जानिए मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलिटी के नये नियमों के बारे में विस्तार से
Tuesday - December 24, 2019 12:36 pm ,
Category : WTN HINDI
TRAI के मुताबिक सिर्फ़ 3 वर्किंड डे में सिम होगी पोर्ट
TRAI का दावा: पहले की तुलना में अब तेज़ी से पोर्ट होगी मोबाइल सिम
DEC 24 (WTN) – मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलिटी के बारे में तो आपने सुना ही होगा और हो सकता है कि आपने इस सुविधा का इस्तेमाल भी किया होगा। लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्राई (TRAI) यानी टेलीकॉम रेगुलेटरी ऑथेरिटी ऑफ़ इण्डिया (Telecom Regulatory Authority of India) ने मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलिटी के नए नियम जारी कर दिए हैं जो कि 16 दिसम्बर से लागू हो गये हैं। यदि आपको अभी भी मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलिटी के नये नियमों के बारे में जानकारी नहीं है, तो हम आपको इन नियमों के बारे में विस्तार से बताते हैं।
मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलिटी के नये नियमों के बारे में ट्राई का दावा है कि पहले की तुलना में यह नियम आसान हैं और साथ ही नये नियमों में नम्बर पोर्टेबिलिटी के काम में तेज़ी लाने के लिए प्राथमिकता दी गई है। जैसा कि आप जानते हैं कि मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलिटी के नियम के मुताबिक़, यूज़र अपना नम्बर बदले बिना अपनी सिम के मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटर को बदल सकता है। यानी वो अपना मोबाइल नम्बर बदले बिना मोबाइल नेटवर्क कम्पनी को बदल सकता है। ट्राई का दावा है कि मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलिटी की इस पूरी प्रोसेस में यूज़र को सिर्फ़ 3 वर्किंग डे का समय लगेगा जबकि पहले इसी प्रक्रिया के लिए 7 वर्किंग डे का समय लगता था।
वहीं ट्राई के मुताबिक़, मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलिटी के नये नियमों के तहत एक सर्कल से दूसरे सर्कल में नम्बर पोर्ट करने के लिए अब अधिकतम 5 दिन का वक़्त लगेगा। मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलिटी के नये नियमों के अनुसार अब नम्बर पोर्ट करने के लिए Unique Porting Code (UPC) जेनरेट करने की ज़रूरत पड़ेगी। जानकारी के लिए बता दें कि UPC कुछ स्थान विशेष को छोड़कर देश के सभी इलाक़ों में 4 दिनों के लिए वैलिड रहेगा जबकि पहले यह 15 दिन के लिए वैलिड रहता था। लेकिन नये नियमों के मुताबिक़, जम्मू कश्मीर, असम और उत्तर पूर्व के राज्यों में UPC 30 दिनों के लिए वैलिड रहेगा।
ट्राई के नये नियमों के अनुसार मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलिटी के लिए ट्रांजैक्शन फीस 6.46 रुपये देना होगी। वहीं यदि आपका मोबाइल कनेक्शन पोस्टपेड है तो सिम पोर्ट करने से पहले यूज़र को मौजूदा ऑपरेटर के सभी बक़ायों को ख़त्म करना होगा। वहीं पोस्टपेड नम्बर को वही यूज़र पोर्ट कर सकेंगे, जो मौजूदा ऑपरेटर की सर्विस के साथ कम से कम 90 दिनों से जुड़े हुए हैं। यदि इससे कम समय में आप मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलिटी के लिए ओनर बदलने का अनुरोध करते हैं, तो आपकी मोबाइल नम्बर पोर्टिबिलिटी रिक्वेस्ट को रद्द कर दिया जाएगा। वहीं सिम यूजर को सर्विस छोड़ने से पहले ऑपरेटर द्वारा तय किए गए सभी नियम और शर्तों को पूरा करना होगा, जो नम्बर लेते समय सब्सक्राइबर अग्रीमेंट में दिए गए थे।
यदि किसी भी यूज़र को अपने मोबाइल नम्बर को पोर्ट करने के लिए रिक्वेस्ट सेण्ड करना है तो उसे सबसे पहले अपना मोबाइल के मैसेज बॉक्स में PORT टाइप करना होगा और इसके बाद स्पेस देकर अपने उस मोबाइल नम्बर को टाइप करना होगा जिसे वो पोर्ट करना चाहता है। नम्बर टाइप करने के बाद यूज़र को इस मैसेज को उसी मोबाइल नम्बर से 1900 नम्बर पर सेण्ड करना होगा। इस नम्बर पर मैसेज सेण्ड करने के बाद यूज़र के मोबाइल पर UPC जनरेट हो जाएगा।
अब जिस भी मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटर की सुविधा यूज़र लेना चाहता है, उस मोबाइल नेटवर्क कम्पनी के सर्विस सेन्टर पर यूज़र को जाना होगा। यहां पर यूज़र को CAF (Customer Acquisition Form) यानी कस्टमर ऐक्वजिशन फॉर्म और पोर्टिंग फॉर्म को भरना होगा और पेमेण्ट करने के साथ-साथ KYC (Know Your Customer) डॉक्यूमेण्स जमा करने होंगे। डॉक्यूमेंट्स जमा करने के बाद यूज़र को एक नई सिम मिलेगी और इसके बाद यूज़र को पोर्ट से जुड़ा एक एसएमएस भी मिलेगा। इसी एसएमएस में सिम पोर्टिंग का दिन और समय भी लिखा रहेगा।
DEC 24 (WTN) – मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलिटी के बारे में तो आपने सुना ही होगा और हो सकता है कि आपने इस सुविधा का इस्तेमाल भी किया होगा। लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्राई (TRAI) यानी टेलीकॉम रेगुलेटरी ऑथेरिटी ऑफ़ इण्डिया (Telecom Regulatory Authority of India) ने मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलिटी के नए नियम जारी कर दिए हैं जो कि 16 दिसम्बर से लागू हो गये हैं। यदि आपको अभी भी मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलिटी के नये नियमों के बारे में जानकारी नहीं है, तो हम आपको इन नियमों के बारे में विस्तार से बताते हैं।
मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलिटी के नये नियमों के बारे में ट्राई का दावा है कि पहले की तुलना में यह नियम आसान हैं और साथ ही नये नियमों में नम्बर पोर्टेबिलिटी के काम में तेज़ी लाने के लिए प्राथमिकता दी गई है। जैसा कि आप जानते हैं कि मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलिटी के नियम के मुताबिक़, यूज़र अपना नम्बर बदले बिना अपनी सिम के मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटर को बदल सकता है। यानी वो अपना मोबाइल नम्बर बदले बिना मोबाइल नेटवर्क कम्पनी को बदल सकता है। ट्राई का दावा है कि मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलिटी की इस पूरी प्रोसेस में यूज़र को सिर्फ़ 3 वर्किंग डे का समय लगेगा जबकि पहले इसी प्रक्रिया के लिए 7 वर्किंग डे का समय लगता था।
वहीं ट्राई के मुताबिक़, मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलिटी के नये नियमों के तहत एक सर्कल से दूसरे सर्कल में नम्बर पोर्ट करने के लिए अब अधिकतम 5 दिन का वक़्त लगेगा। मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलिटी के नये नियमों के अनुसार अब नम्बर पोर्ट करने के लिए Unique Porting Code (UPC) जेनरेट करने की ज़रूरत पड़ेगी। जानकारी के लिए बता दें कि UPC कुछ स्थान विशेष को छोड़कर देश के सभी इलाक़ों में 4 दिनों के लिए वैलिड रहेगा जबकि पहले यह 15 दिन के लिए वैलिड रहता था। लेकिन नये नियमों के मुताबिक़, जम्मू कश्मीर, असम और उत्तर पूर्व के राज्यों में UPC 30 दिनों के लिए वैलिड रहेगा।
ट्राई के नये नियमों के अनुसार मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलिटी के लिए ट्रांजैक्शन फीस 6.46 रुपये देना होगी। वहीं यदि आपका मोबाइल कनेक्शन पोस्टपेड है तो सिम पोर्ट करने से पहले यूज़र को मौजूदा ऑपरेटर के सभी बक़ायों को ख़त्म करना होगा। वहीं पोस्टपेड नम्बर को वही यूज़र पोर्ट कर सकेंगे, जो मौजूदा ऑपरेटर की सर्विस के साथ कम से कम 90 दिनों से जुड़े हुए हैं। यदि इससे कम समय में आप मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलिटी के लिए ओनर बदलने का अनुरोध करते हैं, तो आपकी मोबाइल नम्बर पोर्टिबिलिटी रिक्वेस्ट को रद्द कर दिया जाएगा। वहीं सिम यूजर को सर्विस छोड़ने से पहले ऑपरेटर द्वारा तय किए गए सभी नियम और शर्तों को पूरा करना होगा, जो नम्बर लेते समय सब्सक्राइबर अग्रीमेंट में दिए गए थे।
यदि किसी भी यूज़र को अपने मोबाइल नम्बर को पोर्ट करने के लिए रिक्वेस्ट सेण्ड करना है तो उसे सबसे पहले अपना मोबाइल के मैसेज बॉक्स में PORT टाइप करना होगा और इसके बाद स्पेस देकर अपने उस मोबाइल नम्बर को टाइप करना होगा जिसे वो पोर्ट करना चाहता है। नम्बर टाइप करने के बाद यूज़र को इस मैसेज को उसी मोबाइल नम्बर से 1900 नम्बर पर सेण्ड करना होगा। इस नम्बर पर मैसेज सेण्ड करने के बाद यूज़र के मोबाइल पर UPC जनरेट हो जाएगा।
अब जिस भी मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटर की सुविधा यूज़र लेना चाहता है, उस मोबाइल नेटवर्क कम्पनी के सर्विस सेन्टर पर यूज़र को जाना होगा। यहां पर यूज़र को CAF (Customer Acquisition Form) यानी कस्टमर ऐक्वजिशन फॉर्म और पोर्टिंग फॉर्म को भरना होगा और पेमेण्ट करने के साथ-साथ KYC (Know Your Customer) डॉक्यूमेण्स जमा करने होंगे। डॉक्यूमेंट्स जमा करने के बाद यूज़र को एक नई सिम मिलेगी और इसके बाद यूज़र को पोर्ट से जुड़ा एक एसएमएस भी मिलेगा। इसी एसएमएस में सिम पोर्टिंग का दिन और समय भी लिखा रहेगा।