अनिवार्य नहीं बल्कि स्वैच्छिक होगा। वहीं सरकार का दावा है कि जो भी अपनी प्रॉपर्टी को आधार से लिंक कराएगा, उसकी सम्पत्ति पर यदि कोई कब्ज़ा करता है तो उसे कब्ज़ा मुक्त कराने की ज़िम्मेदारी सरकार की होगी या फ़िर सरकार उसे मुआवज़ा देगी। वहीं जिसने भी अपनी प्रॉपर्टी को आधार से लिंक नहीं कराया है तो उसकी प्रॉपर्टी की ज़िम्मेदारी सरकार की नहीं होगी। यानी यदि लोग चाहते हैं कि सरकार उनकी प्रॉपर्टी की गारण्टी ले तो उन्हें अपनी प्रॉपर्टी को आधार से लिंक कराना होगा।
DEC 18 (WTN) – प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी कर कालेधन वालों के ख़िलाफ़ और जीएसटी लाकर टैक्स चोरी के ख़िलाफ़ बड़ा क़दम उठाया था। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री मोदी अब प्रॉपर्टी से सम्बन्धित एक बड़ी योजना बनाने जा रहे हैं, जिससे धोखाधड़ी से एक ही प्रॉपर्टी को कई लोगों को बेचना अब आसान नहीं होगा। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, केन्द्र सरकार ने प्रॉपर्टी में धोखाधड़ी रोकने के लिए बेहद खास रणनीति तैयार की है। इस ख़ास रणनीति के तहत प्रॉपर्टी के रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज़ ऑनलाइन होंगे।
दरअसल, मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार, प्रॉपर्टी की धोखाधड़ी रोकने के लिए मोदी सरकार अब तीस साल तक पुरानी प्रॉपर्टी के रजिस्ट्रेशन डिजिटल करेगी, जिसके बाद रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज़ ऑनलाइन देखे जा सकेंगे। इसमें सभी तरह के लैण्ड रिकॉर्ड के लिए बाक़ायदा एक पोर्टल बनाया जाएगा। इस ऑनलाइन पोर्टल पर कोई भी जाकर देख सकेगा कि किस प्रॉपर्टी का मालिक कौन है, और इस प्रॉपर्टी को किसने किसको और कब बेचा है।
जैसा कि आप जानते हैं कि भारत में प्रॉपर्टी विवाद सबसे ज़्यादा होते हैं। प्रॉपर्टी विवाद के काऱण हत्याएं तक हो जाना भारत में सामान्य बात है। वहीं प्रॉपर्टी विवाद के लाखों केस कोर्ट में चल रहे हैं, ऐसे में अदलतों का क़ीमती समय प्रॉपर्टी विवादों को निपटाने में ही चला जाता है। वहीं कई बार देखा गया है कि धोखाधड़ी करने वाले एक ही प्रॉपर्टी को कई लोगों को बेच देते हैं,जिसके कारण विवाद की स्थिति बन जाती है।
प्रॉपर्टी विवाद के बढ़ते मामलों के देखते हुए और इनके निपटारे के लिए मोदी सरकार एक नया सिस्टम बनाने जा रही है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, प्रॉपर्टी विवाद निपटारे के लिए इण्डिपेन्डेण्ट ग्रिवांस रिड्रेसल सिस्टम (Independent Grievance Redressal System) बनाया जायेगा। इस सिस्टम के तहत एक तय समय सीमा में प्रॉपर्टी सम्बन्धित विवादों का निपटारा किया जाएगा।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 2008 में लैण्ड रिकॉर्ड मॉर्डनाइजेशन प्रोग्राम (Land Record Modernization Program (DILRMP) शुरू किया गया था, जिसके तहत राज्यों ने नई ज़मीन की रजिस्ट्री ऑनलाइन शुरू की है। जानकारी के अनुसार, अधिकांश राज्यों ने इसके तहत काम करना शुरू कर दिया है। कहा जा रहा है कि प्रॉपर्टी मामलों पर भी मोदी सरकार का फोकस ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नेस की तरह ही होगा।
इतना ही नहीं, कहा जा रहा है कि सरकार प्रॉपर्टी ओनरशिप के लिए एक नया क़ानून लाने की तैयारी में है। इस क़ानून के तहत अपनी फिक्स्ड एसेट्स के मालिकाना हक़ के लिए उसको आधार नम्बर से लिंक कराना होगा। सरकार का दावा है कि इससे ज़मीन-मकान की ख़रीददारी में धोखाधड़ी रोकने में मदद मिलेगी और साथ ही इससे बेनामी सम्पत्ति का भी पता चल सकेगा।
सरकार का कहना है कि प्रॉपर्टी को आधार से लिंक कराना अनिवार्य नहीं बल्कि स्वैच्छिक होगा। वहीं सरकार का दावा है कि जो भी अपनी प्रॉपर्टी को आधार से लिंक कराएगा, उसकी सम्पत्ति पर यदि कोई कब्ज़ा करता है तो उसे कब्ज़ा मुक्त कराने की ज़िम्मेदारी सरकार की होगी या फ़िर सरकार उसे मुआवज़ा देगी। वहीं जिसने भी अपनी प्रॉपर्टी को आधार से लिंक नहीं कराया है तो उसकी प्रॉपर्टी की ज़िम्मेदारी सरकार की नहीं होगी। यानी यदि लोग चाहते हैं कि सरकार उनकी प्रॉपर्टी की गारण्टी ले तो उन्हें अपनी प्रॉपर्टी को आधार से लिंक कराना होगा।