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पहुंचाया सार्वजनिक या सरकारी सम्पत्ति को नुकसान तो ज़ब्त हो सकती है सम्पत्ति

Monday - December 23, 2019 1:10 pm , Category : WTN HINDI
हिंसक विरोध प्रदर्शन करना आपको पड़ सकता है ‘भारी’
हिंसक विरोध प्रदर्शन करना आपको पड़ सकता है ‘भारी’

सार्वजनिक सम्पत्ति के नुकसान पर बहुत ‘सख़्त’ है क़ानून, आरोपी को ख़ुद को साबित करना होता है ‘निर्दोष’

DEC 23 (WTN) – दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी जनसंख्या वाले देश भारत में राजनीतिक दलों और उनके सहयोगी संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन करना सामान्य सी बात है। लेकिन देखा गया है कि विरोध प्रदर्शन और धरने के समय भीड़ द्वारा कई बार हिंसक गतिविधियों को अन्जाम दिया जाता है, जिसके कारण सार्वजनिक और सरकारी सम्पत्ति को काफ़ी नुकसान होता है। जैसा कि आप जानते हैं कि नागरिकता संशोधन एक्ट (Citizenship Amendment Act) के विरोध में देश के कई हिस्सों में विपक्षी दलों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हिंसक विरोध में बदल गया जिसके कारण कई राज्यों में सार्वजनिक और सरकारी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाया गया।
 
नागरिकता संशोधन एक्ट (Citizenship Amendment Act) के ख़िलाफ़ हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हिंसक विरोध प्रदर्शन पर नाराज़गी जताते हुए और कड़ा रुख़ अपनाते हुए कहा है कि हिंसा करने वाले दंगाइयों की पहचान कर उनके ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और सार्वजनिक और सरकारी सम्पत्ति का नुकसान करने वाले दंगाइयों की सम्पत्ति जब्त की जाएगी। दरअसल, देखा गया है कि अक्सर विरोध प्रदर्शनों में सार्वजनिक और सरकारी सम्पत्ति का नुकसान होता है। लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विरोध प्रदर्शनों में सार्वजनिक और सरकारी सम्पत्ति के नुकसान की भरपाई के लिए सरकार उपद्रव करने वालों से क़ानून के मुताबिक़ इसकी क़ीमत वसूल कर सकती है और इसके लिए उनकी सम्पत्ति ज़ब्त भी कर सकती है।

जानकारी के लिए बता दें कि 1984 के सार्वजनिक सम्पत्ति नुकसान रोकथाम अधिनियम के प्रावधानों के मुताबिक़, अगर कोई व्यक्ति सरकारी या सार्वजनिक सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने का दोषी साबित होता है, तो उसे 5 साल की सज़ा हो सकती है साथ ही इसमें जुर्माने का भी प्रावधान है। वहीं ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर सज़ा और जुर्माना दोनों एक साथ हो सकते हैं। इस क़ानून के अनुसार सार्वजनिक और सरकारी सम्पत्ति का नुकसान पहुंचाने के आरोपी को तब तक ज़मानत नहीं मिल सकती है, जब तक कि वो नुकसान की 50 प्रतिशत भरपाई नहीं कर देता है।
 
सार्वजनिक सम्पत्ति नुकसान रोकथाम अधिनियम 1984 एक केन्द्रीय क़ानून है। वहीं इसके अलावा अलग-अलग राज्यों ने इस बारे में अपने अलग क़ानून बनाए हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले दिनों सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश का मसला केरल में काफ़ी उछला था। इसको लेकर राज्य में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिसमें सार्वजनिक और सरकारी सम्पत्ति को काफ़ी नुकसान पहुंचा था। इसी से निपटने के लिए केरल सरकार एक नया बिल लेकर आई थी, जिसमें पब्लिक प्रॉपर्टी के नुकसान को सार्वजनिक या सरकारी सम्पत्ति के नुकसान के बराबर ही माना गया है।

जानकारी के लिए बता दें कि केरल प्रदेश के क़ानून में प्रावधान है कि इस मामलों में आरोपी को तब तक ज़मानत नहीं मिल सकती है, जब तक कि वो नुकसान हुई सम्पत्ति की 100 प्रतिशत भरपाई नहीं कर देता है। वहीं केन्द्रीय क़ानून में प्रावधान है कि जमानत के लिए आरोपी को नुकसान हुई सम्पत्ति की कम से कम 50 प्रतिशत भरपाई करना होगी। केन्द्रीय क़ानून के बारे में इण्डियन पीनल कोड के सेक्शन 425 में विस्तार से बताया गया है कि सार्वजनिक और सरकारी सम्पत्ति के नुकसान पर किस तरह का जुर्माना और सज़ा दी जाएगी।
 
वहीं सार्वजनिक सम्पत्ति के नुकसान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी गाइडलाइंस जारी की है। सार्वजनिक सम्पत्ति के भीषण नुकसान की ख़बरों पर सुप्रीम कोर्ट ने साल 2007 में स्वत: संज्ञान लिया था, क्योंकि उस साल विरोध प्रदर्शन, बंद और हड़ताल में सार्वजनिक और सरकारी सम्पत्ति का काफ़ी नुकसान हुआ था। जानकारी के लिए बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इस बारे में क़ानून में बदलाव के लिए दो कमेटियां बनाई थीं और इन कमेटियों का प्रमुख सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज के.टी. थॉमस और सीनियर वकील फली नरीमन को बनाया था। इन दोनों कमेटियों की सलाह पर ही साल 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी और सार्वजनिक सम्पत्ति को लेकर कुछ गाइडलाइंस जारी की थीं।
 
सुप्रीम कोर्ट ने अपनी गाइडलाइंस में कहा था कि सार्वजनिक सम्पत्ति का नुकसान होने की स्थिति में सारी ज़िम्मेदारी नुकसान के आरोपी पर डाली जाएगी। गाइडलाइंस के मुताबिक अगर सार्वजनिक सम्पत्ति का नुकसान होता है, तो कोर्ट यह मानकर चलती है कि नुकसान का आरोपी इसका ज़िम्मेदार है और इस मामले में आरोपी को ख़ुद को निर्दोष साबित करना होता है। गाइडलाइंस के मुताबिक़, निर्दोष साबित होने तक कोर्ट उसे ज़िम्मेदार मानकर चलती है। वहीं नरीमन कमेटी ने कहा था कि ऐसे मामलों में दंगाइयों से सार्वजिनक सम्पत्ति के नुकसान की वसूली की जाए।

वैसे विरोध प्रदर्शनों में सरकारी सम्पत्ति को हुए नुकसान को वसूल पाना बहुत मुश्किल काम होता है। गुजरात में हुए पाटीदार आंदोलन में सार्वजनिक सम्पत्ति का बहुत नुकसान हुआ था। सार्वजनिक सम्पत्ति के नुकसान के लिए राज्य सरकार ने हार्दिक पटेल को नुकसान का आरोपी बनाया गया। लेकिन हार्दिक पटेल के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में यह साबित करने में सफ़ल रहे कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि हार्दिक पटेल के कहने पर ही पाटीदार आन्दोलन में हिंसा फैली। इसी कारण से हार्दिक पटेल से कोई वसूली नहीं हो सकी।
 
लेकिन फ़िर भी हमारी आपको सलाह है कि किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक और सरकारी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने से बचें, क्योंकि यदि पुलिस की वीडियोग्राफी या फ़िर सीसीटीवी फुटेज से यह साबित हो गया है कि आपने विरोध प्रदर्शन के दौरान सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाया है, तो क़ानूनन आप से नुकसान हुई सम्पत्ति की भरपाई के लिए जुर्माना वसूला जा सकता है और इसके लिए आपकी सम्पत्ति तक जब्त हो सकती है। तो बेहतर होगा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान शान्तिपूर्वक तरीक़े से ही अपना विरोध प्रदर्शित करें।