इमरान ख़ान के ‘इस क़दम’ से फ़िर बढ़ सकता है भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध का तनाव
Thursday - December 19, 2019 1:03 pm ,
Category : WTN HINDI
पीओके को पाकिस्तान में मिलाने की फिराक़ में इमरान ख़ान
पीओके-गिलगिट-बाल्टिस्तान पर पाकिस्तान की ‘तिरछी नज़र’
DEC 19 (WTN) – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत की राजनीति के ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के भी एक बड़े खिलाड़ी हैं। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में जिस तरह से नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा नीत एनडीए ने जीत हासिल की है, उससे साफ़ ज़ाहिर होता है कि मोदी इस समय भारतीय राजनीति के सबसे बड़े नेता हैं। वहीं सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक के साथ जम्मू-कश्मीर राज्य से अनुच्छेद 370 हटाकर और इस मामले में पाकिस्तान को पूरी दुनिया में बेनकाब कर मोदी ने साबित कर दिया है कि कूटनीति के मामले में भी उनके आगे पाकिस्तान कुछ नहीं है। कश्मीर मामले में प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी टीम के साथ मिलकर पाकिस्तान को दुनिया के लगभग हर मंच पर अकेला कर दिया है, जो बताता है कि मोदी की कूटनीति के सामने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान अभी बौने हैं।
प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीतिक चालों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मात खाने वाला पाकिस्तान अब एक नई चाल चलने की तैयारी में है। जम्मू-कश्मीर राज्य से मोदी सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 हटाये जाने से परेशान और तिलमिलाये पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पीओके यानी पाक अधिकृत कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाना चाहते हैं। इमरान ख़ान की इस चाल का दावा यूनाइटेड कश्मीर पीपल्स नेशनल पार्टी के नसीर अज़ीज़ ख़ान ने किया है।
दरअसल, नसीर अज़ीज़ ख़ान का दावा है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने पीओके को पाकिस्तान का हिस्सा बनाने के लिए इस सम्बन्ध में जो पहला क़दम उठाया है, वह यह है कि उन्होंने 'आजाद जम्मू एण्ड कश्मीर मैनेजमेण्ट ग्रुप' का नाम बदलकर 'जम्मू एण्ड कश्मीर एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस' कर दिया है। ख़ान के मुताबिक़ इसका नोटिफिकेशन इसी महीने की 11 तारीख़ को जारी हुआ है। वहीं इमरान ख़ान के इस फ़ैसले से कुछ दिनों पहले ही पीओके के प्रधानमंत्री फारूक़ हैदर ख़ान ने आशंका ज़ाहिर करते हुए कहा था कि वे पीओके के आख़िरी प्रधानमंत्री हो सकते हैं
पीओके को पाकिस्तान में मिलाने की इमरान ख़ान की साजिश के बारे में दावा करते हुए नसीर अज़ीज़ ख़ान का कहना है कि प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने पीओके का दर्जा बदलने के लिए ज़रूरी क़ानूनी आधार तैयार करने के सम्बन्ध में सम्बन्धित विभागों को निर्देश दे दिया है। इस बारे में नसीर अज़ीज का कहना है कि इमरान ख़ान, पीओके-गिलगिट-बाल्टिस्तान के विलय की तैयारी कर रहे हैं और इसके लिए चुपचाप तरीक़े से संविधान संशोधन की तैयारी भी चल रही है। इतना ही नहीं यह भी हो सकता है कि पूरे गिलगिट-बाल्टिस्तान क्षेत्र को पाकिस्तान में विलय करने का प्रस्ताव लाया जा सकता है।
नसीर अज़ीज़ ख़ान के मुताबिक़, पीओके का विलय अवैध रूप से पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में किया जा सकता है। लेकिन पीओके के लोग इमरान ख़ान के इस सम्भावित क़दम पर आपत्ति जता रहे हैं। वहीं पाकिस्तान की सरकार वहां की सेना के साथ मिलकर पीओके-गिलगिट-बाल्टिस्तान, इन तीनों जगहों पर दमनकारी क़दम उठाती नज़र आ रही है। लेकिन इमरान ख़ान के इस सम्भावित क़दम का विरोध होना शुरू हो गया है। आशंका ज़ाहिर की जा रही है कि मानवाधिकार हनन के लिए कुख्यात पाकिस्तान की सेना और पाकिस्तानी सरकार पीओके-गिलगिट-बाल्टिस्तान से उठ रहीं विरोध की आवाज़ों को दबाने के लिए मानवाधिकारों का हनन कर सकती हैं।
इसी कड़ी में पीओके-गिलगिट-बाल्टिस्तान में स्वायत्तता मांगने वाले 100 से ज़्यादा लोगों को देशद्रोह के आरोप में हिरासत में लिया जा चुका है। यानी स्पष्ट है कि पाकिस्तान वहां असहमति की आवाज़ को दबाने में लग गया है। कहा जा रहा है कि मोदी सरकार द्वारा भारत के हिस्से वाले जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म करने के बाद तिलमिलाये इमरान ख़ान यह क़दम उठा रहे हैं। दरअसल, कई बार मोदी सरकार पीओके वापस लेने की चेतावनी भी दे चुकी है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान, पीओके को पाकिस्तान का पांचवां प्रांत घोषित कर सकते हैं।
ख़ैर अब देखना होगा कि नसीर अज़ीज़ ख़ान और पीओके के प्रधानमंत्री फारूक़ हैदर ख़ान के दावों में कितनी सच्चाई है। यदि इन दोनों के दावों में सच्चाई है तो इमरान ख़ान के इस क़दम का भारत द्वारा कड़ा विरोध किया जाएगा। हो सकता है कि इस मुद्दे पर भारत औऱ पाकिस्तान दोनों ही देशों के बीच युद्ध के हालात निर्मित हो जाएं। लेकिन जो भी हो, यदि इमरान ख़ान पीओके-गिलगिट-बाल्टिस्तान की प्रशासनिक स्थिति में किसी भी तरह का बदलाव करते हैं तो इसका जमकर विरोधी मोदी सरकार द्वारा किया जाएगा और इस कारण से दोनों देशों के बीच एक बार फ़िर से तनाव बढ़ सकता है।
DEC 19 (WTN) – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत की राजनीति के ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के भी एक बड़े खिलाड़ी हैं। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में जिस तरह से नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा नीत एनडीए ने जीत हासिल की है, उससे साफ़ ज़ाहिर होता है कि मोदी इस समय भारतीय राजनीति के सबसे बड़े नेता हैं। वहीं सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक के साथ जम्मू-कश्मीर राज्य से अनुच्छेद 370 हटाकर और इस मामले में पाकिस्तान को पूरी दुनिया में बेनकाब कर मोदी ने साबित कर दिया है कि कूटनीति के मामले में भी उनके आगे पाकिस्तान कुछ नहीं है। कश्मीर मामले में प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी टीम के साथ मिलकर पाकिस्तान को दुनिया के लगभग हर मंच पर अकेला कर दिया है, जो बताता है कि मोदी की कूटनीति के सामने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान अभी बौने हैं।
प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीतिक चालों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मात खाने वाला पाकिस्तान अब एक नई चाल चलने की तैयारी में है। जम्मू-कश्मीर राज्य से मोदी सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 हटाये जाने से परेशान और तिलमिलाये पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पीओके यानी पाक अधिकृत कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाना चाहते हैं। इमरान ख़ान की इस चाल का दावा यूनाइटेड कश्मीर पीपल्स नेशनल पार्टी के नसीर अज़ीज़ ख़ान ने किया है।
दरअसल, नसीर अज़ीज़ ख़ान का दावा है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने पीओके को पाकिस्तान का हिस्सा बनाने के लिए इस सम्बन्ध में जो पहला क़दम उठाया है, वह यह है कि उन्होंने 'आजाद जम्मू एण्ड कश्मीर मैनेजमेण्ट ग्रुप' का नाम बदलकर 'जम्मू एण्ड कश्मीर एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस' कर दिया है। ख़ान के मुताबिक़ इसका नोटिफिकेशन इसी महीने की 11 तारीख़ को जारी हुआ है। वहीं इमरान ख़ान के इस फ़ैसले से कुछ दिनों पहले ही पीओके के प्रधानमंत्री फारूक़ हैदर ख़ान ने आशंका ज़ाहिर करते हुए कहा था कि वे पीओके के आख़िरी प्रधानमंत्री हो सकते हैं
पीओके को पाकिस्तान में मिलाने की इमरान ख़ान की साजिश के बारे में दावा करते हुए नसीर अज़ीज़ ख़ान का कहना है कि प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने पीओके का दर्जा बदलने के लिए ज़रूरी क़ानूनी आधार तैयार करने के सम्बन्ध में सम्बन्धित विभागों को निर्देश दे दिया है। इस बारे में नसीर अज़ीज का कहना है कि इमरान ख़ान, पीओके-गिलगिट-बाल्टिस्तान के विलय की तैयारी कर रहे हैं और इसके लिए चुपचाप तरीक़े से संविधान संशोधन की तैयारी भी चल रही है। इतना ही नहीं यह भी हो सकता है कि पूरे गिलगिट-बाल्टिस्तान क्षेत्र को पाकिस्तान में विलय करने का प्रस्ताव लाया जा सकता है।
नसीर अज़ीज़ ख़ान के मुताबिक़, पीओके का विलय अवैध रूप से पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में किया जा सकता है। लेकिन पीओके के लोग इमरान ख़ान के इस सम्भावित क़दम पर आपत्ति जता रहे हैं। वहीं पाकिस्तान की सरकार वहां की सेना के साथ मिलकर पीओके-गिलगिट-बाल्टिस्तान, इन तीनों जगहों पर दमनकारी क़दम उठाती नज़र आ रही है। लेकिन इमरान ख़ान के इस सम्भावित क़दम का विरोध होना शुरू हो गया है। आशंका ज़ाहिर की जा रही है कि मानवाधिकार हनन के लिए कुख्यात पाकिस्तान की सेना और पाकिस्तानी सरकार पीओके-गिलगिट-बाल्टिस्तान से उठ रहीं विरोध की आवाज़ों को दबाने के लिए मानवाधिकारों का हनन कर सकती हैं।
इसी कड़ी में पीओके-गिलगिट-बाल्टिस्तान में स्वायत्तता मांगने वाले 100 से ज़्यादा लोगों को देशद्रोह के आरोप में हिरासत में लिया जा चुका है। यानी स्पष्ट है कि पाकिस्तान वहां असहमति की आवाज़ को दबाने में लग गया है। कहा जा रहा है कि मोदी सरकार द्वारा भारत के हिस्से वाले जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म करने के बाद तिलमिलाये इमरान ख़ान यह क़दम उठा रहे हैं। दरअसल, कई बार मोदी सरकार पीओके वापस लेने की चेतावनी भी दे चुकी है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान, पीओके को पाकिस्तान का पांचवां प्रांत घोषित कर सकते हैं।
ख़ैर अब देखना होगा कि नसीर अज़ीज़ ख़ान और पीओके के प्रधानमंत्री फारूक़ हैदर ख़ान के दावों में कितनी सच्चाई है। यदि इन दोनों के दावों में सच्चाई है तो इमरान ख़ान के इस क़दम का भारत द्वारा कड़ा विरोध किया जाएगा। हो सकता है कि इस मुद्दे पर भारत औऱ पाकिस्तान दोनों ही देशों के बीच युद्ध के हालात निर्मित हो जाएं। लेकिन जो भी हो, यदि इमरान ख़ान पीओके-गिलगिट-बाल्टिस्तान की प्रशासनिक स्थिति में किसी भी तरह का बदलाव करते हैं तो इसका जमकर विरोधी मोदी सरकार द्वारा किया जाएगा और इस कारण से दोनों देशों के बीच एक बार फ़िर से तनाव बढ़ सकता है।