कर्मचारियों के हितों के लिए मोदी सरकार ने उठाये ‘कड़े’ और ‘बड़े’ क़दम
Thursday - December 26, 2019 10:59 am ,
Category : WTN HINDI
कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में हो सकता है बदलाव
सरकार और इण्डस्ट्री के बीच सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव पर जारी है चर्चा
DEC 26 (WTN) – यदि आप नौकरी करते हैं तो आपकी सैलरी से जुड़ी एक नई योजना मोदी सरकार लेकर आ रही है। यदि सभी कुछ योजना के अनुसार ही चलता रहा और सभी कुछ समय पर होता रहा तो नये साल में कर्मचारियों की सैलरी का स्ट्रक्चर बदल सकता है। यह पढ़कर आप सोच रहे होंगे कि आख़िर क्या कुछ मोदी सरकार करने जा रही है जिससे सैलरी का स्ट्रक्चर बदलने वाला है? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अब कर्मचारी की बेसिक सैलरी में अलाउंसेस का कुछ हिस्सा भी शामिल हो सकता है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, सरकार और इण्डस्ट्री के बीच इस बात पर सहमति बन गई है।
दरअसल, मोदी सरकार के नये सैलरी स्ट्रक्चर के अनुसार किसी भी क़ीमत पर किसी भी कर्मचारी की बेसिक सैलरी कुल सैलरी के 50 प्रतिशत से कम नहीं हो सकती है। हालांकि, इस सब में कितना अलाउंस कर्मचारी को दिया जाएगा इसके बारे में सरकार को तय करना है और फ़िलहाल इस बारे में इण्डस्ट्री के साथ सरकार की बाचतीत चल रही है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सैलरी के नये स्ट्रक्चर में बेसिक सैलरी में तो वृद्धि होगी और साथ ही इसमें PF अंशदान में भी वृद्धि होगी, लेकिन पीएफ अंशदान में वृद्धि होने से कर्मचारी की टेक होम सैलरी में कुछ कमी आ सकती है।
वैसे तो इण्डस्ट्री केन्द्र सरकार की इस बात से राज़ी है कि सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव किया जाए, लेकिन इण्डस्ट्री इस बदलाव के पहले कुछ सवालों के जवाब सरकार से चाहती है, जैसे बेसिक सैलरी में अलाउंसेस का कितना योगदान होगा और बेसिक सैलरी में कितना अलाउंस जोड़ा जाएगा?
साथ ही इण्डस्ट्री के सवाल हैं कि कौन-कौन से अइलाउंस बेसिक सैलरी का हिस्सा होंगे और कौन-कौन से अलाउंस को बेसिक सैलरी से बाहर रखा जाएगा? यही वह मुद्दे हैं जिन पर काफ़ी समय से चर्चा चल रही है और सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने एक निर्देश में इसे सुनिश्चित करने को कहा था। वहीं मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार, सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव के लिए इण्डस्ट्री इस शर्त के साथ तैयार हुई है कि सरकार अलाउंसेस की स्पष्ट कैटेगरी तय कर दे।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जो बात सामने आ रही है, उसके मुताबिक़ बेसिक सैलरी में HRA को बाहर रखने का प्रस्ताव है। वहीं बाकी अलाउंसेस का 50 प्रतिशत बेसिक सैलरी में शामिल किया जाएगा। वहीं PLI (Performance-Linked Incentive) यानी परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव को अलाउंसेस नहीं माना जाएगा। वहीं सैलरी स्ट्रक्चर के बदलाव में इण्डस्ट्री की दो प्रमुख मांगें हैं। इण्डस्ट्री की पहली मांग है कि पहले तो सरकार स्पष्ट रूप यह तय कर दे कि कौन-कौन से अलाउंसेस बेसिक सैलरी के साथ जोड़े जाएंगे और कौन-कौन से अलाउंसेस नहीं जोड़े जाएंगे।
वहीं इण्डस्ट्री ने इस बारे में एक शर्त रखी है कि सैलरी स्ट्क्चर के प्रस्ताव को सारे सेक्टर्स पर एकसमान रूप से लागू नहीं किया जाए और इसके लिए सेक्टर्स तय किए जाएं। जानकारी के लिए बता दें कि अब सरकार और इण्डस्ट्री मिलकर उन सेक्टर्स को अलग करेंगी जिन्हें सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव के साथ जोड़ा जाएगा।
वहीं सरकार की तरफ़ से कोड्स ऑन मिनिमम वेजेज को भी मन्ज़ूरी मिल चुकी है और सरकार ने नियम बनाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। नियम बनाने की प्रक्रिया के साथ ही बेसिक सैलरी में अलाउंसेस को भी शामिल किया जा सकता है। वहीं मोदी सरकार अब कर्मचारियों का पीएफ जमा नहीं वाली कम्पनियों पर लगाम कसने की तैयारी में है।
जानकारी के मुताबिक़ कर्मचारियों का पीएफ जमा नहीं करने वाली कम्पनियों पर भारी पेनाल्टी के साथ-साथ तीन साल की जेल का प्रावधान भी किया गया है। यानी कि यदि किसी भी कम्पनी ने कर्मचारियों के पीएफ अंशदान में लापरवाही बरती तो उस पर कड़ी कार्रवाई किये जाने का प्रावधान मोदी सरकार ने कर लिया है।
DEC 26 (WTN) – यदि आप नौकरी करते हैं तो आपकी सैलरी से जुड़ी एक नई योजना मोदी सरकार लेकर आ रही है। यदि सभी कुछ योजना के अनुसार ही चलता रहा और सभी कुछ समय पर होता रहा तो नये साल में कर्मचारियों की सैलरी का स्ट्रक्चर बदल सकता है। यह पढ़कर आप सोच रहे होंगे कि आख़िर क्या कुछ मोदी सरकार करने जा रही है जिससे सैलरी का स्ट्रक्चर बदलने वाला है? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अब कर्मचारी की बेसिक सैलरी में अलाउंसेस का कुछ हिस्सा भी शामिल हो सकता है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, सरकार और इण्डस्ट्री के बीच इस बात पर सहमति बन गई है।
दरअसल, मोदी सरकार के नये सैलरी स्ट्रक्चर के अनुसार किसी भी क़ीमत पर किसी भी कर्मचारी की बेसिक सैलरी कुल सैलरी के 50 प्रतिशत से कम नहीं हो सकती है। हालांकि, इस सब में कितना अलाउंस कर्मचारी को दिया जाएगा इसके बारे में सरकार को तय करना है और फ़िलहाल इस बारे में इण्डस्ट्री के साथ सरकार की बाचतीत चल रही है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सैलरी के नये स्ट्रक्चर में बेसिक सैलरी में तो वृद्धि होगी और साथ ही इसमें PF अंशदान में भी वृद्धि होगी, लेकिन पीएफ अंशदान में वृद्धि होने से कर्मचारी की टेक होम सैलरी में कुछ कमी आ सकती है।
वैसे तो इण्डस्ट्री केन्द्र सरकार की इस बात से राज़ी है कि सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव किया जाए, लेकिन इण्डस्ट्री इस बदलाव के पहले कुछ सवालों के जवाब सरकार से चाहती है, जैसे बेसिक सैलरी में अलाउंसेस का कितना योगदान होगा और बेसिक सैलरी में कितना अलाउंस जोड़ा जाएगा?
साथ ही इण्डस्ट्री के सवाल हैं कि कौन-कौन से अइलाउंस बेसिक सैलरी का हिस्सा होंगे और कौन-कौन से अलाउंस को बेसिक सैलरी से बाहर रखा जाएगा? यही वह मुद्दे हैं जिन पर काफ़ी समय से चर्चा चल रही है और सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने एक निर्देश में इसे सुनिश्चित करने को कहा था। वहीं मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार, सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव के लिए इण्डस्ट्री इस शर्त के साथ तैयार हुई है कि सरकार अलाउंसेस की स्पष्ट कैटेगरी तय कर दे।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जो बात सामने आ रही है, उसके मुताबिक़ बेसिक सैलरी में HRA को बाहर रखने का प्रस्ताव है। वहीं बाकी अलाउंसेस का 50 प्रतिशत बेसिक सैलरी में शामिल किया जाएगा। वहीं PLI (Performance-Linked Incentive) यानी परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव को अलाउंसेस नहीं माना जाएगा। वहीं सैलरी स्ट्रक्चर के बदलाव में इण्डस्ट्री की दो प्रमुख मांगें हैं। इण्डस्ट्री की पहली मांग है कि पहले तो सरकार स्पष्ट रूप यह तय कर दे कि कौन-कौन से अलाउंसेस बेसिक सैलरी के साथ जोड़े जाएंगे और कौन-कौन से अलाउंसेस नहीं जोड़े जाएंगे।
वहीं इण्डस्ट्री ने इस बारे में एक शर्त रखी है कि सैलरी स्ट्क्चर के प्रस्ताव को सारे सेक्टर्स पर एकसमान रूप से लागू नहीं किया जाए और इसके लिए सेक्टर्स तय किए जाएं। जानकारी के लिए बता दें कि अब सरकार और इण्डस्ट्री मिलकर उन सेक्टर्स को अलग करेंगी जिन्हें सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव के साथ जोड़ा जाएगा।
वहीं सरकार की तरफ़ से कोड्स ऑन मिनिमम वेजेज को भी मन्ज़ूरी मिल चुकी है और सरकार ने नियम बनाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। नियम बनाने की प्रक्रिया के साथ ही बेसिक सैलरी में अलाउंसेस को भी शामिल किया जा सकता है। वहीं मोदी सरकार अब कर्मचारियों का पीएफ जमा नहीं वाली कम्पनियों पर लगाम कसने की तैयारी में है।
जानकारी के मुताबिक़ कर्मचारियों का पीएफ जमा नहीं करने वाली कम्पनियों पर भारी पेनाल्टी के साथ-साथ तीन साल की जेल का प्रावधान भी किया गया है। यानी कि यदि किसी भी कम्पनी ने कर्मचारियों के पीएफ अंशदान में लापरवाही बरती तो उस पर कड़ी कार्रवाई किये जाने का प्रावधान मोदी सरकार ने कर लिया है।