BrahMos WORLD INDIA MADHYA PRADESH BHOPAL WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RELIGION SPORTS BUSINESS FUN FACTS ENTERTAINMENT LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE SCIENCE & TECHNOLOGY HEALTH EDUCATION DIASPORA OPINION & INTERVIEW RECIPES DRINKS BIG MEMSAAB 2017 BUDGET 2017 FUNNY VIDEOS VIRAL ON WEB PICTURE STORIES Mahakal Ke Darshan
WTN HINDI ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
logo
Breaking News

जानिए इस बार क्यों पड़ रही है दिसम्बर में ज़्यादा ठण्ड?

Thursday - December 26, 2019 1:10 pm , Category : WTN HINDI
शीतलहर के कारण ठिठुरा उत्तर भारत
शीतलहर के कारण ठिठुरा उत्तर भारत

पश्चिमी विक्षोभ से ठण्डाया उत्तर भारत, सालों बाद पड़ रही दिसम्बर में कड़ाके की सर्दी

DEC 26 (WTN) – आख़िर कौन है जिसे सर्दी का मौसम अच्छा नहीं लगता है। सर्दी के मौसम का काफ़ी लोगों को इंतज़ार रहता है और लोग इस दौरान पहाड़ी इलाक़ों में घूमने जाते हैं। वहीं आयुर्वेद की परम्परा के मुताबिक़, सर्दी का मौसम शरीर के लिए काफ़ी फ़ायदेमंद रहता है क्योंकि इस मौसम में जठराग्नि खुलती है जिससे जमकर भूख लगती है और शरीर को पोषण हासिल होता है। लेकिन सर्दी के मौसम के यह सभी मज़े तब ही लिये जा सकते हैं जब सर्दी जबरदस्त ना पड़ती हो। पर जैसा कि आप जानते ही हैं कि इस साल दिसम्बर के महीने में ज़ोरदार तरीक़े से सर्दी पड़ रही है।
 
चलिये आपको बताते हैं कि आख़िर इस साल दिसम्बर के महीने में जनवरी की तुलना में ज़्यादा सर्दी क्यों पड़ रही है? आपकी जानकारी के लिए बता दें कि क्रिसमस यानी 25 दिसम्बर के दिन दिल्ली का न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज़ किया गया। वहीं दिल्ली समेत उत्तर भारत में 12 साल बाद इतनी लम्बी सर्दी पड़ रही है। वहीं मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक़, दिल्ली समेत देश के उत्तर पूर्वी इलाक़ों में पड़ रही ज़बरदस्त सर्दी में फ़िलहाल किसी भी तरह की कमी नहीं आने वाली है।

बता दें कि उत्तर भारत में शीतलहर और तेज़ हो सकती है, और इसी कारण से 27 दिसम्बर से ठण्ड के साथ-साथ घना कोहरा भी पड़ना शुरू हो जाएगा। जानकारी के लिए बता दें कि 29 और 30 दिसम्बर को घना कोहरा पड़ने का पूर्वानुमान है, क्योंकि इस दौरान हवा की गति कम रहेगी। जैसा कि आप जानते हैं कि उत्तर भारत में पिछले 9 दिनों से शीतलहर जारी है। जानकारी के मुताबिक़ इतनी लम्बी शीतलहर इससे पहले साल 2003 में चली थी। वहीं साल 1997 में लगातार 17 दिनों तक रिकॉर्ड शीतलहर के कारण लोगों को काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। वहीं पिछले साल लगातार 8 दिनों तक शीतलहर चली थी।
 
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक़, इस सप्ताह के अंत तक तापमान में 4 डिग्री सेल्सियस की और गिरावट दर्ज़ की जा सकती है, जिसके कारण सर्दी और शीतलहर से मौसम और भी ज़्यादा ख़राब हो सकता है। तेज़ सर्दी और शीतलहर के प्रकोप से पूरा उत्तर भारत प्रभावित होगा और साल 1997 के बाद दिसम्बर में इतनी ज़्यादा सर्दी पड़ेगी। आने वाले दिनों में रात के तापमान में और भी ज़्यादा कमी देखी जा सकती है और इस कारण से शीतलहर कुछ और दिनों तक जारी रह सकती है।

जैसा कि आपने ख़ुद अनुभव किया होगा कि पिछले कुछ सालों में दिसम्बर महीने की तुलना में जनवरी में ज़्यादा ठण्ड पड़ रही थी। लेकिन इस बार दिसम्बर के महीने में जनवरी के महीने से ज़्यादा ठण्ड पड़ रही है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक़ ऐसा पश्चिमी विक्षोभ के कारण हो रहा है। दरअसल, दो पश्चिमी विक्षोभ में दस दिनों का अन्तर होने से तापमान में गिरावट दर्ज़ की गई है। जानकारी के लिए बता दें कि साल के आख़िरी दिन यानी 31 दिसम्बर को एक पश्चिमी विक्षोभ दिल्ली पहुंचेगा, और इसी के साथ ही उत्तर भारत में शीतलहर और भी बढ़ेगी।

वहीं हिमालय के क्षेत्रों में बर्फ़बारी और बर्फ़ीली हवाओं के कारण उत्तर भारत में ठण्ड बड़ी है और इसी कारण से औसत तापमान में गिरावट दर्ज़ की गई है। पहाड़ी इलाकों में ज़बरदस्त ठण्ड और बर्फ़बारी का यह आलम है कि हिमाचल प्रदेश के केलॉन्ग में न्यूनतम तापमान माइनस 12.4 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज़ किया गया है। वहीं किन्नौर के कल्पा में न्यूनतम तापमान माइनस 4.6 डिग्री तक पहुंच गया है। वहीं कुल्लु, मनाली और कुफरी में न्यूनतम तापमान माइनस 2.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज़ किया गया है। जम्मू-कश्मीर और तिब्बत के कई इलाकों में भी तापमान में कमी दर्ज़ की गई है। यानी साफ़ है कि पहाड़ों में हो रही बर्फ़बारी के कारण जल्द ही उत्तर भारत समेत मैदानी इलाक़ों में कड़ाके की ठण्ड और भी बढ़ने वाली है।