जानिए आख़िर क्यों है NPR की देश को ज़रूरत?
Saturday - December 21, 2019 3:18 pm ,
Category : WTN HINDI
अब NPR की तैयारी में मोदी सरकार
NPR के ज़रिये तैयार होगा सभी नागरिकों का डेटाबेस, मिलेगा पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ
DEC 21 (WTN) – CAA (Citizenship Amendment Act) यानी नागरिकता संशोधन क़ानून और NRC (National Register of Citizens) यानी भारतीय नागरिकता रजिस्टर पर विवाद और चर्चा के बीच अब मोदी सरकार NPR (National Population Register) यानी राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर बनाने की तैयारी में है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि NPR में भारतीय नागरिकों की बायोमेट्रिक और वंशावली को दर्ज़ किया जाएगा। वहीं असम समेत पूरे देश में NPR (National Population Register) पर काम शुरू किया जाएगा। जानकारी के लिए बता दें कि NPR के लिए 1 अप्रैल 2020 से 30 सितम्बर 2020 तक असम के अलावा देशभर में घर-घर जाकर जनगणना की जाएगी।
जनगणना की इस प्रक्रिया के लिए गृह मंत्रालय ने कैबिनेट से 3,941 करोड़ रुपयों की मांग की है। सरकार का कहना है कि NPR का उद्देश्य देश के सामान्य निवासियों की व्यापक पहचान का एक डेटाबेस तैयार करना है, जिसमें जनसांख्यिकी के साथ-साथ बायोमेट्रिक जानकारी भी शामिल होगी। जानकारी के लिए बता दें कि बायोमेट्रिक डेटा में हर भारतीय नागरिक के अंगूठे का निशान और अन्य जानकारियां शामिल होंगी।
दरअसल, NPR (National Population Register) में भारत के हर नागरिक की जानकारी रखी जाएगी और यह पूरा काम नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों के तहत स्थानीय, उप-ज़िला, ज़िला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाएगा। इसके तहत कोई भी भारतीय नागरिक जो कि भारत में कहीं पर पर भी 6 महीने या उससे अधिक समय से स्थानीय क्षेत्र में निवास कर रहा है उसे NPR में अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा।
नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर में तीन चरण होंगे। एनपीआर का पहला चरण 1 अप्रैल 2020 से 30 सितम्बर 2020 तक होगा, जिसमें केन्द्र और राज्य सरकार के कर्मचारी घर-घर जाकर जनसंख्या से सम्बन्धित आंकड़े जुटाएंगे। इस प्रक्रिया का दूसरा चरण 9 फरवरी 2021 से 28 फरवरी 2021 तक होगा। वहीं तीसरे चरण में संशोधन की प्रक्रिया 1 मार्च 2021 से 5 मार्च 2021 तक होगी। बता दें कि भारत सरकार ने अप्रैल 2010 से सितम्बर 2010 के दौरान जनगणना 2011 के लिए घर-घर जाकर सूची तैयार करने और हर घर की जनगणना के हर चरण में देश के सभी सामान्य निवासियों के सम्बन्ध में विशिष्ट सूचना जमा करके इस डेटाबेस को तैयार करने का काम शुरू किया था।
जैसा कि आप जानते ही होंगे कि देश में हर 10 साल के बाद जनगणना होती है। आज़ादी के बाद साल 1951 में भारत में जनगणना हुई थी, वहीं साल 2011 में आज़ाद भारत की 7वीं जनगणना हुई थी। अभी फ़िलहाल 2011 की जनगणना के आंकड़े उपलब्ध हैं और 2021 की जनगणना पर काम जारी है। वहीं मोदी सरकार का कहना है कि NPR (National Population Register) एक बहुउद्देशीय परियोजना है, जिसका लाभ देश के नागरिकों को मिलेगा। NPR (National Population Register) का मक़सद है कि सरकारी योजनाओं के अन्तर्गत दिया जाने वाला लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचे और ज़रूरतमंद व्यक्ति की पहचान की जा सके। सरकार का दावा है कि NPR के द्वारा देश की सुरक्षा में सुधार किया जा सकेगा और आतंकवादी गतिविधियों को रोकने में सहायता प्राप्त हो सकेगी।
DEC 21 (WTN) – CAA (Citizenship Amendment Act) यानी नागरिकता संशोधन क़ानून और NRC (National Register of Citizens) यानी भारतीय नागरिकता रजिस्टर पर विवाद और चर्चा के बीच अब मोदी सरकार NPR (National Population Register) यानी राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर बनाने की तैयारी में है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि NPR में भारतीय नागरिकों की बायोमेट्रिक और वंशावली को दर्ज़ किया जाएगा। वहीं असम समेत पूरे देश में NPR (National Population Register) पर काम शुरू किया जाएगा। जानकारी के लिए बता दें कि NPR के लिए 1 अप्रैल 2020 से 30 सितम्बर 2020 तक असम के अलावा देशभर में घर-घर जाकर जनगणना की जाएगी।
जनगणना की इस प्रक्रिया के लिए गृह मंत्रालय ने कैबिनेट से 3,941 करोड़ रुपयों की मांग की है। सरकार का कहना है कि NPR का उद्देश्य देश के सामान्य निवासियों की व्यापक पहचान का एक डेटाबेस तैयार करना है, जिसमें जनसांख्यिकी के साथ-साथ बायोमेट्रिक जानकारी भी शामिल होगी। जानकारी के लिए बता दें कि बायोमेट्रिक डेटा में हर भारतीय नागरिक के अंगूठे का निशान और अन्य जानकारियां शामिल होंगी।
दरअसल, NPR (National Population Register) में भारत के हर नागरिक की जानकारी रखी जाएगी और यह पूरा काम नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों के तहत स्थानीय, उप-ज़िला, ज़िला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाएगा। इसके तहत कोई भी भारतीय नागरिक जो कि भारत में कहीं पर पर भी 6 महीने या उससे अधिक समय से स्थानीय क्षेत्र में निवास कर रहा है उसे NPR में अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा।
नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर में तीन चरण होंगे। एनपीआर का पहला चरण 1 अप्रैल 2020 से 30 सितम्बर 2020 तक होगा, जिसमें केन्द्र और राज्य सरकार के कर्मचारी घर-घर जाकर जनसंख्या से सम्बन्धित आंकड़े जुटाएंगे। इस प्रक्रिया का दूसरा चरण 9 फरवरी 2021 से 28 फरवरी 2021 तक होगा। वहीं तीसरे चरण में संशोधन की प्रक्रिया 1 मार्च 2021 से 5 मार्च 2021 तक होगी। बता दें कि भारत सरकार ने अप्रैल 2010 से सितम्बर 2010 के दौरान जनगणना 2011 के लिए घर-घर जाकर सूची तैयार करने और हर घर की जनगणना के हर चरण में देश के सभी सामान्य निवासियों के सम्बन्ध में विशिष्ट सूचना जमा करके इस डेटाबेस को तैयार करने का काम शुरू किया था।
जैसा कि आप जानते ही होंगे कि देश में हर 10 साल के बाद जनगणना होती है। आज़ादी के बाद साल 1951 में भारत में जनगणना हुई थी, वहीं साल 2011 में आज़ाद भारत की 7वीं जनगणना हुई थी। अभी फ़िलहाल 2011 की जनगणना के आंकड़े उपलब्ध हैं और 2021 की जनगणना पर काम जारी है। वहीं मोदी सरकार का कहना है कि NPR (National Population Register) एक बहुउद्देशीय परियोजना है, जिसका लाभ देश के नागरिकों को मिलेगा। NPR (National Population Register) का मक़सद है कि सरकारी योजनाओं के अन्तर्गत दिया जाने वाला लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचे और ज़रूरतमंद व्यक्ति की पहचान की जा सके। सरकार का दावा है कि NPR के द्वारा देश की सुरक्षा में सुधार किया जा सकेगा और आतंकवादी गतिविधियों को रोकने में सहायता प्राप्त हो सकेगी।