तमाम आर्थिक चुनौतियों के बीच मोदी सरकार को मिली ‘राहत’ की ख़बर
Saturday - December 21, 2019 10:51 am ,
Category : WTN HINDI
फिच रेटिंग्स ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर दी ‘संतोषजनक’ रिपोर्ट
अन्य देशों की तुलना में काफ़ी ‘मज़बूत’ है भारतीय अर्थव्यवस्था, जल्द होगा जीडीपी ग्रोथ रेट में सुधार
DEC 21 (WTN) – वैश्विक आर्थिक सुस्ती के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था को काफ़ी झटका लगा है। ऐसा नहीं है कि आर्थिक सुस्ती का असर सिर्फ़ भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, दुनिया की 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्थाओं पर आर्थिक सुस्ती का असर पड़ा है। लेकिन भारत और ब्राजील जैसी तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं पर आर्थिक सुस्ती का ज़रा ज़्यादा ही असर पड़ा है। अमेरिका-चीन ट्रेड वार के साथ कई ऐसे फैक्टर्स हैं जो कि भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं। भारत समेत दुनिया की कई रेटिंग एजेंसियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर वैश्विक आर्थिक सुस्ती के असर के कारण रिपोर्ट्स जारी की हैं, जिनके मुताबिक़ भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट इस बार उम्मीद से काफ़ी कम रहने वाली है।
लेकिन तमाम तरह की रिपोर्ट्स के बीच, फिच रेटिंग्स ने मोदी सरकार के लिए थोड़ी राहत की ख़बर दी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने भारत की लॉन्ग टर्म रेटिंग को 'BBB-' बरक़रार रखा है। इतना ही नहीं फिच रेटिंग्स ने भारतीय अर्थव्यवस्था के आउटलुक को भी ‘स्टैबल’ यानी ‘स्थिर’ रखा है। जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय अर्थव्यवस्था के सम्बन्ध में अपनी रिपोर्ट में फिच रेटिंग्स ने कहा है, “अन्य देशों की तुलना में भारत की जीडीपी ग्रोथ को लेकर हमारा आउटलुक अभी भी मज़बूत है। हालांकि, पिछली कुछ तिमाहियों में ग्रोथ रेट में गिरावट दर्ज़ की गई है, जिसके पीछे घरेलू फैक्टर्स भी रहे हैं।”
जैसा कि हमने आपको बताया कि फिच ने भारत की लॉन्ग टर्म रेटिंग को ‘BBB-’ कैटेगरी में रखा है। इसका मतलब है कि अन्य देशों की तुलना में भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी मज़बूत है। फिच के मुताबिक़, भारतीय अर्थव्यवस्था के कुछ भीतरी संकट उसे आर्थिक सुस्ती से उबरने में बाधा बन रहे हैं, जैसे सार्वजनिक ऋण का स्तर ऊंचा होना, वित्तीय क्षेत्र की कमज़ोरी और राजकोषीय घाटा समेत कई अन्य ऐसे पहलू हैं जो कि भारत की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं, लेकिन मज़बूत विदेशी मुद्रा भण्डार समेत एक बड़ी अर्थव्यवस्था होने के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था बाहरी और भीतरी जोखियों से निपटने में सक्षम है।
चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट के बारे में कई तरह के अनुमान रेटिंग एजेंसियों द्वारा लगाए जा रहे हैं। वहीं यदि फिच रेटिंग्स की बात करें तो फिच के मुताबिक़ चालू वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 5 प्रतिशत से कम रहेगी और यह 4.6 प्रतिशत के क़रीब रह सकती है। फिच के अनुसार भारत में NBFC (Non-Banking Financial Company) यानी गैर-बैंकिंग वित्तीय कम्पनियों के लिए क्रेडिट संकट और कंज्यूमर कॉन्फिडेंस में कमी के कारण भी जीडीपी ग्रोथ रेट में कमी आई है।
वैसे भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में फिच रेटिंग्स ने सकारात्मक रवैया रखा है। फिच ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2020-21 में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 5.6 प्रतिशत रह सकती है। वहीं आने वाले समय में वैश्विक और घरेलू स्तर पर और भी सुधार होने पर वित्त वर्ष 2021-22 में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 6.5 प्रतिशत रह सकती है। फिच का मानना है कि आने वाले समय में जीडीपी ग्रोथ रेट में यह वृद्धि बाज़ार में नक़दी बढ़ने और सम्भावित बेहतर राजकोषीय नीतियों के कारण हो सकती है।
लेकिन वहीं फिच ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बढ़ता हुआ राजकोषीय घाटा जीडीपी ग्रोथ रेट पर नकारात्मक असर डाल सकता है। दरअसल, फिच रेटिंग्स ने साफ़ किया है कि चालू वित्त वर्ष 2019-20 के लिए 4.6 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ रेट का जो अनुमान है वो राजकोषीय घाटे के लक्ष्य के आधार पर ही है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वर्तमान में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 3.3 प्रतिशत है। फिच का मानना है कि राजाकोषीय घाटे को नियंत्रण में रखना और अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कड़े फ़ैसला लेना, इन दोनों में सन्तुलन कायम रखना मोदी सरकार के लिए काफ़ी चुनौती भरा काम होगा। अब देखना होगा कि मोदी सरकार इन चुनौतियों से कैसे निपट पाती है?
DEC 21 (WTN) – वैश्विक आर्थिक सुस्ती के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था को काफ़ी झटका लगा है। ऐसा नहीं है कि आर्थिक सुस्ती का असर सिर्फ़ भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, दुनिया की 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्थाओं पर आर्थिक सुस्ती का असर पड़ा है। लेकिन भारत और ब्राजील जैसी तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं पर आर्थिक सुस्ती का ज़रा ज़्यादा ही असर पड़ा है। अमेरिका-चीन ट्रेड वार के साथ कई ऐसे फैक्टर्स हैं जो कि भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं। भारत समेत दुनिया की कई रेटिंग एजेंसियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर वैश्विक आर्थिक सुस्ती के असर के कारण रिपोर्ट्स जारी की हैं, जिनके मुताबिक़ भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट इस बार उम्मीद से काफ़ी कम रहने वाली है।
लेकिन तमाम तरह की रिपोर्ट्स के बीच, फिच रेटिंग्स ने मोदी सरकार के लिए थोड़ी राहत की ख़बर दी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने भारत की लॉन्ग टर्म रेटिंग को 'BBB-' बरक़रार रखा है। इतना ही नहीं फिच रेटिंग्स ने भारतीय अर्थव्यवस्था के आउटलुक को भी ‘स्टैबल’ यानी ‘स्थिर’ रखा है। जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय अर्थव्यवस्था के सम्बन्ध में अपनी रिपोर्ट में फिच रेटिंग्स ने कहा है, “अन्य देशों की तुलना में भारत की जीडीपी ग्रोथ को लेकर हमारा आउटलुक अभी भी मज़बूत है। हालांकि, पिछली कुछ तिमाहियों में ग्रोथ रेट में गिरावट दर्ज़ की गई है, जिसके पीछे घरेलू फैक्टर्स भी रहे हैं।”
जैसा कि हमने आपको बताया कि फिच ने भारत की लॉन्ग टर्म रेटिंग को ‘BBB-’ कैटेगरी में रखा है। इसका मतलब है कि अन्य देशों की तुलना में भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी मज़बूत है। फिच के मुताबिक़, भारतीय अर्थव्यवस्था के कुछ भीतरी संकट उसे आर्थिक सुस्ती से उबरने में बाधा बन रहे हैं, जैसे सार्वजनिक ऋण का स्तर ऊंचा होना, वित्तीय क्षेत्र की कमज़ोरी और राजकोषीय घाटा समेत कई अन्य ऐसे पहलू हैं जो कि भारत की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं, लेकिन मज़बूत विदेशी मुद्रा भण्डार समेत एक बड़ी अर्थव्यवस्था होने के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था बाहरी और भीतरी जोखियों से निपटने में सक्षम है।
चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट के बारे में कई तरह के अनुमान रेटिंग एजेंसियों द्वारा लगाए जा रहे हैं। वहीं यदि फिच रेटिंग्स की बात करें तो फिच के मुताबिक़ चालू वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 5 प्रतिशत से कम रहेगी और यह 4.6 प्रतिशत के क़रीब रह सकती है। फिच के अनुसार भारत में NBFC (Non-Banking Financial Company) यानी गैर-बैंकिंग वित्तीय कम्पनियों के लिए क्रेडिट संकट और कंज्यूमर कॉन्फिडेंस में कमी के कारण भी जीडीपी ग्रोथ रेट में कमी आई है।
वैसे भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में फिच रेटिंग्स ने सकारात्मक रवैया रखा है। फिच ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2020-21 में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 5.6 प्रतिशत रह सकती है। वहीं आने वाले समय में वैश्विक और घरेलू स्तर पर और भी सुधार होने पर वित्त वर्ष 2021-22 में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 6.5 प्रतिशत रह सकती है। फिच का मानना है कि आने वाले समय में जीडीपी ग्रोथ रेट में यह वृद्धि बाज़ार में नक़दी बढ़ने और सम्भावित बेहतर राजकोषीय नीतियों के कारण हो सकती है।
लेकिन वहीं फिच ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बढ़ता हुआ राजकोषीय घाटा जीडीपी ग्रोथ रेट पर नकारात्मक असर डाल सकता है। दरअसल, फिच रेटिंग्स ने साफ़ किया है कि चालू वित्त वर्ष 2019-20 के लिए 4.6 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ रेट का जो अनुमान है वो राजकोषीय घाटे के लक्ष्य के आधार पर ही है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वर्तमान में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 3.3 प्रतिशत है। फिच का मानना है कि राजाकोषीय घाटे को नियंत्रण में रखना और अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कड़े फ़ैसला लेना, इन दोनों में सन्तुलन कायम रखना मोदी सरकार के लिए काफ़ी चुनौती भरा काम होगा। अब देखना होगा कि मोदी सरकार इन चुनौतियों से कैसे निपट पाती है?