जानिए आख़िर क्यों बदले जा रहे हैं पुराने डेबिट-क्रेडिट कार्ड?
Friday - December 20, 2019 3:38 pm ,
Category : WTN HINDI
31 दिसम्बर के बाद ब्लॉक हो जाएंगे मैग्नेटिक स्ट्राइप वाले डेबिट-क्रेडिट कार्ड्स
बैंक अकाउण्ट की सुरक्षा के लिए जल्द बदलें अपने पुराने डेबिट-क्रेडिट कार्ड्स
DEC 20 (WTN) – आपका किसी ना किसी बैंक में अकाउण्ट तो होगा ही और यदि बैंक में अकाउण्ट है तो बैंक का डेबिट या क्रेडिट कार्ड भी आपके पास होगा ही। लेकिन यदि आपके पास पुराना डेबिट या क्रेडिट कार्ड है तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यदि आपने 31 दिसम्बर 2019 तक अपने मैग्नेटिक स्ट्राइप वाले पुराने डेबिट या क्रेडिट कार्ड को नहीं बदलाया तो आपका कार्ड ब्लॉक हो जाएगा। दरअसल, आरबीआई यानी भारतीय रिज़र्व बैंक के आदेशानुसार मैग्नेटिक स्ट्राइप वाले डेबिट और क्रेडिट कार्ड को बैंक बंद करने जा रहे हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस समय देश में दो तरह के डेबिट-क्रेडिट कार्ड मौजूद हैं। पहली तरह के कार्ड मैग्नेटिक स्ट्राइप वाले हैं तो वहीं दूसरी तरह के कार्ड चिप वाले कार्ड हैं। कार्ड यूज़र्स की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बैंक अब मैग्नेटिक स्ट्राइप कार्ड्स को बंद कर रहे हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक के आदेशानुसार पुराने मैग्नेटिक स्ट्राइप वाले कार्ड्स को रिप्लेस करने की आख़िरी तारीख़ 31 दिसम्बर 2019 है। आरबीआई का दावा है कि यूज़र्स के डेबिट और क्रेडिट कार्ड की जानकारी को सिक्योर रखने के लिए यह बड़ा फ़ैसला लिया गया है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रिज़र्व बैंक ऑफ़ इण्डिया ने साल 2016 में ही सभी बैंकों को आदेश दे दिया था कि ग्राहकों के साधारण मैग्नेटिक स्ट्राइप कार्ड्स को चिप वाले कार्ड से रिप्लेस किया जाए। और यही वजह है कि बैंक अब सिर्फ चिप वाले एटीएम कार्ड और डेबिट कार्ड जारी कर रहे हैं। आरबीआई के डेटा के अनुसार पूरे देश में 44.2 मिलियन एक्टिव क्रेडिट कार्ड और 958.2 मिलियन एक्टिव डेबिट कार्ड मौजूद हैं।
पुराने मैग्नेटिक स्ट्राइप कार्ड और नये चिप वाले कार्ड्स में काफ़ी अन्तर है। दरअसल, मैग्नेटिक स्ट्राइप कार्ड से ट्रांजेक्शन के लिए कार्डहोल्डर के सिग्नेचर या पिन की जरूरत होती है। इस कार्ड पर आपके अकाउण्ट की डिटेल्स मौजूद होती हैं। इसी स्ट्राइप की मदद से कार्ड स्वाइप के समय मशीन आपके बैंक इंटरफेस से जुड़ती है और प्रक्रिया आगे बढ़ती है। वहीं, चिप वाले कार्ड में सारी जानकारी चिप में मौजूद रहती है। इनमें भी ट्रांजेक्शन के लिए पिन और सिग्नेचर ज़रूरी होते हैं, लेकिन EMV चिप कार्ड में ट्रांजेक्शन के वक्त यूज़र को ऑथेंटिकेट करने के लिए एक यूनीक ट्रांजेक्शन कोड जनरेट होता है, जो एक वेरिफिकेशन को सपोर्ट करता है और ऐसा मैग्नेटिक स्ट्राइप कार्ड में नहीं होता है।
पुराने कार्ड के बारे में आरबीआई का कहना है कि मैग्नेटिक स्ट्राइप वाले कार्ड्स अब पुरानी टेक्नोलॉजी के हो चुके हैं और इसी कारण से बैंक ने ऐसे कार्ड्स बनाने बंद कर दिए हैं। मैग्नेटिक स्ट्राइप वाले कार्डस की जगह पर अब EMV चिप कार्ड्स को तैयार किया गया है। आरबीआई का इस बारे में कहना है कि एक लम्बी समयावधि के दौरान सभी पुराने मैग्नेटिक स्ट्राइप वाले कार्ड्स को नये कार्ड्स से बदल दिया गया है या फ़िर बदला जा रहा है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि स्टेट बैंक ऑफ़ इण्डिया समेत लगभग सभी बैंक तय तारीख़ के बाद मैग्नेटिक स्ट्राइप वाले डेबिट और क्रेडिट कार्ड को ब्लॉक करने जा रहे हैं। हालांकि, कार्ड को तभी ब्लॉक किया जाएगा, जब उसकी एक्सपायरी डेट आने वाली हो। वहीं आरबीआई के आदेशानुसार बैंक अपने ग्राहकों के लिए पुराने मैग्नेटिक स्ट्राइप कार्ड को चिप वाले कार्ड से रिप्लेस करने का नोटिफिकेशन भी जारी कर चुके हैं। जानकारी के लिए बता दें कि चिप वाले कार्ड्स के लिए बैंक कोई अलग से चार्ज नहीं ले रहे हैं और इसे पुराने कार्ड के बदले में इन्हें बिल्कुल मुफ़्त में बदला जा रहा है।
दरअसल, पुराने मैग्नेटिक स्ट्राइप वाले कार्ड्स सुरक्षित नहीं हैं। संसद में पेश की गई एक रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत में पिछले तीन सालों में क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग से जुड़े 3,409 मामलों में 134 करोड़ रुपये की राशि का धोखा हुआ है। जानकारी के लिए बता दें कि हाल के दिनों में फ़िशिंग, विशिंग और कार्ड स्किमिंग के ज़रिये बैंक ग्राहकों को धोखा देने के प्रयास सामने आए हैं। जानकारों के मुताबिक़, पुराने मैग्नेटिक स्ट्राइप कार्ड की मदद से इस तरह की धोखाधड़ी काफ़ी आसानी से हो जाती है।
धोखाधड़ी करने वाले लोग मैग्नेट स्ट्रीप में संग्रहीत ग्राहक के डेटा को पढ़ने के लिए एटीएम या टर्मिनल्स में कार्ड स्वाइप स्लॉट के अन्दर एक स्किमर डिवाइस रखते हैं, जिसकी मदद से कार्डहोल्डर की सारी डिटेल धोखाधड़ी करने वालों का पता चल जाती है। ऐसा करने के बाद धोखाधड़ी करने वाले आपके कार्ड की जानकारी हासिल करने के बाद इसका इस्तेमाल समान विवरण के साथ एक नया कार्ड क्लोन करने के लिए करते हैं। इतना ही नहीं, वे लोग ग्राहक की जानकारी को हैकर्स तक पहुंचा देते हैं और हैकर्स इस डिटेल के ज़रिये ऑनलाइन शॉपिंग के साथ-साथ मनी ट्रांसफर तक कर सकते हैं। लेकिन EMV चिप कार्ड वाले डेबिट-क्रेडिट कार्ड से ऐसी स्किमिंग नहीं हो सकती है, क्योंकि EMV चिप कार्ड स्वाइप करने के समय कार्ड के डेटा को टर्मिनल पर प्रकट नहीं करते हैं और इसके बजाय एक क्रिप्टोग्राम उत्पन्न करते हैं।
DEC 20 (WTN) – आपका किसी ना किसी बैंक में अकाउण्ट तो होगा ही और यदि बैंक में अकाउण्ट है तो बैंक का डेबिट या क्रेडिट कार्ड भी आपके पास होगा ही। लेकिन यदि आपके पास पुराना डेबिट या क्रेडिट कार्ड है तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यदि आपने 31 दिसम्बर 2019 तक अपने मैग्नेटिक स्ट्राइप वाले पुराने डेबिट या क्रेडिट कार्ड को नहीं बदलाया तो आपका कार्ड ब्लॉक हो जाएगा। दरअसल, आरबीआई यानी भारतीय रिज़र्व बैंक के आदेशानुसार मैग्नेटिक स्ट्राइप वाले डेबिट और क्रेडिट कार्ड को बैंक बंद करने जा रहे हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस समय देश में दो तरह के डेबिट-क्रेडिट कार्ड मौजूद हैं। पहली तरह के कार्ड मैग्नेटिक स्ट्राइप वाले हैं तो वहीं दूसरी तरह के कार्ड चिप वाले कार्ड हैं। कार्ड यूज़र्स की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बैंक अब मैग्नेटिक स्ट्राइप कार्ड्स को बंद कर रहे हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक के आदेशानुसार पुराने मैग्नेटिक स्ट्राइप वाले कार्ड्स को रिप्लेस करने की आख़िरी तारीख़ 31 दिसम्बर 2019 है। आरबीआई का दावा है कि यूज़र्स के डेबिट और क्रेडिट कार्ड की जानकारी को सिक्योर रखने के लिए यह बड़ा फ़ैसला लिया गया है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रिज़र्व बैंक ऑफ़ इण्डिया ने साल 2016 में ही सभी बैंकों को आदेश दे दिया था कि ग्राहकों के साधारण मैग्नेटिक स्ट्राइप कार्ड्स को चिप वाले कार्ड से रिप्लेस किया जाए। और यही वजह है कि बैंक अब सिर्फ चिप वाले एटीएम कार्ड और डेबिट कार्ड जारी कर रहे हैं। आरबीआई के डेटा के अनुसार पूरे देश में 44.2 मिलियन एक्टिव क्रेडिट कार्ड और 958.2 मिलियन एक्टिव डेबिट कार्ड मौजूद हैं।
पुराने मैग्नेटिक स्ट्राइप कार्ड और नये चिप वाले कार्ड्स में काफ़ी अन्तर है। दरअसल, मैग्नेटिक स्ट्राइप कार्ड से ट्रांजेक्शन के लिए कार्डहोल्डर के सिग्नेचर या पिन की जरूरत होती है। इस कार्ड पर आपके अकाउण्ट की डिटेल्स मौजूद होती हैं। इसी स्ट्राइप की मदद से कार्ड स्वाइप के समय मशीन आपके बैंक इंटरफेस से जुड़ती है और प्रक्रिया आगे बढ़ती है। वहीं, चिप वाले कार्ड में सारी जानकारी चिप में मौजूद रहती है। इनमें भी ट्रांजेक्शन के लिए पिन और सिग्नेचर ज़रूरी होते हैं, लेकिन EMV चिप कार्ड में ट्रांजेक्शन के वक्त यूज़र को ऑथेंटिकेट करने के लिए एक यूनीक ट्रांजेक्शन कोड जनरेट होता है, जो एक वेरिफिकेशन को सपोर्ट करता है और ऐसा मैग्नेटिक स्ट्राइप कार्ड में नहीं होता है।
पुराने कार्ड के बारे में आरबीआई का कहना है कि मैग्नेटिक स्ट्राइप वाले कार्ड्स अब पुरानी टेक्नोलॉजी के हो चुके हैं और इसी कारण से बैंक ने ऐसे कार्ड्स बनाने बंद कर दिए हैं। मैग्नेटिक स्ट्राइप वाले कार्डस की जगह पर अब EMV चिप कार्ड्स को तैयार किया गया है। आरबीआई का इस बारे में कहना है कि एक लम्बी समयावधि के दौरान सभी पुराने मैग्नेटिक स्ट्राइप वाले कार्ड्स को नये कार्ड्स से बदल दिया गया है या फ़िर बदला जा रहा है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि स्टेट बैंक ऑफ़ इण्डिया समेत लगभग सभी बैंक तय तारीख़ के बाद मैग्नेटिक स्ट्राइप वाले डेबिट और क्रेडिट कार्ड को ब्लॉक करने जा रहे हैं। हालांकि, कार्ड को तभी ब्लॉक किया जाएगा, जब उसकी एक्सपायरी डेट आने वाली हो। वहीं आरबीआई के आदेशानुसार बैंक अपने ग्राहकों के लिए पुराने मैग्नेटिक स्ट्राइप कार्ड को चिप वाले कार्ड से रिप्लेस करने का नोटिफिकेशन भी जारी कर चुके हैं। जानकारी के लिए बता दें कि चिप वाले कार्ड्स के लिए बैंक कोई अलग से चार्ज नहीं ले रहे हैं और इसे पुराने कार्ड के बदले में इन्हें बिल्कुल मुफ़्त में बदला जा रहा है।
दरअसल, पुराने मैग्नेटिक स्ट्राइप वाले कार्ड्स सुरक्षित नहीं हैं। संसद में पेश की गई एक रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत में पिछले तीन सालों में क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग से जुड़े 3,409 मामलों में 134 करोड़ रुपये की राशि का धोखा हुआ है। जानकारी के लिए बता दें कि हाल के दिनों में फ़िशिंग, विशिंग और कार्ड स्किमिंग के ज़रिये बैंक ग्राहकों को धोखा देने के प्रयास सामने आए हैं। जानकारों के मुताबिक़, पुराने मैग्नेटिक स्ट्राइप कार्ड की मदद से इस तरह की धोखाधड़ी काफ़ी आसानी से हो जाती है।
धोखाधड़ी करने वाले लोग मैग्नेट स्ट्रीप में संग्रहीत ग्राहक के डेटा को पढ़ने के लिए एटीएम या टर्मिनल्स में कार्ड स्वाइप स्लॉट के अन्दर एक स्किमर डिवाइस रखते हैं, जिसकी मदद से कार्डहोल्डर की सारी डिटेल धोखाधड़ी करने वालों का पता चल जाती है। ऐसा करने के बाद धोखाधड़ी करने वाले आपके कार्ड की जानकारी हासिल करने के बाद इसका इस्तेमाल समान विवरण के साथ एक नया कार्ड क्लोन करने के लिए करते हैं। इतना ही नहीं, वे लोग ग्राहक की जानकारी को हैकर्स तक पहुंचा देते हैं और हैकर्स इस डिटेल के ज़रिये ऑनलाइन शॉपिंग के साथ-साथ मनी ट्रांसफर तक कर सकते हैं। लेकिन EMV चिप कार्ड वाले डेबिट-क्रेडिट कार्ड से ऐसी स्किमिंग नहीं हो सकती है, क्योंकि EMV चिप कार्ड स्वाइप करने के समय कार्ड के डेटा को टर्मिनल पर प्रकट नहीं करते हैं और इसके बजाय एक क्रिप्टोग्राम उत्पन्न करते हैं।