BrahMos WORLD INDIA MADHYA PRADESH BHOPAL WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RELIGION SPORTS BUSINESS FUN FACTS ENTERTAINMENT LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE SCIENCE & TECHNOLOGY HEALTH EDUCATION DIASPORA OPINION & INTERVIEW RECIPES DRINKS BIG MEMSAAB 2017 BUDGET 2017 FUNNY VIDEOS VIRAL ON WEB PICTURE STORIES Mahakal Ke Darshan
WTN HINDI ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
logo
Breaking News

जानिए भारतीय नागरिकता के बारे में जो आपका जानना है ज़रूरी

Saturday - December 21, 2019 12:34 pm , Category : WTN HINDI
NRC के बारे में डरने की नहीं है ज़रूरत
NRC के बारे में डरने की नहीं है ज़रूरत

आसान से 9 दस्तावेज़ों में से कोई भी एक दस्तावेज़ है तो आप हैं भारतीय नागरिक
 

DEC 21 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा लागू किये गये नागरिकता संशोधन क़ानून के बारे में जानकारी ना होने के कारण पूरे देश में नामसझी के कारण विवाद, प्रदर्शन और आगजनी जारी है। कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियां इस क़ानून का इस आधार पर विरोध कर रही हैं कि हैं कि नया क़ानून संविधान के ख़िलाफ़ है। लेकिन लगता है कि विपक्षी पार्टियों को इस क़ानून और भारतीय नागरिकता के बारे में शायद कम जानकारी है तभी वे इसका विरोध कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह समेत केन्द्र सरकार के कई मंत्री साफ़तौर पर कह चुके हैं कि नये नागरिकता क़ानून और एनआरसी से भारत के किसी भी धर्म के नागरिकों को घबराने की ज़रूरत नहीं है।

यदि आप भी नये नागरिकता क़ानून और एनआरसी को लेकर चिन्तित या आशंकित हैं तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यदि आपके पास नौ आसान से दस्तावेज़ों में से एक भी कोई दस्तावेज़ है तो आप भारत के नागरिक हैं और आपका नाम NRC (National Register of Citizens) यानि राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर में दर्ज़ होगा।

जानकारी के लिए बता दें कि जो नौ ज़रूरी दस्तावेज़ नागरिकता के लिए चाहिए उनमें से एक ना एक दस्तावेज़ तो भारत में पैदा हुए और भारत में रह रहे लगभग हर नागरिक के पास होगा ही। वहीं यदि असम के बाद पूरे भारत में एनआरसी लागू होता है तो भी आपको घबराने की ज़रूरत नहीं है। दरअसल, एनआरसी में वे सभी लोग पात्र हैं जो या तो भारत में पैदा हुए हैं, या 1949 के बाद भारत आए हैं या फ़िर वे लोग, जिन्होंने देश की नागरिकता हासिल कर ली है।

यह नौ ज़रूरी दस्तावेज़ हैं; ज़मीन के दस्तावेज़ या ज़मीन के मालिकाना हक़ के दस्तावेज, राज्य शासन द्वारा जारी किया गया स्थायी निवास प्रमाणपत्र, भारत सरकार की ओर से जारी पासपोर्ट, किसी भी सरकारी प्राधिकरण द्वारा जारी लाइसेंस/प्रमाणपत्र, सरकार या सरकारी उपक्रम के तहत सेवा या नियुक्ति को प्रमाणित करने वाला दस्तावेज़, बैंक या डाक घर में खाता, सक्षम ऑथरिटी द्वारा जारी किया गया जन्म प्रमाण पत्र, बोर्ड/विश्वविद्यालयों द्वारा जारी शिक्षण प्रमाणपत्र और न्यायिक या राजस्व अदालत की सुनवाई से जुड़ा दस्तावेज़। स्वाभाविक है कि इन दस्तावेज़ों में से कोई ना कोई एक दस्तावेज़ तो आपके पास होगा ही। वहीं यदि इनमें से एक भी दस्तावेज़ आपके पास नहीं है तो इसकी व्यवस्था भी सरकार द्वारा की गई है।

अब जब देश में नागरिकता को लेकर चर्चा जारी है तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 5 से लेकर 11 तक में नागरिकता को पारिभाषित किया गया है। इसमें अनुच्छेद 5 से लेकर 10 तक में नागरिकता की पात्रता के बारे में विस्तार से बताया गया है, वहीं अनुच्छेद 11 में नागरिकता के मसले पर संसद को क़ानून बनाने का अधिकार दिया गया है। नागरिकता को लेकर साल 1955 में नागरिकता क़ानून पास हुआ था। इस क़ानून में अब तक बार साल 1986, 2003, 2005 और 2015 में संशोधन हो चुका है।
 
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 5 में भारतीय नागरिकता को परिभाषित किया गया है। इसमें कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति भारत में जन्म लेता है और उसके माता-पिता दोनों या दोनों में से कोई एक भारत में जन्मा हो तो वो भारत का नागरिक होगा। भारत में संविधान लागू होने के 5 साल पहले यानी 1945 के पहले से रह रहा हर व्यक्ति भारत का नागरिक माना जाएगा। वहीं यदि कोई व्यक्ति यहां पांच साल तक रह चुका हो तो वो भारत की नागरिकता के लिए निवेदन कर सकता है।

वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि असम में जब NRC प्रक्रिया को लागू किया तो उसमें ये माना गया कि वे व्यक्ति NRC के तहत भारत का नागरिक होने के योग्य हैं, जो साबित करते हैं कि या तो वे या उनके पूर्वज 24 मार्च 1971 को या उससे पहले भारत में थे। ये प्रक्रिया बांग्लादेशी प्रवासियों को बाहर करने के लिए शुरू की गई थी।
 
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 6 में पाकिस्तान से भारत आए लोगों की नागरिकता को पारिभाषित किया गया है। इस अनुच्छेद के मुताबिक़, 19 जुलाई 1949 से पहले पाकिस्तान से भारत आए लोग भारत के नागरिक माने जाएंगे, लेकिन इस तारीख के बाद पाकिस्तान से भारत आए लोगों को नागरिकता हासिल करने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। लेकिन इन दोनों ही परिस्थितियों में व्यक्ति के माता-पिता या दादा-दादी का भारतीय नागरिक होना ज़रूरी है।
 
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 7 में पाकिस्तान जाकर वापस लौटने वाले लोगों के बारे में जिक्र किया गया है। इसके मुताबिक़, 1 मार्च 1947 के बाद अगर कोई व्यक्ति पाकिस्तान चला गया, लेकिन रिसेटेलमेण्ट परमिट के साथ तुरन्त वापस लौट गया हो तो वो भी भारत की नागरिकता हासिल करने का पात्र है। ऐसे लोगों को 6 महीने तक भारत में रहकर नागरिकता के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना होगा और ऐसे लोगों पर 19 जुलाई 1949 के बाद आए लोगों के लिए बने नियम लागू होंगे।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 8 विदेशों में रह रहे भारतीयों की नागरिकता को लेकर नियम स्पष्ट करता है। इस अनुच्छेद के मुताबिक़, विदेश में पैदा हुए बच्चे को भी भारतीय नागरिक माना जाएगा अगर उसके माता-पिता या दादा-दादी में से से कोई एक भारतीय नागरिक हो। ऐसे बच्चे को नागरिकता हासिल करने के लिए भारतीय दूतावास से सम्पर्क कर पंजीकरण करवाना होगा।

वहीं भारतीय संविधान का अनुच्छेद 9 भारत की एकल नागरिकता को लेकर नियम स्पष्ट करता है। इसके अनुसार यदि कोई भारतीय नागरिक किसी और देश की नागरिकता ले लेता है तो उसकी भारतीय नागरिकता अपने आप ख़त्म हो जाएगी। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 10 नागरिकता को लेकर संसद को अधिकार देता है। संविधान में स्पष्ट किया गया है कि अनुच्छेद 5 से लेकर 9 तक के नियमों का पालन करने वाले लोग ही भारतीय नागरिक होंगे। वहीं केन्द्र सरकार के पास नागरिकता को लेकर नियम बनाने का अधिकार होगा। सरकार नागरिकता को लेकर जो नियम बनाएगी उसके आधार पर ही किसी को नागरिकता दी जा सकेगी।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 11 भारतीय संसद को नागरिकता पर क़ानून बनाने का अधिकार देता है। इस अनुच्छेद के अनुसार किसी को नागरिकता देना या उसकी नागरिकता ख़त्म करना है इसके सम्बन्ध में क़ानून बनाने का अधिकार सिर्फ़ भारत की संसद के पास है। स्पष्ट है कि संविधान के इसी अनुच्छेद के मुताबिक़ मोदी सरकार ने नया नागरिकता क़ानून बनाया है और इसे लागू करने से कोई भी राज्य सरकार मना नहीं कर सकती है। तो स्पष्ट है कि नये नागरिकता क़ानून और एनआरसी से किसी भी भारतीय नागरिक को डरने की ज़रूरत नहीं है।