...तो डोनाल्ड ट्रम्प को देना पड़ सकता है इस्तीफ़ा
Friday - December 20, 2019 10:57 am ,
Category : WTN HINDI
हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव में पास हुआ ट्रम्प के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव
ख़तरे में है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की कुर्सी, सीनेट पर टिकी निकाहें
DEC 20 (WTN) – दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका की राजनीति में इन दिनों उबाल आया हुआ है। अपने गुस्से और बचकाना स्वभाव के लिए पहचाने जाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की राष्ट्रपति की कुर्सी ख़तरे में हैं, क्योंकि उन पर महाभियोग की कार्रवाई चल रही है। इस सबके बीच सबसे बड़ा सवाल है कि क्या डोनाल्ड ट्रम्प अपने पद से इस्तीफ़ा देंगे? आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव में डोनाल्ड ट्रम्प के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव पास हो चुका है। वैसे हाऊस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव से महाभियोग प्रस्ताव को तो पास होना ही था, क्योंकि यहां पर ट्रम्प की विरोधी ड्रमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत है।
सबसे पहले तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्रम्प के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव आख़िर लाया क्यों गया है? दरअसल, ट्रम्प पर आरोप हैं कि ट्रम्प ने सत्ता का दुरुपयोग किया और कांग्रेस यानी अमेरिकी संसद को काम करने से रोका। अब आपको बता दें कि डोनाल्ड ट्रम्प के ख़िलाफ़ हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव में महाभियोग प्रस्ताव पास होने के लिए कम से कम 216 वोटों की ज़रूरत थी, लेकिन अमेरिकी संसद के निचले सदन में ट्रम्प की विरोधी पार्टी डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 233 सदस्य हैं इसलिए ट्रम्प के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव यहां पर पास हो गया। स्वाभाविक है कि हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में रिपब्लिकन पार्टी के कम सदस्य होने के कारण ट्रम्प को यहां पर हार का सामना करना पड़ा है और उनके ख़िलाफ़ यहां पर महाभियोग प्रस्ताव पास हो गया। अमेरिका समेत पूरी दुनिया में इस समय यही चर्चा है कि क्या डोनाल्ड ट्रम्प दबाव में आकर या फ़िर नैतिकता के आधार पर अपना इस्तीफ़ा देंगे?
अमेरिकी राजनीति के जानकारों का मुताबिक़, इस समय अमेरिका में राजनीतिक परिस्थिति इतनी विपरीत नहीं है कि डोनाल्ड ट्रम्प को अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव ने ट्रम्प के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव इसलिए पास कर दिया है, क्योंकि अमेरिकी संसद के उच्च सदन सीनेट में ट्रम्प के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव पेश नहीं किया जा सकता। दरअसल, अगर सीनेट में महाभियोग प्रस्ताव चलाने का फ़ैसला लिया भी जाता है, तो इसके लिए सीनेट के दो तिहाई सदस्यों की मंजूरी ज़रूरी होगी। लेकिन सीनेट में ऐसा होना आसान नहीं है, क्योंकि सीनेट में डोनाल्ड ट्रम्प की पार्टी रिपब्लिकन को बहुमत हासिल है।
अमेरिकी संसद के उच्च सदन सीनेट में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव तभी मुमकिन है, जब डोनाल्ड ट्रम्प की पार्टी रिपब्लिकन के सदस्य भी इसके पक्ष में हों। जानकारी के लिए बता दें कि सीनेट के 45 डेमोक्रेट्स और 2 निर्दलियों सदस्यों के साथ ही रिपब्लिकन पार्टी के 53 सदस्यों में कम से कम 20 सदस्यों को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ वोट करना होगा जिसके बाद ही सीनेट में राष्ट्रपति ट्रम्प के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव पारित हो सकता है। लेकिन यह इतना आसान नहीं है, क्योंकि ख़ुद डेमोक्रेट्स में ही आपस में एकता नहीं है। दरअसल, पिछले दिनों डेमोक्रेटिक पार्टी के कुछ सांसद पार्टी लाइन के ख़िलाफ़ जाकर कुछ मुद्दों पर डोनाल्ड ट्रम्प का समर्थन कर चुके हैं।
अब आपके मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि यदि सीनेट में ट्रम्प के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव लाया जाता है तो इसकी प्रक्रिया क्या होगा? आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सीनेट अगर ट्रम्प के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव लाने की इजाज़त दे भी देता है तो इसके ट्रायल को लेकर नियम क़ानून बनाने होंगे। दरअसल, अमेरिकी संविधान राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव चलाने की इजाज़त देता है लेकिन इसकी प्रक्रिया को लेकर कोई स्पष्ट नियम और निर्देश अमेरिकी संविधान में नहीं हैं।
ट्रम्प के ख़िलाफ़ यदि सीनेट में महाभियोग प्रस्ताव लाया जाता है तो सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या ट्रम्प के ख़िलाफ़ गवाह पेश किये जाएंगे? वहीं ट्रम्प के ख़िलाफ़ वो कौन से सबूत पेश किये जाएंगे, जो कि सदन में मान्य होंगे। जानकारों का मानना है कि इसके लिए सीनेट में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं के बीच बातचीत के आधार पर फ़ैसला लेना होगा। यह सब प्रक्रिया पूरी होने के बाद ट्रायल की तारीख़ तय होगी और जो कि शायद जनवरी के महीने की हो सकती है।
ट्रायल की तारीख़ एक बार तय हो जाने के बाद अमेरिका के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जॉन जी रॉबर्ट्स एक जूनियर प्रीसाइडिंग ऑफिसर की भूमिका में ट्रायल की निगरानी करेंगे। मुख्य न्यायाधीश यह देखेंगे कि बिना पक्षपात के सीनेटर इस सम्बन्ध में शपथ लें। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस दौरान सीनेटर सिर्फ़ लिखित में ही कोई प्रश्न पूछ सकते हैं और इस प्रश्न को मुख्य न्यायाधीश ही पढ़कर सुनाएंगे। अमेरिका में राष्ट्रपति पर चलने वाली महाभियोग की प्रक्रिया में अमेरिका के मुख्य न्यायाधीश की बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह भूमिका इतनी महत्वपूर्ण होती है कि सीनेट और मुख्य न्यायाधीश के बीच मतभेद की स्थिति में मुख्य न्यायाधीश की ही बात सुनी जाती है।
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद अभियोजन पक्ष की भूमिका निभाएंगे। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपनी क़ानूनी टीम की मदद भी ले सकते हैं। इतना ही नहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति के निवास स्थान व्हाइट हाउस के वकील भी ट्रम्प के पक्ष में शामिल हो सकते हैं। महाभियोग की प्रक्रिया का सीनेट में ट्रायल हफ्ते के छह दिनों तक चलेगा और इन दिनों में सीनेट में कोई अन्य काम नहीं होगा।
महाभियोग की प्रक्रिया में सीनेट में ट्रायल और वोटिंग दोनों पारदर्शी तरीक़े से होंगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्रम्प के ख़िलाफ़ सीनेट में महाभियोग प्रस्ताव पारित होने के लिए उन्हें कम से कम दो में से एक मामले में दोषी साबित करना ही पड़ेगा। यदि दो में से किसी एक मामले में भी ट्रम्प के ख़िलाफ़ दोष साबित हो जाता है, तो ट्रम्प को अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ेगा। अब देखना होगा कि डोनाल्ड ट्रम्प पर चल रहे महाभियोग पर क्या कुछ घटनाक्रम सीनेट में घटित होता है, क्योंकि सीनेट की कार्यवाही पर ही पूरा मामला टिका हुआ है।
DEC 20 (WTN) – दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका की राजनीति में इन दिनों उबाल आया हुआ है। अपने गुस्से और बचकाना स्वभाव के लिए पहचाने जाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की राष्ट्रपति की कुर्सी ख़तरे में हैं, क्योंकि उन पर महाभियोग की कार्रवाई चल रही है। इस सबके बीच सबसे बड़ा सवाल है कि क्या डोनाल्ड ट्रम्प अपने पद से इस्तीफ़ा देंगे? आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव में डोनाल्ड ट्रम्प के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव पास हो चुका है। वैसे हाऊस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव से महाभियोग प्रस्ताव को तो पास होना ही था, क्योंकि यहां पर ट्रम्प की विरोधी ड्रमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत है।
सबसे पहले तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्रम्प के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव आख़िर लाया क्यों गया है? दरअसल, ट्रम्प पर आरोप हैं कि ट्रम्प ने सत्ता का दुरुपयोग किया और कांग्रेस यानी अमेरिकी संसद को काम करने से रोका। अब आपको बता दें कि डोनाल्ड ट्रम्प के ख़िलाफ़ हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव में महाभियोग प्रस्ताव पास होने के लिए कम से कम 216 वोटों की ज़रूरत थी, लेकिन अमेरिकी संसद के निचले सदन में ट्रम्प की विरोधी पार्टी डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 233 सदस्य हैं इसलिए ट्रम्प के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव यहां पर पास हो गया। स्वाभाविक है कि हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में रिपब्लिकन पार्टी के कम सदस्य होने के कारण ट्रम्प को यहां पर हार का सामना करना पड़ा है और उनके ख़िलाफ़ यहां पर महाभियोग प्रस्ताव पास हो गया। अमेरिका समेत पूरी दुनिया में इस समय यही चर्चा है कि क्या डोनाल्ड ट्रम्प दबाव में आकर या फ़िर नैतिकता के आधार पर अपना इस्तीफ़ा देंगे?
अमेरिकी राजनीति के जानकारों का मुताबिक़, इस समय अमेरिका में राजनीतिक परिस्थिति इतनी विपरीत नहीं है कि डोनाल्ड ट्रम्प को अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव ने ट्रम्प के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव इसलिए पास कर दिया है, क्योंकि अमेरिकी संसद के उच्च सदन सीनेट में ट्रम्प के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव पेश नहीं किया जा सकता। दरअसल, अगर सीनेट में महाभियोग प्रस्ताव चलाने का फ़ैसला लिया भी जाता है, तो इसके लिए सीनेट के दो तिहाई सदस्यों की मंजूरी ज़रूरी होगी। लेकिन सीनेट में ऐसा होना आसान नहीं है, क्योंकि सीनेट में डोनाल्ड ट्रम्प की पार्टी रिपब्लिकन को बहुमत हासिल है।
अमेरिकी संसद के उच्च सदन सीनेट में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव तभी मुमकिन है, जब डोनाल्ड ट्रम्प की पार्टी रिपब्लिकन के सदस्य भी इसके पक्ष में हों। जानकारी के लिए बता दें कि सीनेट के 45 डेमोक्रेट्स और 2 निर्दलियों सदस्यों के साथ ही रिपब्लिकन पार्टी के 53 सदस्यों में कम से कम 20 सदस्यों को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ वोट करना होगा जिसके बाद ही सीनेट में राष्ट्रपति ट्रम्प के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव पारित हो सकता है। लेकिन यह इतना आसान नहीं है, क्योंकि ख़ुद डेमोक्रेट्स में ही आपस में एकता नहीं है। दरअसल, पिछले दिनों डेमोक्रेटिक पार्टी के कुछ सांसद पार्टी लाइन के ख़िलाफ़ जाकर कुछ मुद्दों पर डोनाल्ड ट्रम्प का समर्थन कर चुके हैं।
अब आपके मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि यदि सीनेट में ट्रम्प के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव लाया जाता है तो इसकी प्रक्रिया क्या होगा? आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सीनेट अगर ट्रम्प के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव लाने की इजाज़त दे भी देता है तो इसके ट्रायल को लेकर नियम क़ानून बनाने होंगे। दरअसल, अमेरिकी संविधान राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव चलाने की इजाज़त देता है लेकिन इसकी प्रक्रिया को लेकर कोई स्पष्ट नियम और निर्देश अमेरिकी संविधान में नहीं हैं।
ट्रम्प के ख़िलाफ़ यदि सीनेट में महाभियोग प्रस्ताव लाया जाता है तो सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या ट्रम्प के ख़िलाफ़ गवाह पेश किये जाएंगे? वहीं ट्रम्प के ख़िलाफ़ वो कौन से सबूत पेश किये जाएंगे, जो कि सदन में मान्य होंगे। जानकारों का मानना है कि इसके लिए सीनेट में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं के बीच बातचीत के आधार पर फ़ैसला लेना होगा। यह सब प्रक्रिया पूरी होने के बाद ट्रायल की तारीख़ तय होगी और जो कि शायद जनवरी के महीने की हो सकती है।
ट्रायल की तारीख़ एक बार तय हो जाने के बाद अमेरिका के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जॉन जी रॉबर्ट्स एक जूनियर प्रीसाइडिंग ऑफिसर की भूमिका में ट्रायल की निगरानी करेंगे। मुख्य न्यायाधीश यह देखेंगे कि बिना पक्षपात के सीनेटर इस सम्बन्ध में शपथ लें। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस दौरान सीनेटर सिर्फ़ लिखित में ही कोई प्रश्न पूछ सकते हैं और इस प्रश्न को मुख्य न्यायाधीश ही पढ़कर सुनाएंगे। अमेरिका में राष्ट्रपति पर चलने वाली महाभियोग की प्रक्रिया में अमेरिका के मुख्य न्यायाधीश की बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह भूमिका इतनी महत्वपूर्ण होती है कि सीनेट और मुख्य न्यायाधीश के बीच मतभेद की स्थिति में मुख्य न्यायाधीश की ही बात सुनी जाती है।
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद अभियोजन पक्ष की भूमिका निभाएंगे। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपनी क़ानूनी टीम की मदद भी ले सकते हैं। इतना ही नहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति के निवास स्थान व्हाइट हाउस के वकील भी ट्रम्प के पक्ष में शामिल हो सकते हैं। महाभियोग की प्रक्रिया का सीनेट में ट्रायल हफ्ते के छह दिनों तक चलेगा और इन दिनों में सीनेट में कोई अन्य काम नहीं होगा।
महाभियोग की प्रक्रिया में सीनेट में ट्रायल और वोटिंग दोनों पारदर्शी तरीक़े से होंगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्रम्प के ख़िलाफ़ सीनेट में महाभियोग प्रस्ताव पारित होने के लिए उन्हें कम से कम दो में से एक मामले में दोषी साबित करना ही पड़ेगा। यदि दो में से किसी एक मामले में भी ट्रम्प के ख़िलाफ़ दोष साबित हो जाता है, तो ट्रम्प को अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ेगा। अब देखना होगा कि डोनाल्ड ट्रम्प पर चल रहे महाभियोग पर क्या कुछ घटनाक्रम सीनेट में घटित होता है, क्योंकि सीनेट की कार्यवाही पर ही पूरा मामला टिका हुआ है।